वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए सरकार ने खराब आयातित वस्तुओं पर नकेल कसी

Posted On: 01 APR 2025 4:17PM by PIB Delhi

भारत सरकार ने भारतीय बाजारों में खराब वस्तुओं के आयात पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न उपायों को लागू किया है। घरेलू उद्योग को सस्ते आयात के प्रतिकूल प्रभाव से बचाने के लिए, वाणिज्य विभाग का एक संबद्ध कार्यालय, व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर), घरेलू उद्योग की ओर से दायर विधिवत प्रमाणित याचिका के आधार पर सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत विभिन्न जांच (एंटी-डंपिंग/सुरक्षा (मात्रात्मक प्रतिबंध)/काउंटरवेलिंग) करता है। डीजीटीआर में प्राधिकारी घरेलू उद्योग की ओर से दायर आवेदनों की जांच करता है और सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 के प्रावधानों के अनुसार आयातकों, निर्यातकों और अन्य इच्छुक पक्षों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन करता है। इस जांच के आधार पर, डीजीटीआर अंतिम विचार के लिए वित्त मंत्रालय को अपनी सिफारिशें देता है।

मौजूदा वित्त वर्ष 2024-2025 (फरवरी, 2025 तक) में, राजस्व खुफिया निदेशालय और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के अंतर्गत सीमा शुल्क क्षेत्रीय संरचनाओं की ओर से आईपीआर, बीआईएस और एफएसएसएआई मानदंडों का उल्लंघन करने वाले खराब वस्तुओं के आयात के खिलाफ कुल 206 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनकी कीमत 206.62 करोड़ रुपये है।

राजस्व खुफिया निदेशालय और सीबीआईसी के अंतर्गत सीमा शुल्क क्षेत्र की इकाइयां भारत में खराब वस्तुओं के आयात की जांच के लिए निरंतर निगरानी रखती हैं। ऐसे मामलों का पता चलने पर सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 और अन्य संबद्ध अधिनियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा, भारतीय सीमा शुल्क जोखिम प्रबंधन प्रणाली (आरएमएस) संबंधित नियामक एजेंसी के चयनात्मकता मानदंडों के आधार पर जोखिम-आधारित चयनात्मक जांच और परीक्षण की नीतियों को लागू करती है, जिससे खराब वस्तुओं के आयात के प्रयासों को विफल किया जा सके।

इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 25 और खाद्य सुरक्षा और मानक (आयात) विनियम, 2017 देश में खाद्य पदार्थों के आयात को नियंत्रित करते हैं। एफएसएसएआई की ओर से जारी किया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दस्तावेजों की जांच, दृश्य निरीक्षण, नमूनाकरण और परीक्षण के अधीन है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि वे सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

उपरोक्त के अतिरिक्त, अपने घरेलू उत्पादकों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के उद्देश्य से, भारत के पास अपने लोगों, पौधों और पशुओं के पर्यावरण, जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक विस्तृत और मजबूत कानूनी ढांचा और संस्थागत व्यवस्था है। भारतीय उपभोक्ताओं और उत्पादकों की सुरक्षा के लिए विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत पर्याप्त प्रावधान मौजूद हैं क्योंकि आयातित माल घरेलू कानूनों, नियमों, आदेशों, विनियमों, तकनीकी विनिर्देशों, पर्यावरण और सुरक्षा मानदंडों के अधीन हैं। घरेलू वस्तुओं पर लागू बीआईएस मानक आयातित वस्तुओं पर भी लागू होते हैं। इसके अतिरिक्त, पौधे और पौधे-आधारित उत्पादों के आयात प्लांट क्वारंटीन उपायों और स्वच्छता और फाइटो-सैनिटरी उपायों के अंतर्गत हैं, पशु और पशु-आधारित उत्पादों के आयात स्वच्छता आयात परमिट के अधीन हैं और खाद्य/ खाद्य वस्तुओं के आयात एफएसएसएआई मानकों के अधीन हैं।

यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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