सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 5वें पूर्वोत्तर भारत पारंपरिक फैशन सप्ताह (एनईआईएफडब्ल्यू), 2021 का उद्घाटन किया


इस कार्यक्रम का लक्ष्य पूर्वोत्तर भारत की स्वदेशी संस्कृति एवं विभिन्न कलाओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाकर 'मेक इन इंडिया' आंदोलन को समृद्ध बनाना है

प्रविष्टि तिथि: 24 JUL 2021 6:34PM by PIB Delhi

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कुमारी प्रतिमा भौमिक और श्री ए. नारायणस्वामी की मौजूदगी में "5वें पूर्वोत्तर भारत पारंपरिक फैशन सप्ताह (एनईआईएफडब्लू), 2021" का उद्घाटन वर्चुअल माध्यम  से किया। इस उद्घाटन समारोह में सुश्री अंजलि भावरा, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) भी उपस्थित थीं।

इस अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया और पूर्वोत्तर के दिव्यांगजनों के लिए इस रचनात्मक कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) और इसके राष्ट्रीय संस्थान, एनआईईपीवीडी को बधाई दी। उन्होंने इस दिव्यांगजन आंदोलन को वार्षिक आयोजन बनाने का भी आश्वासन दिया, जिसके माध्यम से पूर्वोत्तर सहित पूरे भारत में स्वदेशी और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा दिया जा सके और पूर्वोत्तर के प्रत्येक समुदाय की विरासत को संरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अनेक राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन और संचालन किया जा रहा है और देश के नागरिकों को इससे लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से यह आवश्यक है कि डीईपीडब्ल्यूडी के सभी राष्ट्रीय संस्थान एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करें और वे अपनी सेवाओं का विस्तार करें जिससे कि दिव्यांगजनों को सभी राष्ट्रीय मिशन कार्यक्रमों का पूरा-पूरा लाभ प्राप्त हो सके जैसे कि समग्र शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय बांस मिशन, कौशल विकास आदि।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजन से निश्चित रूप से उद्यमशीलता के अवसरों को प्रोत्साहन मिलता है और दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के नए-नए अवसर उत्पन्न होते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान, विभाग के सभी संस्थानों के साथ-साथ, 08 राष्ट्रीय संस्थान, भारतीय पुनर्वास परिषद, राष्ट्रीय न्यास, राष्ट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम और भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम भी विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। दिव्यांगजनों के प्रति समावेशी दृष्टिकोण को अपनाते हुए, इस आयोजन का लक्ष्य पूर्वोत्तर भारत की स्वदेशी संस्कृति और विभिन्न कलाओं को बढ़ावा देना और साथ ही साथ दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाकर 'मेक इन इंडिया' आंदोलन को समृद्ध बनाना है।

श्री ए. नारायणस्वामी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र अपने बेहतरीन कारीगरों के लिए प्रसिद्ध है और उनके पास कपड़ा, हथकरघा और शिल्प उद्योग के लिए बहुत ही उन्नत और बड़े स्तर पर अनौपचारिक कारीगर उद्यमिता उपलब्ध हैं।

कुमारी प्रतिमा भौमिक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री, भारत सरकार ने कहा कि पूर्वोत्तर की महिलाएं बुनाई, कपड़ा और शिल्प उद्योग में अपने कौशल के लिए विख्यात हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि रेशम पालन, रेशम संग्रह, बुनाई, लकड़ी के शिल्प, बांस के शिल्प, जैविक खेती, ऑर्किड आदि क्षेत्रों में पूर्वोत्तर के स्वदेशी एवं पारंपरिक कौशल के कुछ ऐसे रास्ते हैं जिनको दिव्यांगजनों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए तलाशा जा सकता है।

डीईपीडब्ल्यूडी सचिव ने कहा कि यह दिव्यांगजन आंदोलन 'इंडिया@75 नेशनल सेलिब्रेशन' और पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख कार्यक्रम के एक भाग के रूप में धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि समावेशी भारत के लिए, विशिष्ट रूप से सक्षम लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा।

एनआईईपीवीडी, देहरादून द्वारा एनईआईएफडब्ल्यू, 2021 का आयोजन किया जा रहा है जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर की दिव्यांग आबादी और हितधारकों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए पूर्वोत्तर भारत की कलाओं और कारीगरों को बढ़ावा देना है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर के विभिन्न जनजातियों और विशिष्ट संस्कृति वाले समूहों के दिव्यांगजनों को सशक्त बनाना एवं उनका उत्थान करना और वस्त्र एवं शिल्प उद्योग के प्रति समावेशी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। एनईआईएफडब्ल्यू द्वारा कौशल एवं उद्यमिता निर्माण; कारीगर प्रशिक्षण कार्यशाला; दिव्यांग कारीगरों की प्रदर्शनी; पारंपरिक ड्रेस शो और पारंपरिक सांस्कृतिक महोत्सव पर ध्यान केंद्रित किया है जिससे न केवल दिव्यांगजनों के कौशल और क्षमताओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न होगी बल्कि उनके लिए रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने में भी सहायता प्राप्त होगी। इस ऐतिहासिक आयोजन में पूर्वोत्तर के सभी 08 राज्यों के दिव्यांगजन, दिव्यांगजन के परिवार, गैर-सरकारी संगठन, डीपीओ, मूल संगठन, विशिष्ट स्कूल, विशिष्ट व्यावसायिक केंद्र और सहकारी समितियां आदि भाग ले रहे हैं, जिससे पूरे देश के दिव्यांगजनों के कौशल, रोजगार और उद्यमिता की अवधारणा को नया स्वरूप प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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