पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

वायु गुणवत्ता आयोग ने निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) स्‍थापित करने की जिम्‍मेदारी शीर्ष तकनीकी संस्‍थानों को सौंपी 


इस प्रणाली के तहत दिल्‍ली/एनसीआर के लक्षित सेक्‍टरों में वायु की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए आर्टिफि‍शियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाएगा

Posted On: 22 JAN 2021 2:47PM by PIB Delhi

राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और उसके आसपास के इलाकों के लिए गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्‍यूएम) ने एक निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) स्‍थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसमें एक वेब और जीआईएस के साथ-साथ मल्‍टी-मोडल आधारित संचालन एवं नियोजन निर्णय सहायता टूल भी होगा।

यह टूल विभिन्‍न स्रोतों से होने वाले उत्‍सर्जन के स्थिर और इधर-उधर फैलने वाले धूल कण, इत्‍यादि का पता लगाने में काफी मददगार साबित होगा। इसमें रासायनिक परिवहन मॉडल का इस्‍तेमाल कर मुख्‍य और गौण दोनों ही तरह के प्रदूषक तत्‍वों से निपटने के लिए एक एकीकृत फ्रेमवर्क होगा। यह प्रणाली इस फ्रेमवर्क की मदद से स्रोत-विशिष्‍ट उपायों का उपयोग करने में भी सक्षम होगी, ताकि इन उपायों के लाभों का आकलन किया जा सके। इसके साथ ही इस प्रणाली के तहत एक व्‍यापक ‘उपयोगकर्ता अनुकूल’ तरीके के साथ-साथ विभिन्न उपयोगकर्ताओं के लिए एक सरल प्रारूप में सर्वोत्तम परिणामों को प्रस्तुत करने पर फोकस किया जाएगा।

आयोग ने देश के निम्‍नलिखित प्रतिष्ठित ज्ञान या तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ समूहों को दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन संबंधी डीएसएस के फ्रेमवर्क को विकसित करने की जिम्‍मेदारी सौंपी है: -

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वायु गुणवत्ता प्रबंधन निर्णय सहायता टूल (डीएसटी) में एक उत्सर्जन सूची विकास एप्‍लीकेशन एवं डेटाबेस; क्षेत्रीय, स्थानीय और स्रोत-ग्राही प्रतिरूपण; और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) पर आधारित परिकल्‍पना टूल्‍स को एक सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क में एकीकृत किया जाता है, ताकि दिल्ली /एनसीआर के लक्षित क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता को बेहतर करने हेतु स्रोत-विशिष्ट उपायों को तैयार करने और उन्‍हें कार्यान्वित करने के लिए एक मजबूत प्रणाली का निर्माण किया जा सके। डीएसटी द्वारा स्रोत-विशिष्ट उपायों की पहचान किए जाने पर विभिन्‍न हितधारकों के साथ विचार किया जाता है।  

इसके तहत कवर किए जाने वाले स्रोतों में उद्योग, परिवहन, बिजली संयंत्र, आवासीय, डीजी सेट, सड़कों पर मौजूद धूल कण, पराली जलाना, इनके जलाने के बाद बचे अवशेषों, निर्माण गतिविधि से उत्‍पन्‍न धूल, अमोनिया, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, अपशिष्ट भरावक्षेत्र या लैंडफिल, आदि शामिल होंगे। उदाहरण के लिए, नगरपालिका, औद्योगिक संघ, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, इत्‍यादि क्रमश: कचरा जलाने, औद्योगिक स्रोत संबंधी प्रदूषण से संबंधित उपायों की पहचान करने के लिए हितधारक होंगे।

संभावित उपायों की पहचान कर लेने पर आर्टिफि‍शियल इंटेलिजेंस आधारित विशेषज्ञ प्रणाली, जिसमें कृत्रिम परिदृश्यों का एक वर्गीकृत डेटाबेस है और जो चिन्हित संभावित उपाय के असर का आकलन करता है, को सीपीसीबी और राज्‍य पीसीबी जैसे नियामकीय संगठनों द्वारा लागू किया जाएगा। ऑन-फील्ड या संबंधित क्षेत्र में इसके कार्यान्वयन की निगरानी विश्वसनीय नागरिक समूहों और प्रोफेशनल एनजीओ द्वारा स्वतंत्र रूप से की जाती है। आखिर में, संबंधित उपाय को लागू किए जाने वाले क्षेत्र के आसपास से एकत्र किए गए वायु गुणवत्ता के आंकड़ों का विश्‍लेषण किया जाएगा, ताकि इस तरह के उपाय के वास्‍तविक लाभों को सही ढंग से समझा जा सके।   

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