प्रधानमंत्री कार्यालय
महात्मा गांधी के विरासत को सम्मान
प्रविष्टि तिथि:
30 JAN 2019 7:24PM by PIB Delhi
मैं मानता हूं कि महात्मा गांधी अपने जीवन काल में जितने प्रासंगिक थे, उतने ही प्रासंगिक आज भी हैं: श्री नरेन्द्र मोदी।
जब से श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री का कार्यभाल संभाला है, तभी से वे सुनिश्चित करते रहे हैं कि महात्मा गांधी के आदर्श, सिद्धांत और उनकी सीख उनके भाषणों और कार्यों के जरिये भारत और विदेशों में उच्च स्तर पर प्रकट होती रहें।
प्रधानमंत्री ने 30 जनवरी, 2019 को राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया। स्मारक में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के निर्णायक क्षणों में से एक नमक सत्याग्रह की भावना और ऊर्जा प्रदर्शित होती है। यह महात्मा गांधी और उनके 80 अनुयायी सत्याग्रहियों की डांडी यात्रा को दर्शाता है। यह ऐसा अवसर था जब एक चुटकी नमक में औपनिवेशिक शासन की नींव हिला दी थीं।
नमक सत्याग्रह स्मारक प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहलों में से सिर्फ एक पहल है, जो महात्मा गांधी की विरासत को आगे ले जाती है।
श्री नरेन्द्र मोदी की प्रिय परियोजना स्वच्छ भारत अभियान महात्मा गांधी के शिक्षण से प्रेरित है। इसकी शुरूआत नई दिल्ली में 2 अक्टूबर, 2014 को गांधी जयंती के दिन हुई थी। इस योजना की शुरूआत करते हुए उन्होंने कहा था, ‘स्वच्छ भारत 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उन्हें सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।’
श्री नरेन्द्र मोदी को साधुवाद कि उनकी बदौलत स्वच्छता एक जनांदोलन बन गया। वह महात्मा गांधी के समय की याद दिलाता है, जब स्वतंत्रता की अभिलाषा जनांदोलन बन गई थी। पिछले साढ़े चार वर्षों से यह योजना पूरे भारत में आमूल चूल परिवर्तन ला रही है। इसके परिणामस्वरूप आम लोगों में जागरूकता बढ़ गई है। सारे राज्य खुले में शौच से मुक्त होने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और भारत शत-प्रतिशत ग्रामीण स्वच्छता प्राप्त करने के निकट है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खादी एक ऐसा विषय था, जिसे महात्मा गांधी ने भारत की अंतरात्मा के साथ जोड़ दिया था। इसके बाद खादी में दिलचस्पी धीरे-धीरे कम होती गई। लेकिन प्रधानमंत्री ने उसमें दोबारा जान फूंक दी, खासतौर से अपने भाषणों के जरिये। श्री नरेन्द्र मोदी अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिये लोगों को खादी उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और इस तरह खादी तथा कुटीर उद्योगों को दोबारा जीवित करने पर जोर देते हैं। श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान ने ऐसा असर डाला कि खादी उत्पादों की बिक्री में जोरदार इजाफा हो गया।
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को दो वर्षीय आयोजन के तौर पर मनाया जा रहा है। इस दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महात्मा गांधी की दृष्टिकोण की याद में नई दिल्ली में 29 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2018 तक महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में दुनियाभर के स्वच्छता क्षेत्र के दिग्गजों और मंत्रियों ने हिस्सा लिया तथा अपने प्रयोगों और अनुभवों को साझा किया।
महात्मा गांधी का प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो’ विश्वव्यापी बन गया, जब 124 से अधिक कलाकारों ने इसे अपनी आवाज दी और संगीत पर गाया। परियोजना से इस सुंदर भारतीय भजन ने पूरे विश्व को बांध लिया।
श्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में महात्मा गांधी द्वारा स्थापित साबरमती आश्रम को भारतीय राजनय के मंच पर ले आए। उनके साथ चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे जैसे प्रमुख वैश्विक नेताओं ने साबरमती आश्रम पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। वास्तव में चीनी राष्ट्रपति ने साबरमती आश्रम की अपनी यात्रा को अपने जीवन का सबसे यादगार पल कहा था। प्रधानमंत्री और दुनिया के विभिन्न नेताओं की चरखा चलाती तस्वीरों ने गांधी जी की याद दिला दी, जब चरखा आत्मनिर्भरता का प्रतीक था।
ब्रिसबेन से हैनोवर और हैनोवर से अशकाबाद तक प्रधानमंत्री ने बापू की प्रतिमाओं और आवक्ष मूर्तियों का अनावरण किया तथा इस तरह विदेशों में महात्मा गांधी की अमिट स्मृतियों को संजो दिया।
वर्ष 2018 में राजकोट के अल्फ्रेड हाईस्कूल में महात्मा गांधी संग्रहालय का उद्घाटन किया गया। इसी स्कूल से महात्मा गांधी ने 1888 में मैट्रिक किया था।
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों को व्यवहार में उतारा और यह बताया कि उनके विचार 21वीं शताब्दी में भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने लोगों को लामबंद करने और नवभारत के निर्माण के अभियान को गति देने के लिए महात्मा गांधी की सीख को प्रयुक्त किया। प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकलापों में महात्मा गांधी के सिद्धांतों और मूल्यों को निरूपित किया है।
2 अक्टूबर, 2018 को अपने ब्लॉग में श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिखे गए उनके शब्दों में बापूजी की विरासत को प्रोत्साहन देने के संबंध में उनका दृष्टिकोण प्रकट होता है। वे लिखते हैं, ‘भारत विविधता की भूमि है। सबको एकता में बांधने, लोगों को मतभेदों से ऊपर उठाने, औपनिवेशिकता के विरुद्ध संघर्ष करने और विश्व मंच पर भारत की स्थिति को ऊपर उठाने का काम जिस एक व्यक्ति ने किया, वह महात्मा गांधी थे। आज हम 1.3 अरब भारतीय बापू के उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो उन्होंने इस देश के लिए देखा था और जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन न्योछावर कर दिया।’
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आर.के.मीणा/एएम/एकेपी/एनआर
(रिलीज़ आईडी: 1562097)
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