सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
आधिकारिक सांख्यिकी आंकड़ो के लिए गैर-परंपरागत डेटा स्रोतों का लाभ उठाने के लिए 20 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में विचार-मंथन सत्र आयोजित किया जाएगा
प्रविष्टि तिथि:
18 MAR 2025 1:59PM by PIB Delhi
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) 20 मार्च, 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आधिकारिक सांख्यिकी क्षेत्र के लिए गैर-पारंपरिक डेटा स्रोतों का लाभ उठाने पर एक विचार-मंथन सत्र आयोजित कर रहा है। इस सत्र का उद्देश्य जनगणना, सर्वेक्षण और प्रशासनिक रिकोर्डों के माध्यम से प्राप्त पारंपरिक डेटा के साथ-साथ गैर-पारंपरिक डेटा का उपयोग करने के तरीकों और साधनों पर विचार-विमर्श करना है।
प्रौद्योगिकी में हुई त्वरित प्रगति गैर-पारंपरिक डेटा स्रोतों की जननी है , जो डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए नए अवसर प्रदान करते हैं। गैर-पारंपरिक डेटा स्रोत पृथ्वी अवलोकन (उपग्रह चित्र); मोबाइल दूरसंचार (कॉल रिकॉर्ड); सामाजिक नेटवर्क (भावनात्मक विश्लेषण), और नागरिक-जनित डेटा (नागरिक समाज डेटा) से आते हैं। इनमें से कुछ को वृहत डेटा माना जाता है और बड़ी मात्रा की इस असंरचित जानकारी के विश्लेषण के लिए नई क्षमताओं की आवश्यकता होती है। गैर-पारंपरिक डेटा स्रोत सांख्यिकीय क्षेत्र के पास उपलब्ध मौजूदा आधिकारिक डेटा को पूरक बनाने का अवसर बन जाते हैं।
हाल के वर्षों में इन दो प्रकार के स्रोतों, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक से प्राप्त आंकड़ों के बेहतर एकीकरण की आवश्यकता रही है। आधिकारिक सांख्यिकी वर्तमान में क्या अध्ययन कर रही है और इन अध्ययनों के लिए किस प्रकार के डेटा का उपयोग किया जा रहा है, इस दिशा में विभिन्न देशों के सांख्यिकी संस्थानों में चर्चाएं हो रही हैं। इसलिए यह समय प्रासंगिक हितधारकों को एक मंच पर लाने और आधिकारिक सांख्यिकी क्षेत्र में गैर-पारंपरिक डेटा को पारंपरिक डेटा के साथ मिलाने के लिए उपयुक्त ढांचे और प्रणालियों पर विचार करने का बेहतर समय है।
इस कार्यक्रम में क्षेत्र विशेषज्ञ, नीति निर्माता, डेटा वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद पारंपरिक डेटा के साथ वैकल्पिक डेटा स्रोतों को पूरक बनाने के अवसरों, चुनौतियों और नीतियों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हो रहें हैं, जिससे आधिकारिक सांख्यिकी क्षेत्र के दायरे, सटीकता और समयबद्धता में वृद्धि होने का अनुमान है। तकनीकी सत्र के पैनलिस्ट विभिन्न उभरते डेटा स्रोतों, उनकी विशेषताओं-संरचनात्मक और लेन-देन संबंधी विशेषताओं और पारंपरिक डेटासेट के साथ उनके एकीकरण की संभावना पर गहन चर्चा करेंगे ।
इस विचार-विमर्श सत्र में मुख्य भाषण श्री क्रिस गोपालकृष्णन द्वारा दिया जाएगा, जो इंफोसिस के सह-संस्थापकों में से एक हैं। उन्हें वैश्विक व्यापार और प्रौद्योगिकी विचार दिग्गज के रूप में जाना जाता है। श्री गोपालकृष्णन ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (ओआईएसटी) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में कार्यरत हैं, आईआईएससी बैंगलोर की काउंसिल के अध्यक्ष हैं और आईआईआईटी, बैंगलोर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं।
उनके अलावा, विचार-मंथन सत्र को एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रमुख अर्थशास्त्री श्री राणा हसन, संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट समन्वयक (यूएनआरसी) श्री शोम्बी शार्प और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग द्वारा संबोधित किया जाएगा।
तकनीकी सत्रों के पैनलिस्ट संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, सरकारों और निजी संस्थानों के प्रतिनिधि हैं। इनमें भारतीय सर्वेक्षण विभाग (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग), राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी: अंतरिक्ष विभाग), यूआईडीएआई (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय), आईआईटी, कानपुर, विश्व बैंक, आईडीइनसाइट, जीडीआई और ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट आदि प्रमुख है।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, मार्गदर्शक मंडलों, स्वतंत्र संगठनों तथा विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने का अनुमान है।
विचार-मंथन सत्र के परिणाम गैर-परंपरागत डेटा स्रोतों के बेहतर उपयोग के लिए कार्यप्रणाली को समझने में सहायक होंगे। इसके अलावा ये पारंपरिक और गैर-परंपरागत स्रोतों के माध्यम से उत्पन्न डेटा एकीकरण के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित करने में भी सहायक होंगे।
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एमजी/केसी/जेके/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2112248)
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