विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण कार्बन कैप्चर और रूपांतरणका उपाय प्रदान करेगा

Posted On: 18 MAR 2021 9:58AM by PIB Delhi

वैज्ञानिकों नेवातावरण में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा कम करने की प्रकृति की अपनी प्रक्रिया,यानि प्रकाश संश्लेषण, का नकल करने के लिए एक विधि का पता लगाया है। यह कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण (एपी) सौर ऊर्जा का उपयोग करके नियंत्रण में लिए गए कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) में परिवर्तित करता है, जिसे आंतरिक दहन इंजन के ईंधन के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।

इस कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण (एपी) में, वैज्ञानिकसरल नैनो संरचनाओं के साथ अनिवार्य रूप से प्राकृतिक प्रकाश संश्लेषण में होने वाली मौलिक प्रक्रिया काही पालन कर रहे हैं। हालांकि, एपी को अंजाम देने के उद्देश्य से एक सफल उत्प्रेरक के रूप में कार्य करने के लिए ढेर सारी बाधाओं से जुझनाहोता है।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) केएक स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च के वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक फोटोसेंसिटाइज़र (वैसे अणु, जो प्रकाश को अवशोषित करते हैं और आने वाली प्रकाश सेइलेक्ट्रॉन कोनिकट के अन्य अणु में स्थानांतरित करते हैं) से लैस एक धातु-कार्बनिक ढांचे (एमओएफ -808) पर आधारित एक एकीकृत उत्प्रेरक प्रणाली को डिजाइन और निर्मित किया है, जो सौर ऊर्जा और एक उत्प्रेरक केंद्र को प्रोत्साहित करसकते हैं जिससे अंततःकार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को कम किया जा सकताहै। रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, यूके के 'एनर्जी एंड एनवायरनमेंटल साइंस' जर्नल में प्रकाशन के लिए ऊपर वर्णित शोध को स्वीकार कर लिया गया है।

वैज्ञानिकों ने एक फोटोसेंसिटाइज़र, जोकि एक रासायनिक है और जिसे रुथेनियम बाईपायरिडिल कॉम्प्लेक्स ([Ru(bpy)2Cl2]) कहा जाता हैऔर एक उत्प्रेरक भाग,जिसे रेनियम कार्बोनिल कॉम्प्लेक्स ([Re(CO)2Cl]) कहा जाता है और जो कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण के लिएनैनो-स्पेस के धातु-कार्बनिक फ्रेमवर्क के अंदर होता है,को स्थिर किया है। ये दोनों आण्विक निकाय एक छिद्रयुक्त धातु-कार्बनिक फ्रेमवर्क प्रणाली के सीमित नैनो-स्पेसमें एक दूसरे के आसपास रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कमरे के तापमान पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्कृष्ट उद्ग्रहण की क्षमता होती है। यह सिंथेटिक रणनीति कुशल सौर प्रकाश चालित फोटोकैटलिसिस को सशक्त बनाती है।

इस विकसित उत्प्रेरक ने 99% से अधिक चयनात्मकता के साथ दृश्य-प्रकाश-चालित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) में कमी को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) मेंपरिवर्तित करने का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। यह उत्प्रेरक ऑक्सीजन (O2) का उत्पादन करने के लिए पानी का ऑक्सीकरण भी करता है। फोटोकैटलिटिक असेंबली ने, जब बिना किसी एडिटिव्स के पानी के एक माध्यम के भीतर सूर्य के सीधे प्रकाश मेंCO2की कमी का मूल्यांकन किया गया, कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के उत्पादन का बेहतर प्रदर्शन दिखाया। विषम होने के नाते, इस एकीकृत उत्प्रेरक असेंबलीको,उसकी सक्रियता को खोये बिना, कई उत्प्रेरक चक्रों में पुन: उपयोग किया जा सकता है।

जेएनसीएएसआर टीम का मानना ​​है कि इस जटिल डिज़ाइन और सिंथेटिक दृष्टिकोणकृत्रिम प्रकाश संश्लेषण की नकल करके CO2कैप्चर औरविभिन्न ऊर्जा-समृद्ध C1 और C2 रासायनिक फीडस्टॉक्स के रूपांतरण की एक नई एकीकृत उत्प्रेरक प्रणाली विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

 

 

इस शोध के लेखकगण

प्रोफेसर तापस के. माजी  संचिता कर्माकर    डॉ. सौमित्र बर्मन फारूक अहमद रहीमी

[प्रकाशन लिंक:DOI: 10.1039/D0EE03643A

अधिक जानकारी के लिए, प्रोफेसर माजी  (tmaji@jncasr.ac.in; 9483540611) से संपर्क करें.]

 

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