स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय

डॉ. हर्ष वर्धन ने 6 राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 के खिलाफ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया और टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा की

राज्यों ने चिकित्सा कार्यबल में महामारी से जुड़ी थकान और प्रशासनिक मशीनरी पर बने दबाव को खत्म करने के लिए दीर्घकालिक योजना में निवेश की सलाह दी

“विभिन्न वैरिएंट से इतर रणनीति एक समान बनी रहेगी”

टीकाकरण रणनीति को आकार देने से जुड़े गंभीर मुद्दों के बारे में राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों को अवगत कराया गया

“राज्य नेतृत्व की तरफ से ज्यादा वैक्सीन की मांग से जनता में संकीर्ण राजनीतिक जुनून पैदा होता है, जिससे महामारी से पार पाने के “समग्र सरकार” के दृष्टिकोण को नुकसान पहुंचता है”

Posted On: 13 MAY 2021 7:37PM by PIB Delhi

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे की उपस्थिति में 6 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रमुख सचिवों/अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ संवाद किया। इन राज्यों/ केन्द्र शासित प्रदेशों में दैनिक मामलों और मृत्यु दर में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में हालात में सुधार हो रहा है।

 

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स्वास्थ्य मंत्री (महाराष्ट्र) श्री राजेश टोपे, स्वास्थ्य मंत्री (कर्नाटक) डॉ. के सुधाकर, स्वास्थ्य मंत्री (केरल) सुश्री के के शैलजा, स्वास्थ्य मंत्री (तमिलनाडु) श्री एम सुब्रमण्यन, स्वास्थ्य मंत्री (राजस्थान) श्री रघु शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री (दिल्ली) श्री सत्येंद्र जैन ने इस बैठक में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

एनसीडीसी निदेशक डॉ. सुजीत के. सिंह ने महामारी विज्ञान के निष्कर्ष और राज्यों में कोविड में बढ़ोतरी का सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कम आयु वाले समूहों में कोविड-19 के प्रसार में बढ़ोतरी की मुख्य वजह यह है कि ज्यादा आयु वाले समूहों का टीकाकरण अनुपातिक रूप से खासा ज्यादा हो गया है। उन्होंने अर्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों में संक्रमण बढ़ने के साथ अर्ध शहरी इलाकों में परीक्षण और टीकाकरण बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में संक्रमण के प्रसार के खिलाफ आगाह किया, क्योंकि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना मामलों में बढ़ोतरी की देखरेख के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राज्यों से नमूनों को जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजने का अनुरोध किया, जिससे गंभीरता और संचरण में विभिन्न वैरिएंट की भूमिका पता लगाई जा सकेगी।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में कोविड की बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने महामारी के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकारों द्वारा दिखाए गए समर्पण व दृढ़ता और इस क्रम में लोगों को वारियर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, भले ही पिछले 24 घंटों में 3.62 लाख नए मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन सक्रिय मामलों की संख्या में 6,426 मामलों की गिरावट दर्ज की गई है। इस समय देश में 37,10,525 सक्रिय मामले हैं। दुर्भाग्य से पिछले 24 घंटों के दौरान इससे 4,120 लोगों की जान चली गई है।

राज्यों के प्रदर्शन पर विस्तार से बात करते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र जनवरी 2021 से लगातार कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है, हालांकि मुंबई और पुणे में मामलों में खासी गिरावट आई है। जनवरी की शुरुआत में विदर्भ क्षेत्र के कुछ जिलों में हालात चिंताजनक थे। हालांकि, अब कोल्हापुर, सतारा और बीड़ सहित 30 जिले खासे प्रभावित हैं, जहां संचरण की दर खासी ऊंची बनी हुई है। इसी प्रकार, राजस्थान में अजमेर, जोधपुर और भीलवाड़ा, केरल में एर्नाकुलम, थ्रिस्सूर, मल्लापुरम, तिरुवनंतपुरम, कर्नाटक में बंगलुरू (शहरी), मैसूर, बेल्लारी, तुमकुर, तमिलनाडु में चेन्नई, कोयंबटूर, चेंगलपट्टू, मदुरई जिलों में हालात चिंताजनक हैं। कर्नाटक के कुल सक्रिय मामलों में लगभग आधी हिस्सेदारी बंगलुरू की है, मदुरई की 1.48 प्रतिशत और चेन्नई की 1.32 प्रतिशत की मृत्यु दर राज्य और देश की तुलना में ज्यादा है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बी.1.617 वैरिएंट ने महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली में मामलों में बढ़ोतरी में खासा योगदान किया है और सभी राज्यों को नियमित रूप से कोविड के उभरते वैरिएंट पर नजर रखने के लिए नमूनों को आईएनएसएसीओजी प्रयोगशालाओं को भेजने की सलाह दी जा रही है। केन्द्रीय मंत्री ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए कदम उठाने की सलाह देते हुए कहा, वैरिएंट से इतर रणनीति समान ही रहती है। उन्होंने वर्तमान बढ़ोतरी के समाधान के लिए रोकथाम के उपायों पर ज्यादा ध्यान देने के साथ कोविड उपयुक्त व्यवहार के पालन पर भी जोर दिया।

डॉ. हर्ष वर्धन ने राज्यों को कोविड-19 से पार पाने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की सलाह दी है। कई राज्य इस महामारी से एक साल से ज्यादा वक्त से जूझ रहे हैं, जिससे चिकित्सा कार्यबल और सार्वजनिक स्वास्थ्य मशीनरी धीरे-धीरे सुस्त होती जा रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों को कार्यबल के नियमित आवर्तन और काम के संबंध में उनकी नियमित काउंसलिंग सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों की उनके राज्यों के लिए टीकों का कोटा बढ़ाने की सामान्य मांग पर डॉ. हर्ष वर्धन ने धैर्यपूर्वक उन तथ्यों के बारे में बताया, जिनके आधार पर टीकाकरण नीति तैयार की गई है। उन्होंने कहा, 88 प्रतिशत मौत 45 से ज्यादा के आयु वर्ग में हुई हैं, जिसके चलते हमने धीरे-धीरे इस समूह को टीकाकरण के लिए खोला है। हालांकि, राज्य अपनी स्थिति को देखते हुए सीधी खरीद के माध्यम से अन्य आयु वर्गों के टीकाकरण को अपना सकते हैं। जब 70 प्रतिशत वैक्सीन के आरक्षण के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं, दूसरी खुराक की उपलब्धता की कमी को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने वैक्सीन की मासिक उत्पादन क्षमता के बारे में भी बताया और राज्यों को फिर से भरोसा दिलाया कि राज्यों के बीच वैक्सीन का समान रूप से वितरण किया जाएगा। उत्पादन क्षमता धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है और यह मई 2021 तक 8 करोड़ खुराक व जून, 2021 तक 9 करोड़ तक पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य नेतृत्व की तरफ से ज्यादा वैक्सीनों की मांग के चलते जनता में संकीर्ण राजनीतिक जुनून की स्थिति पैदा होती है, जिससे महामारी से पार पाने के लिए जरूरी समग्र सरकार के दृष्टिकोण को नुकसान पहुंचता है। राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने विदेशी विनिर्माताओं से वैक्सीन खरीदने के लिए एक समान नीति बनाने का अनुरोध किया है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने विस्तार से बताया कि उदार मूल्य निर्धारण और त्वरित राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण रणनीति के तहत, भारत सरकार के चैनल के तहत मुफ्त टीकाकरण के साथ राज्य अपनी जनसंख्या के समग्र टीकाकरण कवरेज के लिए गैर-भारत सरकार चैनल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हर महीने प्रत्येक विनिर्माता की 50 प्रतिशत वैक्सीन खुराक राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों द्वारा सीधी खरीद के लिए उपलब्ध होंगी, वहीं भारत सरकार अपने हिस्से की 50 प्रतिशत वैक्सीन खरीदना जारी रखेगी और मुफ्त में राज्य सरकारों को उपलब्ध कराती रहेगी, जैसा कि वह पहले से कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं। कोविड-19 के लिए वैक्सीन विकसित की गई है और विदेश में इसका विनिर्माण किया जा रहा है। यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, पीएमडीए जापान या डब्ल्यू में सूचीबद्ध (आपात इस्तेमाल के लिए सूचीबद्धता) द्वारा सीमित इस्तेमाल के लिए दी गई आपात मंजूरी को भारत में आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जा सकती है।

 

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एएसएंडएमडी (एनएचएम) सुश्री वंदना गुरनानी ने कहा कि चरण-3 की नई टीकाकरण रणनीति समय के साथ स्थायी हो रही है और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन सुगम हो रहा है। उन्होंने वैक्सीन उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा हाल में किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि सक्षम नियामकीय प्रावधानों के माध्यम से मौजूदा वैक्सीनों की खुराक की उपलब्धता, देश में दूसरी वैक्सीनों की उपलब्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है।

इस बैठक में संबंधित राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य), अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) और राज्य निगरानी अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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