उप राष्ट्रपति सचिवालय
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए काम करने का आह्वान किया
छात्रों को महिलाओं, गुरुओं, बड़ों और प्रकृति का सम्मान करने जैसे भारतीय मूल्यों की शिक्षा दें: उपराष्ट्रपति
महिलाओं के खिलाफ अत्याचार को खत्म करने के लिए सोच में बदलाव को जरुरी बताया;
राष्ट्र के कल्याण के लिए महिलाओं के सशक्तीकरण पर बल दिया
सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
प्रविष्टि तिथि:
08 DEC 2019 4:39PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं से लैंगिक और जाति के आधार पर भेदभाव तथा महिलाओं का अनादर करने जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का आह्वान किया है।
श्री नायडू आज पूणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं, शिक्षकों और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति के उन मूल्यों की शिक्षा में जिसमें महिलाओं, गुरूओं और बड़ों को सम्मान देने का रिवाज है। उन्होंने समाजिक मूल्यों में आ रही गिरावट और विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ हाल में हुई घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल एक विधेयक या एक अधिनियम महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने ऐसी प्रवृत्तियों और घटनाओं को रोकने के लिए लोगों की सोच में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री नायडू ने भारत के सदियों पुराने लोकाचार, नैतिकता और मूल्यों को पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करने के लिए देश में एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आह्वान किया और कहा कि यह वह समय है जब हम अपनी जड़ों की ओर लौटते हैं।
परिवारों, अर्थव्यवस्था और समाज में बड़े पैमाने पर बदलाव में महिला-सशक्तीकरण को एक बड़ी ताकत बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब तक महिलाओं की स्थिति को सशक्त नहीं बनाया जाता, राष्ट्र का कल्याण संभव नहीं है। उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को महिलाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा।
श्री नायडू ने इच्छा व्यक्त की कि शिक्षण संस्थान जो नवाचार, उद्यमिता और विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं और आने वाले समय में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दें।
आम आदमी की रोजमर्रा की चुनौतियों के लिए स्थायी समाधानों की इच्छा जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्र ऐसे समाधान तलाशने के लिए निर्भीक और लीक से हटकर नए विचारों के साथ आएं। उन्होंने छात्रों से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में हो रही प्रगति का उपयोग करते हुए मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने का आह्वान किया।
यह कहते हुए कि शिक्षा को समाज के वंचित तबके के प्रति संवेदनशील होने के साथ ही उसकी जरूरतों को पूरा करने के लायक भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में ही समुदायों को बदलने की ताकत है और देश युवाओं का मार्गदर्शन करने के लिए शैक्षिक संस्थानों की ओर देखता बड़ी आशा से देख रहा है।
श्री नायडू ने कहा कि वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय अपना स्तर बेहतर बनाएं और बुनियादी ढांचे में सुधार लाएं तथा तेजी से बदलते तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्यों के अनुरूप छात्रों को ढ़ालने के लिए प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग करें।
इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और छात्रों को राष्ट्र और मानवता के लिए इन दो महान हस्थियों के योगदान के बारे में जानने की सलाह दी। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से डीलिट की मानद उपाधि प्राप्त करने वाले प्रसिद्ध कवि, गीतकार और पटकथा लेखक श्री जावेद अख्तर तथा जाने माने वैज्ञानिक डॉ. टेसी थॉमस को बधाई दी।
आयोजन के दौरान, भूटान, मलावी, सूडान, जापान जैसे देशों के छात्रों और अन्य लोगों ने भारत के उपराष्ट्रपति के सम्मान के रूप में अपने देश के झंडे भेंट किये। निदेशक मंडल, विभाग प्रमुख, संकाय और देश के विभिन्न हिस्सों से सिम्बायोसिस के विभिन्न संस्थानों के 10,000 से अधिक छात्र और 85 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले विदेशी छात्र दीक्षांत समारोह में उपस्थित थे।
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आरकेमीणा/आरएनएम/एएम/एमएस/डीसी - 4654
(रिलीज़ आईडी: 1595541)
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