प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एशियाई खेल 2026 में भाग लेने वाले भारतीय एथलीट दल से बातचीत की
हमारे एशियाई खेल चैंपियनों ने तिरंगे को ऊंचा किया है और उसका सम्मान तथा गर्व बढ़ाया है: पीएम
हर क्षेत्र में तिरंगे का गौरव, खेलों में भारत की नई पहचान, हर खेल में नए चैंपियन, और हमारे नाम नए रिकॉर्ड; हम यह करेंगे: पीएम
भारत एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनने के लिए पूरी तरह तैयार है: पीएम
प्रविष्टि तिथि:
15 OCT 2026 7:23PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एशियाई खेल 2026 में भाग लेने वाले भारतीय दल से बातचीत की। उन्होंने एक ही जगह पर इतने सारे पदक जीतने वालों के इकट्ठा होने से बने शानदार माहौल पर बात की। श्री मोदी ने कहा, "आप सभी युवा एथलीट इस बात के उदाहरण हैं कि जब जुनून जीत में बदल जाता है, तो यह पदक के साथ-साथ चेहरों पर भी चमक लाता है।"
140 करोड़ नागरिकों को गर्व दिलाने के लिए एथलीटों की तारीफ करते हुए, प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि सबसे बड़ी कामयाबी राष्ट्रीय झंडे के सम्मान और शान को बढ़ाने में है। उन्होंने खिलाड़ियों, उनके कोच, सहायता देने वाले कर्मी और परिवारों को इस सामूहिक राष्ट्रीय जीत के लिए बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा, "इसलिए, आपकी सफलता सिर्फ़ आपकी नहीं है; यह देश के करोड़ों नागरिकों की भी सफलता है।“
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उनकी जयंती पर याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने दिवंगत राजनेता को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि कैसे डॉ. कलाम का शानदार जीवन और दूरदर्शी सोच देश को रास्ता दिखाती रहती है। श्री मोदी ने कहा, "उनका जीवन और उनका विज़न हम सभी के लिए प्रेरणा है।"
एशियाई खेल में मिली ऐतिहासिक उपलब्धियों को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने पुरुषों और महिलाओं की हॉकी टीमों की दोहरी स्वर्ण जीत का जश्न मनाया, जिसमें महिलाओं ने 44 साल का इंतज़ार खत्म किया, साथ ही दोनों क्रिकेट टीमों ने लगातार पदक जीते और कबड्डी में भी दो स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने तीरंदाजी में पाँच स्वर्ण पदक, शूटिंग, बॉक्सिंग और कुश्ती में शानदार प्रदर्शन, नए एथलेटिक्स रिकॉर्ड, 28 साल बाद भारोत्तोलन में पदक और 1982 के बाद पहली मैराथन सफलता की भी तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा, "इस बार के एशियाई खेल हमारे लिए कई तरह से यादगार रहे हैं।"
भारत के कुल 85 पदक में से 38 पदक जीतने वाली महिला एथलीटों के असाधारण योगदान की तारीफ करते हुए, जिसमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी पदकों की गिनती, आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है और एक मज़बूत नए भारत को दर्शाती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कैसे भारतीय खिलाड़ियों ने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स, सॉफ्ट टेनिस और खास सेलिंग इवेंट्स जैसे खेलों में पहले एशियाई खेल पदक जीतकर इतिहास रचा। श्री मोदी ने कहा, "आज भारत उन खेलों में भी पदक जीत रहा है, जिनमें हमने एशियाई खेल के इतिहास में पहले कभी पदक नहीं जीता था।"
खिलाड़ियों से खेल के मैदान में और भी ज़्यादा ऊंचाइयों को छूने का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने जोश से भरी शपथ दिलाई, जिसमें टीम ने एक साथ "हम कर दिखाएंगे!" का नारा लगाया। उन्होंने उन्हें हर मैदान पर तिरंगे की शान बनाए रखने, देश के लिए एक नई खेल पहचान बनाने और हर खेल में नए चैंपियन बनाने के लिए प्रेरित किया। पीएम मोदी ने कहा, "हमारे नाम और नए रिकॉर्ड, हम यह कर दिखाएंगे!"
प्रधानमंत्री ने इकट्ठा होने की जगह की ओर ध्यान दिलाते हुए एथलीटों को याद दिलाया कि इस स्टेडियम का नाम महान मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा गया है, जो रात में घंटों हॉकी का अभ्यास करते थे। उन्होंने इस आइकॉन के लगातार समर्पण की ओर इशारा करते हुए बताया कि बड़े संकल्पों के लिए सालों तक लगातार धैर्य और कड़ी मेहनत की ज़रूरत होती है। श्री मोदी ने कहा, "उनकी यह कड़ी मेहनत हमें बार-बार याद दिलाती है कि संकल्प और सपने एक दिन में पूरे नहीं होते।"
खेल इकोसिस्टम पर पिछले बारह सालों की मेहनत की तुलना उस पुराने दौर से करते हुए जब भारत ने बस कुछ ही पदक जीते थे और कई खेलों के बारे में अनजान था, प्रधानमंत्री ने याद किया कि कैसे पहले देश का आधे से ज़्यादा ओलंपिक स्पर्धाओं में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। उन्होंने सवाल किया कि देश बिना प्रतियोगिता के मैदान में कदम रखे कभी भी जीत की उम्मीद कैसे कर सकता है। पीएम मोदी ने कहा, "अगर हम प्रतियोगिता ही नहीं करेंगे, तो हम पदक कैसे लाएंगे?"
राष्ट्रीय खेल नीति में एक अहम बदलाव पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक उदासीनता और खुद पर शक को खत्म करने के सरकार के पक्के इरादे पर ज़ोर दिया। उन्होंने आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर रहे भारतीय एथलीटों की संख्या में बढ़ोतरी का जश्न मनाया। श्री मोदी ने कहा, "हमने यह संकल्प लिया है कि हम इस निराशावादी सोच को खत्म करेंगे!"
इस बदलाव का श्रेय पिछले 10 से 12 सालों की दूरगामी सोच और सच्ची कोशिश को देते हुए, प्रधानमंत्री ने टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) और विस्तारित खेलो इंडिया पहल के ज़रिए एक पारदर्शी, आधुनिक खेल इकोसिस्टम बनाने के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि सरकार ने पूरे देश में खेल संघों और स्थानीय कार्यक्रमों को मजबूत करने के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की प्रतिबद्धता जताई है। पीएम मोदी ने कहा, ‘खेलो इंडिया को बढ़ाने और खेल संघों को मजबूत करने के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा आवंटित किए गए हैं।'
प्रधानमंत्री ने हज़ार से अधिक खेलो इंडिया केन्द्रों में जमीनी स्तर की अवसंरचनाओं के तेज़ विस्तार का ज़िक्र किया, और बताया कि शहरों में हर आकार में हजारों नए स्टेडियम, बहुउद्देशीय हॉल, एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल और हॉकी मैदान और स्विमिंग पूल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने एथलीट्स को सीधे वित्तीय सहायता देने पर भी रोशनी डाली, जिसमें टॉप्स के तहत 50,000 रुपये प्रति महीना का जेब-खर्च भत्ता और अंतरराष्ट्रीय कोचिंग के लिए वित्तीय सहायता शामिल हैं। श्री मोदी ने कहा, “अगर किसी खेल में कोचिंग के लिए देश के बाहर जाना जरूरी है, तो सरकार इसे भी सक्षम बना रही है और इसके लिए वित्तीय मदद प्रदान कर रही है।”
शीतकालीन खेलों, संसदीय खेल प्रतियोगिताओं और नई 'खेलो भारत नीति' के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक प्रदर्शन बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने देश का नाम रोशन करने के लिए दिव्यांग खिलाड़ियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की अपनी उपलब्धियां यही साबित करती हैं कि जब खिलाड़ी जानते हैं कि पूरा देश उनके साथ है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा, “आज हर खिलाड़ी में यह आत्मविश्वास है कि देश उनके पूरे सफर में उनके साथ खड़ा है।”
प्रधानमंत्री ने 15 से 17 साल के एथलीटों के शानदार प्रदर्शन को उजागर करते हुए कहा कि कम उम्र में शुरुआत करने से अतिरिक्त फायदा मिलता है। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया और उभरते खेलो इंडिया के माध्यम से 5 से 15 साल के बच्चों की पहचान और प्रशिक्षण पर खास ध्यान दिया जा रहा है। 2028 लॉस एंजेल्स ओलंपिक्स, 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी और 2036 ओलंपिक्स की मेज़बानी की आकांक्षा को देखते हुए, उन्होंने लाल किला से किए गए अपने देशव्यापी गाँव स्तर के प्रतिभा खोज की घोषणा को याद किया। श्री मोदी ने कहा, "ये खिलाड़ी आने वाले समय में भारत के लिए पदक लाएंगे।"
देश के महान संकल्पों के प्रति अडिग विश्वास जताते हुए, प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ एक और जोशीला 'हम कर दिखाएंगे!' का उद्घोष किया। उन्होंने उन्हें विश्व स्तरीय खेल स्पर्धा आयोजित करने, शीर्ष खेल देशों की कतार में शामिल होने, विश्व स्तरीय अवसंरचना बनाने और एक वैश्विक खेल केंद्र बनने जैसे साझा लक्ष्यों के साथ जोड़ा। पीएम मोदी ने कहा, 'भारत के हर कोने से एक चैंपियन, हम कर दिखाएंगे!'
एशियाई खेलों की सफलता को भारतीय युवाओं की बड़ी महत्वाकांक्षाओं से जोड़ते हुए, प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि कैसे युवा नवोन्मेषियों ने भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्टार्टअप इकोसिस्टम में पहुंचाया है और साथ ही अंतरिक्ष, सैटेलाइट तकनीक, रक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नए समाधान पेश किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेलों के जैसे ही छोटे शहरों और गांवों के युवा भी इस उद्यमिता की लहर को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे एक दशक से चल रहे प्रणालीगत सुधारों से समर्थन मिला है। श्री मोदी ने कहा, "उन्हें यह भरोसा है कि अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए देश की पूरी क्षमता उनके साथ है।"
खेलों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के व्यापक आर्थिक असर को विस्तार देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकारी पहलों का फायदा सिर्फ मैदान में प्रतिस्पर्धा करने वालों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने खेल कोचिंग, फिजियोथेरेपी, खेल प्रबंधन और खेल प्रसारण जैसे विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों के तेजी से उभरने को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा, 'इसने युवाओं के लिए नए रोजगार और उद्यम के अवसर बनाए हैं।'
अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव वाले पदक विजेताओं से अगले पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनने की जिम्मेदारी उठाने का आग्रह करते हुए, प्रधानमंत्री ने उनसे स्कूलों का दौरा करने, अपने पुराने खेल मैदानों में लौटने, और अपने गांवों और शहरों के बच्चों से जुड़ने का अनुरोध किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अपने मेहनत से हासिल किए अनुभव साझा करना उन युवा आकांक्षाओं को गहराई से प्रेरित कर सकता है जो उनके नक्शेकदम पर चलने का सपना देख रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “शायद, आपके एक छोटे से शब्द से किसी बच्चे को खेलों में आगे बढ़ने का साहस मिल सकता है।”
खेल के मैदान से परे एथलेटिक्स के गहरे महत्व पर विचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल जीवनभर का अनुशासन, अनुकूलनशीलता, लंबे समय के लक्ष्यों के प्रति स्थिरता और हार के बाद ऊंचा उठने की क्षमता सिखाते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ये मूल गुण स्वाभाविक रूप से दैनिक जीवन में शामिल हो जाते हैं और हर चुनौती से मुकाबला करने में मदद करते हैं। पीएम मोदी ने कहा, "यही खेल भावना जिंदगीभर काम आती है।"
अपने प्रसिद्ध सूत्र 'जो खेलेगा, वही खिलेगा' से अपने संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के उत्साह की प्रशंसा की और इसे नए भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत, शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना, आत्मनिर्भर भारत, वैश्विक निर्माण केंद्र, तकनीकी नेतृत्व, अंतरिक्ष अन्वेषण और ओलंपिक की मेजबानी जैसी लक्ष्यों को समेटते हुए अंतिम 'हम करेंगे!' का उद्घोष किया। उन्होंने उनके सभी भविष्य की प्रतियोगिताओं और प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने कहा, 'यही आत्मविश्वास लेकर हमें भारत को नई ऊँचाईयों पर ले जाना है।'
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पीके/केसी/आरटी/जेके
(रिलीज़ आईडी: 2324190)
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