प्रधानमंत्री कार्यालय

गोरखपुर, उत्‍तर प्रदेश में ‘चौरी चौरा’ शताब्दी समारोह के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ

Posted On: 04 FEB 2021 2:47PM by PIB Delhi

भगवान शिव अवतारी गोरक्षनाथ की धरती को प्रणाम करत बांटी। देवरहा बाबा के आशीर्वाद से जिला खूब आगे बढ़त बा। आज देवरहा बाबा की धरती पर हम चौरी-चौरा के महान लोगन स्वागत करत बांटी अउर आप सबै के नमन करत बांटी।

उत्तर प्रदेश की गवर्नर श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, यशस्‍वी और लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, यूपी सरकार के मंत्रीगण, कार्यक्रम में उपस्थित सांसद, विधायक और मेरे भाइयों और बहनों, चौरी-चौरा की पवित्र भूमि पर देश के लिए बलिदान होने वाले, देश के स्वतन्त्रता संग्राम को एक नई दिशा देने वाले, वीर शहीदों के चरणों में, मैं प्रणाम करता हूँ, आदपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। इस कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों में शहीदों और स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के परिजन भी उपस्थित हैं। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार आज ऑनलाइन भी जुड़े हैं। आप सभी का भी मैं अभिनंदन करता हूं, आदर करता हूं।

साथियों,

सौ वर्ष पहले चौरी-चौरा में जो हुआ, वो सिर्फ एक आगजनी की घटना, एक थाने में आग लगा देने की घटना सिर्फ नहीं थी। चौरी-चौरा का संदेश बहुत बड़ा था, बहुत व्‍यापक था। अनेक वजहों से पहले जब भी चौरी-चौरा की बात हुई, उसे एक मामूली आगजनी के संदर्भ में ही देखा गया। लेकिन आगजनी किन परिस्थितियों में हुई, क्या वजहें थीं, ये भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। आग थाने में नहीं लगी थी, आग जन-जन के दिलों में प्रज्‍ज्‍वलित हो चुकी थी। चौरी-चौरा के ऐतिहासिक संग्राम को आज देश के इतिहास में जो स्थान दिया जा रहा है, उससे जुड़ा हर प्रयास बहुत प्रशंसनीय है। मैं, योगी जी और उनकी पूरी टीम को इसके लिए बधाई देता हूं। आज चौरी-चौरा की शताब्दी पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया है। आज से शुरू हो रहे ये कार्यक्रम पूरे साल आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान चौरी-चौरा के साथ ही हर गाँव, हर क्षेत्र के वीर बलिदानियों को भी याद किया जाएगा। इस साल जब देश अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, उस समय ऐसे समारोह का होना, इसे और भी प्रासंगिक बना देता है।

साथियों,

चौरी-चौरा, देश के सामान्य मानवी का स्वतः स्फूर्त संग्राम था। ये दुर्भाग्य है कि चौरी-चौरा के शहीदों की बहुत अधिक चर्चा नहीं हो पाई। इस संग्राम के शहीदों को, क्रांतिकारियों को इतिहास के पन्नों में भले ही प्रमुखता से जगह दी गई हो लेकिन आज़ादी के लिए उनका खून देश की माटी में जरूर मिला हुआ है जो हमें हमेशा प्रेरणा देता रहता है। अलग अलग गांव, अलग-अलग आयु, अलग अलग सामाजिक पृष्ठभूमि, लेकिन एक साथ मिलकर वो सब माँ भारती की वीर संतान थे। आजादी के आंदोलन में संभवत: ऐसे कम ही वाकये होंगे, ऐसी कम ही घटनाएं होंगी जिसमें किसी एक घटना पर 19 स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी के फंदे से लटका दिया गया। अंग्रेजी हुकूमत तो सेंकडो स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देने पर तुली हुई थी। लेकिन बाबा राघवदास और महामना मालवीय जी के प्रयासों की वजह से करीब-करीब 150 लोगों को लोगों को फांसी से बचा लिया गया था। इसलिए आज का दिन विशेष रूप से बाबा राघवदास और महामना मदन मोहन मालवीय जी को भी प्रणाम करने का है, उनका स्‍मरण करने का है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि इस पूरे अभियान से हमारे छात्र-छात्राओं, युवाओं को प्रतियोगिताओं के माध्यम से भी जोड़ा जा रहा है। हमारे युवा जो अध्‍ययन करेंगे उससे उन्हें इतिहास के कई अनकहे पहलू पता चलेंगे। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने भी आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर युवा लेखकों को स्वतन्त्रता सेनानियों पर किताब लिखने के लिए, घटनाओं पर किताब लिखने के लिए, शोधपत्र लिखने के लिए आमंत्रित किया है। चौरी-चौरा संग्राम के कितने ही ऐसे वीर सेनानी हैं जिनके जीवन को आप देश के सामने ला सकते हैं। चौरी-चौरा शताब्दी के इन कार्यक्रमों को लोकल कला संस्कृति और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। ये प्रयास भी हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों के प्रति हमारी श्रद्धांजलि होगी। मैं इस आयोजन के लिए  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और यूपी सरकार की भी सराहना करता हूँ।

साथियों,

सामूहिकता की जिस शक्ति ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा था, वही शक्ति भारत को दुनिया की बड़ी ताकत भी बनाएगी। सामूहिकता की यही शक्ति,  आत्मनिर्भर भारत अभियान का मूलभूत आधार है। हम देश को 130 करोड़ देशवासियों के लिए भी आत्मनिर्भर बना रहे हैं, और पूरे वैश्विक परिवार के लिए भी। आप कल्पना करिए, इस कोरोना काल में, जब भारत ने 150 से ज्यादा देशों के नागरिकों की मदद के लिए जरूरी दवाइयां भेजीं, जब भारत ने दुनिया के अलग-अलग देशों से अपने 50 लाख से अधिक नागरिकों को स्वदेश लाने का काम किया, जब भारत ने अनेकों देशों के हजारों नागरिकों को सुरक्षित उनके देश भेजा, जब आज भारत खुद कोरोना की वैक्सीन बना रहा है, दुनिया के बड़े-बड़े देशों से भी तेज गति से टीकाकरण कर रहा है, जब भारत मानव जीवन की रक्षा को ध्यान में रखते हुए दुनिया भर को वैक्सीन दे रहा है तो हमारे स्वतन्त्रता सेनानियों को, जहां भी उनकी आत्‍मा होगी जरूरे गर्व होता होगा।

साथियों,

इस अभियान को सफल बनाने के लिए अभूतपूर्व प्रयासों की भी जरूरत है। इन भगीरथ प्रयासों की एक झलक, हमें, इस बार के बजट में भी दिखाई देती है। कोरोना काल में देश के सामने जो चुनौतियाँ आईं उनके समाधान को ये बजट नई तेजी देने वाला है। साथियों, बजट के पहले कई दिग्गज ये कह रहे थे कि देश ने इतने बड़े संकट का सामना किया है, इसलिए, सरकार को टैक्स बढ़ाना ही पड़ेगा, देश के आम नागरिक पर बोझ डालना ही होगा, नए-नए कर लगाने ही पड़ेंगे लेकिन इस बजट में देशवासियों पर कोई बोझ नहीं बढ़ाया गया। बल्कि देश को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ज्यादा से ज्यादा खर्च करने का फैसला किया है। ये खर्च देश में चौड़ी सड़कें बनाने के लिए होगा, ये खर्च आपके गाँव को शहरों से, बाज़ार से, मंडियों से जोड़ने के लिए होगा, इस खर्च से पुल बनेंगे, रेल की पटरियाँ बिछेंगी, नई रेल चलेंगी, नई बसें भी चलाई जाएंगी। शिक्षा, पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था अच्छी हो, हमारे युवाओं को ज्यादा अच्छे अवसर मिलें, इसके लिए भी बजट में अनेक फैसले लिए गए हैं। और साथियों, इन सब कामों के लिए काम करने वालों की भी तो जरूरत पड़ेगी। जब सरकार, निर्माण पर ज्यादा खर्च करेगी तो देश के लाखों नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा। आमदनी के नए रास्ते खुलेंगे।

साथियों,

दशकों से हमारे देश में बजट का मतलब बस इतना ही हो गया था, कि किसके नाम पर क्या घोषणा कर दी गई! बजट को वोट बैंक के हिसाब किताब का बही खाता बना दिया गया था। आप सोचिए, आप भी अपने घर में आने वाले खर्चों का लेखा-जोखा अपनी वर्तमान और भविष्य की जिम्मेदारियों के हिसाब से करते हैं। लेकिन पहले की सरकारों ने बजट को ऐसी घोषणाओं का माध्यम बना दिया था, जो वो पूरी ही नहीं कर पाते थे। अब देश ने वो सोच बदल दी है, अप्र