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उपराष्ट्रपति ने ‘राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026’ का उद्घाटन किया; अंगदान को 'महादान' बताया


उपराष्ट्रपति ने अंगदान की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डाला और ‘वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स’ के पदक विजेताओं को सम्मानित किया

उपराष्ट्रपति ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी मिथकों व गलत धारणाओं को दूर करने का आह्वान किया

‘राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026’ में 570 अंग प्रत्यारोपण करने वाले लोगों और अंगदाताओं ने एक साथ ताड़ासन करके विश्व रिकॉर्ड बनाया

प्रविष्टि तिथि: 01 NOV 2026 2:34PM by PIB Delhi

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026’ का उद्घाटन किया।

सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इन खेलों को साहस, दृढ़ संकल्प, करुणा और जीवन के अनमोल उपहार के उत्सव के रूप में वर्णित किया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए रीनल केयर फाउंडेशन, सर गंगा राम अस्पताल और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) को बधाई दी।

भारत के निस्वार्थ सेवा के सभ्यतागत मूल्यों को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने महर्षि दधीचि के बलिदान को लोक कल्याण के लिए त्याग के एक शाश्वत प्रतीक के रूप में याद किया। उन्होंने अंगदान को एक ऐसा ‘महादान’ बताया, जिसके माध्यम से किसी के चले जाने के बाद भी उम्मीदें बनी रह सकती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में अंगदान आंदोलन को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में दिए गए संबोधनों के माध्यम से इस विषय पर निरंतर बल देने से काफी बढ़ावा मिला है।

इन खेलों को महज एक खेल आयोजन से कहीं बढ़कर बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये आयोजन अंग प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों के दृढ़ संकल्प का उत्सव मनाते हैं और आधुनिक चिकित्सा पद्धति की जीवन बदलने वाली शक्ति को दर्शाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों के साहस, अनुशासन एवं खेल भावना की सराहना की और कहा कि उनकी उपलब्धियां अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे लोगों में आशा जगाती हैं।

उपराष्ट्रपति ने उन दिवंगत अंग दाताओं एवं उनके परिवारों के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की, जिनके निस्वार्थ निर्णयों से दूसरों को जीवन जीने का दूसरा मौका मिलता है। उन्होंने जीवित अंग दाताओं की भी सराहना की, जिन्होंने प्रेम और करुणा के सर्वोत्तम मूल्यों का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक दिवंगत अंग दाता आठ लोगों की जान बचा सकता है।

अंगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इससे जुड़े मिथकों एवं गलत धारणाओं को दूर करने, सोच-समझकर निर्णय लेने को प्रोत्साहित करने और लोगों को अपनी इच्छाओं के बारे में अपने परिवारों से बात करने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल’ इस मिशन को आगे बढ़ाने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करते हैं, क्योंकि ये प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों, अंगदाताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों और उनके परिवारों को एक साथ लाते हैं।

कार्यक्रम के दौरान, उपराष्ट्रपति ने ‘जिंदगी दोबारा’ कैलेंडर जारी किया और जर्मनी के ड्रेसडेन में आयोजित ‘वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2025’ के पदक विजेताओं को सम्मानित किया।

उन्होंने 570 अंग प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों और अंगदाताओं द्वारा एक साथ ताड़ासन करके एक विश्व रिकॉर्ड बनाने के प्रयास को भी देखा। इस सफल प्रयास के बाद, ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, नई दिल्ली’ की ओर से आयोजकों को “अंग प्रत्यारोपण कराने वाले लोगों और अंगदाताओं के ताड़ासन करने के सबसे बड़े समूह” से संबंधित एक प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

उपराष्ट्रपति ने सभा में अंगदान की शपथ लेने में हिस्सा लिया और कबड्डी, टेबल टेनिस तथा बैडमिंटन के प्रदर्शनी मैचों को देखा।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने सभी से अंगदान को साझा मानवता के एक सशक्त प्रतीक के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने एक ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में काम करने का भी आग्रह किया, जहां अधिक मरीजों को प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सके और अंगों की प्रतीक्षा में कम लोगों की जान जाए।

इस कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री प्रतापराव जाधव; लोकसभा सांसद सुश्री बांसुरी स्वराज; सर गंगा राम ट्रस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष तथा एनओटीजी 2026 के मुख्य संरक्षक डॉ. डी. एस. राणा; एनओटीजी 2026 के आयोजन अध्यक्ष डॉ. ए. के. भल्ला; और एनओटीटीओ के निदेशक डॉ. अनिल कुमार सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित  थे।

 

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पीके/केसी/आरटी/आर


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