भारी उद्योग मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा  2019 भारी उद्योग मंत्रालय

फेम इंडिया योजना के दूसरे चरण का 1 अप्रैल 2019 से शुभारंभ

फेम-II के अंतर्गत 3 वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का परिव्‍यय

फेम-II के अंतर्गत 26 राज्‍यों के 64 शहरों के लिए 5595 ई-बसें

Posted On: 20 DEC 2019 6:04PM by PIB Delhi

ऑटोमोबाइल उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख संचालकों में से एक है। 1991 में स्‍वचालित मार्ग के माध्‍यम से 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने के जरिए इस क्षेत्र के उदारीकरण बाद से, भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने एक लंबा सफर तय किया है। आज देश में लगभग प्रत्‍येक अंतर्राष्‍ट्रीय वाहन विनिर्माता मौजूद है। देश में दोपहिया वाहनों, तिपहिया वाहनों, यात्री कारों, हल्के व्‍यावसायिक वाहनों, ट्रकों, बसों, ट्रैक्टरों और भारी व्‍यावसायिक वाहनों जैसे सभी श्रेणियों के वाहनों का निर्माण होता है। भारत दुनिया भर में दोपहिया और तिपहिया वाहनों का सबसे बड़ा तथा यात्री कारों का चौथा सबसे बड़ा निर्माता है। वर्ष 2018-19 के दौरान भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का कुल कारोबार लगभग 118 बिलियन डॉलर (8.2 लाख करोड़ रुपये) रहा, जो देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 7.1%, औद्योगिक जीडीपी 27% और विनिर्माण जीडीपी का 49% है। यह उद्योग देश के सबसे बड़े नियोक्‍ताओं में से एक है और लगभग 37 मिलियन प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार प्रदान करता है। सभी श्रेणियों के वाहनों की वर्तमान बिक्री लगभग 26 मिलियन (2018-19) है, जिसके 2030 तक 3 गुना से अधिक बढ़कर 84.5 मिलियन हो जाने की संभावना है।

 

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प्रति वर्ष होने वाले अरबों लीटर कच्चे तेल का आयात और उससे संबद्ध लाखों टन कार्बनडाई ऑक्‍साइड और अन्य प्रदूषकों का उत्सर्जन देश के समक्ष आ रही उन मुख्य चुनौतियों में से हैं, जो सीधे तौर पर ऑटोमोबाइल क्षेत्र से संबंधित हैं। वर्तमान में, भारत भीषण वायु प्रदूषण के संकट का सामना कर रहा है और दुनिया के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 14 शहर भारत में हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के विभिन्न हितधारक विभाग सीएएफई मानकों को सख्‍त बनाने, बीएस IV से सीधे छलांग लगाकर बीएस VI पर जाते हुए बीएस VI अनुपालन वाले वाहनों को लाने, हैवी ड्यूटी वाणिज्यिक वाहनों के लिए ईंधन दक्षता मानदंड, वाहनों के लिए रेटिंग शुरू करने आदि जैसी कार्यनीतियां तैयार कर रहे हैं। जीरो तेल पाइप उत्सर्जन वाली इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना तेल पर निर्भरता घटाने और शहरों में वाहनों के प्रदूषण में कम लाने की दिशा में सरकार की ओर से किया गया प्रयास है।

प्रदूषण के कारण उत्‍पन्‍न होने वाले विभिन्न संकटों से निपटने के लिए और भारत के नागरिकों को बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन प्रदान करने के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अंगीकार जाना आवश्‍यक है।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मोबिलिटी:

भारत सरकार ने 2011 में नेशनल मिशन ऑन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (एनएमईएम) को मंजूरी दी और उसके बाद में 2013 में प्रधानमंत्री द्वारा राष्‍ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान 2020 (एनईएमएमपी 2020) का उद्घाटन किया गया।

एनईएमएमपी 2020 एक राष्ट्रीय मिशन दस्तावेज है, जो देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को त्‍वरित रूप से अंगीकार करने और उनके विनिर्माण के लिए दृष्टि और विस्‍तृत योजना प्रदान करता है। यह योजना राष्ट्रीय ईंधन सुरक्षा को बढ़ाने, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन प्रदान करने और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को वैश्विक विनिर्माण के क्षेत्र में प्रमुख स्‍थान हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए तैयार की गई है। यह भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी पहलों में से एक है, जिसमें देश के ऑटमोटिव और परिवहन उद्योग में आमूल-चूल बदलाव लाने की क्षमता मौजूद है। यह योजना वर्ष 2020 तक कुछ वाहन खंडों में भारत का वैश्विक नेतृत्व सुनिश्चित करने वाली प्रौद्योगिकी के कुछ स्‍तर तक स्वदेशीकरण सहित भारत में उत्‍तरोत्‍तर लगभग 6-7 मिलियन इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड वाहनों की तादाद सुनिश्चित करने के उद्देश्य वाली नीतियों के संयोजन के माध्यम से भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की एक व्यापक सहयोगपूर्ण योजना का चरमोत्कर्ष थी।

एनईएमएमपी 2020 के भाग के रूप में, सरकार ने मार्च, 2015 में 01 अप्रैल 2015 से 2 साल तक की शुरुआती अवधि के लिए 'फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक (एंड हाइब्रिड) व्हीकल्स इन इंडिया' (फेम इंडिया) नामक योजना को मंजूरी दी। इस योजना का लक्ष्‍य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी लाना और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन से जुड़े मुद्दों का समाधान करना था। 895 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ इस योजना को समय-समय पर बढ़ाकर 31 मार्च, 2019 तक विस्‍तारित किया गया। फेम इंडिया योजना के पहले चरण को चार फोकस क्षेत्रों यथा (i) मांग सृजन, (ii) प्रौद्योगिकी विकास, (iii) प्रायोगिक परियोजना और (iv) चार्जिंग अवसंरचना के माध्यम से लागू किया गया था।

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मांग सृजन का लक्ष्‍य मांग संबंधी प्रोत्‍साहनों के माध्यम से एक्सईवी के खरीदारों को प्रोत्साहित करना है, जिसकी परिणति वाहन खरीदते समय डीलर के स्तर पर स्‍पष्‍ट रूप से कम खरीद मूल्य में होगी। प्रायोगिक परियोजनाओं संबंधी घटक सार्वजनिक परिवहन पर विशेष ध्यान देने के साथ नई प्रौद्योगिकियों, व्यापार मॉडलों आदि के परीक्षण की परिकल्पना करता है। इस योजना के तहत प्रौद्योगिकी विकास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के साथ मिलकर कार्यान्‍वित किया जा रहा है, जहां ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए पीपीपी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। चार्जिंग अवसंरचना घटक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के आधार पर विभिन्न शहरों में चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की परिकल्पना करता है।

 

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फेम इंडिया योजना के चरण -1 के अंतर्गत उपलब्धियां:

यद्यपि फेम योजना को एनईएमएमपी 2020 में मुख्य योजना के रूप में परिकल्पित करने से पूर्व मंजूरी के समय प्रायोगिक योजना के रूप में वर्णित किया गया था, लेकिन यह योजना इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बारे में भारत सरकार और राज्‍य सरकारों के विभिन्न विभागों सहित सभी हितधारकों के बीच प्रमुख नीतिगत विमर्श शुरू करने में काफी हद तक सफल रही है।

इस योजना की कुछ मात्रात्मक और गुणात्मक सफलताएं निम्‍नलिखित हैं :

योजना के इस चरण में लगभग 2.8 लाख हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को लगभग 359 करोड़ रुपये के मांग प्रोत्साहन के माध्यम से सहायता दी गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 50 मिलियन लीटर ईंधन की बचत हुई और लगभग 124 मिलियन किलोग्राम कार्बन डाईऑक्‍साइड के उत्‍सर्जन में कमी आई।

विभिन्न संगठनों/संस्थानों जैसे ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, नॉन फेरस मैटेरियल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (एनएफटीडीसी) और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को परीक्षण अवसंरचना की स्थापना, विद्युतीकृत परिवहन, बैटरी इंजीनियरिंग आदि में उन्नत अनुसंधान के लिए 'उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित करने जैसी प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं के लिए लगभग 158 करोड़ रूपए की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

इस योजना के तहत, डीएचआई ने लगभग 300 करोड़ रुपये की कुल लागत पर देश के विभिन्न शहरों के लिए 425 इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड बसों को मंजूरी दी है। 425 ई-बसों में से 400 बसें इंदौर, लखनऊ, गुवाहाटी, जम्मू-कश्मीर, कोलकाता, हैदराबाद, शिमला और मुंबई जैसे विभिन्न शहरों में प्राप्त और तैनात की गई हैं। शेष 25 ई-बसें इस महीने के अंत तक मुंबई में तैनात किए जाने की संभावना है।

चार्जिंग अवसंरचना के तहत भारत सरकार ने बेंगलुरु, चंडीगढ़, जयपुर जैसे शहरों और दिल्ली एनसीआर में लगभग 500 चार्जिंग स्टेशन/बुनियादी ढांचों को मंजूरी दी है। भारी उद्योग विभाग ने बीएचईएल और आरईआईएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को नियमित अंतराल पर चार्जिंग के लिए अवसंरचना की स्थापना के माध्यम से तीन एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से ई-वाहनों के अनुकूल बनाने का काम सौंपा है। ये राजमार्ग दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-जयपुर और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे हैं। हाल ही में, इनमें से दिल्ली-चंडीगढ़ राजमार्ग को ई-वाहनों के अनुकूल एक्सप्रेसवे देश का पहला एक्सप्रेसवे घोषित किया गया है।

 

फेम इंडिया योजना चरण II:

फेम इंडिया योजना के परिणाम और अनुभव के आधार पर, फेम योजना के दूसरे चरण को अंतिम रूप दिया गया और 8 मार्च 2019 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के साथ इसे अधिसूचित कर दिया गया। योजना के दूसरे चरण की शुरुआत 10,000 करोड़ रुपये के परिव्‍यय के साथ 1 अप्रैल 2019 को 3 साल की अवधि के लिए की गई। इस योजना के 3 घटक हैं अर्थात् -

क) मांग प्रोत्साहन:

ख) चार्जिंग अवसंरचना:

ग) प्रचार, आईईसी गतिविधियों सहित प्रशासनिक व्यय:

 फेम इंडिया स्कीम चरण II की मुख्य विशेषताएं:

इस चरण का लक्ष्‍य 7090 ई-बसों, 5 लाख ई–तिपहिया वाहनों, 55000 ई–चोपहिया यात्री कारों (स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड सहित) और 10 लाख ई-दो पहिया वाहनों की सहायता से मांग उत्‍पन्‍न करना है।

जनता के लिए किफायती और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का विकल्प प्रदान करने पर अधिक बल देने के साथ-साथ यह योजना मुख्य रूप से सार्वजनिक परिवहन के लिए उपयोग में लाए जाने वाले वाहनों या वाणिज्यिक उद्देश्‍यों के लिए पंजीकृत सभी खंडों के वाहनों पर लागू होगी।

-दोपहिया वाहन खंड के लिए, यह योजना निजी स्वामित्व वाले पंजीकृत -दोपहिया वाहनों पर भी लागू है।

विभिन्न श्रेणी के ई-वाहनों की खरीद के आधार पर, इस योजना में इंटर और इंटरा सेग्‍मेंट्स दोनों में अदला-बदली का प्रावधान किया गया है।

योजना केवल उन्‍हीं एक्सईवी पर लागू होगी, जिनमें एडवांस कैमिस्‍टरी बैटरी लगी होगी।

योजना केवल उन्हीं वाहनों पर लागू है, जिन्हें सीएमवीआर के अनुसार मोटर वाहन के रूप में परिभाषित किया गया है और जो सड़क परिवहन प्राधिकरण के साथ पंजीकृत होने के पात्र हैं।

इस चरण में, मांग प्रोत्साहन को बैटरी क्षमता से जोड़ा गया है अर्थात ई-बसों (जिनके लिए प्रोत्साहन 20,000 रुपये/केडब्‍ल्‍यूएच है) को छोड़कर सभी पात्र वाहनों के लिए 10,000 रुपये/ केडब्‍ल्‍यूएच है। यह पात्र वाहनों की लागत की कुछ प्रतिशत सीमा [अर्थात ई-बस के लिए 40% और पात्र वाहनों की अन्य सभी श्रेणियों के लिए 20%पर] के अधीन है।  

मांग प्रोत्साहन केवल उन वाहनों को प्रदान किया जाता है जिनकी एक्‍स–फैक्‍टरी वैल्‍यू  थ्रैशहोल्‍ड वेल्‍यू से कम है।

इसके अलावा, बैटरियों के संबंध में बाजार और प्रौद्योगिकी के रुझान को ध्यान में रखते हुए, योजना के तहत समय-समय पर मांग प्रोत्साहन के संशोधन का प्रावधान किया गया है।

विभाग द्वारा जारी किए गए चरण विनिर्माण कार्यक्रम के अनुसार यह प्रोत्साहन भारत में निर्मित वाहनों पर लागू होता है। केवल वही ओईएम प्रोत्साहन पाने के पात्र हैं, जिन्होंने चोपहिया और बसों के मामले में 40% स्थानीयकरण स्तर और दोपहिया और तिपहिया वाहनों के मामले में 50% स्‍थानीकरण स्‍तर हासिल किया है।

फेम इंडिया योजना चरण II के अंतर्गत प्रदर्शन :

आईएम और वाहनों के मॉडल्‍स : फेम इंडिया योजना के चरण II के अंतर्गत मांग प्रोत्‍साहन प्राप्‍त करने के लिए अब तक 13 ओईएम ने अपने 39 ईवी मॉडल्‍स (दोपहिया -14, तिपहिया – 11 और चोपहिया - 14) का पंजीकरण कराया है। अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों  के पात्र उपयोगकर्ताओं को लगभग 5500 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जा चुके हैं।

इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी : सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से विभाग ने अभिरुचि की अभिव्‍यक्ति के माध्‍यम से शहरों और परिवहन निगमों से परिचालन लागत मॉडल के आधार पर इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती के लिए प्रस्‍ताव आमंत्रित किए हैं। प्रस्‍ताव की जांच करने के बाद विभाग ने योजना के अंतर्गत 26 राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों के 64 शहरों को इंट्रा सिटी और इंटरसिटी परिचालन के लिए 5595 ई-बसों की मंजूरी प्रदान की है। संविदा की अवधि के दौरान ये बसें लगभग 4 बिलियन किलोमीटर का फासला तय करेंगी। इनके द्वारा संविदा की अवधि के दौरान लगभग 1.2 बिलियन ईंधन की बचत होने की संभावना है, जिसके परिणामस्‍वरूप 2.6 मिलियन टन कार्बन डाईऑक्‍साइड के उत्‍सर्जन से बचा जा सकेगा।

चार्जिंग अवसंरचना की मंजूरी : विभाग ने रेंज संबंधी चिंता (रेंज एंग्‍जाइटी) को मिटाने के लिए अभिरुचि की अभिव्‍यक्ति (ईओआई) जारी करने के माध्‍यम से फेम इंडिया योजना के चरण II के अंतर्गत प्रोत्‍साहन प्राप्‍त करने के लिए विभिन्‍न राज्‍यों/शहरों में ईवी चार्जिंग अवसंरचना लगाने के इच्‍छुक शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी)/नगर निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (राज्‍य/केंद्रीय) और सार्वजनिक/निजी इकाइयों से प्रस्‍ताव आमंत्रित किए हैं। उपरोक्‍त शहरों में लगभग 7000 चार्जिंग स्‍टेशन लगाने के लिए ईओआई के जवाब में लगभग 100 प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं। सभी प्रस्‍तावों की जांच की जा रही है और इन शहरों के लिए चार्जिंग स्‍टेशन लगाने की मंजूरी जल्‍द ही प्रदान कर दी जाएगी।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने संबंधित अन्‍य कदम

फेम इंडिया योजना चरण II के अलावा, सरकार के विभिन्न प्रकोष्‍ठ देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस संबंध में उठाए गए कुछ प्रमुख कदम निम्‍नलिखित हैं:

इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की मौजूदा दर को 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने हेतु लिए गए ऋण पर क्रेताओं द्वारा अदा किए गए ब्‍याज पर उन्‍हें 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्‍त आयकर कटौती प्रदान की है।

विद्युत मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए बिजली की बिक्री 'सेवा' के रूप में किए जाने को अनुमति दी है। यह कदम चार्जिंग अवसंरचना में निवेश को आकर्षित करने की दिशा में प्रोत्साहन देने का काम करेगा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय  ने बैटरी चालित व्‍यावसायिक वाहनों के मामले में परमिट में छूट दिए जाने के संबंध में अधिसूचना जारी की है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय  ने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए ग्रीन नंबर प्लेट के लिए अधिसूचना जारी की है।

वित्त मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहनों के कल पुर्जों के स्थानीय स्‍तर पर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उन पर सीमा शुल्‍क को संशोधित किया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यापक रूप से अंगीकार किए जाने की दिशा में चुनौतियां  

(i)  जनता में जागरूकता का अभाव

(ii) रेंज संबंधी चिंता (रेंज एंग्‍जाइटी)

(iii) आईसीई वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की उच्च पूंजीगत लागत

(iv) आईसीई वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों का औसत मानकों से कम प्रदर्शन

(v) बैटरी का पुनर्चक्रण

कामयाबी की राह:

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार निम्नलिखित पहलों पर काम कर रही है:

भारी उद्योग विभाग द्वारा जारी अभिरुचि की अभिव्यक्ति के जवाब में विभिन्न शहरों में लगभग 1000 चार्जिंग स्टेशनों को स्वीकृति

प्रमुख चिन्हित राजमार्गों पर चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना के लिए पात्र सार्वजनिक इकाइयों से प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए नई अभिरुचि की अभिव्यक्ति जारी करना।

64 शहरों और आठ राज्य परिवहन निगमों को योजनाओं के तहत स्वीकृत 5595 इलेक्ट्रिक बसों की समय पर तैनाती की निगरानी।

जनता को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अपनाने के लिए प्रोत्‍साहित करने हेतु प्रचार गतिविधियां।

इंट्रा सिटी और इंटरसिटी परिचालन के लिए राज्यों/शहरों को अतिरिक्त बसों की मंजूरी के लिए नई अभिरुचि की अभिव्यक्ति जारी करना।

सार्वजनिक उद्यम विभाग

भारत सरकार ने पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को महारत्न का दर्जा प्रदान किया है, जो इन सीपीएसई के बोर्डों को व्‍यापक वित्तीय और परिचालन अधिकार प्रदान करने और अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में परिचालन के विस्तार की सुविधा प्रदान करने में सक्षम बनाएगा।

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल या भेल),  महारत्न कंपनी

बीएचईएल या भेल ने इसरो द्वारा विकसित तकनीक का उपयोग करते हुए भेल बेंगलुरु में भारत की पहली लिथियम-आयन आधारित स्पेस ग्रेड सेल निर्माण सुविधा की शुरुआत करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं।

इसने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए गेट्स और डैम्‍पर्स के लिए विनिर्माण सुविधाओं को भी चालू किया है।

भेल ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए इसरो के चंद्रयान मॉड्यूल के लिए विशेष टैंक, रिग्स, बैटरी और सौर पैनलों की आपूर्ति की।

भेल को पहली बार भारतीय रेल की ओर से 25 रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से युक्‍त 5000 एचपी इलेक्ट्रिक रेल इंजन (डब्‍ल्‍यूएजी-7 टाइप) के लिए आदेश मिला।

जहां लक्ष्य 500 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां सार्वजनिक उद्यम विभाग सीपीएसई और अन्य सरकारी संगठनों द्वारा पूंजीगत व्यय (सीएपीईएक्‍स) की निगरानी कर रहा है। इसके परिणामस्‍वरूप सीपीएसई और अन्य सरकारी संगठनों द्वारा अवसंरचना परियोजनाओं के लिए बेहतर खर्च किया गया है। इन संगठनों की सीएपीईएक्‍स उपलब्धि पिछले वर्ष की पहली छमाही में 1,94,331 करोड़ रुपये की तुलना में 2019-20 की पहली छमाही में बढ़कर 2,05,368 करोड़ रुपये (5.69% की वृद्धि) हो गई। 16 सीपीएसई के संबंध में सीएपीईएक्‍स की समीक्षा बैठकें 03.09.2019 और 05.09.2019 को आयोजित की गईं।

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आरकेमीणा/आरएनएम/एएम/आरके-5031



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