पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

श्री भूपेन्‍द्र यादव का कहना है कि भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत, 'हरित विकास' की अवधारणा एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है, जो पुष्टि करता है कि दूरदर्शी दृष्टि से भारतीय नीति निर्माण प्रक्रिया में स्‍थायी विकास को कैसे मुख्य धारा में शामिल किया गया है।


प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना भारतीय लोकाचार में पारंपरिक रूप से शामिल रहा है और यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा दिए गए लाइफ के मंत्र से परिलक्षित होता है: श्री यादव

Posted On: 22 FEB 2023 5:50PM by PIB Delhi

केन्‍द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, श्री भूपेन्‍द्र यादव ने आज नई दिल्ली में आयोजित विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन 2023 के उद्घाटन सत्र में सतत विकास और जलवायु लचीलापन को मुख्यधारा में लाने के लिए दूरदर्शी नेतृत्व पर मुख्य भाषण दिया।

गयाना के उपराष्ट्रपति महामहिम डॉ. भरत जगदेवजलवायु परिवर्तन पर विशेष दूत और सीओपी28 के मनोनीत अध्यक्ष, संयुक्त अरब अमीरात के महामहिम, डॉ. सुल्तान अल जाबेर, , टेरी के अध्यक्ष श्री नितिन देसाई और टेरी की महानिदेशक सुश्री विभा धवन भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर, श्री भूपेन्‍द्र यादव ने कहा कि पिछले साल की विषय वस्‍तु और चर्चा को जारी रखते हुए, शिखर सम्मेलन, इस वर्ष "सामूहिक कार्रवाई के लिए सतत विकास और जलवायु लचीलापन को मुख्यधारा में लाने" पर आधारित है, जो भारत द्वारा जी20 की अध्यक्षता ग्रहण करने के बेहतर समय पर आया है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में, जब दुनिया जलवायु कार्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से संबंधित मुद्दों से निपट रही है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत दुनिया भर के देशों के लिए एक प्रेरणा के रूप में उभर रहा है, विशेष रूप से इस तथ्य पर कि कैसे आर्थिक विकास और पर्यावरण का संरक्षण साथ-साथ हो सकता है।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पारिस्थितिकीय गड़बड़ी को दूर कर पारिस्थितिक सद्भाव में लाने का विजन जमीनी स्तर पर परिलक्षित हो रहा है, जहां प्रोजेक्ट चीता का सफल कार्यान्वयन अनेक उदाहरणों में से एक है। उन्‍होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका से चीतों के दूसरे बैच को 18 फरवरी 2023 को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में सफलतापूर्वक लाया गया है।

अपने संबोधन में, श्री यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और भूमि क्षरण से मुकाबला करना सभी राजनीतिक सीमाओं से परे है और इसलिए यह एक साझा वैश्विक चुनौती है। अनेक मौकों पर घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और कार्यान्वयन के माध्यम से, भारत ने दिखा किया है कि यह कभी भी समस्या का हिस्सा नहीं रहा है लेकिन समाधान का हिस्सा बनने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

इस महीने की शुरुआत में संसद में पेश किए गए केन्‍द्रीय बजट 2023-2024 के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए, श्री यादव ने कहा कि यह कई क्षेत्रों में 'हरित विकास' की परिकल्‍पना करता है, जिसमें अंतर्निहित विचार यह है कि देश में सभी भावी विकास अनिवार्य रूप से हरित होने चाहिए। श्री यादव ने कहा, केन्‍द्रीय बजट में "'हरित विकास' की अवधारणा एक प्राथमिकता वाला क्षेत्र होने के कारण, यह पुष्टि करता है कि कैसे एक दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से सतत विकास को भारतीय नीति निर्माण प्रक्रिया में मुख्य धारा में शामिल किया गया है।"

जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता के बारे में, श्री यादव ने कहा कि भारत ने शर्म अल शेख में सीओपी 27 में अपना दीर्घकालिक कम उत्सर्जन विकास रणनीति दस्तावेज पहले ही प्रस्तुत कर दिया है, जो सीबीडीआर-आरसी के सिद्धांतों के साथ-साथ जलवायु न्याय और टिकाऊ जीवन शैली के दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा 58 देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपना नया या अपडेटेड एलटी-एलईडीएस जमा किया है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर, विशेष रूप से जलवायु लचीलापन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, भारत विशेष रूप से छोटे द्वीप विकासशील राष्ट्रों को मूल्य वर्द्धित अतिरिक्‍त जानकारी प्रदान करके मददगार रहा है, जो विशेष रूप से बढ़ते समुद्र के स्तर के प्रति संवेदनशील हैं। सीडीआरआई या कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और पोषण कर रहा है। भारत ने सीडीआरआई या गठबंधन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण और पोषण किया है। भारत बुनियादी ढांचे में नवाचार और लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न हितधारक संस्थानों और व्यक्तियों को शामिल करने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है।

ऐसी ही एक पहल "डीआरआई कनेक्ट" है जो बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में लगे हितधारकों के लिए एक वेब-आधारित मंच होगा। इस मंच की परिकल्पना लचीली अवसंरचना और आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर क्रिया-आधारित शिक्षा और नवाचार के वातावरण को बढ़ावा देने में नए ज्ञान के निर्माण की दिशा में गठबंधन सदस्यता की सामूहिक बुद्धिमत्ता और चुनौतियों का समाधान करने के लिए कार्रवाई योग्य समाधानों के निर्माण के लिए की गई है।

श्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति में सीओपी 26 में की गई घोषणाओं के आधार पर, आईआरआईएस या सीडीआरआई के एक हिस्से के रूप में लचीले द्वीप राष्‍ट्र बुनियादी ढांचे के एक व्यवस्थित दृष्टिकोण से लेकर लचीले, टिकाऊ, और छोटे द्वीप विकासशील देशों के लिए समावेशी बुनियादी ढांचे के माध्यम से सतत विकास प्राप्त करने में महत्वपूर्ण रहे हैं। श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा शुरू की गई वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट, जिसमें 10 सत्रों में 134 देशों की भागीदारी देखी गई, ने ग्‍लोबल साउथ को विकासशील दुनिया की गंभीर चिंताओं पर चर्चा करने के लिए एक मंच दिया। यह ग्‍लोबल साउथ के लिए प्रमुख आवाज बनकर भारत के नेतृत्व का एक और गवाह बना।

सत्र के उप-विषय पर सभा को संबोधित करते हुए, जो भारत के राष्ट्रीय विकास प्रक्षेपवक्र में सतत विकास को मुख्यधारा में लाने पर केन्‍द्रित है, श्री यादव ने कहा कि भारत द्वारा जी20 की अध्यक्षता संभालने के साथ, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण कार्य दशक में सतत विकास के बारे में चर्चा की ओर दुनिया का ध्‍यान खींचा है।

श्री यादव ने कहा कि प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना भारतीय लोकाचार में पारंपरिक रूप से शामिल रहा है और यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा गढ़े गए लाइफ़ या लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट के मंत्र से परिलक्षित होता है। मंत्र जो एक स्थायी जीवन शैली का नेतृत्व करने के लिए व्यक्तिगत व्यवहार को बढ़ावा देने पर केन्‍द्रित है, ने दुनिया भर के नेताओं और दुनिया भर के प्रमुख विशेषज्ञों से ध्यान और प्रशंसा प्राप्त की है और सीओपी 27 में शर्म अल शेख कार्यान्वयन योजना के कवर निर्णय पाठ में शामिल किया गया है।जीवन शैली को विश्व के नेताओं और प्रमुख विशेषज्ञों से ध्यान और सराहना मिली है। दुनिया भर में और सीओपी 27 में शर्म अल शेख कार्यान्वयन योजना के कवर निर्णय पाठ में शामिल किया गया है। वैश्विक समुदाय को 'वन-वर्ड मास मूवमेंट' - "लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट", जो भारत के अद्यतन एनडीसी में परिलक्षित हुआ है, संरक्षण और संयम की परंपराओं और मूल्यों के आधार पर जीवन जीने के एक स्वस्थ और टिकाऊ तरीके का प्रचार करने में अब महत्वपूर्ण है जो अनिवार्य रूप से टिकाऊ उत्पादन और खपत पर एसडीजी 12 के मूल में है।

सतत विकास को सक्षम करने में महत्वपूर्ण पहलू पर बोलते हुए, श्री यादव ने कहा कि सर्कुलर अर्थव्यवस्था एक नया प्रतिमान प्रदान करती है जो उत्पादों और प्रक्रियाओं के व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देती है। इससे टिकाऊ विकास होता है जो एक आत्मनिर्भर भारत की कुंजी है। श्री यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार सक्रिय रूप से नीतियों को तैयार कर रही है और देश को एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। भारत इस संबंध में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, -कचरा प्रबंधन नियम, निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, धातु पुनर्चक्रण नीति आदि जैसे विभिन्न नियमों को पहले ही अधिसूचित कर चुका है।

बेंगलुरु में 9-11 फरवरी 2023 को आयोजित जी20 की पहली पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह की बैठक के बारे में बोलते हुए, श्री यादव ने कहा कि कार्य समूह की बैठक में उन विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ, जिनके केन्‍द्र में सतत विकास और जलवायु लचीलापन था। तीन दिवसीय चर्चा के दौरान चर्चा के विषय थे:

1. भूमि क्षरण को रोकना, पारिस्थितिक तंत्र की बहाली में तेजी लाना और जैव विविधता को समृद्ध करना

2. सतत और जलवायु अनुकूल नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना

3. संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना

दिए गए विषयों के अलावा, श्री यादव ने कहा कि जी-20 देशों के प्रतिनिधियों ने जलवायु कार्य, विज्ञान और अंतराल में तेजी लाने और पर्यावरण के संरक्षण में मिशन लाइफ की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया।

श्री यादव ने जोर देकर कहा कि दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, भारत जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और प्रदूषण के रूप में ट्रिपल प्लेनेटरी संकट से निपटने में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े कदम उठा रहा है। भारत प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पचहत्तर रामसर वेटलैंड साइट, 33वां एलिफेंट रिजर्व, 53वां टाइगर रिजर्व, बारह ब्लू फ्लैग बीच प्राप्‍त किए, सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को सफलतापूर्वक लागू किया, इसके एनडीसी को अपडेट किया, दो देशों से चीतों को सफलतापूर्वक लाया और शर्म अल शेख में सीओपी27 और मॉन्ट्रियल में सीबीडी सीओपी 15 में मजबूत और साहसिक नेतृत्व का प्रदर्शन किया। ये उदाहरण इस तथ्य की गवाही देते हैं कि भारत के विकास प्रक्षेपवक्र और नीति निर्माण प्रक्रिया ने सतत विकास और जलवायु लचीलेपन को अपने मूल में मुख्यधारा में रखा है।

केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों से विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन जीवन के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से सभी हितधारकों को शामिल करने में सफल रहा है और इसलिए सतत विकास के विषय पर विचार-विमर्श करने में अग्रणी रहा है। श्री यादव ने अपना संबोधन प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को उद्धृत करते हुए समाप्त किया जिन्‍होंने सतत विकास के विचार को बहुत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है:

"गरीबों तक समान ऊर्जा पहुंच हमारी पर्यावरण नीति की आधारशिला रही है, भारतीय हमेशा प्रकृति के साथ सद्भाव में रहे हैं। हमारी संस्कृति, रीति-रिवाज, दैनिक प्रथाएं और कई फसल उत्सव प्रकृति के साथ हमारे मजबूत बंधन को प्रदर्शित करते हैं। रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल, रिकवर, री-डिजाइन और री-मैन्युफैक्चरिंग भारत के सांस्कृतिक लोकाचार का हिस्सा रहा है। भारत जलवायु अनुकूल नीतियों और कार्य प्रणालियों के लिए काम करना जारी रखेगा जैसा कि हमने हमेशा किया है" - श्री नरेन्‍द्र मोदी

इस अवसर पर श्री यादव ने "राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और संचालन के दौरान कार्बनडाइक्‍साइड के उत्सर्जन से बचने के आकलन" पर रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट कार्बनडाइक्‍साइड की सीमा का आकलन करती है जिसे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में प्रति किलोमीटर टाला जा सकता है।

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