विद्युत मंत्रालय

देश में गर्मी के मौसम में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं


ऊर्जा विनिमय के अंतर्गत बिक्री के लिए अधिशेष बिजली की पेशकश की जाएगी; विद्युत संयंत्रों का नियोजित रखरखाव मानसून के मौसम के लिए आगे बढ़ाया जाएगा

Posted On: 02 APR 2024 7:43PM by PIB Delhi

सरकार आगामी गर्मी के मौसम में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के. सिंह ने इसे सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं, जिसमें गर्मी के मौसम के दौरान शून्य लोड शेडिंग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

इस वर्ष मार्च के तीसरे सप्ताह में मंत्रालय में हुई एक बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि सभी हितधारकों द्वारा पर्याप्त अग्रिम योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति को रोका जा सके जिसमें एक राज्य के पास अधिशेष बिजली हो जबकि दूसरे राज्य को बिजली की कमी का सामना करना पड़े।

ताप विद्युत संयंत्रों की आंशिक कटौती कम की जा रही है

आज, 2 अप्रैल, 2024 को एक और बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के सिंह ने बार-बार तापीय क्षमता की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आंशिक कटौती का सामना करने वाले सभी ताप विद्युत संयंत्रों की बिजली क्षमता की स्थिति की समीक्षा की। यह बताया गया कि आंशिक कटौती के तहत क्षमता की मात्रा में कमी आई है और उन्हें और कम करने के लिए उपाय सुझाए गए हैं।

गैर परिचालन या काम में नहीं कर रहे तापीय विद्युत क्षमता की समीक्षा

केंद्रीय मंत्री महोदय ने आज उत्पादन कंपनियों के साथ भी बैठक की और 5.2 गीगावॉट गैर-परिचालन तापीय क्षमता की स्थिति की समीक्षा की।

विद्युत संयंत्रों का नियोजित रखरखाव मानसून के मौसम तक स्थानांतरित किया जाएगा

केंद्रीय मंत्री महोदय ने अप्रैल महीने में 1.7 गीगावॉट और जून महीने में 6 गीगावॉट - 9 गीगावॉट विद्युत संयंत्रों के नियोजित रखरखाव के उपक्रम की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय लिया गया है कि तापीय इकाइयों के नियोजित आउटेज को मानसून के मौसम में शेड्यूल/शिफ्ट करने का प्रयास किया जाएगा।

नई क्षमता वृद्धि में तेजी लाई जाएगी

इनके अलावा, कोयला, पनबिजली, परमाणु, सौर और पवन ऊर्जा में क्षमता वृद्धि की निगरानी की जाएगी, ताकि उनकी कमीशनिंग में तेजी लाई जा सके।

कैप्टिव उत्पादन केन्द्रों के साथ अधिशेष बिजली का उपयोग किया जाएगा

कैप्टिव उत्पादन केन्द्रों के पास उपलब्ध किसी भी अतिरिक्त बिजली के उपयोग की संभावना का पता लगाने का भी निर्णय लिया गया है।

अतिरिक्त बिजली को ऊर्जा विनिमय में बिक्री के लिए पेश किया जाएगा

यह भी बताया गया कि सभी तापीय उत्पादन केन्द्रों को हाल ही में अधिसूचित नियमों के अनुसार, बिजली विनिमय में अपनी गैर-माँगी गई / अधिशेष बिजली की पेशकश करनी होगी। निर्देश दिया गया है कि अनुपालन की नियमित रूप से निगरानी की जाए और निर्देशों का उल्लंघन करने पर नोटिस जारी किया जाए।

सभी कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों के लिए यूनिट क्षमता का 55 प्रतिशत समान तकनीकी न्यूनतम लोडिंग

राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) ने विभिन्न डिस्कॉम द्वारा अव्यवहार्य बिजली शेड्यूलिंग का मुद्दा उठाया। केंद्रीय मंत्री महोदय ने निर्देश दिया कि सभी कोयला आधारित बिजली उत्पादकों के लिए यूनिट क्षमता की 55 प्रतिशत की एक समान तकनीकी न्यूनतम लोडिंग अनिवार्य की जा सकती है, जैसा कि अंतर-राज्यीय उत्पादन केन्द्रों और क्षेत्रीय लोड प्रेषण केंद्रों के लिए लागू किया गया है। इसका उद्देश्य शेड्यूल जारी करते समय तकनीकी न्यूनतम शर्तें सुनिश्चित करना और ग्रिड की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।

गैस आधारित क्षमता के परिचालन की समीक्षा की जाएगी, धारा 11 के निर्देशों की जांच की जाएगी

केंद्रीय विद्युत मंत्री महोदय ने निर्देश दिया है कि गर्मी के मौसम के दौरान गैस आधारित क्षमता के संचालन की समीक्षा के लिए गैस आधारित बिजली परियोजनाओं के सभी डेवलपर्स के साथ भी एक बैठक आयोजित की जाए। मंत्रालय इस बात की जांच करेगा कि क्या बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 11 के तहत निर्देश, जिसके अंतर्गत उपयुक्त सरकार निर्दिष्ट कर सकती है कि एक उत्पादन कंपनी, असाधारण परिस्थितियों में, उस सरकार के निर्देशों के अनुसार किसी भी उत्पादन केंद्र का संचालन और रखरखाव करेगी, की आवश्यकता है। आगामी गर्मी के मौसम के दौरान उनका संचालन सुनिश्चित करने के लिए आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की तरह ही गैस आधारित बिजली संयंत्रों को भी जारी किया गया है।

आयातित-कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों के लिए धारा 11 के निर्देशों को सितंबर 2024 तक बढ़ाया जाएगा

यह भी निर्णय लिया गया है कि, आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों द्वारा प्रदान की जाने वाली ऊर्जा को ध्यान में रखते हुए, धारा 11 के तहत निर्देशों को 30 सितंबर, 2024 तक बढ़ाया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री महोदय की अध्यक्षता में हुई बैठकों में केंद्रीय विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल; सीईए, राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (एनटीपीसी) , ग्रिड इंडिया, जेनकोस, पीएफसी और एनवीवीएन के वरिष्ठ अधिकारी विचार-विमर्श का हिस्सा बने।

पृष्ठभूमि

आगामी गर्मी के मौसम के लिए, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ अलग-अलग इलाकों को छोड़कर, देश भर में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक होने का अनुमान लगाया है। इसलिए बिजली की मांग भी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक होगी, जो कि हाल के महीनों में सौर घंटों और गैर-सौर घंटों दोनों के दौरान चरम मांग की बढ़ती प्रवृत्ति में भी परिलक्षित होती है।

अधिकतम ऊर्जा मांग वर्ष 2022-23 में 2,15,888 मेगावाट से 12.7 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 2,43,271 मेगावाट हो गई, जबकि अधिकतम मांग 2022-23 में 2,10,725 मेगावाट से 13.9 प्रतिशत बढ़ कर 2023-24 में 2,39,931 मेगावाट हो गई।

वर्ष 2022-23 के सापेक्ष, 2023-24 में ऊर्जा आवश्यकता 7.5 प्रतिशत बढ़ी और ऊर्जा उपलब्धता 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जिसके परिणामस्वरूप कुल ऊर्जा कमी 2022-23 में 0.5 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 0.2 प्रतिशत हो गई।  

कुल उत्पादित बिजली 2022-23 में 1,621 बिलियन यूनिट से 7.1 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 1,736 बिलियन यूनिट हो गई।

जहां तक अकेले कोयला आधारित बिजली का संबंध है, 2023-24 में उत्पन्न कुल ऊर्जा 2022-23 की तुलना में 10.0 प्रतिशत बढ़ गई। इसमें से, घरेलू कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों से उत्पन्न ऊर्जा में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि आयातित कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों से उत्पन्न ऊर्जा में 104.0प्रतिशत की वृद्धि हुई।

***

एमजी/एआर/एमकेएस/डीए



(Release ID: 2017034) Visitor Counter : 143