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भारतीय वायुयान नियम, 2026: भारत के आसमान के लिए एक आधुनिक नियमावली

प्रविष्टि तिथि: 04 NOV 2026 6:11PM by PIB Delhi

 भारत में नागर विमानन क्षेत्र और नए नियमों की आवश्यकता

भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे नागर विमानन बाजारों में से एक है। यहां हवाई यात्रा के माध्यम से बड़े शहरों, छोटे कस्बों और दूर-दराज के क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जा रहा है। देश के उड्डयन नेटवर्क के विस्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2014 में 74 हवाई अड्डे परिचालन में थे, जबकि अक्टूबर 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 166 हो गई। इस क्षेत्र के निरंतर विस्तार के साथ इसके नियामक ढांचे को भी विमानन प्रौद्योगिकी, संचालन और वित्तपोषण में हो रहे बदलावों के अनुरूप विकसित करना आवश्यक है। इस पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए एक स्पष्ट, आधुनिक और सुरक्षा-केंद्रित कानूनी ढांचे की आवश्यकता है। ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ इस आधुनिकीकरण का कानूनी आधार प्रदान करता है। इसी के तहत सरकार ने ‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं, जिन्होंने दशकों से लागू ‘वायुयान नियम, 1937’ का स्थान लिया है। ये नए नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे। इनमें सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक शर्तों को बरकरार रखते हुए नागरिक उड्डयन क्षेत्र में हुए नवीनतम बदलावों को भी शामिल किया गया है।

इन नियमों में विमान के डिजाइन और प्रमाणन के लिए अधिक स्पष्ट ढांचा निर्धारित किया गया है। इसके तहत विमान के डिजाइन को मान्यता देने और उसके कलपुर्जों के विनिर्माण की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। इससे डिजाइनकर्ता देश के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। नियमों में आंशिक का भी प्रावधान है। इसके तहत एक विमान का स्वामित्व कई व्यक्तियों या संस्थाओं के पास हो सकता है, जबकि उसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ‘विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण अधिनियम, 2025’ भारत में विमान पट्टे के लिए ‘केप टाउन कन्वेंशन’ के ढांचे को लागू करता है। इसके साथ ही, ‘अपरिवर्तनीय पंजीकरण-समाप्ति एवं निर्यात अनुरोध प्राधिकरण’ (आईडीईआरए) व्यवस्था के तहत विमान का पंजीकरण समाप्त करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है और पात्र विमानों के निर्यात को सुगम बनाया गया है। समय के साथ, इन उपायों से विमान खरीदने और पट्टे पर लेने की लागत कम हो सकती है, जिससे हवाई किरायों पर पड़ने वाला दबाव भी घट सकता है। इन नियमों का उद्देश्य एयरलाइनों को व्यावसायिक लचीलापन प्रदान करने, कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने और यात्रियों के हितों की रक्षा करने के बीच संतुलन स्थापित करना है। इनके तहत हवाई किरायों और उनसे जुड़े शुल्कों में अधिक पारदर्शिता को बढ़ावा देकर यात्रियों के हितों की सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया गया है। साथ ही, असाधारण परिस्थितियों में केंद्र सरकार को उचित कदम उठाने का अधिकार भी दिया गया है।

‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ में कुल 220 नियम हैं, जिन्हें आठ अध्यायों और छह अनुसूचियों में विभाजित किया गया है। इनमें विमान पंजीकरण, उड़ान-योग्यता, कार्मिकों के लाइसेंस, हवाई अड्डों का संचालन, हवाई नेविगेशन सेवाओं और विमान संचालन जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इन नियमों में नियामक निगरानी, सुरक्षा प्रबंधन, नियमों के अनुपालन और दंड से संबंधित प्रावधान भी किए गए हैं। ये नियम ‘वायुयान नियम, 1937’ और ‘वायुयान नियम, 1920’ के भाग-IX का स्थान लेंगे। साथ ही, कुछ विशेष बचत प्रावधानों के अधीन, ‘रेडियो टेलीफोन ऑपरेटर (प्रतिबंधित) प्रमाणपत्र और लाइसेंस नियम, 2025’ को भी निरस्त करेंगे।

 भारतीय वायुयान नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधान

इन नियमों में नागरिक उड्डयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। इनमें विमान के डिजाइन और चालक दल के लाइसेंस से लेकर हवाई अड्डों के संचालन तथा दैनिक उड़ान परिचालन तक के विषय शामिल हैं। इनके प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:

सामान्य सुरक्षा एवं सार्वजनिक आचरण

ये नियम विमान के उपयोग, पंजीकरण, पहचान और सुरक्षित संचालन से जुड़ी आवश्यकताएं तय करते हैं।

  • विमान पंजीकरण: प्रत्येक विमान का पंजीकरण कराना और उस पर निर्धारित राष्ट्रीयता एवं पंजीकरण चिह्न प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
  • विमान संबंधी दस्तावेज: विमान में पंजीकरण प्रमाण-पत्र, उड़ान-योग्यता प्रमाण-पत्र तथा परिचालन से संबंधित अन्य निर्धारित दस्तावेज रखना आवश्यक है।
  • प्रतिबंधित वस्तुएं: हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और सैन्य सामग्री के परिवहन के लिए निर्धारित अनुमति लेना अनिवार्य है।
  • प्रतिबंधित एवं निषिद्ध क्षेत्र: कुछ विशेष क्षेत्रों में विमानों के परिचालन को विनियमित किया गया है।
  • फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी: हवाई अड्डों पर और उड़ान के दौरान विमान से फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी करने के लिए निर्धारित अनुमतियां लेना आवश्यक है।
  • उड़ान सुरक्षा: इसमें सुरक्षित उड़ान परिचालन, खतरनाक तरीके से उड़ान भरने पर रोक, आपातकालीन स्थितियों से निपटने, संकटग्रस्त विमानों और विमानन नियमों के अनुपालन से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
  • विमान सुरक्षा: इसमें चालक दल के सदस्यों पर हमला करने या उनके कार्य में बाधा डालने, गैर-कानूनी गतिविधियों तथा विमान की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले आचरण से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
  • अन्य परिचालन प्रतिबंध: इन नियमों में विमान में ईंधन भरने, विमान से वस्तुएं गिराने, पैराशूटिंग, जानवरों के परिवहन और अन्य विनियमित गतिविधियों से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। इसके अलावा, शोर नियंत्रण के तहत भारत के ऊपर ऐसे नागरिक विमानों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है, जो ध्वनि की तीव्र तरंगें उत्पन्न करते हैं।

विमान डिजाइन, विनिर्माण और उड़ान-योग्यता

इन नियमों में विमानों और वैमानिक उत्पादों के डिजाइन एवं प्रमाणन, उनके विनिर्माण, उड़ान-योग्यता तथा रखरखाव से संबंधित आवश्यकताओं को भी शामिल किया गया है, जिनमें भारत में डिजाइन किए गए उत्पाद भी शामिल हैं।

  • टाइप प्रमाणन: डीजीसीए भारत में डिजाइन किए गए विमानों, इंजनों और प्रोपेलरों के लिए टाइप प्रमाण-पत्र जारी कर सकता है। निर्धारित शर्तों के अधीन विदेशी टाइप प्रमाण-पत्रों को मान्यता भी दे सकता है या स्वीकार कर सकता है।
  • उड़ान-योग्यता निर्देश: यदि किसी विमान या वैमानिक उत्पाद में ऐसी असुरक्षित स्थिति सामने आती है, जिसका प्रभाव उसी डिजाइन वाले अन्य उत्पादों पर भी पड़ सकता है, तो डीजीसीए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है। कुछ विशेष अपवादों को छोड़कर, इन निर्देशों के मसौदे आमतौर पर 30 दिनों के लिए डीजीसीए की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं, ताकि संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जा सकें।
  • भारतीय तकनीकी मानक आदेश: विमान के ऐसे कलपुर्जों को, जो नियम 27 से 33 के दायरे में नहीं आते, डीजीसीए द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का अनुपालन करना होगा।
  • कलपुर्जों का डिजाइन एवं विनिर्माण: डीजीसीए उड़ान-योग्यता संबंधी निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करने वाले विमान के कलपुर्जों के डिजाइन और विनिर्माण को अधिकृत कर सकता है।
  • उड़ान-योग्यता प्रमाणन: इसमें उड़ान-योग्यता प्रमाण-पत्र, विशेष उड़ान-योग्यता प्रमाण-पत्र और उड़ान-योग्यता समीक्षा प्रमाण-पत्र जारी करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
  • शोर प्रमाणन: डीजीसीए निर्धारित आवश्यकताओं के अनुरूप विमानों के लिए शोर प्रमाण-पत्र जारी कर सकता है।
  • निरीक्षण एवं रखरखाव: इन नियमों में विमानों के निरीक्षण, समय-समय पर ओवरहॉल, संशोधन, मरम्मत और रखरखाव प्रमाणन की प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं।
  • रखरखाव संबंधी रिकॉर्ड: विमानों, इंजनों, प्रोपेलरों और अन्य निर्धारित उपकरणों की लॉगबुक तथा लॉग रिकॉर्ड का रखरखाव अनिवार्य किया गया है।
  • मान्यता प्राप्त संगठन: डीजीसीए विमान डिजाइन, विनिर्माण, रखरखाव और इनसे जुड़ी गतिविधियों में शामिल संगठनों को निर्धारित मानदंडों के आधार पर मान्यता दे सकता है। ऐसे संगठनों को डीजीसीए की निगरानी में भी रहना होगा।
  • विदेशी संगठन: डीजीसीए विमानों, इंजनों और कलपुर्जों के रखरखाव के लिए विदेशी मान्यता प्राप्त संगठनों को भी स्वीकार कर सकता है, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों को पूरा करते हों।

नियमों में विमान के उपकरणों, रेडियो यंत्रों, वजन और संतुलन, खराब पुर्जों तथा रखरखाव प्रमाणन के लिए भी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं।

विमान पंजीकरण और पहचान

ये नियम विमान के पंजीकरण, पहचान, स्वामित्व में बदलाव और पंजीकरण रिकॉर्ड के रखरखाव के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करते हैं।

  • पंजीकरण की श्रेणियां: स्वामित्व, नागरिकता, व्यावसायिक पंजीकरण और पट्टे से संबंधित निर्धारित मानदंडों के आधार पर विमानों को श्रेणी ‘ए’ या ‘बी’ के तहत पंजीकृत किया जा सकता है।
  • पंजीकरण प्रमाण-पत्र: इन नियमों में विमान के पंजीकरण प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करने और उसे जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसमें आयातित विमानों के लिए अस्थायी पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने का प्रावधान भी शामिल है।
  • स्वामित्व में बदलाव: विमान के स्वामित्व या पट्टादाता में किसी भी बदलाव की सूचना तत्काल देना अनिवार्य है। पंजीकरण संबंधी सभी आवश्यकताएं पूरी होने तक विमान का परिचालन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, डीजीसीए से लिखित अनुमति मिलने पर इसमें छूट दी जा सकती है।
  • पंजीकरण रद्द करना और पंजीकरण समाप्ति: निर्धारित परिस्थितियों में विमान का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। आईडीईआरए धारकों की ओर से पंजीकरण रद्द करने के लिए प्राप्त वैध आवेदनों पर निर्धारित शर्तों के अनुसार पांच कार्य दिवसों के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
  • निर्यात और विमान रजिस्टर: विमान का पंजीकरण समाप्त होने के बाद उसके निर्यात के लिए आवश्यक प्रावधान किए गए हैं। डीजीसीए भारत में पंजीकृत विमानों का एक रजिस्टर रखेगा, जिसे निर्धारित शर्तों के अधीन आम जनता देख सकेगी।
  • पंजीकरण चिह्न: प्रत्येक विमान पर राष्ट्रीयता चिह्न ‘वीटी’ के बाद एक हाइफन और तीन निर्धारित बड़े अंग्रेजी अक्षर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। पंजीकरण चिह्नों को निर्धारित अवधि के लिए आरक्षित कराने का प्रावधान भी है।
  • सरकारी चिह्न और राष्ट्रीय ध्वज: गैर-सरकारी विमानों पर उन चिह्नों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा, जो सरकारी विमानों के लिए आरक्षित हैं। राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन ‘भारत की ध्वज संहिता’ के प्रावधानों के अनुसार किया जा सकता है।
  • मोड-एस एड्रेस: भारत में पंजीकृत या पंजीकरण के लिए प्रस्तावित ऐसे विमानों को, जिनमें ‘मोड-एस ट्रांसपोंडर’ लगा है, निर्धारित शर्तें पूरी करने पर डीजीसीए द्वारा ‘मोड-एस एड्रेस’ जारी किया जा सकता है।

ये नियम लागू अंतरराष्ट्रीय विमानन व्यवस्थाओं के तहत विमान के पंजीकरण और पंजीकरण रद्द करने के बारे में भी बताते हैं।

कार्मिकों का लाइसेंस और योग्यता

इन नियमों में लाइसेंस, रेटिंग और प्रमाणपत्रों की 23 श्रेणियां बताई गई हैं। इनमें विमानन कर्मियों के लिए योग्यता, मेडिकल फिटनेस, प्रशिक्षण, अनुभव और क्षमता संबंधी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं। इसके मुख्य प्रावधानों में कर्मियों के चार समूह शामिल हैं:

1. पायलट और फ्लाइट इंजीनियर

  • विद्यार्थी पायलट, निजी पायलट, वाणिज्यिक पायलट और एयरलाइन परिवहन पायलटों के साथ-साथ फ्लाइट इंजीनियरों एवं फ्लाइट नेविगेटरों के लिए लाइसेंस संबंधी आवश्यकताएं।
  • न्यूनतम आयु और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित मानदंड।
  • चिकित्सा फिटनेस के मानक और समय-समय पर होने वाली स्वास्थ्य जांच।
  • उड़ान अनुभव, परीक्षाएं और योग्यता का आकलन।
  • विमान रेटिंग, लाइसेंस की वैधता और उसका नवीनीकरण।
  • विदेशी लाइसेंसों का सत्यापन और मान्यता।
  • फ्लाइट क्रू की लॉगबुक तथा उड़ान समय का रिकॉर्ड रखना।

2. विमान रखरखाव इंजीनियर

  • लाइसेंस, योग्यता और प्राधिकरण से संबंधित आवश्यकताएं।
  • विदेशी विमान रखरखाव इंजीनियर लाइसेंसों का सत्यापन।
  • रखरखाव कर्मियों की लॉगबुक और उनके कार्य अनुभव का रिकॉर्ड रखना।

3. एयर ट्रैफिक कंट्रोलर

  • लाइसेंस और इकाई-विशिष्ट रेटिंग से संबंधित आवश्यकताएं।
  • प्रशिक्षण, अनुभव और योग्यता का आकलन।
  • चिकित्सा फिटनेस और समय-समय पर योग्यता का मूल्यांकन।
  • लाइसेंस की वैधता, पुनः सत्यापन और नवीनीकरण।
  • निर्धारित लाइसेंस और रेटिंग के तहत अधिकारों का उपयोग करने के लिए अधिकतम आयु सीमा 60 वर्ष।
  • अनुभव का रिकॉर्ड और निर्धारित योग्यता मानकों को बनाए रखना।

4. रेडियो-टेलीफोन ऑपरेटर

  • विमान में लगे रेडियो-टेलीफोन उपकरणों के संचालन के लिए आवश्यक योग्यताएं।
  • सीमित रेडियो-टेलीफोन कार्यों के लिए पात्रता, परीक्षा और लाइसेंस संबंधी प्रावधान।
  • लागू प्रमाण-पत्रों और लाइसेंसों की मान्यता तथा उनका नवीनीकरण।

इन नियमों की पहली अनुसूची में विमान कर्मियों के लिए लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं का उल्लेख है। दूसरी अनुसूची में एयर ट्रैफिक सेवाओं से जुड़े कर्मियों के लिए लाइसेंस और योग्यता संबंधी आवश्यकताओं का प्रावधान है।

केबिन क्रू के लिए आवश्यकताएं

भारत में पंजीकृत और यात्रियों के सार्वजनिक परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले विमानों में बैठने की क्षमता के आधार पर निर्धारित संख्या में केबिन क्रू सदस्यों की तैनाती अनिवार्य है। यदि विमान निर्माता ने इससे अधिक संख्या में क्रू सदस्यों की तैनाती निर्धारित की है, तो उसी के अनुसार क्रू उपलब्ध कराना होगा। सभी क्रू सदस्यों के लिए स्वीकृत सुरक्षा प्रशिक्षण और रिफ्रेशर पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य है। इसके अलावा, कोई भी क्रू सदस्य तीन से अधिक प्रकार के विमानों पर सेवाएं नहीं दे सकता। नियमों के अनुसार, 10 से 50 सीटों की क्षमता वाले हवाई जहाजों और 20 से 50 सीटों की क्षमता वाले हेलीकॉप्टरों में कम से कम एक केबिन क्रू सदस्य होना आवश्यक है। 50 से अधिक सीटों की क्षमता वाले विमानों में कम से कम दो केबिन क्रू सदस्य होने चाहिए। वहीं, 99 से अधिक सीटों की क्षमता वाले विमानों में प्रत्येक अतिरिक्त 50 सीटों या उसके किसी भी हिस्से के लिए एक अतिरिक्त क्रू सदस्य की तैनाती अनिवार्य है।

हवाई अड्डे और जमीनी बुनियादी ढांचा

ये नियम एयरोड्रोम सुविधाओं, सुरक्षा और परिचालन प्रबंधन के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करते हैं। मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:

  • प्रकाश संबंधी सुरक्षा: विमानन संबंधी लाइटें लगाने के लिए आवश्यक मंजूरी लेना अनिवार्य है। हवाई अड्डों के पांच नॉटिकल मील के दायरे में ऐसी लाइटों के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाता है, जिनसे पायलटों को भ्रम हो सकता है। वहीं, हवाई अड्डे के दस नॉटिकल मील के दायरे में लेजर का इस्तेमाल करने के लिए हवाई अड्डा संचालक से लिखित अनुमति लेना आवश्यक है।
  • हवाई अड्डे का लाइसेंस: हवाई अड्डों को सार्वजनिक या निजी उपयोग के लिए लाइसेंस दिया जा सकता है। इसके लिए भारतीय नागरिक, पात्र कंपनियां, सरकारी संस्थाएं, पंजीकृत समितियां और ट्रस्ट आवेदन कर सकते हैं।
  • हवाई अड्डा मैनुअल: लाइसेंस धारकों के लिए हवाई अड्डा मैनुअल रखना अनिवार्य है। साथ ही, उन्हें हवाई अड्डे को इस स्थिति में बनाए रखना होगा कि वहां विमानों का संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।
  • सुविधाओं में बदलाव: लैंडिंग क्षेत्रों, इमारतों या अन्य संरचनाओं में ऐसा कोई भी बदलाव करने से पहले डीजीसीए की मंजूरी लेना आवश्यक है, जिससे विमान संचालन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
  • निरीक्षण और पहुंच: डीजीसीए द्वारा अधिकृत कर्मचारी हवाई अड्डे की सुविधाओं, उपकरणों, रिकॉर्ड और सुरक्षा प्रबंधन प्रणालियों का निरीक्षण कर सकते हैं।
  • शुल्क और फीस: हवाई अड्डों पर लगाए जाने वाले शुल्कों को विनियमित किया जाता है। भारतीय विमानों और संबंधित देशों के विमानों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। यात्रियों से निर्धारित दरों के अनुसार सेवा शुल्क और उपयोगकर्ता विकास शुल्क लिया जा सकता है।
  • प्रवेश और आवाजाही वाले क्षेत्र: टर्मिनल के निर्धारित हिस्सों में प्रवेश के लिए, कुछ विशेष छूटों को छोड़कर, प्रवेश टिकट या अधिकृत पास होना आवश्यक है। प्रतिबंधित आवाजाही वाले क्षेत्रों में प्रवेश के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है।
  • वन्यजीवों से जुड़े खतरों पर नियंत्रण: हवाई अड्डों के दस किलोमीटर के दायरे में जानवरों का वध करने, कचरा फेंकने या ऐसी कोई भी गतिविधि करने पर प्रतिबंध है, जिससे जंगली जानवर आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि, नियमों में कुछ विशेष अपवाद भी निर्धारित हैं।
  • ग्राउंड हैंडलिंग: एयरलाइंस पात्र ग्राउंड हैंडलिंग सेवा प्रदाताओं की सेवाएं ले सकती हैं। इसके लिए सेवा प्रदाताओं के पास आवश्यक मंजूरी और सुरक्षा संबंधी स्वीकृति होनी चाहिए तथा उन्हें निर्धारित सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा।

वायु नेविगेशन सेवाएं

ये नियम हवाई नेविगेशन सेवाओं के लिए एक विनियामक ढांचा स्थापित करते हैं, जिसमें हवाई यातायात प्रबंधन और उससे जुड़ी तकनीकी सेवाएं शामिल हैं। मुख्य प्रावधानों में ये शामिल हैं:

  • एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट: सुरक्षित, कुशल और निर्बाध हवाई यातायात सेवाएं प्रदान करना, हवाई क्षेत्र का प्रबंधन करना तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के लिए ड्यूटी की अवधि और न्यूनतम विश्राम समय से संबंधित आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करना।
  • संचार, नेविगेशन और निगरानी: निर्धारित संचार, नेविगेशन और निगरानी सुविधाओं का प्रमाणन एवं रखरखाव करना। इसके साथ ही, वॉयस कम्युनिकेशन, संदेशों, सिग्नलों और डेटा का रिकॉर्ड रखना।
  • मौसम संबंधी सेवाएं: विमानन के लिए मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना और उससे जुड़े रिकॉर्ड कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखना, ताकि पूछताछ और जांच के दौरान उनका उपयोग किया जा सके।
  • इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट प्रोसीजर का डिजाइन: इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट प्रोसीजर का डिजाइन डीजीसीए द्वारा अनुमोदित मानदंडों के अनुरूप होना चाहिए। इन्हें प्रकाशित करने, इनमें बदलाव करने या वापस लेने से पहले डीजीसीए की मंजूरी लेना आवश्यक है।
  • खोज और बचाव अभियान: पड़ोसी देशों के साथ खोज और बचाव अभियानों के संचालन के लिए समझौते करना तथा बचाव समन्वय केंद्रों (रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर्स) के बीच आपसी सहयोग सुनिश्चित करना।

तीसरी अनुसूची वैमानिक दूरसंचार सुविधाओं और उनसे संबंधित नियमावलियों के लिए आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करती है।

विमान संचालन

ये नियम अनुसूचित और गैर-अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं, निजी विमानों तथा विशेष विमानन गतिविधियों के लिए परिचालन संबंधी आवश्यकताएं निर्धारित करते हैं। मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:

  • उड़ान परमिट और पासपोर्ट: भारत में पंजीकृत विमानों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के लिए निर्धारित परमिट लेना आवश्यक है। विमान से भारत आने वाले व्यक्तियों के पास लागू आव्रजन नियमों के अनुसार वैध पासपोर्ट होना चाहिए।
  • क्रू की थकान और कार्यक्षमता: इन प्रावधानों में उड़ान और ड्यूटी के समय की सीमाएं, न्यूनतम विश्राम अवधि तथा थकान प्रबंधन से संबंधित नियम शामिल हैं। क्रू सदस्यों के लिए उड़ान से 12 घंटे पहले और उड़ान ड्यूटी के दौरान शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन करना प्रतिबंधित है।
  • विमान में सुरक्षा और आचरण: विमान में पायलट-इन-कमांड का अंतिम अधिकार होता है। घरेलू हवाई परिवहन सेवाओं में शराब का सेवन प्रतिबंधित है। इसके अलावा, विमान के भीतर धूम्रपान और कुछ अन्य गतिविधियों पर भी निर्धारित प्रतिबंध लागू होते हैं।
  • एयर ऑपरेटर प्रमाण-पत्र: अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं के संचालन के लिए निर्धारित अनुमतियां और प्रमाण-पत्र लेना आवश्यक है। इसके तहत स्वामित्व, नियंत्रण, सुरक्षा और संरक्षा से संबंधित शर्तों का पालन करना होता है।
  • चार्टर सेवाएं, हवाई कार्य और विदेशी एयरलाइंस: गैर-अनुसूचित हवाई परिवहन सेवाओं और हवाई कार्यों के संचालन के लिए निर्धारित परमिट या प्राधिकरण लेना आवश्यक है। विदेशी एयरलाइंस को भी लागू अनुमतियों, समझौतों और परिचालन शर्तों का पालन करना होता है।
  • हवाई किराया और टैरिफ: एयरलाइंस को परिचालन लागत सहित अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर किराया निर्धारित कर उसे डिजिटल माध्यम से प्रकाशित करना होता है। अनुसूचित ऑपरेटरों को निगरानी के लिए अपना टैरिफ डीजीसीए के पास जमा करना अनिवार्य है। बुकिंग वेबसाइटों और टिकटों पर कुल देय राशि के साथ किराए, करों, शुल्कों और अन्य प्रभारों का पूरा विवरण देना होता है। विशेष परिस्थितियों में, केंद्र सरकार जनहित में उचित और समयबद्ध निर्देश जारी कर सकती है।
  • विमान का स्वामित्व और आयात: इन प्रावधानों के तहत विमानों के आयात, आंशिक स्वामित्व और निजी विमानों के संचालन को विनियमित किया जाता है। नियमों में विशेष रूप से अनुमति दिए जाने के अलावा, निजी विमानों का उपयोग किराए पर या मुनाफा कमाने के लिए नहीं किया जा सकता। नियम आंशिक स्वामित्व को भी मान्यता देते हैं, जिसके तहत किसी विमान में कई पक्ष साझा निवेश कर सकते हैं। इसके साथ ही, विमान के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं।
  • इंजीनियरिंग, निरीक्षण और मैनुअल: विमान मालिकों और ऑपरेटरों को रखरखाव, निरीक्षण, रिकॉर्ड रखने तथा मैनुअल से संबंधित निर्धारित आवश्यकताओं का पालन करना होता है।
  • क्षेत्रीय हवाई संपर्क कोष: केंद्र सरकार क्षेत्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक कोष स्थापित कर सकती है। इसके लिए घरेलू अनुसूचित उड़ानों पर शुल्क लगाया जा सकता है। इस कोष में राज्य सरकारों और अन्य निर्धारित स्रोतों से भी योगदान प्राप्त किया जा सकता है।
  • शुल्क और लेवी: इन प्रावधानों के तहत विमानन सुरक्षा शुल्क वसूला जा सकता है। इसके अलावा, नियामक परमिट, प्राधिकरण, अनुमोदन और अन्य सेवाओं के लिए भी शुल्क निर्धारित किए गए हैं।

नियामक निगरानी, ​​पर्यवेक्षण और प्रवर्तन     

ये नियम विनियामक निगरानी, ​​विमानन सुरक्षा प्रबंधन, अनुपालन और प्रवर्तन के लिए आवश्यकताएं निर्धारित करते हैं। मुख्य प्रावधानों में शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय मानक: डीजीसीए, अधिनियम और नियमों के दायरे में रहते हुए, शिकागो कन्वेंशन और इसके अनुबंधों के अनुरूप मानक और प्रक्रियाएं निर्धारित कर सकता है।
  • राज्य सुरक्षा कार्यक्रम: डीजीसीए को विमानन सुरक्षा में सुधार के लिए आवश्यकताओं और गतिविधियों से संबंधित एक एकीकृत कार्यक्रम तैयार करना और उसकी निगरानी करना अनिवार्य है।
  • नियामक निर्देश: डीजीसीए ‘नोटिस टू एयरमेन’ (एनओटीएएम), ‘एयरोनॉटिकल इन्फॉर्मेशन पब्लिकेशन्स’, ‘एयरोनॉटिकल इन्फॉर्मेशन सर्कुलर्स’ और ‘सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स’ (सीएआर) के माध्यम से निर्देश जारी कर सकता है।
  • हितधारकों से परामर्श: सीएआर के मसौदे आमतौर पर 30 दिनों के लिए डीजीसीए की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाने चाहिए, ताकि हितधारक उन पर आपत्तियां और सुझाव दे सकें। हालांकि, जनहित में लिखित आदेश के माध्यम से इस परामर्श अवधि को कम किया जा सकता है या इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
  • सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली: निर्धारित विमान ऑपरेटरों, हवाई अड्डों, डिजाइन एवं विनिर्माण संगठनों, रखरखाव संगठनों, प्रशिक्षण संगठनों और एयर ट्रैफिक सेवा प्रदाताओं के लिए सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली बनाए रखना अनिवार्य है।
  • सुरक्षा रिपोर्टिंग: डीजीसीए को अनिवार्य और स्वैच्छिक सुरक्षा रिपोर्टिंग प्रणालियां स्थापित करनी होंगी। स्वैच्छिक रिपोर्टिंग प्रणाली में रिपोर्ट देने वालों को दंड से संरक्षण दिया जाएगा और उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
  • निरीक्षण और पहुंच: डीजीसीए द्वारा अधिकृत कर्मचारी विमानों और विमानन सुविधाओं का निरीक्षण कर सकते हैं। इसमें बिना पूर्व सूचना के किए जाने वाले निरीक्षण भी शामिल हैं। ऐसे कर्मचारियों को निरीक्षण के लिए निर्धारित पहुंच अधिकार प्राप्त होंगे।
  • रिकॉर्ड की सत्यता: लॉगबुक में धोखाधड़ी से प्रविष्टियां करना या अपने लाइसेंस अथवा अनुमोदन दूसरों को सौंपना प्रतिबंधित है। निरीक्षण के दौरान मांगे जाने पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
  • निलंबन और प्रतिबंध: नियमों का पालन न करने या सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं होने जैसी निर्धारित परिस्थितियों में लाइसेंस, प्रमाण-पत्र, प्राधिकरण और अनुमोदनों को निलंबित या रद्द किया जा सकता है अथवा उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
  • प्रतिनिधि-नियुक्ति और छूट: केंद्र सरकार, ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के प्रावधानों के अनुसार, कुछ विशिष्ट शक्तियां अन्य प्राधिकरणों या व्यक्तियों को सौंप सकती है और निर्धारित मामलों में छूट प्रदान कर सकती है।

 

अपराध, दंड और अपीलें

ये नियम व्यापार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। साथ ही, ये विमानन सुरक्षा के कड़े मानकों को बनाए रखते हुए एक संतुलित और अनुपालन-केंद्रित नियामक ढांचा प्रस्तुत करते हैं। इन नियमों के तहत 21 ऐसे अपराध निर्धारित किए गए हैं, जिनके लिए दो वर्ष तक की कैद, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। इसके अलावा, 18 अपराध ऐसे हैं, जिनमें समझौते का प्रावधान है। यह नियामक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की दिशा में एक सुविचारित पहल है। नियमों में दंड का एक श्रेणीबद्ध ढांचा भी निर्धारित किया गया है, जिसमें गंभीरता के दस स्तर शामिल हैं। उल्लंघन की प्रकृति तथा उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था की श्रेणी और आकार के आधार पर 10,000 रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, अपील करने का अधिकार, सुनवाई का अवसर व तर्कसंगत आदेश जारी करने जैसे प्रावधान प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करते हैं। इस प्रकार, ये नियम विमानन सुरक्षा व जवाबदेही से समझौता किए बिना नियामक अनुपालन को सरल बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हैं।

 भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा और मानकों को सुदृढ़ बनाना

‘भारतीय वायुयान नियम, 2026’ नागरिक उड्डयन क्षेत्र के प्रमुख पहलुओं को एक अद्यतन नियामक ढांचे के अंतर्गत समाहित करते हैं। इनमें विमानों की उड़ान-योग्यता और रखरखाव, विमानन कर्मियों की योग्यता, हवाई अड्डों की सुरक्षा, वायु नेविगेशन सेवाएं तथा उड़ान संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। सुरक्षा प्रबंधन प्रणालियों, थकान प्रबंधन, अनिवार्य एवं स्वैच्छिक सुरक्षा रिपोर्टिंग तथा नियामक निगरानी से संबंधित प्रावधान परिचालन जोखिमों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करते हैं। इन नियमों में श्रेणीबद्ध दंड, प्रवर्तन संबंधी उपायों और अपील की व्यवस्था भी की गई है, जिससे जवाबदेही व निष्पक्ष नियामक प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलता है। कुल मिलाकर, इन प्रावधानों का उद्देश्य सुरक्षित और विश्वसनीय हवाई यात्रा सुनिश्चित करना, यात्रियों का भरोसा बढ़ाना तथा भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के निरंतर विस्तार को प्रोत्साहित करना है।

 संदर्भ

नागर विमानन मंत्रालय

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पीके/केसी/आरटी/एनके


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