मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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बंगाल की खाड़ी में मत्स्यपालन प्रथाएं

Posted On: 01 APR 2025 3:31PM by PIB Delhi

मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र सहित भारत के ईईजेड में  स्थायी मत्स्यन तरीकों (सस्टेनेबल फिशिंग प्रैक्टिस) को सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं। इसमें ब्रीडिंग स्टॉक की रक्षा के लिए इंडियन एक्सक्लूसिव इकोनोमिक जोन (ईईजेड) में पूर्वी तट पर 15 अप्रैल से 14 जून तक और पश्चिमी तट पर 1 जून से 31 जुलाई तक 61 दिनों की अवधि के लिए यूनिफार्म फिशिंग बैन का कार्यान्वयन शामिल है। बंगाल की खाड़ी क्षेत्र सहित तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रादेशिक जलक्षेत्र (टेरिटोरियल वाटर्स)  में  इसी तरह के फिशिंग बैन लागू किए जाते हैं। फिशिंग बैन अवधि के दौरान, सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े, सक्रिय पारंपरिक मछुआरों को आजीविका और पोषण संबंधी सहायता के लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है ।

मत्स्यपालन विभाग , भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र सहित देश भर में जिम्मेदार और सस्टेनेबल फिशिंग  के लिए  'नेशनल पॉलसी ऑन मरीन फिशरीज (एनपीएमएफ), 2017' अधिसूचित किया  है। मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार ने एक्सक्लूसिव इकोनोमिक जोन( ईईजेड)  में  विनाशकारी फिशिंग प्रैक्टिस जैसे बुल या पेयर ट्रॉलिंग  और फिशिंग  के लिए आरटिफ़िशियल  लाइट्स/एलईडी लाइट्स के उपयोग को प्रतिबंधित करने के आदेश भी जारी किए हैं, और तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भी टेरिटोरियल वाटर्स में इसी तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा, सी टर्टल की सुरक्षा के लिए टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) की स्थापना के लिए राज्य सरकारों द्वारा अपने संबंधित समुद्री मात्स्यिकी विनियमन अधिनियम नियमों (संशोधन) में आवश्यक प्रावधान किए गए हैं । इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा कार्यान्वित प्रमुख योजना प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) में अन्य बातों के साथ-साथ तट के किनारे आरटिफ़िशियल रीफ़्स  की स्थापना, सी रेंचिंग और सी वीड कल्टीवेशन सहित मेरीकल्चर के लिए सहायता प्रदान करने की परिकल्पना की गई है और ये  सभी सस्टेनेबिलिटी में योगदान करते हैं। इसके अलावा, बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी)-आईजीओ के सदस्य के रूप में भारत नेशनल एक्शन प्लांन फॉर शार्क, इकोसिस्टम अप्रोच टू फिशरीज मेनेजमेंट (ईएएफएम) और बे ऑफ बंगाल लार्ज मरीन इकोसिस्टम (बीओबीएलएमई) परियोजना जैसे सस्टेनेबल  मात्स्यिकी पद्धतियों के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग में विभिन्न पहल सक्रिय रूप से कर रहा है।

एनपीएमएफ, 2017 में अन्य बातों के साथ-साथ इस बात पर जोर देता है कि मछुआरा समुदाय की सहायता के लिए इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) और स्पेस टेक्नोलॉजी (एसटी) का इष्टतम उपयोग किया जाएगा और मछुआरों के लाभ के लिए रियल टाइम पोटेनशियल फिशिंग जोन (पीएफजेड) संबंधी सलाह और मौसम के पूर्वानुमान के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के उपयोग की भी सिफारिश की गई है।  भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), हैदराबाद ने सूचित किया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ओशनसैट उपग्रह के आंकड़ों का उपयोग पोटेनशियल फिशिंग जोन (पीएफजेड) संबंधी सलाह तैयार करने के लिए किया जाता है, जो संभावित मात्स्यिकी क्षेत्रों (पोटेन्शियल फिशिंग एरियास) को इंगित करता है और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मछुआरों को प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, पीएमएमएसवाई में अन्य बातों के साथ-साथ फिशिंग वेसल्स पर ट्रांसपोंडर लगाने, पारंपरिक मछुआरों और मोटोराइज्ड फिशिंग वेसल्स को सेफ्टी किट प्रदान करने, पोटेनशियल फिशिंग ज़ोन  (पीएफजेड) डिवाईज़ेस और नेटवर्क के लिए सहायता, जिसमें स्थापना की लागत भी शामिल है, अप्रयुक्त संसाधनों की खोज करने के उद्देश्य से डीप सी फिशिंग वेसल्स का निर्माण और निर्यात क्षमता के लिए फिशिंग वेसल्स का उन्नयन करने के लिए सहायता प्रदान की जाती  है। पीएमएमएसवाई के तहत जलकृषि में प्रौद्योगिकी आधारित मॉर क्रॉप पर ड्रॉप जैसे कि री सर्कुलेटरी एक्वाक्लचर सिस्टम (आरएएस) के माध्यम से फिश कल्चर, बायोफ्लोक जलकृषि प्रणाली, जलाशयों में केज कल्चर, ओपेन सी केज कल्चर, सी वीड कल्टीवेशन, पर्ल फार्मिंग सहित बाइवल्व कल्टीवेशन और ओर्नामेंटल फिशरीज पर जोर दिया गया है।

वर्तमान में सदस्य देशों में पशुधन स्वास्थ्य और ब्रीडिंग प्रैक्टिस में सुधार के लिए कार्यान्वित की जाने वाली ऐसी कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं है। हालाँकि, भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, स्वदेशी नस्लों, मुर्रा बफेलो और साहीवाल मवेशियों के जर्मप्लाज्म को सीमन डोजेज, भ्रूण और जीवित पशुओं के रूप में सदस्य देशों मुख्य रूप से बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ साझा किया गया है ।

यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, श्री जॉर्ज कुरियन ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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