रक्षा मंत्रालय
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ईएसटीआईसी-2026 में सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप्स पर विशेष सत्र की मेजबानी करेगा
प्रविष्टि तिथि:
13 OCT 2026 6:58PM by PIB Delhi
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ‘सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप्स’ विषय पर आयोजित एक विशेष सम्मेलन की अगुवाई करेगा। यह सत्र 27 से 29 अक्टूबर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ईएसटीआईसी-2026) का हिस्सा होगा। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में 12 मंत्रालयों और विभागों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है। इसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाना और देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा प्रदान करना है।
डीआरडीओ के इस विशेष आयोजन में रक्षा उद्योग जगत, शिक्षाविद, देश के सेमीकंडक्टर विनिर्माण तंत्र और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे। सत्र में माइक्रोन इंडिया के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुख्य भाषण देंगे। इसके बाद भारत सेमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नेत्रसेमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और आईआईटी मद्रास के निदेशक अपने विचार साझा करेंगे। चर्चा के दौरान सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी, विशिष्ट उद्देश्यों के लिए विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम-ऑन-चिप, सिलिकॉन चिप पर ही इंटेलिजेंस विकसित करने की तकनीक और माइक्रोप्रोसेसर के बदलते परिदृश्य में हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ सेमीकंडक्टर विनिर्माण, चिप डिजाइन, एआई आधारित कंप्यूटिंग, स्वदेशी सेमीकंडक्टर प्लेटफॉर्म, अनुसंधान एवं विकास तथा रणनीतिक और रक्षा संबंधी अनुप्रयोगों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इस सत्र से रक्षा उद्योग जगत, शिक्षाविदों और रणनीतिक क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलने, तकनीकी विकास के नए अवसरों की पहचान करने तथा देश में एक मजबूत स्वदेशी सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में मदद मिलने की आशा है। इसमें विशेष रूप से महत्वपूर्ण और अगली पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत की घरेलू तकनीकी क्षमताओं को सशक्त करने पर जोर दिया जाएगा।
ईएसटीआईसी-2026 में डीआरडीओ का आउटरीच स्टॉल रक्षा मंत्रालय की प्रमुख गतिविधियों, उपलब्धियों, अनुसंधान कार्यक्रमों और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में उसके योगदान को प्रदर्शित करने का मंच बनेगा। इस दौरान डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित कई स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इनमें उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम प्रौद्योगिकी के प्रोटोटाइप, अत्यधिक ठंडे मौसम के लिए विशेष कपड़े, महिलाओं के लिए ‘प्रबला’ फुल-बॉडी प्रोटेक्टर, पैसिव और पावर्ड एक्सोस्केलेटन, पोर्टेबल हाइब्रिड ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, हाई-पावर पल्स लेजर डायोड तथा स्क्रैमजेट इंजन तकनीक शामिल हैं।
यह प्रदर्शनी स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को आगे ले जाने, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने तथा रक्षा एवं अन्य रणनीतिक क्षेत्रों की महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाएगी। इसके साथ ही, डीआरडीओ का यह स्टॉल शिक्षाविदों, उद्योग जगत, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। इसका उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने में मंत्रालय की भूमिका के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना भी है।
प्रख्यात वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार प्रणाली) डॉ. बी.के. दास ने 13 अक्टूबर, 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरु में डीआरडीओ द्वारा आयोजित एक प्रारंभिक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप्स के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ये तकनीकें आर्थिक प्रतिस्पर्धा, डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। डॉ. दास ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए देश के लिए एक मजबूत और व्यापक माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना बेहद जरूरी है। इससे दूरसंचार, ऑटोमोटिव सिस्टम, औद्योगिक स्वचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हार्डवेयर और रणनीतिक रक्षा प्रणालियों को मजबूती मिलेगी।
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डॉ. दास ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आने वाली बाधाओं, भू-राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी निर्यात नियंत्रणों से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए घरेलू क्षमताओं को उत्कृष्ट बनाना बेहद आवश्यक है। डॉ. दास ने माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की पूरी मूल्य श्रृंखला में रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करने और उच्च-मूल्य वाले निर्यात को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य का उल्लेख किया।
जाने-माने वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (प्रौद्योगिकी प्रबंधन) डॉ. अनुपम शर्मा ने आधुनिक युद्ध में सेमीकंडक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य अभियानों के लगभग हर पहलू में इन तकनीकों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र का कारोबार वर्ष 2035 तक बढ़कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस अवसर पर एक्स्ट्रा-म्यूरल रिसर्च एंड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स निदेशालय के निदेशक, सॉलिड स्टेट फिजिक्स प्रयोगशाला के निदेशक, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट के निदेशक और कॉम्बैट एयरक्राफ्ट सिस्टम्स डेवलपमेंट एंड इंटीग्रेशन सेंटर के प्रमुख सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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पीके/केसी/आरटी/एनके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2323000)
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