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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से बातचीत की


2010 में 14 पदकों से लेकर 114 पदकों तक का शानदार सफर आपकी निरंतर कड़ी मेहनत और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है: प्रधानमंत्री

ओलिंपिक पर पूरा ध्यान केंद्रित करते हुए, इस बार मैंने लाल किले की प्राचीर से अपने युवाओं से आगे आने और 'टैलेंट हंट' (प्रतिभा खोज) अभियान में भाग लेने का आग्रह किया: प्रधानमंत्री

सरकार ने 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (खेल सामग्री विनिर्माण योजना) को मंजूरी दी है; अब समय आ गया है कि हमारा खेल सामग्री निर्माण उद्योग नए कीर्तिमान स्थापित करे: प्रधानमंत्री

जब भी कोई भारतीय या विदेशी खिलाड़ी मैदान पर उतरे, तो उनके खेल उपकरण, कपड़े और जूते 'मेड इन इंडिया' होने चाहिए: प्रधानमंत्री

हम चाहते हैं कि भारत विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार करे और साथ ही विश्व स्तरीय खेल उपकरण भी बनाए: प्रधानमंत्री

प्रविष्टि तिथि: 05 NOV 2026 7:52PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ हफ्ते पहले एशियाई खेलों के दल से मिलने के बाद, वे पैरा-एशियाई खेलों के खिलाड़ियों से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारत बड़ी वैश्विक खेल शक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है। 140 करोड़ नागरिकों की ओर से खिलाड़ियों को बधाई देते हुए और उनके परिवारों, प्रशिक्षकों तथा कोचों के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों ने न केवल बड़े मंच पर पदक जीते हैं, बल्कि पूरे देश में करोड़ों लोगों का दिल भी जीता है।

प्रधानमंत्री ने अतीत के उन युगों का जिक्र किया जब खेलों में भारत की भागीदारी को केवल एक औपचारिकता माना जाता था और पैरा-खेलों में देश काफी पीछे था—उदाहरण के लिए, 2010 के पैरा-एशियाई खेलों में भारत ने केवल एक स्वर्ण सहित कुल 14 पदक जीते थे। इसके विपरीत, उन्होंने इस दल की 114 पदकों तक की ऐतिहासिक छलांग पर बल दिया। इन 114 पदकों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। इसके साथ ही, खिलाड़ियों ने पांच विश्व रिकॉर्ड और नौ एशियाई रिकॉर्ड भी बनाए हैं। 56 महिला एथलीटों में से 34 ने पदक जीते, भारतीय खिलाड़ियों ने चार स्पर्धाओं में पोडियम के तीनों स्थानों पर कब्ज़ा किया, और अकेले अंतिम दिन ही भारतीय दल ने नौ स्वर्ण पदक हासिल किए। प्रधानमंत्री ने टूर्नामेंट के अंत तक जीतते रहने के उनके निरंतर जज़्बे की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "14 से 114 पदकों तक की यह यात्रा आपके कड़े परिश्रम की पराकाष्ठा का परिणाम है।"

प्रधानमंत्री ने उन कई स्पर्धाओं का विशेष ज़िक्र किया, जिनमें भारतीय एथलीटों ने पहली बार स्वर्ण पदक जीते—जबकि इससे पहले देश को इन स्पर्धाओं में कभी सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने बताया कि मोना अग्रवाल ने पैरा शूटिंग में विश्व कीर्तिमान बनाया, जबकि हनी ने अपना ही पिछला विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। श्री मोदी ने कहा, "हिमांशु, रवि और जेहान ने अपने प्रदर्शन के ज़रिए दुनिया को दिखा दिया कि शारीरिक चुनौतियों को कैसे मात दी जा सकती है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भले ही किसी व्यक्ति या समूह की जीत की चमक देखती है, लेकिन सफलता की यह विशाल इमारत वर्षों की उस कड़ी मेहनत, पसीने और अटूट तपस्या पर टिकी होती है जो किसी को दिखाई नहीं देती। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे एथलीट रिंकू ने एशियन पैरा गेम्स से ठीक दो महीने पहले अपनी माँ को खोने के बावजूद अपना साहस बनाए रखा और स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनकी तस्वीर उठाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "उस पल ने हम सभी को भावुक कर दिया।"

एथलीटों के संघर्ष और जीत को बेहद प्रेरणादायक बताते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत यात्रा और देश के विकास की यात्रा में काफी समानता है। श्री मोदी ने कहा, "आज आपके प्रयास और देश के प्रयास मिलकर ऐसी शक्ति बन रहे हैं, जिसे कोई रोक नहीं सकता।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह एथलीटों ने मुश्किलों के आगे हार नहीं मानी, उसी तरह देश ने भी अपनी व्यवस्था में बड़े बदलाव करने का संकल्प लिया, ताकि युवाओं की प्रतिभा बेकार न जाए। इससे युवा खिलाड़ियों में यह भरोसा जगा है कि देश पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा है। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, जूडो और पावरलिफ्टिंग में भारत के बढ़ते दबदबे का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि एशियन पैरा गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने वाले 61 खिलाड़ियों में से 36 ने पदक जीते, जबकि संदीप ने अपने पहले ही प्रयास में विश्व कीर्तिमान बना दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "युवाओं की यह भागीदारी आज के भारत की तस्वीर भी है और भविष्य के भारत का ऐलान भी।"

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि सरकार खेलों को केवल राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के रूप में नहीं देखती, बल्कि इसे व्यक्तित्व विकास और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को जीवन के जरूरी मूल्य सिखाते हैं। श्री मोदी ने कहा, "खेल ही युवाओं को सिखाते हैं कि हारने के बाद कैसे जीतना है, और अनुशासन तथा टीम भावना का असली मतलब क्या होता है।"

प्रधानमंत्री ने स्कूल और जमीनी स्तर के अभियानों, कई 'खेलो इंडिया केंद्रों' और 'TOPS' (टॉप्स) योजना के अंतर्गत ओलिंपिक-स्तर के प्रशिक्षण के माध्यम से आधुनिक खेल इकोसिस्टम बनाने के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने लाल किले से युवाओं को ओलिंपिक को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रव्यापी 'टैलेंट हंट' (प्रतिभा खोज) अभियान में भाग लेने के लिए दिए गए अपने हालिया आह्वान को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "इसी विजन के साथ, हम देश के लिए आधुनिक खेल इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि इन राष्ट्रीय योजनाओं में पैरा-स्पोर्ट्स (दिव्यांग खिलाड़ियों के खेल) को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि खिलाड़ी बड़े वैश्विक आयोजनों में शानदार प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने हाल ही में हुए टूर्नामेंट में मिले ठोस नतीजों की ओर संकेत करते हुए कहा, "इस प्रतियोगिता में, TOPS से मदद पाने वाले खिलाड़ियों ने 41 पदक जीते और 'खेलो इंडिया' के खिलाड़ियों ने 19 पदक जीते। इससे पता चलता है कि हमारे प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत की आधुनिक खेल नीतियां खेल के मैदान के बाहर भी युवाओं के लिए कई तरह के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने खेल बुनियादी ढांचे के निर्माण, खेल उपकरणों के निर्माण और प्रसारण (ब्रॉडकास्टिंग) अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार का ज़िक्र किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज भारत की आधुनिक खेल नीतियां, खेल की दुनिया में युवाओं के लिए मैदान के बाहर भी कई नए अवसर उपलब्ध करा रही हैं।"

प्रधानमंत्री ने 1,800 करोड़ रुपये से अधिक की 'खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (खेल उपकरण विनिर्माण योजना) को हाल ही में मिली मंजूरी का जिक्र किया। उन्होंने घरेलू खेल उपकरण निर्माता उद्योग से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि दुनिया भर के खिलाड़ी 'मेड इन इंडिया' (भारत में बने) उपकरण, कपड़े और जूते पहनकर मैदान में उतरें। इससे एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) मजबूत होंगे और छोटे शहरों तथा ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम चाहते हैं कि भारत न केवल विश्व स्तरीय खिलाड़ी तैयार करे, बल्कि विश्व स्तरीय खेल उपकरणों का निर्माण भी करे।" 

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों की अपनी आगामी यात्रा के दौरान युवाओं को खेल के मैदान में जीत हासिल करने और खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के बारे में मार्गदर्शन दें। इसके साथ ही, उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी जिक्र किया। इनमें दिव्यांग पेंशन में बढ़ोतरी, पात्रता की सीमा को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करना, और पेंशन का लाभ 18 साल की उम्र के बजाय जन्म से ही मिलना शुरू होना शामिल है। इसके अलावा, 10,000 शब्दों का 'भारतीय सांकेतिक भाषा शब्दकोश' तैयार करना, सांकेतिक भाषा वाली स्कूली किताबें उपलब्ध कराना, और 'सुगम्य भारत अभियान' के अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाना भी इसमें शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हमारा प्रयास है कि देश के हर दिव्यांग भाई-बहन को सम्मान मिले, समान अवसर मिलें और वे अपनी क्षमताओं के दम पर जीवन में आगे बढ़ सकें।"

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को याद दिलाया कि आइची-नागोया का मंच कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि शुरुआती पड़ाव है। भारत की नज़रें अब लॉस एंजिल्स 2028 खेलों पर हैं, जिसके लिए अवनि और मनीष पहले ही कोटा हासिल कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से अपनी जीत का उत्सव मनाने और 2028 में रिकॉर्ड भागीदारी और ज़्यादा से ज़्यादा पदक जीतने की तैयारी अभी से शुरू करने को कहा। अंत में उन्होंने खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दीं। श्री मोदी ने कहा, "पूरा देश आपके साथ है और आपकी अगली जीत की प्रतीक्षा कर रहा है।"

 

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