सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

वर्षांत समीक्षा 2024

Posted On: 19 DEC 2024 2:15PM by PIB Delhi

 

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (01.01.2024 से 30.11.2024 तक)

अनुसूचित जाति के 18,72,000 से अधिक विद्यार्थियों  को 437 करोड़ रुपये से अधिक राशि की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति जारी की गई; पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत अनुसूचित जाति के 41,32,000 से अधिक विद्यार्थियों को 4965 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्त हुई

श्रेष्ठ योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए सीबीएसई/राज्य बोर्डों से संबद्ध 142 निजी आवासीय विद्यालयों में दाखिले के लिए 2961 विद्यार्थियों का चयन किया गया

पीएम-अजय के तहत 5051 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया; 3,05,842 लाभार्थियों के लिए 1655 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं; 19 बालिका छात्रावासों और 19 बालक छात्रावासों के निर्माण के लिए 26.31 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई

आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित पहलों को एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत समेकित और सुव्यवस्थित करने के लिए पीएम-सूरज पोर्टल लॉन्च किया गया, जिससे यह पिछड़े वर्गों के आर्थिक उत्थान की दिशा में एक व्यापक समाधान बन गया

विश्वास पोर्टल पर अनुसूचित जाति के 1.67 लाख लाभार्थियों के दावे प्राप्त हुए; विश्वास योजना के तहत 6.41 लाख ओबीसी लाभार्थियों का नामांकन पहले ही हो चुका है

कारीगरों के उत्पादों के विपणन हेतु उपभोक्ता संबद्धता व्यापक बनाने, उनकी आमदनी की क्षमता और बाजार में दृश्‍यता बढ़ाने के लिए ट्यूलिप ब्रांड लॉन्च किया गया

2023-24 के दौरान, 112 पैनलबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से 80,185 लाभार्थियों को पीएम-दक्ष योजना के तहत प्रशिक्षण दिया गया

नशा मुक्त भारत अभियान 4.42 करोड़ युवाओं और 2.71 करोड़ महिलाओं सहित 13.57 करोड़ से अधिक  लोगों तक पहुंचा, इसके लॉन्‍च के बाद से 3.85 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी देखी गई

स्माइल योजना के तहत, इस वर्ष 6 राज्यों में निराश्रित ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 6 नए गरिमा गृह आश्रय गृह स्थापित किए गए; 23,811 प्रमाण पत्र जारी किए गए, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर 62 लाख से अधिक लोगों ने विजिट किया

वित्त वर्ष 2024-25 में नमस्ते योजना के तहत कचरा बीनने वालों को लक्षित समूह के रूप में जोड़ा गया; 2024-25 और 2025-26 के दौरान 2,50,000 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग लक्षित की गई

राष्ट्रीय वयोश्री योजना की शुरुआत से अब तक 3.87 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 15.54 लाख से अधिक सहायक उपकरण प्राप्त हुए हैं

 

वर्ष 2024 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डी/ओ एसजेएंडई) की प्रमुख पहलों और उपलब्धियों का विवरण निम्‍नलिखित है।

1. अनुसूचित जाति के कल्याण हेतु पहल

ए. प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति

एसजेएंडई विभाग राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के माध्यम से दो केंद्र प्रायोजित छात्रवृत्ति योजनाएं, अर्थात (i) अनुसूचित जातियों और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना; और (ii) अनुसूचित जातियों के विद्यार्थियों  के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (पीएमएस-एससी) लागू करता है।

योजना के तहत उपलब्धियां

वर्ष 2024 के दौरान 31.10.2024 तक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों  के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 41,32,000 लाभार्थियों को 4965.45 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई है;

वर्ष 2024 के दौरान 31.10.2024 तक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 18,72,000 लाभार्थियों को 437.8 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई है

बी. युवा अचीवर्स हेतु उच्च शिक्षा के लिये छात्रवृत्ति योजना (श्रेयस) - एससी

श्रेयस-एससी में चार उप-योजनाएं जैसे एससी और ओबीसी के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना, एससी के लिए शीर्ष श्रेणी की शिक्षा, एससी आदि के लिए राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना और एससी के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप शामिल हैं। 

i. अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए शीर्ष श्रेणी छात्रवृत्ति (टीसीएस)

इस योजना के तहत, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों  को 12वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। यह योजना देश के 266 शीर्ष श्रेणी के प्रमुख संस्थानों में पढ़ने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की सहायता करती है। संस्थान को आवंटित किए गए स्लॉट में से 30 प्रतिशत पात्र अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए उनकी इंटर-से-मेरिट के आधार पर आरक्षित हैं।

योजना के तहत उपलब्धियां

• वर्ष 2024 के दौरान अब तक अनुसूचित जाति के कुल 4563 लाभार्थियों को 93.77 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई है।

  1. अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना

इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आर्थिक रूप से वंचित उम्मीदवारों को प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में भाग लेने में सहायता देने हेतु अच्छी गुणवत्ता वाली कोचिंग प्रदान करना है। 2023-24 से, यह योजना केंद्रीय नोडल एजेंसी डॉ. अम्‍बेडकर  फाउंडेशन (डीएएफ) द्वारा 19 पैनलबद्ध केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थापित डॉ. अम्‍बेडकर  सेंटर फॉर एक्सीलेंस (डीएसीई) के माध्यम से चलाई जा रही है।

योजना के तहत उपलब्धियां

• वर्ष 2024 के दौरान अब तक अनुसूचित जाति के कुल 1437 लाभार्थियों को 13.71 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई है।

  1. अनुसूचित जाति और अन्य उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति योजना (एनओएस)

एनओएस के तहत, अनुसूचित जाति (115 स्लॉट), विमुक्त घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (6 स्लॉट), भूमिहीन खेतीहर मजदूरों (4 स्लॉट) और पारंपरिक कारीगरों की श्रेणियों से संबंधित कम आय वाले विद्यार्थियों को विदेश में मास्टर डिग्री या पीएचडी कोर्स जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रत्येक चयन वर्ष के लिए 30 प्रतिशत  छात्रवृत्ति महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की जाती है।

योजना के तहत उपलब्धि

• वर्ष 2024 के दौरान अब तक कुल  अनुसूचित जाति के 80लाभार्थियों को 56.29 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई है।

iv. अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों  के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफएससी)

इस योजना के तहत, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कॉलेजों में विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में पीएचडी की डिग्री के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले एससी विद्यार्थियों  को फेलोशिप प्रदान की जाती है। यह योजना यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा - जूनियर रिसर्च फेलोशिप (एनईटी-जेआरएफ) या यूजीसी-वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (यूजीसी-सीएसआईआर) नेट-जेआरएफ संयुक्त परीक्षा उत्तीर्ण एससी विद्यार्थियों  के लिए हर साल 2000 नए स्लॉट (विज्ञान स्ट्रीम के लिए 500 और मानविकी और सामाजिक विज्ञान के लिए 1500) प्रदान करती है।

योजना के तहत उपलब्धि

• वर्ष 2024 के दौरान अब तक अनुसूचित जाति के कुल 4132 लाभार्थियों को 197.61 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियां जारी की गई हैं।

सी. लक्षित क्षेत्रों में उच्च विद्यालयों में विद्यार्थियों  के लिए आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्ठ)

विभाग अनुदान-सहायता संस्थानों (एनजीओ द्वारा संचालित) और उच्च गुणवत्तापूर्ण  शिक्षा प्रदान करने वाले आवासीय उच्च विद्यालयों के प्रयासों के माध्यम से शिक्षा की पहुंच बढ़ाने; अनुसूचित जातियों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान और समग्र विकास करने के लिए श्रेष्ठ को कार्यान्वित कर रहा है। इस योजना को दो तरीकों से लागू किया जा रहा है।

मोड-I में, प्रत्येक वर्ष राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में निर्दिष्ट संख्या में अनुसूचित जाति के मेधावी विद्यार्थियों  (3000) का चयन राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित श्रेष्ठता (एनईटीएस) के लिए राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से किया जाता है और उन्हें सीबीएसई/राज्य बोर्डों से संबद्ध सर्वश्रेष्ठ निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं और 11वीं में प्रवेश दिया जाता है।

मोड-2 में, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों  के लिए शिक्षा के क्षेत्र से संबंधित स्कूल/छात्रावास परियोजनाओं को चलाने के लिए गैर सरकारी संगठनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना मोटे तौर पर 3 प्रकार की परियोजनाओं, अर्थात् (i) आवासीय विद्यालय (ii) गैर-आवासीय विद्यालय और (iii) प्राथमिक और माध्यमिक विद्यार्थियों  दोनों के छात्रावासों को कवर करती है ।

योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए सीबीएसई/राज्य बोर्डों से संबद्ध 142 निजी आवासीय विद्यालयों में दाखिले के लिए कुल 2961 विद्यार्थियों  का चयन किया गया है और विभाग द्वारा 64.00 करोड़ रुपये की स्कूल फीस की प्रतिपूर्ति की गई है।

योजना के तहत उपलब्धियां

• वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान, 01.12.2024 तक मोड-I के तहत 5269 विद्यार्थियों  को 64.00 लाख रुपये और मोड-II के तहत 248 विद्यार्थियों  को 10.16 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

* 2023-24, 2022-23 और 2021-2022 के दौरान मोड-I के तहत चयनित विद्यार्थियों  में से 2942 विद्यार्थियों  को आगे बढ़ाया गया है।

डी. प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय)

विभाग ने 2021-22 में पीएम-अजय के तहत तीन पूर्ववर्ती केंद्र प्रायोजित योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई), अनुसूचित जाति उपयोजना को विशेष केंद्रीय सहायता (एससीएसपी को एससीए) और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (बीजेआरसीवाई) का विलय कर दिया, जिसका उद्देश्य कौशल विकास, आय सृजन योजनाओं और अन्य पहलों के माध्यम से रोजगार के अतिरिक्त अवसरों का सृजन करके एससी समुदायों की पीढि़यों की गरीबी को कम करना और एससी बहुल गांवों में पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं और अपेक्षित सेवाओं को सुनिश्चित करके सामाजिक-आर्थिक विकास संकेतकों में सुधार करना है। योजना में अब तीन निम्नलिखित घटक हैं

 • अनुसूचित जाति बहुल गांवों का ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकास

• अनुसूचित जातियों की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए जिला/राज्य स्तरीय परियोजनाओं के लिए अनुदान सहायता

• उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रावासों का निर्माण

योजना के तहत उपलब्धियां

'आदर्श ग्राम' घटक: 01.01.2024 से अब तक कुल 3802 ग्राम विकास योजनाएं (वीपीडी) तैयार की गई हैं और 5051 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 402.14 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है।

'अनुदान सहायता' घटक: 01.01.2024 से अब तक कुल 1655 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और स्वीकृत किया गया है, जिससे कुल 3,05,842 लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं। इस अवधि के दौरान, राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 215.32 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है।

'छात्रावास' घटक: 01.01.2024 से अब तक 19 बालिका छात्रावासों और 19 बालक छात्रावासों के निर्माण के लिए 26.31 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

ई. नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989

उपरोक्त अधिनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु केंद्र प्रायोजित योजना राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों  को स्वीकार्य केंद्रीय सहायता प्रदान करती है मुख्य रूप से:

• अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठ तथा विशेष पुलिस स्टेशन के कामकाज और सुदृढ़ीकरण हेतु;

• न्यायिक तंत्र के सुदृढ़ीकरण और प्रवर्तन हेतु;

• अत्याचार पीड़ितों/आश्रितों के राहत और पुनर्वास हेतु;

• अंतर-जातीय विवाहों के लिए प्रोत्साहन, जहां पति-पत्नी में से एक अनुसूचित जाति का सदस्य है;

• जागरूकता पैदा करने/प्रचार करने हेतु ।

योजना/अधिनियम के तहत उपलब्धियां

• मांग-आधारित योजना के तहत 01.01.2024 से 09.12.2024 तक 512.83 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है।

• डीओएसजेई ने विभाग के अधिनियमों, नियमों और योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ पीसीआर अधिनियम, 1955, एससी/एसटी (पीओए) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों और इन अधिनियमों के कार्यान्वयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

एफ. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी)

योजना के तहत उपलब्धियां

• स्वरोजगार ऋण योजना: 12,240 लाभार्थियों को कुल 165.79 करोड़ रुपये का संवितरण किया गया।

• अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप योजना (एनएफएससी): 3,698 उम्मीदवारों को 104.24 करोड़ रुपये जारी किए गए।

  • क्लस्टर विकास: एनएसएफडीसी के बेसलाइन सर्वेक्षण में अनुसूचित जाति के 676 बुनकरों की पहचान की गई, जो गांव: नयापुरा, जुग्यनापुरा, बसियापुर और प्राणपुर, प्रखंड : चंदेरी, जिला: अशोक नगर, मध्य प्रदेश में चंदेरी साड़ियों के निर्माण में संलग्‍न हैं। सर्वेक्षण के परिणामों/निष्कर्षों के अनुसार, 300 बुनकरों को पिट लूम के स्थान पर बेंगलुरु जैक्वार्ड और फ्रेम लूम प्रदान करने का प्रस्ताव है। एनएचडीपी योजना के तहत डीसी (हैंडलूम) कार्यालय को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, जिसमें 76 बुनकरों के लिए लाइटनिंग यूनिट सहित 1.98 करोड़ रुपये की मंजूरी मांगी गई है। डीसी (हैंडलूम) ने 14.06.2024 को परियोजना को मंजूरी दी, इस संबंध में राज्य स्तरीय परियोजना समिति (एसएलपीसी) की बैठक 30.07.2024 को मध्य प्रदेश हथकरघा निदेशालय, मुख्यालय, भोपाल में आयोजित की गई और डिजाइनर और सीडीई के लिए एक विज्ञापन मध्य प्रदेश के एक स्थानीय समाचार पत्र में 14.10.2024 को प्रकाशित किया गया।

जी. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी)

• ई-शिकायत प्रबंधन पोर्टल (ई-जीएमपी): डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत एनसीएससी द्वारा शिकायतों की रियल टाइम ट्रैकिंग के साथ शिकायत निवारण का 24x7 मंच है। इसकी स्थापना के बाद से 38,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। वित्तीय वर्ष 2024-2025 के दौरान (नवंबर 2024 तक), एनसीएससी को ईजीएमपी प्लेटफॉर्म के माध्यम से 15,137 शिकायतें मिलीं। इसी अवधि में, 12,394 नोटिस जारी किए गए, और बाहरी प्राधिकरणों  से 6,559 उत्तर ऑनलाइन रूप से प्राप्त हुए, जो पोर्टल की प्रभावशीलता और इसे व्यापक रूप से अपनाए जाने को रेखांकित करता है।

  • वर्ष 2024-25 के दौरान, आयोग ने आरक्षण नीति के कार्यान्वयन और अनुसूचित जाति कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों अर्थात बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, नाबार्ड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की समीक्षाएं कीं।
  • आयोगों के कामकाज से संबंधित सामान्य मुद्दों के बारे में चर्चा करने और उन्हें सौंपे गए जनादेश को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए 26 नवंबर, 2024 को संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के साथ बातचीत कार्यक्रम आयोजित किया गया।

एच. अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (वीसीएफ-एससी)

केंद्रीय बजट 2014-15 में अनुसूचित जातियों (एससी) में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए एससी उद्यमियों को रियायती वित्त प्रदान करते हुए वीसीएफ की स्थापना की गई थी। आईएफसीआई इस कोष का प्रबंधन करता है, जिसे 16.01.2015 को 750 करोड़ रुपये की कुल राशि के साथ लॉन्च किया गया था। सहायता 10 लाख रुपये से 15 करोड़ रुपये तक है, जिस पर प्रति वर्ष 4 प्रतिशत  की रियायती ब्याज दर (महिलाओं और दिव्यांग एससी उद्यमियों के लिए 3.75 प्रतिशत) है।

स्वीकृतियां और संवितरण (15.11.2024 तक):

स्वीकृतियां: 140 कंपनियों को 543.69 करोड़ रुपये ।

• संवितरण: 115 कंपनियों को 393.61 करोड़ रुपये ।

अम्‍बेडकर  सामाजिक नवाचार और इनक्यूबेशन मिशन (एएसआईआईएम): 30.09.2020 को वीसीएफ-एससी के तहत लॉन्च किया गया, एएसआईआईएम एससी विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर और अटल इनक्यूबेशन सेंटरों के साथ काम करने वालों के बीच नवाचार को बढ़ावा देता है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की 'स्टैंड अप इंडिया' पहल के अनुरूप है। युवा लाभार्थियों को 30 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

स्वीकृतियां और संवितरण (15.11.2024 तक):

  • स्वीकृतियां: 94 कंपनियों को 27.91 करोड़ रुपये।
  • संवितरण: 75 कंपनियों को 9.67 करोड़ रुपये।

2. पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए पहल

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त जनजाति (डीएनटी) विद्यार्थियों  के कल्याण के लिए पीएम-यशस्वी और श्रेयस दो छत्र योजनाएं हैं और डीएनटी के लिए एक योजना है।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने 28.02.2024 को मणिपुर में 2 छात्रावासों (ओबीसी लड़कों और लड़कियों के लिए 100-100 सीटों वाले) के निर्माण के लिए शिलान्‍यास समारोह और देश भर के अन्य राज्यों में 746 सीटों वाले 6 छात्रावासों के उद्घाटन की अध्यक्षता की।

. पीएम-यशस्वी और श्रेयस के तहत उपलब्धि

  • 01.01.2024 से 09.12.2024 तक ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों  के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत  21,857 लाख रुपये जारी किए गए हैं और 2023-24 के लिए लाभार्थियों की संख्या 26.03 लाख है और 2024-25 के लाभार्थियों की रिपोर्ट राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अगले वर्ष के प्रस्ताव के साथ दी जाएगी।
  • 01.01.2024 से 09.12.2024 तक ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों  के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत  99,287 लाख रुपये जारी किए गए हैं और 2023-24 के लिए लाभार्थियों की संख्या 32.73 लाख है और 2024-25 के लाभार्थियों की रिपोर्ट राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अगले वर्ष के प्रस्ताव के साथ दी जाएगी।
  • ओबीसी लड़के और लड़कियों के लिए छात्रावासों के निर्माण के लिए 01.01.2024 से 09.12.2024 तक 400 सीटों के लिए 859 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
  • ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों  के लिए स्कूलों में शीर्ष श्रेणी की शिक्षा की केंद्रीय क्षेत्र की योजना के तहत 2023-24 के दौरान 661 लाख रुपये जारी किए गए हैं, जिससे 3177 छात्र लाभान्वित हुए।
  • ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी विद्यार्थियों  के लिए कॉलेज में शीर्ष श्रेणी की शिक्षा की केंद्रीय क्षेत्र की योजना के तहत 2023-24 के दौरान 12,405 लाख रुपये जारी किए गए हैं, जिससे 5781 छात्र लाभान्वित हुए।
  • ओबीसी/ईबीसी विद्यार्थियों  के लिए विदेश में अध्ययन के लिए डॉ. अम्‍बेडकर  ब्याज सब्सिडी योजना के तहत 2023-24 में 2752 विद्यार्थियों  के लिए 3,748 लाख रुपये जारी किए गए हैं।
  • ओबीसी विद्यार्थियों  के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप के तहत 2009 लाभार्थियों (दिसंबर 2024 तक) के लिए 9,302 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

बी. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी)

  • ऋण योजनाएं: निगम ने स्पष्ट संचार सुगम बनाने के लिए चालू वित्त वर्ष से अपनी योजनाओं का दो श्रेणियों- व्यक्तिगत ऋण और समूह ऋण में पुनर्गठन किया है। निगम ने जनवरी से नवंबर, 2024 तक 63,014 लाभार्थियों की सहायता के लिए 455.77 करोड़ रुपये जारी किए हैं। संचयी रूप से, एनबीसीएफडीसी ने अपनी स्थापना के बाद से 32.69 लाख से अधिक लाभार्थियों की सहायता के लिए 7,408.75 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
  • पीएम-सूरज पोर्टल: दिनांक 13.03.2024 को प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च किए गए पीएम-सूरज पोर्टल (https://pmsuraj.dosje.gov.in/), का उद्देश्य एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म के तहत आर्थिक सशक्तिकरण पहलों को समेकित और सुव्यवस्थित करना है। यह विभिन्न ऋण योजनाओं को एकीकृत करता है, जिससे यह आर्थिक उत्थान के लिए एक व्यापक समाधान बन जाता है। पारदर्शिता लाने और दूरदराज के क्षेत्रों में लक्षित समूहों तक इसकी पहुंच को व्यापक बनाने के लिए, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के साथ गठजोड़ की व्यवस्था की गई है।
  • विपणन संबंध:
  • निगम देश के प्रमुख मेलों जैसे शिल्प समागम मेला, दिल्ली हाट, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला और सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला के साथ-साथ अपने-अपने राज्यों में आयोजित प्रदर्शनियों/मेलों में भाग लेने के अवसर प्रदान करके लक्षित समूह के कारीगरों के लिए विपणन सहायता को बढ़ावा दे रहा है। जनवरी-नवंबर, 2024 के दौरान, एनबीसीएफडीसी ने निम्नलिखित प्रदर्शनियों/मेलों का आयोजन/भागीदारी की:

क्र.सं.

कार्यक्रम/प्रदर्शनी का नाम

अ‍वधि

लाभार्थी/भागीदार राज्यों की संख्या

लाभार्थियों की संख्‍या

राज्‍य

1.

आत्‍मनिर्भर भारत, (दिल्‍ली)

03-10 जनवरी 24

37

 

असम, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, जम्मू -कश्मीर, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड,

2.

गोवा लोकोत्सव मेला

09-17 जनवरी 24

05

 

गुजरात, गोवा, केरल

3.

शिल्प समागम मेला, अमृतसर (पंजाब)

12-21 जनवरी 24

68

 

असम, गुजरात, हरियाणा, जम्मू- कश्मीर, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड।

4.

शिल्प समागम मेला, बेंगलुरु, कर्नाटक

12-20 जनवरी 24

25

 

असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात

5.

सूरज कुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला, फरीदाबाद, हरियाणा

02-18 फरवरी 24

29

 

असम, दिल्ली, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू -कश्मीर, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड

6.

शिल्प समागम मेला, जोधपुर, राजस्थान

29 फ़रवरी-08 मार्च 24

25

 

असम, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश

7.

शिल्प समागम मेला (दिल्ली हाट, आईएनए), दिल्ली

1-15 नवंबर 2024

35

 

असम, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल, प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड

8.

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला, प्रगति मैदान, दिल्ली

14-27 नवंबर 2024

31

 

असम, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा

बी. पारंपरिक कारीगरों का उत्थान आजीविका संवर्धन कार्यक्रम (ट्यूलिप): सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने 05.11.2024 को हमारे कारीगरों के उत्पादों के विपणन हेतु उपभोक्ता संबद्धता व्यापक बनाने, उनकी आमदनी की क्षमता और बाजार में दृश्‍यता बढ़ाने के लिए ट्यूलिप ब्रांड लॉन्च किया । ट्यूलिप के तहत नियोजित गतिविधियों में अमेज़ॉन, फिलिपकार्ट, मीशो और जियोमार्ट पर मार्केटप्लेस ऑन-बोर्डिंग, कुशल इन्वेंट्री प्रबंधन और डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक्स प्रदाता (डिलीवरी, एक्सप्रेस बीज़, ईकॉम एक्सप्रेस) के साथ गठजोड़ करके भंडारण और पूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ताओं को लक्षित करने के लिए अमेज़ॉन ग्लोबल, ईबे और ईटीसी पर अंतर्राष्ट्रीय मार्केटप्लेस ऑन-बोर्डिंग, भुगतान और शिपिंग समाधान, वेबसाइट स्थानीयकरण, वेबसाइट विकास आदि शामिल हैं। घरेलू बाजारों में ट्यूलिप उत्पादों की लॉन्चिंग जनवरी 2025 तक पूरी हो जाएगी। योजना का विस्‍तृत विवरण वेबसाइट https://pmsuraj.dosje.gov.in/ के माध्यम से देखा जा सकता है।  

• ओबीसी के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफओबीसी): इस योजना का उद्देश्य ओबीसी विद्यार्थियों  को विश्वविद्यालय, शोध संस्थानों और वैज्ञानिक संस्थानों में एम.फिल. और पीएचडी जैसी डिग्री प्राप्त करने के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने में वित्तीय सहायता प्रदान करना है। प्रति वर्ष 1000 स्लॉट हैं, मानविकी/सामाजिक विज्ञान के लिए 750 और विज्ञान के लिए 250 और कुल सीटों का 5प्रतिशत  पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। जेआरएफ स्तर के लिए फेलोशिप की संशोधित दर 37,000 रुपये प्रति माह है और एसआरएफ स्तर के लिए यह 42,000 रुपये प्रति माह है, इसके अलावा 01.01.2023 से एचआरए और आकस्मिक राशि भी है। एनबीसीएफडीसी को अब तक एमओएसजेई से 93.21 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है, जिसका उपयोग 2288 विद्वानों को फेलोशिप प्रदान  करने में  किया गया है।

• कौशल विकास पहल: एमओएसजेई ने 2020-21 से प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (पीएम-दक्ष) योजना शुरू की और एनबीसीएफडीसी 2020-21 से इस योजना के तहत 3 लाख रुपये से कम सालाना पारिवारिक आमदनी वाले ओबीसी, 1 लाख रुपये से कम सालाना पारिवारिक आमदनी वाले ईबीसी और डीएनटी से संबंधित लक्षित समूह के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू कर रहा है। निगम ने कौशल विकास प्रशिक्षण और पीएम-दक्ष योजना के तहत  2014-15 से 2023-24 तक 2,08,903 प्रशिक्षुओं के लिए 366.31 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकरण: निगम ने विस्तारित दान स्रोतों के माध्यम से सामुदायिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज - सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई-एसएसई) के साथ-साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज - सोशल स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई-एसएसई) पर पंजीकरण कराया है। निगम निधियां जुटाने से संबंधित दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में है और इसे एक्सचेंज पर परियोजना की लिस्टिंग के साथ अपलोड किया जाएगा। इन सामाजिक प्रभाव निधियों में व्यक्तिगत परोपकारी, दानदाता समूह जैसे परिवार और दुनिया भर के कॉर्पोरेट द्वारा योगदान दिया जा सकता है।

सी. पिछड़े वर्गों के लिए उद्यम पूंजी कोष (वीसीएफ-बीसी)

पिछड़े वर्गों (बीसी) में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए 01.10.2019 को शुरू की गई यह योजना वीसीएफ -एससी के समान ही है। कुल राशि 176.74 करोड़ रुपये है, और 6 प्रतिशत ब्याज दर के साथ  20 लाख रुपये से 15 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाती है।

स्वीकृतियां और संवितरण (15.11.2024 तक)

  • स्वीकृतियां: 22 कंपनियों को 112.35 करोड़ रुपये।
  • संवितरण: 16 कंपनियों को 49.44 करोड़ रुपये।
  • वीसीएफ-एससी और वीसीएफ-बीसी योजनाओं का परिणाम: 256 कंपनियों को 683.95 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है, जिससे 4500 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं।
  • सृजित परिसंपत्तियां: 778 करोड़ रुपये

विश्वास: विश्वास योजना हाशिए पर पड़े अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारियों (जिसमें हाथ से मैला ढोने वाले और कचरा बीनने वाले शामिल हैं) के लिए आजीविका संबंधी गतिविधियों में सहायता प्रदान करने के उद्देश्‍य से शुरु की गई विभाग की एक पहल है। इसके तहत आय-उत्पादक ऋणों पर 5 प्रतिशत  ब्याज छूट प्रदान की जाती है। पीएसबी, आरआरबी, निजी बैंकों, लघु वित्त बैंकों और इसी तरह की संस्थाओं में मानक खातों वाले व्यक्तिगत और एसएचजी ऋणकर्ता (कम से कम 70 प्रतिशत  लक्ष्य समूह के सदस्यों के साथ) इस लाभ के लिए पात्र हैं। ऋण देने वाली संस्थाओं की ओर से छूट संबंधी सभी दावों को पीएम सूरज पोर्टल के माध्यम से संसाधित किया जाता है। इसमें विश्वास के अलावा, निगमों की ऋण योजनाएं और वेंचर कैपिटल फंड शामिल हैं।

यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत तीन निगमों, अर्थात् राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है ।

कार्यान्वयन:

  • विश्वास 2024-25 से 2025-26 तक चलेगी, जो मुद्रा, एनआरएलएम और सिडबी के प्रयास जैसे मौजूदा कार्यक्रमों के साथ अभिसरण का लाभ उठाएगी।
  • एनएसएफडीसी ने अपने बैंकिंग चैनल भागीदारों के माध्यम से विश्वास की ब्याज छूट योजना को लागू करना शुरू कर दिया है।
  • इस वर्ष के लिए एनएसएफडीसी का लक्ष्य अनुसूचित जाति के 3.13 लाख लाभार्थियों को कवर करना है, जिसके लिए निगम को विश्वास पोर्टल पर 1.67 लाख लाभार्थियों के दावे प्राप्त हुए हैं।
  • इस योजना के अंतर्गत ओबीसी के 7.36 लाख लाभार्थियों को कवर किया जाना है, जिनमें से 6.41 लाख लाभार्थियों को पहले ही योजना में नामांकित किया जा चुका है और उन्हें जल्द ही सब्सिडी लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
  • एनएसकेएफडीसी ने पूरे भारत में योजना के कार्यान्वयन को सुगम बनाने के लिए  44 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओए) और परिशिष्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।

बजट और लाभार्थी: 2024-25 और 2025-26 के लिए 15 लाख लाभार्थियों को लक्षित करते हुए कुल 251 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

3. विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों का आर्थिक सशक्तिकरण

ए. विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू समुदायों के लिए विकास और कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) का गठन

डीडब्ल्यूबीडीएनसी का गठन दिनांक 21 फरवरी, 2019 की राजपत्र अधिसूचना के संदर्भ में मौजूदा कार्यक्रमों और पात्रता तक पहुंच में खामियों की पहचान करने के बाद डीएनटी समुदायों के लिए आवश्यक कल्याण और विकास कार्यक्रमों को तैयार करने, उन्‍हें कार्यान्वित करने, और उनकी समीक्षा करने के उद्देश्‍य से किया गया।

डीएनटी के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजना (एसईईडी):

 डीडब्ल्यूबीडीएनसी 16.02.2022 को शुरू की गई डीएनटी के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजना (एसईईडी) नामक एक योजना लागू कर रहा है। इस योजना के चार घटक हैं यथा :

• डीएनटी उम्मीदवारों को प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के लिए सक्षम बनाने हेतु अच्छी गुणवत्ता की कोचिंग प्रदान करना।

• डीएनटी समुदायों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना।

• डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदाय संस्थानों के छोटे समूहों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण करने के लिए सामुदायिक स्तर पर आजीविका पहल की सुविधा प्रदान करना।

• डीएनटी समुदायों के सदस्यों को मकान बनवाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।

योजना के तहत उपलब्धियां

. आजीविका संबंधी घटक:

  • एसईईडी के तहत आजीविका गतिविधियों का सृजन करने और उन्‍हें प्रोत्‍साहन देने के लिए 8 राज्यों अर्थात् महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में कुल 3500 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की योजना बनाई गई है। पांच राज्यों में नियोजित एसएचजी में से 1368 एसएचजी का गठन कर लिया गया है, जिससे 13,884 लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं।
  • आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में 300 एसएचजी की दर से 600 एसएचजी के लिए परियोजना स्वीकृत की गई है और डीएनटी बोर्ड द्वारा मार्च 2024 में 600 लाख रुपये की राशि अग्रिम के रूप में जारी की गई है।
  • परियोजना को 12 जिलों में प्रति राज्य 6 जिलों की दर से लागू किया जा रहा है। मंजूरी के अनुसार, आज तक 498 एसएचजी का गठन किया गया है, 5820 लाभार्थी हैं और एनएसएफडीसी कार्यान्वयन भागीदारों को 16.68 लाख रुपये की राशि जारी की गई है।
  • एनबीसीएफडीसी ने 915 एसएचजी गुजरात में (612), हरियाणा (232) और राजस्थान में (71) का गठन किया है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश में एसएचजी का गठन प्रक्रिया में है।

बी. शिक्षा संबंधी घटक (निःशुल्क कोचिंग):

  • इसका कार्यान्‍वयन दो केंद्रीय विश्वविद्यालय कर रहे हैं और 55 पात्र डीएनटी छात्र इसका लाभ उठा रहे हैं। एक अनुभवी एजेंसी को 12वीं कक्षा पास होने की योग्यता शर्त वाली परीक्षाओं की कोचिंग के लिए विद्यार्थियों को शॉर्टलिस्ट करने के काम पर लगाया गया है। इस कार्यक्रम में एजेंसी ने अब तक, लगभग 350 पात्र डीएनटी विद्यार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया है।

सी. स्वास्थ्य बीमा संबंधी घटक:

  • पायलट परियोजना के रूप में, मंत्रालय ने दो राज्यों -गुजरात और महाराष्ट्र में 50000 आयुष्मान कार्ड की सुविधा को मंजूरी दी है। इस पायलट परियोजना में अब तक 9005 आयुष्मान कार्ड (गुजरात में 8000 और महाराष्ट्र में 1005) पात्र डीएनटी लाभार्थियों को सुलभ कराए जा चुके हैं। एनबीसीएफडीसी आयुष्मान कार्ड (गुजरात और महाराष्ट्र में प्रत्येक में 25000) जारी करके एसईईडी योजना के स्वास्थ्य घटक को भी लागू कर रहा है।

डी. आवास संबंधी घटक:

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय से अपनी संशोधित पीएमएवाई योजना में डीएनटी समुदायों को शामिल करने का अनुरोध किया गया है। इस संबंध में, पर्याप्‍त डीएनटी आबादी वाले कई राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे लक्षित लाभ हेतु पात्र डीएनटी व्यक्तियों की सूची साझा करें।

4. सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए पहल

ए. यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई (नमस्ते)

यह वित्त वर्ष 2023-24 से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में कार्यान्वित की जाने वाली एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इस योजना में स्थायी आजीविका प्रदान करके शहरी भारत में सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान की परिकल्पना की गई है। पूर्ववर्ती हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास हेतु स्वरोजगार योजना (एसआरएमएस) के घटकों को 2023-24 से नमस्ते योजना में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2024-25 में कचरा बीनने वालों को नमस्ते के तहत लक्षित समूह के रूप में जोड़ा गया है।

योजना के तहत उपलब्धियां

• सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मी (एसएसडब्ल्‍यू)

i. नमस्ते के कार्यान्वयन की दिशा में चालू वित्त वर्ष में 2 राज्यों ने एसएसडब्‍ल्‍यू की प्रोफाइलिंग शुरू कर दी है (36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 32 ने प्रोफाइलिंग शुरू कर दी है)।

ii. 21,172 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों (एसएसडब्‍ल्‍यू) की प्रोफाइलिंग की गई है।

  1. केंद्रीय खरीद के माध्यम से एसएसडब्‍ल्‍यू को 13,203 पीपीई किट, आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाइयों के लिए 43 सुरक्षा उपकरण किट मुहैया कराई गई हैं।
  2. इस वित्त वर्ष नगर निगम/म्‍युनिसिपैलिटी /नगर पालिका तथा सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मियों को नियुक्त करने वाले अन्य ऐसे संगठनों में सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई की रोकथाम पर 337 कार्यशालाएं आयोजित की गईं।

 

हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास हेतु स्व-रोजगार योजना (एसआरएमएस)

नमस्ते के घटक:  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2013 और 2018 में हाथ से मैला ढोने वालों की पहचान के लिए किए गए दो सर्वेक्षणों के दौरान, 58,098 हाथ से मैला ढोने वालों की पहचान की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए योजना के तहत उपलब्धियां निम्‍नलिखित हैं:

  1. 35 लाभार्थियों को स्वरोजगार परियोजनाओं के लिए 5.00 लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई।
  2. 90 सफाई कर्मचारियों/आश्रितों को स्वच्छता संबंधी परियोजनाओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई।

• नई पहल: निम्नलिखित प्रमुख हस्तक्षेपों के साथ कचरा बीनने वालों को भी सीवर सेप्टिक टैंक श्रमिकों के साथ-साथ एक अतिरिक्त लक्ष्य समूह के रूप में नमस्ते योजना के तहत शामिल किया गया है:

i. 2024-25 और 2025-26 के दौरान 2,50,000 कचरा बीनने वालों की प्रोफाइलिंग

ii. व्यावसायिक जोखिमों और सुरक्षित हैंडलिंग के बारे में व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण।

iii. कचरा बीनने वालों को पीपीई किट का प्रावधान।

iv. आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज।

v. सूखा कचरा संग्रहण केंद्रों (डीडब्ल्यूसीसी) के कचरा संग्रहण वाहनों के लिए कचरा बीनने वालों को 5.0  लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी

vi. आईईसी अभियान आदि।

बी. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी)

01.01.2024 से 05.12.2024 के दौरान, एनएसकेएफडीसी ने 40,942 लाभार्थियों को कवर करने के लिए 242.66 करोड़ रुपये की रियायती ऋण राशि स्वीकृत और जारी की है। इनमें से, एनएसकेएफडीसी की महिला समृद्धि योजना (एमएसवाई) और महिला अधिकारिता योजना (एमएवाई) के तहत 40,803 महिला लाभार्थियों को कवर करने के लिए 239.69 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

सी. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके)

एनसीएसके राज्य स्तर पर बैठकों और अनुवर्ती संचार के माध्यम से सफाई कर्मचारियों की गरिमा, अधिकारों के पालन और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित पर जोर देते हुए प्रयास जारी रखे हुए है:

  • सीवर/सेप्टिक टैंक में हुई मौतों के मामलों में दर्ज एफआईआर में एम.एस. अधिनियम, 2013 के उपयुक्‍त  प्रावधानों को लागू किया जाए, जांच और सुनवाई में तेजी लाई जाए।
  • सीवर/सेप्टिक टैंक की सफाई का यंत्रीकरण युद्ध स्तर पर किया जाए, ताकि इस दौरान होने वाली मूल्यवान मानव जीवन की हानि को रोका जा सके।
  • दिनांक 27.03.2014 और 20.10.2023 के उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय के आलोक तथा मृतक के परिवारों की वित्तीय और सामाजिक पीड़ा के स्तर के मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए मुआवजा दिया जाए। किसी भी अन्य अधिनियम/नियम/दिशानिर्देश के अनुसरण में किए गए किसी भी भुगतान के अलावा उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्णय के अनुसार मुआवजा दिया जाए।
  • ऐसे मामले जहां कानूनी वारिसों का पता नहीं चल पा रहा हो, वहां एक स्थानीय और एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में कम से कम तीन बार विज्ञापन दिया जाना चाहिए। जहां आंशिक भुगतान पहले ही किया जा चुका है, वहां कानूनी वारिसों का विवरण कानूनी वारिसों के बैंक खाते या भुगतान वाउचर से पता लगाया जा सकता है।
  • एम.एस. अधिनियम, 2013 के संदर्भ में राज्यों में राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठकों के साथ-साथ जिला सतर्कता समिति की बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता है
  • मुआवजे के शीघ्र भुगतान, एम.एस. अधिनियम, 2013 के विभिन्न प्रावधानों के कार्यान्वयन और सफाई कर्मचारियों की शिकायत याचिकाओं के निपटान के लिए राज्यों के मुख्य सचिवों सहित विभिन्न स्तरों पर 140 डी.ओ. पत्र भेजे गए हैं।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप:

  • इस वर्ष सीवर में हुई मौतों के 35 मामलों में मुआवज़े का पूरा भुगतान किया गया है। इन 35 मामलों में से 5 मामले ऐसे हैं, जिनमें मृत्यु 2016-2020 की अवधि के दौरान हुई थी और शेष 30 मामले ऐसे हैं जिनमें मृत्यु 2021-2024 के दौरान हुई थी।
  • कुल 19 मामलों में, जहां वर्ष 2024 (जनवरी के बाद) के दौरान मृत्यु हुई थी, वहां प्रत्‍येक मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को प्रति 30 लाख रुपये का तत्काल मुआवजा दिया गया।
  • आयोग उच्‍चतम न्‍यायालय के निर्देशों के अनुसार सीवर में हुई मृत्यु के मामले में परिवारों के पुनर्वास के साथ- साथ दिव्‍यांगता (स्थायी/आंशिक) के मामले में भी मुआवजे का मुद्दा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के समक्ष उठा रहा है और सीवर में हुई मृत्यु के मामलों में एफआईआर/मामलों की स्थिति पर भी विचार कर रहा है।
  • राज्य प्राधिकारियों के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद कानूनी उत्तराधिकारियों का पता नहीं लग पाने के कारण मृत्यु के चार मामलों को बंद कर दिया गया।
  • सीवर में मौतों के मामलों में राज्यों ने अब मुआवजे के भुगतान के विशिष्ट उद्देश्य के लिए बजट रखने एवं धन आवंटित करने की सलाह को लागू करना शुरू कर दिया है।
  • विभिन्न राज्यों में राज्य स्तरीय निगरानी समिति की अनेक बैठकें साथ ही साथ जिला सतर्कता समिति की बैठकें की गई हैं।
  • आयोग के अनुसंधान एवं विकास अनुभाग द्वारा जनवरी, 2024 से अक्टूबर, 2024 तक की अवधि के दौरान सफाई कर्मचारियों से संबंधित कुल 860 शिकायतों/कष्‍टों/अभ्यावेदनों का निपटान किया गया।
  • माननीय उच्‍चतम न्यायालय के 2014 और 2023 के फैसले के बारे में सिविल और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी जागरूकता फैलाई गई है।
  • मृत्‍यु के कई मामलों में, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में मृतक व्यक्तियों के परिवारों को सहायता और पुनर्वास के रूप में सरकारी नौकरियों की पेशकश की गई। इस अभ्यास ने पीडि़त परिवार के सदस्यों को स्थिरता और आजीविका प्रदान करने में मदद की।
  • एमएस अधिनियम 2013 के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों ने देश भर के विभिन्न राज्यों का दौरा किया। इन यात्राओं के दौरान, उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को कर्मचारियों के स्थानांतरण, पदोन्नति, कार्य स्थितियों और मुआवज़े से संबंधित मामलों सहित परिचालन संबंधी मुद्दों पर गौर करने और हल करने के निर्देश दिए। इन निर्देशों का काफी संख्या में मामलों में पालन किया गया।

डी. पीएम-दक्ष के तहत एससी, ओबीसी और सफाई कर्मचारियों का कौशल विकास

पीएम-दक्ष योजना, एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे 2020-21 के दौरान शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लक्षित समूहों (एससी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, डीएनटी, कचरा बीनने  वाले सहित सफाई कर्मचारी आदि) के योग्यता स्तर को बढ़ाना है ताकि उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उन्‍हें स्वरोजगार और वेतन-रोजगार दोनों में रोजगार योग्य बनाया जा सके।

योजना के तहत उपलब्धियां

  • वर्ष 2023-24 के लिए, पीएम-दक्ष योजना के तहत 112 पैनलबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कुल 80,185 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
  • प्रशिक्षण संस्थानों को पैनलबद्ध करने की प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जाना लंबित होने के कारण वित्त वर्ष 2024-25 के लिए प्रशिक्षण शुरू होना अभी तक बाकी है, जिसके बाद संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को धनराशि वितरित की जाएगी।
  • योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए की गई पहलों में एनएसक्यूएफ से संबद्ध  पाठ्यक्रम शुरू करना, कौशल पाठ्यक्रम में ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण घटक के अनिवार्य प्रावधान को प्राथमिकता देना, एमएसडीई के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को अपनाना, बेहतर निगरानी प्रणाली, आर्थिक रूप से कमजोर लाभार्थियों की आय सीमा को 1.00 लाख से बढ़ाकर 3.00 लाख करना आदि शामिल हैं।

6. सामाजिक सुरक्षा के तहत उठाए गए कदम

ए. वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु की गई पहल

• अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई): यह योजना वरिष्ठ नागरिकों की शीर्ष पांच आवश्यकताओं अर्थात आश्रय, वित्तीय सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य देखभाल और मानवीय संपर्क/सम्मानपूर्ण जीवन का ध्यान रखती है। इसमें जागरूकता फैलाने और समाज को संवेदनशील बनाने से लेकर बुजुर्गों की सुरक्षा/संरक्षण और सामान्य भलाई के पहलू भी शामिल हैं। एवीवाईएवाई योजना के प्रमुख घटक हैं:

  1. वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीएसआरसी): निःशुल्क आश्रय, पोषण, चिकित्सा, मनोरंजन सुविधाएं आदि प्रदान करने के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों को परियोजना लागत का 100 प्रतिशत  तक अनुदान प्रदान किया जाता है। 2014-15 से अब तक 8.46 लाख लाभार्थियों के लिए 730.22 करोड़ रुपये जारी किए गए।
  2. वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना (एसएपीएसआरसी): प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी स्थानीय सोच को ध्यान में रखते हुए योजना और रणनीति बनाएं और अपने वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए स्वयं की राज्य कार्य योजनाएं तैयार करें। 2019-20 से 2024-25 तक (01.12.2024 तक) एसएपीएसआरसी के तहत 73.24 करोड़ रुपये जारी किए गए।
  3. राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई): आरवीवाई की शुरुआत 1 अप्रैल 2017 को की गई थी, जिसका उद्देश्य बीपीएल श्रेणी से संबंधित पात्र वरिष्ठ नागरिकों या 15,000 रुपये से कम मासिक आय वाले और आयु संबंधी अशक्‍तताओं/ दिव्‍यांगताओं से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क सहायक उपकरण प्रदान करना है। इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 15,54,179 उपकरणों के वितरण के माध्यम से कुल 3,87,589 वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुंचाया गया है।
  4. एल्डरलाइन (14567)- वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन: वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए निःशुल्क जानकारी, मार्गदर्शन, भावनात्मक समर्थन तथा र्व्यवहार और मुक्‍त कराने संबंधी मामलों में फील्‍ड हस्तक्षेप प्रदान करने के लिए 01.10.2021 को शुरू की गई। एल्डरलाइन एक टोल-फ्री नंबर (14567) है जो दिन में 12 घंटे (सुबह 8:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक) काम करता है। एल्डरलाइन पर अब तक कुल 24 लाख कॉल प्राप्त हुई हैं।
  5. वृद्धजनों की देखभाल करने वालों का प्रशिक्षण: वरिष्ठ नागरिकों को अधिक पेशेवर सेवाएं प्रदान करने  तथा वृद्धावस्था के संबंध में पेशेवर देखभाल करने वालों का एक समूह तैयार करने के लिए आपूर्ति  में कमी को दूर करना है। इस योजना की शुरुआत से लेकर अब तक, योजना के अंतर्गत कार्यान्वयन एजेंसी को 45.82 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

बी. नशीली दवाओं की लत की रोकथाम के लिए पहल

डीओएसजेई ने ‘नशीली दवाओं की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) तैयार की है और उसे लागू कर रहा है, जो एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसके तहत निम्नलिखित को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है:

  • निवारक शिक्षा और जागरूकता सृजन, क्षमता निर्माण, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों  द्वारा नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने हेतु कार्यक्रम आदि के लिए राज्य सरकारें/ केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) प्रशासन।
  • 'नशे की लत से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए एकीकृत पुनर्वास केन्द्रों (आईआरसीए) के संचालन और रखरखाव के लिए एनजीओ/वीओ, किशोरों में नशीली दवाओं की लत की शुरुआत में ही रोकथाम के लिए हमउम्र लोगों के नेतृत्व में समुदाय आधारित समाधान (सीपीएलआई), आउटरीच और ड्रॉप-इन केन्द्रों (ओडीआईसी) और जिला नशा मुक्ति केन्द्र (डीडीएसी)'; तथा
  • व्यसन उपचार सुविधाओं (एटीएफ)के लिए सरकारी अस्पताल

2020 में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के शुभारंभ से लेकर अब तक एनएमबीए 4.42 करोड़ युवाओं और 2.71 करोड़ महिलाओं सहित 13.57 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच कायम कर चुका है। इस अभियान में 3.85 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों ने भी भाग लिया है।

  • 08.02.2024 को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री द्वारा 41 एटीएफ का उद्घाटन किया गया।
  • मंत्रालय ने ब्रह्मा कुमारियों के सहयोग से 14.02.2024 को एनएमबीए जागरूकता वाहन लॉन्‍च किया।
  • डीओएसजेई ने 26.06.2024 को नशीली दवाओं की लत और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र में एटीएफ की स्थापना के लिए लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई क्षेत्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (एलजीबीआरआईएमएच) तेजपुर, असम के साथ 22.07.2024 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
  • एनएमबीए की स्थापना के पांचवें वर्ष के उपलक्ष्य में, डीओएसजेई ने मॉडर्न स्कूल, बाराखंभा रोड, नई दिल्ली में एक सामूहिक प्रतिज्ञा/शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया।इस अवसर पर मॉडर्न स्कूल के लगभग 2700 छात्र, शिक्षक उपस्थित थे, जबकि देश भर में 3 करोड़ से अधिक लोगों ने शपथ ली और इस अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया।

सी. भिक्षावृत्ति करने वाले व्यक्तियों के कल्याण के लिए पहल

स्माइल योजना: ‘आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए सहायता (स्माइल)’ योजना का उद्देश्य भिक्षावृत्ति करने वाले व्यक्तियों का समग्र पुनर्वास करना है। इसका उद्देश्य भिक्षुकों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाकर ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ बनाना है। इस योजना के प्रमुख घटक क्षेत्र-विशिष्ट सर्वेक्षण, जागरूकता अभियान, लामबंदी और मुक्‍त कराने का अभियान, आश्रय-गृहों और बुनियादी सेवाओं और कौशल प्रशिक्षण तक पहुंच, वैकल्पिक आजीविका विकल्प और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) का गठन हैं। यह योजना तीर्थ, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों सहित 81 शहरों/कस्बों में सक्रिय है। अगले चरण में इसका 50 और शहरों तक विस्तार किया जाएगा।

प्रगति (15.11.2024 तक):

भिक्षावृत्ति में लिप्त चिन्हित व्यक्ति: 7,660

पुनर्वासित व्यक्ति: 970

डी. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का समग्र पुनर्वास

स्माइल योजना: जनवरी से नवंबर, 2024 तक स्माइल योजना की टीजी उप-योजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियां की गईं:

  1. विभाग ने निराश्रित ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 6 राज्यों - आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 6 नए गरिमा गृह आश्रय गृह स्थापित किए हैं।
  2. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल को 62 लाख से अधिक लोग विजिट कर चुके हैं और अब तक 23,811 प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
  3. अब तक छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, अंडमान एवं  निकोबार, सिक्किम, पंजाब, मिजोरम और उत्तर प्रदेश राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 11 ट्रांसजेंडर संरक्षण प्रकोष्ठ स्थापित किए गए हैं।
  4. अब तक, राजस्थान, मिजोरम, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, महाराष्ट्र, केरल, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर तथा अंडमान एवं निकोबार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 19 ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड (टीडब्ल्यूबी) स्थापित किए जा चुके हैं।
  5. विभाग ने ट्रांसजेंडर समुदाय को रोजगार के अवसरों आदि तक समान पहुंच सुलभ कराने के लिए  ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समान अवसर नीति’ जारी की है।
  6. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ब्यूटी एंड वेलनेस सेक्टोरल स्किल काउंसिल, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट सेक्टर स्किल काउंसिल और उद्यमिता विकास संस्थान (लखनऊ) के माध्यम से कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक, प्रशिक्षण भागीदार उद्यमिता विकास संस्थान (लखनऊ) द्वारा कुल 725 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को विभिन्न व्‍यवसायों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

योजना के तहत उपलब्धियां

  • वास्‍तविक उपलब्धियां: वर्ष 2024 के दौरान (नवंबर 2024 तक) कुल 1475 लाभार्थी (गरिमा गृह में 750 और कौशल विकास के तहत 725)
  • वित्तीय उपलब्धियां: वर्ष 2024 के दौरान (नवंबर 2024 तक) कुल 1.54 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

ई. राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान

  1. राष्ट्रीय ड्रग दुरूपयोग निवारण केन्द्र (एनसीडीएपी)
  • एनआईएसडी दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली के 15 जिलों, 48 इकाइयों, 11 कल्याण केंद्रों में मादक पदार्थों की लत की रोकथाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। 11 कार्यक्रमों के माध्यम से  दिल्ली पुलिस के 2300 अधिकारियों को जागरूक किया गया है।
  • आई-गॉट और दीक्षा (स्वयं और ई-विद्या) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नशीली दवाओं की लत की रोकथाम और नवचेतना पर पाठ्यक्रमों को अपलोड किया गया ।
  • एनआईएसडी ने नशीली दवाओं की लत और इसकी रोकथाम पर केंद्रित व्यापक जागरूकता फैलाने और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पुलिस अकादमियों, एनवाईकेएस (नेहरू युवा केंद्र संगठन), एनएसएस (राष्ट्रीय सेवा योजना), विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों और एसआईआरडी/एनआईआरडी (राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान और पंचायती राज और राज्य ग्रामीण विकास संस्थान) जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के साथ सहयोग किया।
  • ओडीआईसी, सीपीएलआई, आईआरसीए और सीडब्ल्यूपीओ के लिए चार रिसोर्स मैनुअल विकसित किए गए हैं और संबंधित परियोजनाओं के साथ साझा करने से पहले उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है।
  • एनआईएसडी में यूएनओडीसी के सहयोग से नशीली दवाओं की लत संबंधी विकारों की प्रकृति, रोकथाम और उपचार पर तीन दिवसीय नीति निर्माताओं का प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें मालदीव के गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया।
  • एनसीडीएपी ने 19 राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण आयोजित किए हैं, जिनमें एनएपीपीडीआर के तहत काम करने वाले 511 कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया।
  • एनसीडीएपी ने विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से 16.12.2024 तक 946 कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें 2,62,658 लोगों ने भाग लिया।

ii. एनआईएसडी का ट्रांसजेंडर और भिक्षावृत्ति (टीएंडबी) प्रभाग

एनआईएसडी के टीएंडबी प्रभाग ने भिक्षावृत्ति करने वाले व्यक्तियों और ट्रांसजेंडर समुदाय के सशक्तिकरण, पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण पर जोर देकर हाशिए पर पड़े समुदायों का समर्थन करने के लिए प्रभावशाली कार्यक्रम लागू किए हैं। 2024 के दौरान प्रभाग की पहलों में शामिल हैं:

• ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए एनआईएसडी ने 290 कार्यक्रम (13.12.2024 तक) स्वीकृत किए, जिनमें 15,849 लोगों ने भाग लिया।

• एनआईएसडी ने भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों के कल्याण के लिए 22 कार्यक्रम (13.12.2024 तक) स्वीकृत किए, जिनमें 720 लोगों ने भाग लिया।

• एनआईएसडी ने सामाजिक सुरक्षा से संबंधित 35 कार्यक्रम (05.09.2024 तक) स्वीकृत किए, जिनमें 1401 लोगों ने भाग लिया।

• प्रभाग ट्रांसजेंडर और भिक्षावृत्ति के मुद्दों को हल करने वाले कदमों को मजबूत करने के लिए अग्रणी संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया में है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हान्स) बेंगलुरु, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), दिल्ली, ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, सोनीपत, हरियाणा और एलायंस इंडिया, दिल्ली के साथ साझेदारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

योजना के तहत उपलब्धियां

  • एनआईएसडी ने 24.04.2024 को एनआईएसडी, नई दिल्ली में नोडल अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए हाइब्रिड मोड में भिक्षावृत्ति पर स्माइल उप-योजना के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों को स्थायी आजीविका और सामाजिक एकीकरण की ओर ले जाने के लिए संगठित करना और उन्हें सशक्त बनाना है। इस कार्यक्रम में 65 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
  • एनआईएसडी ने 20.09.2024 को अयोध्या, उत्तर प्रदेश में स्माइल उप-योजना ‘भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास’ के अंतर्गत एक दिवसीय अभिविन्यास-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सभी 53 जिलों/नगर निगमों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग भी कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे।
  • एनआईएसडी ने मितवा संकल्प समिति के सहयोग से छत्तीसगढ़ में टीजी आईडी कार्ड और प्रमाण पत्र नामांकन शिविर का आयोजन किया, जिसमें 100 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों ने नामांकन कराया और 50 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उसी दिन उनके आईडी/प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
  • एनआईएसडी ने एलायंस इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से एनआईएसडी, दिल्ली में राष्ट्रीय स्तरीय  टीओटी सह अनुभव साझाकरण कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें टीजी समुदाय के नेता/गुरु, समाज कल्याण अधिकारी, चिकित्सा व्‍यवसायी, बैंक अधिकारी, सीबीओ/एनजीओ शामिल थे। प्रतिभागियों को टीजी अधिनियम के प्रावधानों और अपने राज्यों में उनका समर्थन करने के तरीके के बारे में जागरूक किया गया। अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
  • एनआईएसडी ने अगस्त 2024 में पुलिस अधिकारियों के साथ टीजी अधिनियम 2019 के प्रावधानों पर टीओटी का आयोजन किया। पुलिस अधिकारियों को डीओएसजेई के सचिव द्वारा संबोधित किया गया और एक अनुकूल समाज के लिए उनकी भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला गया।

7. डॉ. अम्‍बेडकर फाउंडेशन

योजना के तहत उपलब्धि

  • डॉ. अम्‍बेडकर  चिकित्सा सहायता योजना: 90 लाभार्थियों को 215.64 लाख रुपये जारी किए गए।
  • डॉ. अम्‍बेडकर चेयर: 17 लाभार्थियों को 539.90 लाख रुपये जारी किए गए।
  • महान संतों की जयंती मनाना: 23 लाभार्थियों को 9.29 लाख रुपये जारी किए गए।
  • माध्यमिक विद्यालय परीक्षा (10वीं) के एससी और एसटी से संबंधित मेधावी विद्यार्थियों  के लिए डॉ. अम्‍बेडकर राष्ट्रीय योग्यता पुरस्कार योजना: 23 लाभार्थियों को 7.30 लाख रुपये जारी किए गए।
  • माध्यमिक विद्यालय परीक्षा (12वीं) के एससी और एसटी से संबंधित मेधावी विद्यार्थियों  के लिए डॉ. अम्‍बेडकर  राष्ट्रीय योग्यता पुरस्कार योजना: 19 लाभार्थियों को 7.20 लाख रुपये जारी किए गए।
  • अंतर-जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण के लिए डॉ. अम्‍बेडकर  योजना*: 10 लाभार्थियों को 25 लाख रुपये जारी किए गए।
  • अत्याचार की शिकार अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए डॉ. अम्‍बेडकर  राष्ट्रीय राहत: 2 लाभार्थियों को 4 लाख रुपये जारी किए गए।

 (* अप्रैल, 2023 तक निपटाए गए मामले, उसके बाद योजना का मंत्रालय में विलय कर दिया गया है)

 

डॉ. अम्‍बेडकर  अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) और डॉ. अम्‍बेडकर राष्ट्रीय स्मारक (डीएएनएम)

  • 15, जनपथ, नई दिल्ली स्थित डॉ. अम्‍बेडकर  अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) को सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन और बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में अध्ययन, अनुसंधान, विश्लेषण और नीतिगत सारांशों के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है।
  • 26 अलीपुर रोड, दिल्ली स्थित डॉ. अम्‍बेडकर  राष्ट्रीय स्मारक (डीएएनएम) बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अम्‍बेडकर से संबंधित महत्वपूर्ण स्थान है। यह स्मारक ‘पंच तीर्थ’ में से एक है, जिसे भारत के प्रधानमंत्री ने ‘महापरिनिर्वाण भूमि’ नाम दिया है। डीएएनएम डॉ. बी. आर. अम्‍बेडकर  से जुड़ी जानकारी और कलाकृतियों का भंडार है। देश भर से व्यक्ति और समूह हर साल 14 अप्रैल को उनकी जयंती और 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बाबासाहेब अम्‍बेडकर  को श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक पर आते हैं।

विशेष व्याख्यान/राष्ट्रीय संगोष्ठी/गतिविधियां/डीएआईसी की उपलब्धियां:

(i) विशेष व्याख्यान:

  • 16.02.2024 को  'डॉ. बी आर अम्बेडकर और साम्यवाद' ।
  • सीआईपीओडी, जेएनयू में 27.03.2024 को 'भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में' ।
  • 05.04.2024 को 'डॉ. अम्बेडकर के विचारों और दर्शन की ज्ञानमीमांसा की ओर'।
  • 23.04.2024 को 'भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा के आयाम @2024'।
  • 03.05.2024 को ‘भारत का महावृतांत और विकास के संदर्भ’ ।
  • 23.08.2024 को 'लीडरशिप 4.0'
  • 06.09.2024 को 'भारत में शहरीकरण: भविष्‍य की चुनौतियां'।
  • 04.10.2024 को 'समावेशी और न्यायसंगत समाज के लिए राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का दृष्टिकोण'।

 (ii) राष्ट्रीय संगोष्ठियां

  • 30.05.2023 को वर्तमान संदर्भ में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पत्रकारिता’
  • 26.07.2024 को ‘भारत की प्राकृतिक सीमा का विचार और डॉ. बी. आर. अम्‍बेडकर ’ पर 25वें कारगिल विजय दिवस का जश्न।
  • भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 25 से 29 नवंबर, 2024 को ‘भारतीय संविधान के विचारों, मुद्दों, संस्थाओं और प्रभावों की यात्रा’ पर पांच दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी।

 (iii) गतिविधियां/उपलब्धियां:

  • जनपथ और विधानसभा मेट्रो स्टेशनों पर डीएआईसी और डीएएनएम के साइनेज बोर्ड की स्थापना।
  • दिल्ली पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से डीएएनएम की दृश्यता।
  • डीएमआरसी के माध्यम से डीएएनएम की दृश्यता, 1 से 14 अप्रैल, 2024 तक मेट्रो और विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर डीएएनएम का वीडियो प्रदर्शित किया।
  • 14.04.2024 को डीएआईसी और डीएएनएम में डॉ. बी.आर. अम्‍बेडकर  की 134वीं जयंती का जश्न ।
  • मई, जून और जुलाई, 2024 के महीने में अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम के तीन बैच।
  • डीएआईसी और डीएएनएम में स्वतंत्रता दिवस, 2024 का जश्न।
  • डीएआईसी और डीएएनएम में 12.08.2024 को ड्रग्स के खिलाफ शपथ।
  • भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) से लोक प्रशासन में उन्नत व्यावसायिक कार्यक्रम (एपीपीपीए) की टीम का डॉ. अम्‍बेडकर  राष्ट्रीय स्मारक पर 15.10.2024 को दौरा।
  • 21.06.2024 को डीएआईसी में 10वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया ।
  • 12.07.2024 को डीडी मॉर्निंग शो में डीएएनएम की यात्रा।
  • डीएआईसी में 01.10.2024 को ‘स्वच्छता ही सेवा-2024’ कार्यक्रम में डीएआईसी/ डीएएनएम को प्रथम पुरस्कार मिला।
  • 19.10.2024 को ‘राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह के शुभारंभ’ के लिए भारत के प्रधानमंत्री का डीएआईसी दौरा।
  • 21.11.2024 को डीएआईसी में ऑस्ट्रियाई व्यापार प्रतिनिधिमंडल का दौरा।
  • 26.11.2024 को डीएआईसी और डीएएनएम में 75वें संविधान दिवस का उत्सव और शपथ समारोह।
  • भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने पर स्थिरता और भारत की भावना का उत्सव - 'हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान' - एसटीईएम में अनुसंधान और नवाचार की पहल के साथ, 1-2 दिसंबर 2024 को डीएआईसी में राष्ट्रीय मेला 2024-2025 का आयोजन किया गया।
  • 06.12.2024 को डीएआईसी और डीएएनएम में बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का 69वां महापरिनिर्वाण दिवस।

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एमजी/केसी/आरके


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