कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को प्रोत्साहन देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए आईआईसीए ने आईएएमसी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
यह सहयोग विशेष क्षमता निर्माण, एमएसएमई मध्यस्थता मदद, नीति की दिशा में अनुसंधान और विकसित भारत@2047 की दिशा में भारत के एडीआर फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा
प्रविष्टि तिथि:
04 NOV 2026 7:08PM by PIB Delhi
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने तेलंगाना सरकार और तेलंगाना उच्च न्यायालय के सहयोग से स्थापित हैदराबाद स्थित स्वायत्त संस्था, इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर (आईएएमसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करने और मध्यस्थता, कॉरपोरेट कार्य और पारस्परिक हित के संबंधित क्षेत्रों में पेशेवर उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक एवं सीईओ, आईआईसीए ने श्री ए. जे. जवाद, सीईओ एवं रजिस्ट्रार, आईएएमसी का स्वागत किया और उनकी उपस्थिति में श्री कर्नल अमनदीप सिंह पुरी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, आईआईसीए और श्री ए. जे. जवाद, सीईओ एवं रजिस्ट्रार, आईएएमसी की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

आईआईसीए के वैकल्पिक विवाद समाधान उत्कृष्टता केंद्र (सीईएडीआर) प्रमुख प्रोफेसर (डॉ.) नवीन सिरोही ने गणमान्यों का स्वागत किया और जानकारी के आदान-प्रदान, पेशेवर विकास और सहयोगात्मक पहलों को प्रोत्साहन देने में संस्थागत साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने मुख्य भाषण में, श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने अनुकूलित अल्पकालिक और दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों, कार्यशालाओं, सेमिनारों और अन्य कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से मध्यस्थों, मध्यस्थों और विवाद समाधान पेशेवरों का एक विशेष समूह बनाने के लिए विकसित भारत@2047 की परिकल्पना की दिशा में आईआईसीए और आईएएमसी के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने आर्थिक विकास, जीडीपी और निर्यात से जुड़े एमएसएमई क्षेत्र में मध्यस्थता के महत्व पर जोर दिया और दोनों संस्थानों की ओर से इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की परिकल्पना की। इसके अलावा, हरियाणा राज्य के 2047 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को क्षेत्रीय सहयोग देने पर विचार किया जा सकता है, जो मजबूत संस्थागत मध्यस्थता और सुलह केंद्र की ओर से निवेशकों के विश्वास के बिना संभव नहीं हो सकता।
श्री ए. जे. जवाद ने अपने विशेष संबोधन में इस विषय पर प्रकाश डाला कि आईएएमसी, आईआईसीए के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है, जिससे भारत में विवाद समाधान तंत्र को प्रोत्साहन देने और मजबूत करने के लिए संरचित कार्यक्रम, संयुक्त पहल और नीति-उन्मुख अनुसंधान विकसित करने हेतु एक-दूसरे की संस्थागत विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ लिया जा सके। उन्होंने कहा कि यह समझौता ज्ञापन मध्यस्थता, सुलह और विवाद समाधान प्रशिक्षण और संस्थागत विकास में व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ाने, सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह का आयोजन वैकल्पिक विवाद समाधान उत्कृष्टता केंद्र (सीईएडीआर) की ओर से वित्त एवं प्रबंधन स्कूल और वैकल्पिक विवाद समाधान उत्कृष्टता केंद्र प्रमुख प्रोफेसर (डॉ.) नवीन सिरोही के मार्गदर्शन में किया गया था।

आईआईसीए और आईएएमसी हैदराबाद के बारे में
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) भारत सरकार के कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। यह कॉरपोरेट प्रशासन, दिवालियापन, नियामक फ्रेमवर्क और इससे संबंधित क्षेत्रों सहित कॉरपोरेट मामलों के विविध क्षेत्रों में अनुसंधान, नीतिगत समर्थन, क्षमता निर्माण और व्यावसायिक विकास के लिए एक राष्ट्रीय संसाधन संस्था के तौर पर कार्य करता है।
हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर (आईएएमसी) एक संस्थागत मंच है जो मध्यस्थता, सुलह और विवाद समाधान के अन्य वैकल्पिक तंत्रों को प्रोत्साहन देने हेतु समर्पित है। यह वैकल्पिक विवाद समाधान में सुलभता और विशेषज्ञता प्रदान करने की दिशा में कार्य करता है।
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पीके/केसी/आरटी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2332848)
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