युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज वर्चुअल तरीके से वर्ष 2018-19 के लिए राष्‍ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) पुरस्कार प्रदान किए


मानवता और राष्ट्र की सेवा हमारी मूल्य व्‍यवस्‍‍था की परंपरा रही है: श्री रामनाथ कोविंद

सभी युवा पुरस्कार विजेता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेंगे: श्री किरेन रिजिजू

प्रविष्टि तिथि: 24 SEP 2020 6:48PM by PIB Delhi

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज 24 सितंबर, 2020 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली से वर्ष 2018-19 के लिए राष्‍ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) पुरस्कारों को वर्चुअल तरीके से प्रदान किया। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन से इस समारोह में भाग लिया। वर्ष 2018-19 के लिए नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) पुरस्कार 3 अलग-अलग श्रेणियों में 42 विजेताओं को प्रदान किए गए। इन श्रेणियों में विश्वविद्यालय/ +2 परिषद, एनएसएस की इकाइयां एवं उनके कार्यक्रम अधिकारी और एनएसएस स्वयंसेवक शामिल हैं।  इस अवसर पर युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव सुश्री उषा शर्मा एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि मानवता एवं राष्ट्र की सेवा हमारी मूल्य व्‍यवस्‍था की परंपरा रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी परंपरा में इसकी जड़ें गहरी हैं जहां यह कहा गया है कि सेवाओं के उद्देश्य के निहितार्थ को समझना और समझना कठिन है।

राष्ट्रपति श्री कोविंद ने महात्मा गांधी का उल्‍लेख करते हुए कहा कि सेवा केवल मनुष्यों के प्रति ही नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति भी होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय सेवा योजना को महात्मा गांधी की 100वीं जयंती पर 1969 में शुरू किया गया था और यह लगातार, यहां तक कि आज भी काफी प्रासंगिक है। उन्होंने कोविड वैश्विक महामारी के दौरान परीक्षा की इस घड़ी में भी पुरस्कार प्रदान करने की प्रशंसा की और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की।

 

राष्ट्रपति श्री कोविंद ने एनएसएस के बारे में बात करते हुए कहा कि यह 'स्वयं से पहले आप' के आदर्श वाक्य के साथ विभिन्न उपायों के जरिये सामुदायिक सेवा के लिए युवाओं को स्वयंसेवक बनने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि वास्‍तव में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 40 लाख से अधिक छात्र इस नेक योजना से जुड़े हैं। उन्‍होंने कहा कि यह एक उत्साहजनक विकास है जो यह विश्वास दिलाता है कि हमारे देश का भविष्य सुरक्षित है।

 

 

युवा स्वयंसेवकों द्वारा संचालित गतिविधियों पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वयंसेवकों ने कोविड-19 के समय में मास्क का उचित उपयोग करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने संबंधी जागरूकता पैदा करने में उल्‍लेखनीय भूमिका निभाई है। ये स्‍वयंसेवक महामारी के दौरान क्‍वारंटीन एवं आइसोलेट किए गए रोगियों को भोजन एवं अन्‍य उपयोगी सामग्री उपलब्‍ध कराने में भी काफी मददगार रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन स्वयंसेवकों ने बाढ़ और भूकंप पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास प्रदान करने में हमेशा दिल से मदद की है।

 

राष्ट्रपति श्री कोविंद ने इसकी भी सराहना की कि 42 पुरस्‍कृत लोगों में 14 लड़कियां थीं जो काफी उत्साहजनक है। हमारे देश की महिलाएं सावित्री बाई फुले, कस्तूरबा गांधी और मदर टेरेसा की परंपरा का पालन करते हुए राष्ट्र की सेवा कर रही हैं।

 

राष्ट्रपति के पूर्ण भाषण के लिए कृपया लिंक पर क्लिक करें

 

श्री किरेन रिजिजू ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के इस  पुरस्कार वितरण समारोह में हम कार्यक्रम समन्वयक, कार्यक्रम अधिकारियों और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को उनकी उत्कृष्ट सामुदायिक सेवाओं के लिए सराहना करते हैं। श्री रिजिजू ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के इस चुनौतीपूर्ण समय में राष्ट्रीय सेवा योजना के हमारे स्वयंसेवकों ने इस वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए अनुकरणीय सेवा प्रदान की है।

 

श्री रिजिजू ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री का मानना है कि युवा स्वयंसेवकों को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि ये युवा जरूरत पड़ने पर अपनी प्रतिभा, ज्ञान और तकनीकी कौशल के बल पर हर प्रकार की आपदा से निपटने में पूरी तरह सक्षम हो सकें।

 

 

श्री रिजिजू ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और सभी युवा स्वयंसेवक हमारा भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि सभी युवा पुरस्कार विजेता आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेंगे और अपने सामाजिक कार्यों को जारी रखते हुए भारत का नाम रोशन करेंगे।

 

 

रिजिजू ने पुरस्कार विजेता के परिवारों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों के सभी पदाधिकारियों को बधाई दी जिनके समर्थन, प्रेरणा और मार्गदर्शन ने एनएसएस स्वयंसेवकों को अपनी निस्वार्थ सेवा प्रदान करने का अवसर दिया है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मैं राष्ट्रीय सेवा योजना के सभी स्वयंसेवकों से अपेक्षा करता हूं कि वे अपने स्तर पर सामुदायिक विकास कार्यों में गहराई से शामिल होकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं ताकि राष्ट्र के निर्माण की भूमिका में समाज मील का पत्थर साबित हो सके।

इससे पहले सुबह में श्री किरेन रिजिजू ने कुछ पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत की जो दिल्‍ली के विज्ञान भवन से इस समारोह में शामिल हुए।

 

 युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत युवा कार्यक्रम विभाग हर साल राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार प्रदान करता है। ये पुरस्‍कार विश्वविद्यालयों/ कॉलेजों, (+2) परिषदों, वरिष्ठ माध्यमिक, एनएसएस इकाइयों/ कार्यक्रम अधिकारियों और एनएसएस स्‍वयंसेवकों द्वारा स्वैच्छिक सामुदायिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं ताकि देश में एनएसएस को बढावा दिया जा सके। वर्तमान में देश भर में एनएसएस के लगभग 40 लाख स्वयंसेवक मौजूद हैं।

 

तीन अलग-अलग श्रेणियों में वर्ष 2018-19 के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) पुरस्कार के विवरण इस प्रकार हैं:

 

क्रम संख्‍या

श्रेणी

पुरस्‍कार विजेताओं की संख्‍या

पुरस्‍कार

1

विश्वविद्यालय/ +2 परिषद

2

प्रथम पुरस्कार: 5,00,000 रुपये (एनएसएस कार्यक्रम विकास के लिए), विश्वविद्यालय/ +2 परिषद को एक ट्रॉफी के साथ।

कार्यक्रम समन्वयक को प्रमाणपत्र एवं रजत पदक।

  

द्वितीय पुरस्कार: 3,00,000 रुपये (एनएसएस कार्यक्रम विकास के लिए), विश्वविद्यालय/ +2 परिषद को ट्रॉफी के साथ।

कार्यक्रम समन्वयक को प्रमाणपत्र एवं रजत पदक।

2

एनएसएस इकाइयां  और उनके कार्यक्रम अधिकारी

10+10

प्रत्येक एनएसएस इकाई को (एनएसएस कार्यक्रम विकास के लिए) के लिए 2,00,000 रुपये और ट्रॉफी।

 

प्रत्येक कार्यक्रम अधिकारी को प्रमाण पत्र एवं रजत पदक के साथ 1,50,000 रुपये 

3

एनएसएस के स्वयंसेवक

30

प्रत्येक स्‍वयंसेवक को प्रमाण पत्र एवं रजत पदक के साथ 1,00,000 रुपये

 

एनएसएस केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसे स्‍वैच्छिक सामुदायिक सेवा के जरिये युवा छात्रों के व्‍यक्तित्‍व एवं चरित्र के विकास के प्राथमिक उद्देश्य के साथ वर्ष 1969 में शुरू की गई थी। एनएसएस का वैचारिक उद्देश्‍य महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रेरित है। एनएसएस का आदर्श वाक्य 'नॉट मी बट यू' यानी 'स्‍वयं से पहले आप' है।

 

एनएसएस के स्वयंसेवक सामाज के लिहाज से प्रासंगिक मुद्दों पर काम करते हैं। इस प्रकार के कार्य नियमित तौर पर और विशेष शिविर लगाकर समुदाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए किए जाते हैं। इन मुद्दों में (i) साक्षरता एवं शिक्षा, (ii) स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं पोषण, (iii) पर्यावरण संरक्षण, (iv) सामाजिक सेवा कार्यक्रम, (v) महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्यक्रम, (vi) आर्थिक विकास संबंधी गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम, (vii) आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत आदि शामिल हैं।

 

पुरस्कार विजेताओं के विवरण के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें

 

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एमजी/एएम/एसकेसी/एसएस

 


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