सूचना और प्रसारण मंत्रालय
क्यूब सिनेमा टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक सेंथिल कुमार ने कहा कि "लोगों तक सिनेमा की पहुंच बढ़ाना विशेषता नहीं, सामाजिक अनिवार्यता है"
सिनेमा थिएटरों में फीचर फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन में सुगम्यता मानकों के दिशानिर्देश कार्यान्वयन पर सेंथिल कुमार ने कहा, “कानून स्पष्ट है, समयसीमा उचित है और शुल्क भी बहुत अधिक नहीं है”
आईएफएफआई 2024 के दौरान थिएटरों में फीचर फिल्मों के प्रदर्शनः सुगम्यता के मुद्दे पर मास्टरक्लास आयोजित
दिव्यांगजनों को फिल्म देखना सुगम बनाने के लिए सरकार ने सिनेमा थिएटरों में फ़ीचर फ़िल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए सुगम्यता मानक दिशा-निर्देश अधिसूचित किए हैं। ये दिशा-निर्देश स्पष्ट और व्यापक हैं। क्यूब सिनेमा टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक सेंथिल कुमार ने सिनेमा थिएटरों में फ़ीचर फ़िल्मों के प्रदर्शन: सुगम्यता के सवाल पर आयोजित मास्टरक्लास के दौरान कहा कि इसके लिए दी गई समयसीमा उचित है और इससे जुड़ा शुल्क भी अधिक नहीं है। आईएफएफआई 2024 के दौरान गोवा के कला अकादमी में आयोजित सत्र में उन्होंने यह बात कही।
श्री कुमार एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की प्रोडक्शन एंड टेक्नोलॉजी विभाग के सदस्य भी हैं।

श्री कुमार ने दिव्यांग दर्शकों के लिए क्लोज्ड कैप्शन प्रदान करने के तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं की चर्चा की। उन्होंने ऑडियो संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इसका अत्यधिक प्रभाव दर्शकों को विचलित कर सकता है, जबकि अपर्याप्त विवरण ऑन-स्क्रीन एक्शन को प्रभावी ढंग से व्यक्त नहीं कर पाता। आमतौर पर, दिव्यांगजों को एक फिल्म का लगभग 15 प्रतिशत श्रव्य माध्यम से समझाया जाता है।
उन्होंने क्लोज्ड कैप्शनिंग डिवाइस और ऑडियो सेवाओं सहित विभिन्न सुविधाओं का उल्लेख किया जिसे सबके लिए सिनेमा अनुभव बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

दिव्यांगजनों के लिए अवसर और सुगमता बढ़ाने, देश के प्रत्येक व्यक्ति को सशक्त बनाकर समावेशी समाज का निर्माण, समानता और सहयोग की भावना के साथ समाज में सद्भाव बढ़ाने और सबके साथ मिलकर प्रगति करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, मार्च 2024 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने श्रवण और दृश्य बाधित व्यक्तियों के लिए सिनेमा थिएटरों में फीचर फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन में सुगमता मानक दिशानिर्देश जारी किए हैं।
श्री कुमार ने सरकार द्वारा आरम्भ की गई सुगम्यता सुविधा संबंधी दिशा-निर्देशों को विस्तार से बताते हुए कहा कि सुलभता विशेषता नहीं, सामाजिक अनिवार्यता है।
सिनेमा थियेटरों में फीचर फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन में सुगम्यता मानकों के दिशा-निर्देश की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- श्रवण एवं दृश्य बाधित व्यक्तियों को फिल्मों की पहुंच सुनिश्चित कराना।
- एक से अधिक भाषाओं में प्रमाणित होने वाली सभी फीचर फिल्मों को 6 महीने के भीतर दिशानिर्देशों का पालन करना होगा और अन्य सभी को 2 वर्षों के भीतर इनका अनुपालन करना होगा।
- श्रवण बाधित और दृष्टि बाधित व्यक्तियों के लिए कम से कम एक सुलभता सुविधा जैसे क्लोज्ड कैप्शनिंग और ऑडियो विवरण अनिवार्य होगा।
- लाइसेंसधारी सिनेमा थियेटरों को नियमित शो में अनुकूलित उपकरणों या मोबाइल एप्स अथवा अन्य उपलब्ध प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल वाली सुलभ सुविधाओं का उपयोग करना होगा।
- यह वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए सिनेमा हॉल/मूवी थिएटरों में फीचर फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर लागू होगा।
- सुगम्यता मानकों को न केवल फिल्म सामग्री, बल्कि सहायक उपकरणों और थिएटर अवसंरचना के लिए भी निर्धारित किये गये हैं, जिससे सिनेमाघरों में सर्वोत्तम वैश्विक सुविधाओं को शामिल करते हुए श्रवण और दृश्य बाधित व्यक्तियों के लिए आवश्यक सुगम्यता उपलब्ध कराई जाए।
अनिवार्य सुगम्यता सुविधाएं:
- श्रवण बाधित और दृष्टि बाधित व्यक्तियों के लिए कम से कम एक सुगम्यता सुविधा, ऑडियो विवरण और क्लोज्ड कैप्शन आवश्यक है।
- ऑडियो विवरण दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए फिल्म में दृश्यों का श्रवण वर्णन करता है। संवादों के अंतराल के दौरान, यह दृश्य तत्वों जैसे दृश्यों, सेटिंग्स, क्रियाओं और वेशभूषा भी बताता है।
- क्लोज्ड कैप्शनिंग में किसी फिल्म के ऑडियो संवाद और ध्वनि चित्रण दोनों को ऑन-स्क्रीन टेक्स्ट द्वारा दृश्यमान बनाया जाता है, जिसे ऑडियो सामग्री के साथ समन्वयित किया जाता है।
- अतिरिक्त सुविधाएं:
- दुभाषियों द्वारा भारतीय सांकेतिक भाषाओं को पिक्चर-इन-पिक्चर मोड में प्रदान की जानी चाहिए। यह सटीक और समन्वित होनी चाहिए जिससे श्रवण बाधितों को स्पष्ट तौर पर समझ आये।
- फिल्म प्रमाणन के लिए फिल्म निर्माता को फिल्म की सुलभता सुविधाओं की फाइल भी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को सौंपना आवश्यक है।
- कार्यान्वयन अनुसूची –
- एक से अधिक भाषाओं में प्रमाणित होने वाली सभी फीचर फिल्मों को 6 महीने के भीतर दिशानिर्देशों का पालन करना होगा तथा अन्य सभी को 2 वर्षों के भीतर इनका पालन करना होगा।
- 1 जनवरी, 2025 से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों के लिए प्रस्तुत फिल्मों को भी इनका अनुपालन करना होगा।
- सिनेमा थिएटर द्वारा सुलभ सुविधाओं को निम्नलिखित में से किसी भी माध्यम से उपलब्ध कराया जा सकता है:
- सिनेमाघरों में (नियमित शो के दौरान) मिरर कैप्शन, क्लोज्ड कैप्शनिंग स्मार्ट ग्लास, क्लोज्ड कैप्शन स्टैंड, स्क्रीन के नीचे क्लोज्ड कैप्शन डिस्प्ले या ऑडियो विवरण के लिए हेडफ़ोन/इयरफ़ोन, आदि उपकरणों का उपयोग करना।
- नियमित शो के दौरान मोबाइल ऐप्स का उपयोगः फिल्म निर्माताओं को फीचर फिल्म के लिए सीसी/ओसी और एडी को किसी भी उपयुक्त सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के साथ जोड़ना होगा, ताकि सिनेमाघरों में फिल्म की सामान्य स्क्रीनिंग सुविधा दिव्यांगजनों तक पहुंचाई जा सके और उपयोगकर्ता व्यक्तिगत डिवाइस के माध्यम से इसका उपयोग कर सकें।
- इसके अतिरिक्त अन्य प्रौद्योगिकियों का उपयोग: सहायक/सहायक उपकरणों और सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के रूप में किसी अन्य तकनीकी इनपुट का उपयोग भी किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण लिंक
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एमजी/केसी/एकेवी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2077963)
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