विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

सरकार ने भू-स्थानिक डेटा के लिए उदार दिशा-निर्देशों की घोषणा की

भू-स्थानिक दिशा-निर्देशों को उदार बनाकर, सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है,  जो एक लाख करोड़ रुपए की भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा : डॉ. हर्ष वर्धन

आज की घोषणा ने राष्ट्र निर्माण और एक आत्मनिर्भर भारत बनाने के हित में भू-मानचित्रण को सीमित उपयोग से व्यापक उपयोग के लिए खोलने की शुरुआत की है : डॉ. जितेंद्र सिंह

सुरक्षा को कम किए बगैर दिशा-निर्देश भारतीय उद्योग और सर्वेक्षणकर्ता एजेंसियों को प्रेरित करेंगे और सशक्त बनाएंगे : प्रोफेसर आशुतोष शर्मा

Posted On: 15 FEB 2021 6:28PM by PIB Delhi

सरकार ने भू-स्थानिक डेटा के लिए उदार दिशा-निर्देशों की घोषणा की है। आज नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उदारीकृत दिशा-निर्देशों का ब्यौरा देते हुए, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि भू-स्थानिक दिशा-निर्देशों को उदार बनाकर सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जो एक लाख करोड़ रुपए की भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि यह विज्ञान को जन आंदोलन बनने और देश की जनता को एक नया भारत उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगा।

इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह, राज्य मंत्री, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय; प्रधानमंत्री कार्यालय; कार्मिक, सार्वजनिक शिकायतें और पेंशन; परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग; प्रोफेसर आशुतोष शर्मा, सचिव, डीएसटी और श्री सुनील कुमार, संयुक्त सचिव, डीएसटी भी उपस्थित थे।

 

डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, “प्रौद्योगिकियों की अगली पीढ़ी हाइपर-रिज़ोल्यूशन मानचित्रों का उपयोग करेगी। भू-स्थानिक डेटा के व्यापक, अत्यधिक सटीक, दानेदार और नियमित रूप से संशोधित प्रकाशन की उपलब्धता अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को काफी फायदा पहुंचाएगी और देश में नवाचार को भी बढ़ावा देगी और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए देश की तैयारियों को बहुत ही ज्यादा उन्नत बनाएगी। भारतीय कंपनियों के लिए आंकड़ों और आधुनिक मानचित्रण प्रौद्योगिकियों की उपलब्धता आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को पूरा करने के लिहाज से  भी महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने रेखांकित किया, “सार्वजनिक रूप से उपलब्ध भू-स्थानिक सेवाओं की शुरुआत के साथ, बहुत सा भू-स्थानिक डेटा, जो कि सीमित दायरे में इस्तेमाल होता था, अब स्वतंत्र और सामान्य तौर पर उपलब्ध है और ऐसी सूचनाओं को विनियमित करने में इस्तेमाल होने वाली कुछ नीतियां/दिशा-निर्देश पुराने और निरर्थक बन गए हैं।उन्होंने आगे कहा, “जो कुछ वैश्विक स्तर पर आसानी से उपलब्ध है, उसे विनियमित करने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय संस्थाओं के लिए, भू-स्थानिक डेटा और मानचित्रों सहित भू-स्थानिक डेटा सेवाओं के अधिग्रहण और उत्पादन के लिए पहले से कोई अनुमति, सुरक्षा मंजूरी, लाइसेंस इत्यादि लेने से पूरी तरह से छूट होगी।

डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, “सुरक्षा/कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से एकत्रित वर्गीकृत भू-स्थानिक डेटा को छोड़कर, सार्वजनिक धन से तैयार किए गए सभी भू-स्थानिक डेटा को सभी भारतीय संस्थाओं के लिए वैज्ञानिक, आर्थिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए सुलभ बनाया जाएगा और उनके उपयोग पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होगी। सरकारी एजेंसियों और अन्य संस्थाओं को खुले तौर पर जुड़ाव वाले भू-स्थानिक डेटा के लिए साझेदारी और काम करने की जरूरत है।उन्होंने जोर दिया, “लाभान्वित हितधारकों में उद्योग से लेकर अकादमिक क्षेत्र और सरकारी विभागों तक, व्यावहारिक रूप से समाज के हर वर्ग को शामिल किया जाएगा।मंत्री ने आगे कहा कि यह परिवर्तनकारी सुधार है।

इस अवसर पर अपने संबोधन में, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र ने भू-स्थानिक मानचित्र निर्माण को पूरी तरह से मुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है और पहली बार भारत में भू-स्थानिक क्षेत्र को बंधनमुक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनाए गए दूरदर्शी सुधारों की एक श्रृंखला का एक विस्तार है। उन्होंने कहा कि आज की घोषणा ने राष्ट्र निर्माण और एक आत्मनिर्भर भारत बनाने के हित में भू-मानचित्रण को सीमित उपयोग से व्यापक उपयोग के लिए खोलने की शुरुआत की है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, यह कुछ औपनिवेशिक विरासतों, जिनसे भारत अभी भी जूझ रहा था, को हटाने का एक और स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा कि मानचित्रण को छूट देना इस मायने में ऐतिहासिक है कि भू-मानचित्रण को देश की सुरक्षा के लिए महज एक औजार के बजाए अब विकास के एक उपकरण के रूप में मान्यता मिलने जा रही है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारतीय व्यवसायों को आगे आकर नेतृत्व करने और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए उपलब्ध कराए जा रहे अवसरों का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा, उद्योग, शिक्षा क्षेत्र और सरकार का सहयोगात्मक प्रयास भारत को भू-स्थानिक ज्ञान में पूरे विश्व में अग्रणी बना देगा। मंत्री ने सभी वर्गों से इस अवसर का लाभ लेने और 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लिए राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने का अनुरोध किया।

सचिव, डीएसटी, प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने भू-स्थानिक दिशा-निर्देशों पर एक प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा, नए दिशा-निर्देश सुरक्षा को कमजोर किए बगैर भारतीय उद्योग और सर्वेक्षण एजेंसियों को प्रेरित और सशक्त बनाने का काम करेंगे। भू-स्थानिक उत्पादों और समाधानों में आत्मनिर्भरता, 2030 तक एक लाख करोड़ रुपये का कारोबार होगी और विकास के जरिए आर्थिक प्रभाव डालेगी।

भारत के आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना और 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को साकार बनाने के लिए, भू-स्थानिक डेटा और मानचित्रों पर लागू होने वाले विनियम अब से पूरी तरह से उदार बन गए हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने भारत की मानचित्रण नीति में व्यापक बदलाव, विशेष रूप से भारतीय कंपनियों के लिए, की घोषणा की है। वैश्विक स्तर पर जो डेटा आसानी से उपलब्ध हैं, उसे भारत में नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं है और इसलिए भू-स्थानिक डेटा, जो पहले प्रतिबंधित था, अब भारत में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होगा। इसके अलावा, हमारी संस्थाओं और नवाचारकर्ताओं पर अब न तो कोई पाबंदी है और न ही उन्हें भारतीय क्षेत्र में डिजिटल भू-स्थानिक डेटा और मानचित्रों को जुटाने, बनाने, तैयार करने, जमा करने, प्रकाशित और संशोधित करने से पहले कोई मंजूरी लेने की जरूरत है।

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