मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
पशु कल्याण पर जन जागरूकता और भागीदारी
Posted On:
25 MAR 2025 12:49PM by PIB Delhi
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 9(के) के तहत भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) का एक प्रमुख कार्य पशुओं के साथ मानवीय व्यवहार के बारे में शिक्षा प्रदान करना और पशुओं को अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुंचाने के खिलाफ जन जागरूकता को बढ़ावा देना है। इस कार्य को विभिन्न माध्यमों से संपन्न किया जाता है, जिसमें व्याख्यान, पुस्तकें, पोस्टर, सिनेमैटोग्राफिक प्रदर्शनियां और बहुत कुछ शामिल हैं। पशु कल्याण के प्रयासों में जन जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाए गए विभिन्न कदम, विशेष रूप से स्कूली बच्चों के बीच, अनुलग्नक-1 में दिए गए हैं।
पशु कल्याण कानूनों से संबंधित मुद्दों पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए एडब्ल्यूबीआई विभिन्न दिशा-निर्देश, विनियम और पुस्तिकाएं प्रकाशित कर रहा है। एडब्ल्यूबीआई ने पशु कल्याण कानूनों से संबंधित मुद्दों पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए।
इस वित्तीय वर्ष के दौरान, 19.10.2024 को बेंगलुरु में थानिसांद्रा स्थित पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में पशु कल्याण कानूनों पर पुलिस अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण के दौरान पशु कल्याण के महत्व, पीसीए अधिनियम, 1960, पशुओं के वध और परिवहन पर विनियम, एबीसी नियम और व्यावहारिक प्रशिक्षण और केस स्टडी पर सत्र शामिल किए गए। पशु कल्याण कानूनों और नियमों के क्षेत्र में विषय विशेषज्ञों ने पुलिस विभाग के अधिकारियों को जागरूक करने के लिए व्याख्यान दिए। पुलिस अधीक्षक और पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय के प्राचार्य और उनकी टीम ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में समन्वय किया।
एडब्ल्यूबीआई ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों सहित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए चार पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
- पशु कल्याण कानूनों पर कानून प्रवर्तन पुस्तिका
- शहरी स्थानीय निकायों के लिए पशु कानून पुस्तिका
- पशु कल्याण कानूनों पर पशु चिकित्सा अधिकारियों के लिए पुस्तिका
- स्ट्रीट डॉग्स संख्या प्रबंधन, रेबीज उन्मूलन और मानव-कुत्ता टकराव को कम करने के लिए संशोधित पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) मॉड्यूल।
एडब्ल्यूबीआई देश के विभिन्न भागों से पशुओं के प्रति क्रूरता के बारे में शिकायतें प्राप्त होने पर संबंधित राज्य सरकारों और जिला कलेक्टरों/मजिस्ट्रेटों/जिला पुलिस अधीक्षकों के समक्ष मामले को उठा रहा है और उन्हें क्रूरता के मामलों की जांच करने के लिए मौजूदा पशु कल्याण कानूनों के बारे में जागरूक कर रहा है। राज्य प्राधिकरणों को पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले अपराधियों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का अधिकार है।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में जागरूकता हेतु जारी पत्रों का विवरण अनुलग्नक-2 में दिया गया है।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 के अनुसार, किसी पशु की देखभाल या प्रभार संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसे पशु की भलाई सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित उपाय करे तथा ऐसे पशु को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट से बचाए।
इसके अलावा, पीसीए अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(i) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति, बिना उचित कारण के, किसी पशु को ऐसी परिस्थितियों में छोड़ देता है, जिसमें यह संभावना हो कि वह भूख या प्यास के कारण पीड़ा झेलेगा; तो वह प्रथम अपराध के मामले में, कम से कम दस रुपये के जुर्माने से, जो पचास रुपये तक हो सकता है, दण्डनीय होगा और पिछले अपराध के तीन वर्षों के भीतर किए गए दूसरे या बाद के अपराध के मामले में, कम से कम पच्चीस रुपये के जुर्माने से, जो एक सौ रुपये तक हो सकता है या तीन महीने तक की अवधि के कारावास से, या दोनों से दण्डनीय होगा।
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II में अनुच्छेद 246(3) के अनुसार, पशुओं का संरक्षण, सुरक्षा और सुधार तथा पशु रोगों की रोकथाम; पशु चिकित्सा प्रशिक्षण और अभ्यास राज्य सूची में आता है, जिस पर राज्य को सातवीं अनुसूची की सूची II में सूचीबद्ध किसी भी मामले के संबंध में ऐसे राज्य या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने का विशेष अधिकार है। तदनुसार, स्थानीय निकायों की यह जिम्मेदारी है कि वे आवारा पशुओं की देखभाल करें और अपने संबंधित नगरपालिका क्षेत्रों में पालतू पशुओं के स्वामित्व के पंजीकरण की प्रक्रिया को नियमित करें, जिससे पालतू पशुओं की संख्या की निगरानी में मदद मिलेगी।
केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों और जारी परामर्शों का विवरण अनुलग्नक-3 में दिया गया है।
अनुबंध 1
पशु कल्याण के प्रयासों में जन जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए, विशेष रूप से स्कूली बच्चों के बीच
- एडब्ल्यूबीआई लगातार पशु कल्याण संगठनों और पशु कल्याण से जुड़े लोगों को मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि (एचएडब्ल्यूआर) के रूप में नामित करके प्रोत्साहित कर रहा है ताकि पोस्टर प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता और निबंध लेखन प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियों का आयोजन करके स्कूलों में शैक्षिक कार्यक्रमों का विस्तार किया जा सके। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य जानवरों के प्रति करुणा को बढ़ावा देना और पशुओं के प्रति बेहतर तथा अधिक जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करना है।
- इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एडब्ल्यूबीआई ने स्कूली बच्चों के लिए दो आयु समूहों कक्षा V-VIII और कक्षा IX-XII में शैक्षिक मॉड्यूल विकसित किए हैं। ये मॉड्यूल जागरूकता बढ़ाने और छात्रों को पशु कल्याण को लेकर संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों को शामिल करते हैं। कक्षा V-VII के बच्चों के लिए, विषयों में जानवरों के प्रति करुणा, पशु व्यवहार, पशु क्रूरता, पालतू पशुओं के जिम्मेदार स्वामी और पशुओं को लेकर अंधविश्वास शामिल हैं। कक्षा IX-XII के छात्रों के लिए, मॉड्यूल में पालतू और सड़क पर रहने वाले जानवरों के लिए पशु चिकित्सा सहायता, टकराव में कमी, पशु कल्याण में उपलब्धियां, पशु कल्याण और स्थिरता, मानव स्वास्थ्य और अहिंसा (भारत में संस्कृति और विरासत) जैसे अधिक उन्नत विषय शामिल हैं। व्यापक प्रसार सुनिश्चित करने के लिए इन मॉड्यूल को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभाग को भेजा गया है।
- एडब्ल्यूबीआई ने स्कूलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसका संदेश छोटे बच्चों तक प्रभावी रूप से पहुंचे। इसके अलावा, राज्य सरकारों और पशु कल्याण संगठनों के नियमित सेमिनार, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम जनता, विशेष रूप से पशु प्रेमियों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- एडब्ल्यूबीआई नियमित रूप से पशु कल्याण के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सलाह और परिपत्र जारी करता है। ये सलाह पशु कल्याण पखवाड़ा (14 से 30 जनवरी), विश्व पशु दिवस, विश्व रेबीज दिवस, दीपावली के मानवीय उत्सव और गर्मी तथा सर्दियों के मौसम जैसे प्रमुख आयोजनों के दौरान पशु कल्याण संबंधी बातों पर जोर देने के लिए जारी की जाती हैं।
- इसके अलावा, एडब्ल्यूबीआई मानद पशु कल्याण प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है और अपने स्थानीय क्षेत्रों में सामुदायिक पशुओं की देखभाल करने वाले दयालु लोगों को कॉलोनी एनिमल केयरटेकर प्राधिकरण पत्र जारी करता है। ये प्रयास जानवरों की भलाई को बढ़ावा देने और एक दयालु समाज को आगे करने में मदद करते हैं।
अनुबंध- 2
उत्तर प्रदेश में अमरोहा के लिए जागरूकता हेतु पत्र जारी किए गए
क्र.सं.
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शिकायत की तिथि
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शिकायत का विषय
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पत्र किसको?
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1
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31.05.2022
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अमरोहा में आवारा पशुओं की जान बचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध
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दिनांक 31.05.2022 का पत्र जिला मजिस्ट्रेट, अमरोहा, उत्तर प्रदेश को जारी किया गया
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2
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13.04.2024
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जिला अमरोहा में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 और एडब्ल्यूबीआई मॉड्यूल के प्रावधानों को लागू करने का अनुरोध किया गया
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दिनांक 24.04.2024 का पत्र सदस्य सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड एवं निदेशक, पशुपालन विभाग, पशुपालन निदेशालय, गोकर्णनाथ रोड, बादशाह बाग, लखनऊ एवं नगर आयुक्त नगर निगम अमरोहा को जारी किया गया।
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3
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07.02.2025
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उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक साधारण कुत्ते पर हमला करने और उसे मार डालने के आरोप में पिटबुल डॉग के मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज
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सदस्य सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड एवं निदेशक, पशुपालन विभाग, पशुपालन निदेशालय, गोकर्णनाथ रोड, बादशाह बाग, लखनऊ को दिनांक 04.03.2025 का पत्र जारी किया गया।
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अनुबंध 3
केन्द्र सरकार के अधिसूचित नियमों और जारी परामर्शों का विवरण
- केंद्र सरकार ने पशुओं के अवैध प्रजनन को विनियमित करने और पालतू पशुओं की बिक्री या व्यापार को विनियमित करने के लिए क्रमशः पशु क्रूरता निवारण (कुत्ते प्रजनन और विपणन) नियम, 2017 और पशु क्रूरता निवारण (पालतू जानवरों की दुकान) नियम, 2018 को भी अधिसूचित किया है। इन नियमों को संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जा रहा है।
- एडब्ल्यूबीआई ने आवारा कुत्तों और पालतू पशुओं के संबंध में कई सलाह जारी की थीं:
- दिनांक 26.02.2015 को पालतू कुत्ते और आवारा कुत्ते पर परिपत्र।
- पशुओं के प्रति दया दिखाने वाले नागरिकों को परेशान करने के संबंध में सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के डीजीपी को दिनांक 25-08-2015 और 28.10.2015 को परिपत्र जारी किया गया।
- आवारा पशुओं के बचाव और पुनर्वास के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू करने हेतु दिनांक 12-07-2018 को परामर्श
- प्रत्येक जिले में आवारा कुत्तों के लिए पर्याप्त संख्या में भोजन स्थलों की पहचान करने और दिनांक 03.03.2021 को पालतू कुत्तों और सड़क के कुत्तों पर एडब्ल्यूबीआई संशोधित दिशानिर्देश को ठीक से लागू करने के लिए सलाह।
- दिनांक 17.05.2022 को सामुदायिक पशुओं को गोद लेने के लिए मानक प्रोटोकॉल को ठीक से लागू करने और प्रसारित करने का अनुरोध।
- कुत्तों के मुंह पर जाली का उपयोग और सामुदायिक कुत्तों की देखभाल के लिए दिनांक 17.08.2022 को दिशानिर्देश।
- दिनांक 31.03.2023 को प्रमुख सचिव, शहरी विकास और पशुपालन के साथ-साथ सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी जिलों के नगर निगम आयुक्त से एबीसी नियम, 2023 के प्रावधान को लागू करने का अनुरोध।
- दिनांक 30.05.2023 को सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट से एबीसी नियम, 2023 के प्रावधान को लागू करने का अनुरोध।
यह जानकारी केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने 25 मार्च, 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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एमजी/केसी/एके/एनजे
(Release ID: 2114787)
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