जल शक्ति मंत्रालय
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जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत सामुदायिक स्वामित्व, संसाधन स्थिरता और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए जिला कलेक्टरों के 13वें पेयजल संवाद का आयोजन किया गया


उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, तमिलनाडु, ओडिशा और झारखंड के पांच जिलों ने ग्रामीण पेयजल प्रशासन में नवोन्मेषी पद्धतियों का प्रदर्शन किया

प्रविष्टि तिथि: 15 OCT 2026 3:08PM by PIB Delhi

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद के 13वें संस्करण का आयोजन किया। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों/जिला मजिस्ट्रेटों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के मिशन निदेशकों ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने पर विचार-विमर्श किया।

डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक के.के. मीना ने संवाद की अध्यक्षता की। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अपर सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोआन और डीडीडब्ल्यूएस के वरिष्ठ अधिकारी भी संवाद में उपस्थित रहे।

अपने आरंभिक संबोधन में श्री अशोक के.के. मीना ने कहा कि यह मंच सहकर्मी शिक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। यह जिला प्रशासनों को ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण में नवीन तौर-तरीकों को साझा करने और कार्यान्वयन सम्‍बंधी चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने स्थानीय जल प्रशासन को सुदृढ़ करने, ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के प्रभावी संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करने और मिशन के तहत निर्मित संपत्तियों के सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देने में जिला कलेक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।

डीडीडब्ल्यूएस सचिव ने अधिक जवाबदेही और डेटा-आधारित शासन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जिलों को निर्देश दिया कि वे जिला जल एवं स्वच्छता मिशनों (डीडब्ल्यूएसएम) की नियमित मासिक बैठकें सुनिश्चित करें और बैठकों का विवरण डीडब्ल्यूएसएम पोर्टल पर समय पर अपलोड करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए मजबूत संस्थागत निगरानी और दस्तावेजीकरण आवश्यक हैं।

जल सेवा आंकलन से प्राप्त निष्कर्षों के बारे में बताते हुए श्री मीना ने जिलों से डैशबोर्ड पर उपलब्ध कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्टों और जिला सुधार योजनाओं की नियमित समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जल गुणवत्ता और ऊर्जा सम्‍बंधी व्यवधान कई क्षेत्रों में सेवा वितरण को प्रभावित कर रहे हैं। उन्‍होंने राज्यों एवं जिलों से विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं के सौर ऊर्जाकरण की संभावनाओं पर विचार करने का आह्वान भी किया।

उन्होंने भूजल, वर्षा, जल विज्ञान और जल जीवन मिशन के आंकड़ों को एकीकृत करने वाली निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के प्रभावी उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने जिला प्रशासनों को साक्ष्य-आधारित योजना बनाने, जल संकटग्रस्त क्षेत्रों की पहचान करने, स्रोत स्थिरता योजना बनाने और उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता देने के लिए इस मंच का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

पेयजल स्थिरता प्रयासों को अन्य राष्ट्रीय पहलों के साथ एकीकृत करने के बारे में उन्होंने जिलों से आग्रह किया कि वे संवेदनशील क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण, स्रोत संरक्षण और जल संरक्षण उपायों को अपनाने के लिए वीबी-जी राम जी और अन्य कार्यक्रमों के तहत अभिसरण अवसरों का लाभ उठाएं।

सचिव ने इस बात पर भी बल दिया कि जल अर्पण के माध्यम से पेयजल आपूर्ति योजनाओं के औपचारिक हस्तांतरण के बाद, जिलों को जल अर्पण मॉड्यूल के माध्यम से अपने-अपने स्थानीय भाषाओं में प्रमाण पत्र अपने पास रखने होंगे।

श्री कमल किशोर सोआन, एसोसिएट एंड एमडी, एन.जे.जे.एम. ने अपने संबोधन में ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जमीनी स्तर की संस्थाओं को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने पेयजल अवसंरचना के संचालन और रखरखाव में सहयोग हेतु ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी), पंचायत सचिवों और सुजलम शक्ति समूहों के व्यवस्थित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को डीएसएस प्लेटफॉर्म के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। जल संकटग्रस्त क्षेत्रों में स्रोत स्थिरता योजना को मजबूत करना चाहिए और पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के लिए चल रही ग्रामीण विकास पहलों और वीबी-जी राम जी के साथ समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए।

श्री सोआन ने जिलों को उच्च माध्यमिक और वरिष्ठ विद्यालय के छात्रों के लिए बहु-ग्राम जल आपूर्ति योजनाओं, जल उपचार सुविधाओं, प्रयोगशालाओं और एससीएडीए-सक्षम प्रणालियों के के बारे में बताने के लिए दौरे आयोजित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया ताकि युवा नागरिकों में जल अवसंरचना और जल संरक्षण की गहरी समझ विकसित हो सकें।

श्री वाई.के. सिंह, निदेशक (एनजेजेएम), ने जल अर्पण मॉड्यूल पर एक प्रस्तुति दी। इसमें उन्होंने ग्राम पंचायतों और समुदायों को ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं के औपचारिक शुभारंभ और हस्तांतरण को सुनिश्चित करने में इसके महत्व के बारे में बताया। उन्होंने जल अर्पण की तैयारी के प्रमुख चरणों, डीटीयू/डीडब्ल्यूएसएसएम डैशबोर्ड के माध्यम से रिपोर्टिंग और निगरानी ढांचे, और ग्राम पंचायत डैशबोर्ड पर जल अर्पण और हर घर जल प्रमाणीकरण के लिए डिजिटल कार्यप्रणाली की व्याख्या की। इसके साथ ही उन्‍होंने ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से रिपोर्टिंग और प्रमाणीकरण की चरण-दर-चरण प्रक्रिया के बारे में भी मार्गदर्शन किया।

प्रस्तुतियों के माध्यम से जिलों द्वारा साझा की गई नवोन्मेषी सर्वोत्तम पद्धतियां

पेयजल संवाद के दौरान, कुल पांच जिलों ने अपनी प्रगति और सर्वोत्तम जमीनी पद्धतियों को प्रस्तुत किया। इससे अन्य राज्यों के जिलों को जेजेएम 2.0 के तहत बेहतर विकास करने में मदद मिलेगी। प्रत्येक प्रस्तुति सम्‍बंधित जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई।

  • कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश – जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर श्री महेंद्र सिंह तंवर ने नियमित समीक्षा बैठकों, अंतर-विभागीय समन्वय और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सेवा वितरण को सुदृढ़ करने की दिशा में जिले के प्रयासों के बारे में बताया। जिले ने जल संरक्षण, जल गुणवत्ता और पेयजल अवसंरचना के जिम्मेदार उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों, खेल क्लबों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को शामिल करते हुए व्यापक सूचना एवं संचार संचार (आई.ई.सी.) गतिविधियां चलाई हैं। प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवकों द्वारा फील्ड टेस्ट किट का उपयोग करके सामुदायिक जल गुणवत्ता निगरानी को मजबूत किया जा रहा है, जबकि नियमित प्रयोगशाला परीक्षण और गुणवत्ता लेखापरीक्षाएं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक हैं। जिले ने बेहतर सेवा निगरानी के लिए एस.सी.ए.डी.ए.-आधारित प्रणालियों, डिजिटल शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म और जल सारथी एप्लिकेशन सहित प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी तंत्रों के उपयोग को भी प्रदर्शित किया। बेहतर अवसंरचना प्रबंधन और योजना के लिए पेयजल संपत्तियों की जीआईएस-आधारित मैपिंग विकसित करने के प्रयास भी जारी हैं।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के स्क्रीनशॉट में दिखाई गई एआई-जनरेटेड सामग्री गलत हो सकती है।

  • पश्चिम त्रिपुरा, त्रिपुरा - जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर डॉ. विशाल कुमार के प्रस्तुतीकरण में ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पेयजल प्रणालियों के सामुदायिक स्वामित्व और स्थिरता को मजबूत करने पर बल दिया गया। जिले में उपयोगकर्ता शुल्क वसूली में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ग्राम पंचायतों के लिए जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव, स्रोत स्थिरता और निगरानी पर व्यापक क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए गए हैं। स्वयं सहायता समूह जागरूकता पैदा करने, सामुदायिक लामबंदी और सामाजिक लेखापरीक्षा सम्‍बंधी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे जवाबदेही और स्थानीय भागीदारी बढ़ रही है। जल उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए जिला जल संग्रहण संरक्षण, वनरोपण, छतों पर वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और अपशिष्ट जल प्रबंधन उपायों के माध्यम से स्रोत स्थिरता पर विशेष बल दे रहा है। वैज्ञानिक स्रोत मानचित्रण, ग्राम जल सुरक्षा योजनाओं का निर्माण और अन्य विकास कार्यक्रमों के साथ समन्वय दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। जिले ने पेयजल संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने में जल सखियों और स्थानीय संस्थानों की भागीदारी सहित सामुदायिक नेतृत्व वाले प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

  • तंजावुर, तमिलनाडु - जिला कलेक्टर टीएमटी आर. रेवती ने वैज्ञानिक योजना और प्रौद्योगिकी आधारित कदमों के माध्यम से पेयजल सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए नवोन्मेषी उपायों का प्रदर्शन किया। जिले ने वर्तमान और भविष्य की जल मांग का आकलन करने, भूजल संकट की पहचान करने और पुनर्भरण एवं संरक्षण उपायों में निवेश को निर्देशित करने के लिए ग्राम स्तर पर जल बजटिंग अभ्यास किया है। इस अभ्यास में सामुदायिक भागीदारी केंद्रीय रही है, इसमें ग्राम पंचायतें, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति और स्थानीय हितधारक योजना एवं कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। जिले ने दीर्घकालिक जल सुरक्षा में सुधार के लिए भूजल पुनर्भरण, छतों पर वर्षा जल संचयन, जल निकायों का पुनरुद्धार और सूक्ष्म सिंचाई उपायों को भी बढ़ावा दिया है। उन्होंने पेयजल सेवा वितरण में सुधार के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी प्रकाश डाला। इनमें आई.ओ.टी.-सक्षम रीयल-टाइम निगरानी प्रणाली, डिजिटल डैशबोर्ड और जल आपूर्ति प्रदर्शन की निगरानी और नुकसान को कम करने के लिए स्मार्ट प्रवाह-निगरानी तंत्र शामिल हैं। जल गुणवत्ता प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कम लागत वाली जल कीटाणुशोधन प्रणालियां भी शुरू की गई हैं। सचिव ने जल बजटिंग पर जिले के कार्य की सराहना की और उपयुक्त क्षेत्रों में निरंतर ग्रामीण जल आपूर्ति की व्यवहार्यता के आकलन सहित नवोन्मेषी दृष्टिकोणों की खोज को भी प्रोत्साहित किया।

  • बरगढ़ा, ओडिशा – जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर श्री आदित्य गोयल ने ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए जिले के सुनियोजित दृष्टिकोण को साझा किया। इसमें निष्पादन, चालू करना और संचालन एवं रखरखाव को शामिल करते हुए तीन चरण की रूपरेखा अपनाई गई है। मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय ने भूमि, बिजली आपूर्ति, वन मंजूरी और मार्ग के अधिकार सम्‍बंधी अनुमतियों से जुड़े मुद्दों को हल करने में मदद की है। इससे पेयजल अवसंरचना परियोजनाओं में समय पर प्रगति संभव हुई है। रिसाव, अनधिकृत कनेक्शन और प्रभावित अवसंरचना के जीर्णोद्धार जैसे मुद्दों की पहचान और समाधान करने के लिए जिले ने मासिक समीक्षा तंत्र और चालू करने के चरण के दौरान सामुदायिक भागीदारी को संस्थागत रूप दिया है। बरगढ़ा ने सक्रिय शिकायत निवारण व्यवस्था, नियमित क्षेत्र निरीक्षण और आवधिक जल गुणवत्ता निगरानी के माध्यम से सेवा वितरण को और मजबूत किया है। जिले ने आईआईएम संबलपुर को चौबीसों घंटे पाइप से जल आपूर्ति प्रदान करने सहित बड़ी बहु-ग्राम योजनाओं के माध्यम से विश्वसनीय जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय सफलता का उल्लेख किया। यह अनुभव विश्वसनीय पेयजल सेवाएं प्राप्त करने में प्रभावी परियोजना प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और निरंतर निगरानी के महत्व को दर्शाता है।

  • पलामू, झारखंड – जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर श्री दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने पेयजल योजनाओं की कार्यप्रणाली पर दृष्टि बनाए रखने के लिए नियमित समीक्षा बैठकों, एक समर्पित जिला नियंत्रण कक्ष और शिकायत निवारण प्रणालियों सहित मजबूत निगरानी तंत्रों पर प्रकाश डाला। सौंपे जाने के बाद जल आपूर्ति अवसंरचना के प्रभावी संचालन और रखरखाव को सुगम बनाने के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और सामुदायिक स्तर की संस्थाओं की क्षमता निर्माण कार्य चल रहा है। जिले ने जल स्रोत की स्थिरता और सामुदायिक सहभागिता के लिए अभिनव दृष्टिकोण भी प्रदर्शित किए। भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन कार्यों के लिए मनरेगा और अन्य कार्यक्रमों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। आई.ओ.टी.-सक्षम निगरानी प्रणालियां जल आपूर्ति योजनाओं की वास्तविक समय निगरानी में सहायता कर रही हैं। जल सहियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य सहियों के संयुक्त प्रयासों से समुदाय आधारित जल गुणवत्ता निगरानी की जा रही है। जिले ने अपने जलकार भुगतान अभियान पर भी प्रकाश डाला। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह को मजबूत करना और अधिक सामुदायिक स्वामित्व और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण पेयजल अवसंरचना के सतत संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करना है।

इन प्रस्तुतियों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत हासिल की गई उपलब्धियों, मौजूदा चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित किया गया। इसमें हर घर जल के तहत प्रगति को गति देने के लिए अपनाए गए दृष्टिकोणों की विविधता को रेखांकित किया गया।

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