रक्षा मंत्रालय
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भारतीय वायु सेना 21 अक्टूबर, 2026 को मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के विकास संबंधी रोडमैप पर रक्षा उद्योग जगत के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित करेगी

प्रविष्टि तिथि: 21 OCT 2026 8:29PM by PIB Delhi

भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने 21 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उद्योग संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप व उद्योग जगत के भागीदारों को मानवरहित तथा स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में वायु सेना की दीर्घकालिक आवश्यकताओं और भावी योजनाओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता एयर मुख्यालय में महानिदेशक (हथियार प्रणालियां) एयर मार्शल प्रेमकुमार के. वीएम, वीएसएम ने की। इसमें विभिन्न ड्रोन कंपनियों और उद्योग भागीदारों के लगभग 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम भारतीय वायु सेना और देश के मानवरहित प्रणालियों से जुड़े उद्योग जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस आयोजन ने भारतीय वायु सेना को अपनी परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और तकनीकी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान किया। यह पहल 14 सितंबर, 2026 को पोखरण में आयोजित आईएएफ ड्रोनथॉन 2026 के दौरान जारी किए गए ‘भारतीय वायु सेना के मानवरहित एवं स्वायत्त प्रणालियों संबंधी रोडमैप’ पर आधारित थी। कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायु सेना ने अपनी भावी आवश्यकताओं और तकनीकी प्राथमिकताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही, उद्योग जगत के भागीदारों को ‘आईएएफ रोडमैप पुस्तिका’ भी वितरित की गई।

इस रोडमैप से मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में भारतीय वायु सेना की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। आकाश में युद्ध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, इसमें विभिन्न स्तरों पर कार्य करने वाली और नेटवर्क से जुड़ी मानवरहित प्रणालियों के विकास की परिकल्पना की गई है। साथ ही, ऐसी स्वदेशी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया गया है, जो परिचालन की दृष्टि से प्रभावी, विश्वसनीय व मजबूत हों और वर्तमान तथा भविष्य के मानव-संचालित विमानों एवं अन्य प्लेटफॉर्मों की क्षमताओं को बढ़ाने में सहायक बनें।

कार्यक्रम में इस बात पर बल दिया गया कि मानवरहित प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि परिचालन की दृष्टि से अनिवार्य आवश्यकता है। इसके लिए स्वदेशी प्रणोदन प्रणाली, स्वायत्त सॉफ्टवेयर, उन्नत एवं विश्वसनीय नेविगेशन और मानकीकृत इंटरफेस जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई। इन क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को विस्तार देने से विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और देश के रक्षा उद्योग तंत्र को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

रक्षा उद्योग जगत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप व शिक्षण संस्थानों के साथ निरंतर सहयोग के जरिए भारतीय वायु सेना का लक्ष्य नवाचार को बढ़ावा देना, संयुक्त विकास को प्रोत्साहित करना और उभरती प्रौद्योगिकियों को विश्वसनीय परिचालन क्षमताओं में बदलना है। साथ ही, इसका उद्देश्य एक सशक्त घरेलू रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना भी है, जो रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सके।

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