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‘आईएफएफआई युवा और महत्वाकांक्षी फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मक सोच और मूल्यों को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन देता है: संतोष सिवान


पुरस्कार फिल्म निर्माता को मजबूत देते हैं: संतोष सिवान

युवा फिल्म निर्माताओं को पुराने निर्माताओं की सच्चाई और अतीत पर सवाल उठाने के साथ शुरुआत करनी चाहिए: शेखर दास, जूरी सदस्य

भारतीय फीचर फिल्म के सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक जूरी ने 55वें आईएफएफआई में मीडिया के साथ बातचीत की

देश में नई और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के 55वें संस्करण में एक नई पुरस्कार श्रेणी: ‘भारतीय फीचर फिल्म के सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक’ की शुरुआत की गई है, जिसमें पांच उल्लेखनीय पहली फिल्में दिखाई जाएंगी जो पूरे भारत से नए दृष्टिकोण, विविध कथाओं और अभिनव सिनेमाई शैलियों को उजागर करेंगी।

आज, इस श्रेणी में पांच प्रविष्टियों में से सर्वश्रेष्ठ फिल्म का चयन करने का काम करने वाली जूरी ने गोवा के पणजी में आईएफएफआई मीडिया सेंटर में मीडिया से बातचीत की। बातचीत के दौरान, जूरी सदस्यों ने उम्मीद और विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र में रचनात्मक प्रतिभा और महत्वाकांक्षी युवाओं की भरमार के साथ भारतीय सिनेमा सुरक्षित है और फिल्म निर्माण के सभी पहलुओं में तेजी से सुधार कर रहा है। उन्होंने पुरस्कार के मानदंडों और चयन प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी।

जूरी के चेयरमैन श्री संतोष सिवान, जो 12 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित प्रसिद्ध छायाकार हैं, ने अपने शुरुआती भाषण में बताया कि जूरी ने छात्र फिल्मों, विशेष रूप से फिल्म संस्थान के छात्रों द्वारा बनाई गई फिल्मों को शामिल करने के लिए श्रेणी का विस्तार करने की सिफारिश की थी। उन्होंने भारतीय सिनेमा के भविष्य को आकार देने के लिए ऐसी पहल के महत्वपूर्ण होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे उद्योग के "कल" ​​को बढ़ावा देने में इनकी अहमियत पता चलती है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरस्कार और पहचान से महत्वाकांक्षी फिल्म निर्माता और सशक्त होंगे एवं उन्हें नए विचारों के साथ आने और अपनी कला को बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

जूरी सदस्य श्री शेखर दास ने बताया कि डिजिटल युग ने पहली बार फिल्म बनाने वालों के लिए अपनी पहल को अब बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने रखना थोड़ा आसान बना दिया है। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल युग में उपलब्ध अवसरों के बावजूद, आईएफएफआई की यह पहल महत्वाकांक्षी प्रतिभाओं का मनोबल बढ़ाएगी और उन्हें बहुत प्रेरित करेगी। श्री दास ने यह भी याद करते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय पर आधारित अपनी पहली फिल्म में उन्होंने सत्यजीत रे की आखिरी फिल्म ‘आगंतुक’ के चित्रण से जुड़े कुछ सवाल उठाने का साहस किया, जिसमें नायक आदिवासी जीवन की सादगी में वापस जाने की इच्छा रखता है। उन्होंने भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए पुराने निर्देशकों की रचनाओं पर ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न पूछने के महत्व पर जोर दिया।

जूरी के सदस्य श्री सुनील पुराणिक ने कैमरे के साथ अपने पहले प्रयोग के लिए विषय चुनने के मामले में पहली बार फिल्म बनाने वालों की क्षमता और परिपक्वता की दिल से सराहना की। उन्होंने डेब्यू डायरेक्टर अवार्ड की शुरुआत करके रचनात्मक प्रयासों में से सर्वश्रेष्ठ की पहचान करने के लिए इस तरह के नए और कुशल तंत्र को स्थापित करने के लिए एनएफडीसी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भी बधाई दी।

श्री एम. वी. रघु के लिए सिनेमा का मतलब जादू है। उन्होंने प्रकाश, कैमरा और एक्शन के माध्यम से फिल्म बनाने की कला को समझने पर जोर दिया। उन्होंने शानदार नई प्रतिभाओं को तैयार करने के लिए गुणवत्तापूर्ण फिल्म शिक्षा की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया।

पहली बार जूरी के सदस्य बने श्री विनीत कनौजिया ने बताया कि फिल्म निर्माताओं के बीच से जूरी में शामिल होना कितना कठिन काम था।

जूरी के सभी सदस्यों ने बहुत पहले डेब्यू डायरेक्टर बनने के अपने अनुभव साझा किए और कहा कि आज युवाओं के पास अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए कई मंच हैं। श्री सिवान ने कहा कि अगर कोई मंच नहीं है, तो वे खुद ही कोई मंच बना लेंगे। वे दिन गए जब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में शुरुआत करने के लिए औपचारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता होती थी। आजकल, युवा बहुत कम उम्र में ही कैमरों की दुनिया से परिचित हो जाते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस का संचालन राजिथ चंद्रन ने किया।

डेब्यू डायरेक्टर जूरी में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं:

1. श्री संतोष सिवान (चेयरपर्सन), सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक

2. श्री सुनील पुराणिक, अभिनेता, निर्देशक और निर्माता

3. श्री शेखर दास, फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक

4. श्री एम. वी. रघु, सिनेमैटोग्राफर और निर्देशक

5. श्री विनीत कनौजिया, फिल्म निर्माता, लेखक और संपादक

इस पुरस्कार का उद्देश्य पहली बार निर्देशन करने वाले निर्देशकों की रचनात्मकता और क्षमता का सम्मान करना है, तथा भारतीय सिनेमा के विकास में उनके योगदान को मान्यता देना है। इन नए लोगों को सुर्खियों में लाकर, यह सिनेमाई कहानीकारों की अगली पीढ़ी को प्रोत्साहित करने के लिए आईएफएफआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उल्लेखनीय है कि पुरस्कार विजेता फिल्म के निर्देशक को उनकी रचनात्मक दृष्टि, कलात्मक कहानी कहने की योग्यता और समग्र प्रभाव के लिए 5 लाख रुपये का प्रमाण पत्र और नकद पुरस्कार दिया जाएगा।

यहां बातचीत देखें:

जूरी के बारे में अधिक जानने के लिए: https://iffigoa.org/debut-director-jury

डेब्यू डायरेक्टर फिल्म्स के बारे में अधिक जानने के लिए: https://iffigoa.org/debut-director-films/2024/debut-director-films

डेब्यू डायरेक्टर प्रीव्यू कमेटी के बारे में अधिक जानने के लिए:  https://iffigoa.org/debut-directors-previw-commitee-2024

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एमजी/केसी/एमपी

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