पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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मुंबई में समुद्री राज्य विकास परिषद (एमएसडीसी) की 21वीं बैठक आज सफलतापूर्वक संपन्न



परिषद ने कानूनी नियमों के अंतर्गत एकीकृत समुद्री विकास और राष्ट्रीय पत्तन परिप्रेक्ष्य योजना के विकास के लिए केंद्र-राज्य के बीच तालमेल को और मजबूत किया

भारत के जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 'शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस पॉलिसी' (एसबीपीसीपी) और 'बिजनेस क्रेडिट शील्ड पॉलिसी-शिपबिल्डर्स' (बीसीएसपीएस) जैसे क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस प्रोडक्ट का शुभारंभ किया गया

मार्च 2027 तक सभी बंदरगाहों पर 'वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस' (ओएनओपी) सुधार लागू किए जाएंगे

परिषद ने पारदर्शिता के लिए बंदरगाह शुल्क को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रकाशित करना अनिवार्य किया

राज्य, केंद्र सरकार के साथ मिलकर, 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से मंजूरी मिलने वाली व्यवस्था के साथ बंदरगाह से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित करेंगे

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि एसएसडीसी समुद्री सुशासन में सहकारी संघवाद (कोऑपरेटिव फेडरलिज़्म) का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो हमारे बंदरगाहों और बंदरगाह-आधारित औद्योगीकरण के लिए काम कर रहा है

प्रविष्टि तिथि: 13 OCT 2026 6:53PM by PIB Delhi

मुंबई में आज 21वीं समुद्री राज्य विकास परिषद (एमएसडीसी) की बैठक आज संपन्न हो गई, जिसके भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए प्रमुख परिणाम सामने आए। 15 मई 2026 को अधिसूचित 'भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025' के तहत एक वैधानिक सलाहकार निकाय के रूप में मान्यता मिलने के बाद एमएसडीसी की यह पहली बैठक थी। मूल रूप से 1997 में गठित यह परिषद अब एकीकृत समुद्री विकास, समन्वित नीति निर्माण और समुद्री बुनियादी ढांचे के नियोजित विकास को बढ़ावा देने के व्यापक अधिकार क्षेत्र के साथ काम करती है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई एमएसडीसी की बैठक में तटीय राज्यों के मंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक, राज्य समुद्री बोर्डों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख बंदरगाहों के अध्यक्ष, संबंधित समुद्री संस्थान और केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में गुजरात के वित्त मंत्री श्री कनुभाई देसाई; गोआ सरकार में मंत्री (बंदरगाह) श्री दिगंबर वी. कामत; महाराष्ट्र सरकार में मत्स्य पालन और बंदरगाह विकास मंत्री श्री नितेश राणे; और पुडुचेरी के मंत्री श्री मल्लादी कृष्णा राव शामिल थे। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के समुद्री बोर्डों के वरिष्ठ सचिवों और सीईओ के साथ-साथ दीनदयाल, जेएनपीए, एमबीपीए, कोचीन, चेन्नई, विशाखापत्तनम, पारादीप, एसएमपीए, कामराजार और मरमुगाओ जैसे प्रमुख बंदरगाहों के अध्यक्षों ने भी इसमें भाग लिया। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, भारतीय पत्तन निगम इंडिया, भारतीय ड्रेजिंग निगम, भारतीय पत्तन रेल और रोपवे निगम, कोचीन शिपयार्ड, भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय, डीपीआईआईटी, नीति आयोग, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल जैसे संबंधित संगठनों के प्रमुख भी बैठक में मौजूद थे।

बैठक से पहले मुंबई पोर्ट अथॉरिटी क्रूज टर्मिनल और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) का शैक्षिक दौरा किया गया, जिसमें भारत की क्रूज और कंटेनर पोर्ट क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। विचार-विमर्श के दौरान, परिषद ने 'समुद्री भारत परिकल्पना 2030' और समुद्री अमृत काल परिकल्पना 2047' के लक्ष्यों को अपनाया। इन लक्ष्यों के तहत बंदरगाहों, शिपिंग, अंतर्देशीय जलमार्ग, जहाज़ निर्माण, ग्रीन शिपिंग और ग्लोबल सहयोग से जुड़ी 500 से ज़्यादा पहलें शामिल हैं। राज्यों और राज्य समुद्री बोर्ड्स से कहा गया कि वे इन राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप 'मेजर पोर्ट्स' (बड़े बंदरगाहों) के अलावा अन्य बंदरगाहों के लिए 'पोर्ट मास्टर प्लान' तैयार करें। इसके लिए एमओपीएसडब्ल्यू ने वह स्टैंडर्ड टेम्प्लेट उपलब्ध कराया जिसका इस्तेमाल बड़े बंदरगाह करते हैं।

परिषद ने 'नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान' की प्राथमिकताओं का समर्थन किया और राज्यों से सड़क, रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग, पाइपलाइन और कन्वेयर के ज़रिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में तेज़ी लाने का आग्रह किया। इसने तय किया कि राज्य, एमओपीएसडब्ल्यू के साथ मिलकर, पोर्ट-लिंक्ड इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित करेंगे। इनमें ज़मीन की उपलब्धता, 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज़ी से मंज़ूरी जैसी सुविधाएँ होंगी और इन्हें पोर्ट की क्षमता बढ़ाने और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स के साथ जोड़ा जाएगा।

कानूनी नियमों के पालन के मामले में, काउंसिल ने पोर्ट डेटा और टैरिफ में पारदर्शिता पर एमएसडीसी रेगुलेशन और गाइडलाइंस के ड्राफ्ट को मंज़ूरी दी। साथ ही, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे एक्ट की धारा 77 के तहत सहायक नियम तीन महीने के भीतर नोटिफ़ाई करें।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "भारतीय समुद्री अधिनियम ने एमएसडीसी को कानूनी आधार दिया। आज केंद्र और तटीय राज्यों ने उस आधार को एक साझा कार्य योजना में बदल दिया है, जिसकी समय-सीमा को पूरा करने के लिए हम सभी सहमत हैं।" "यह समुद्री प्रशासन में सहकारी संघवाद (कोऑपरेटिव फेडरलिज़्म) का उदाहरण है, जो हमारे पोर्ट्स और पोर्ट-आधारित औद्योगीकरण के लिए काम कर रहा है।"

'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' यानी व्यापार में सुगमता की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर, परिषद ने तय किया कि 'वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस' (ओएनओपी) सुधारों को मार्च 2027 तक सभी पोर्ट्स पर लागू किया जाएगा। इन सुधारों में 'वन नेशन वन डॉक्यूमेंटेशन', पोर्ट प्रोसेस री-इंजीनियरिंग और अंतर-मंत्रालयी प्रक्रिया सुधार शामिल हैं। परिषद ने यह भी तय किया कि सभी पोर्ट्स मार्च 2027 तक 'मैरीटाइम सिंगल विंडो' (एमएसडब्ल्यू– सागर सेतु) के साथ जुड़ जाएँगे, ताकि पूरे देश में एक जैसी डिजिटल प्रक्रियाएँ सुनिश्चित हो सकें। इलेक्ट्रॉनिक पब्लिकेशन के ज़रिए पोर्ट टैरिफ में पारदर्शिता लाना भी अनिवार्य किया गया। एक समान कार्यान्वयन में मदद के लिए, केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने ओएनओपी को लागू करने के लिए 'रेडी रेकनर' जारी किया। यह बड़े और अन्य पोर्ट्स के लिए एक विस्तृत गाइड है। इस दस्तावेज़ में अंतर-मंत्रालयी प्रक्रिया सुधारों को लागू करने के लिए सीबीआईसी, एमएचए और एमओएचएफडब्ल्यू द्वारा जारी केंद्रीय सर्कुलर का ज़िक्र है। साथ ही, इसमें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों से ओएनओपी को तेज़ी से लागू करने की स्पष्ट अपेक्षाएँ भी बताई गई हैं।

परिषद ने पोर्ट कनेक्टिविटी, जहाज निर्माण और क्रूज शिपिंग पर खास ज़ोर दिया। इसने सागरमाला के तहत कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने, नेशनल कोस्टल और इनलैंड शिपिंग स्ट्रैटेजिक प्लान को लागू करने, कार्गो को कोस्टल शिपिंग की ओर ले जाने को बढ़ावा देने, जहाज निर्माण, जहाज की मरम्मत और रीसाइक्लिंग क्लस्टर के विकास में मदद करने और फाइनेंसिंग के लिए मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड, शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम और शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस प्रोग्राम का इस्तेमाल करने का फैसला किया। बड़े और छोटे पोर्ट्स पर क्रूज शिपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी मंज़ूरी दी गई।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक प्रमुख घोषणा की, जिसमें नेशनल शिपबिल्डिंग मिशन के तहत भारत के जहाज निर्माण उद्योग को सहारा देने के लिए दो खास क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस प्रोडक्ट पेश किए गए। शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (एसबीडीएस) के तहत तैयार की गई ये अपनी तरह की पहली इंश्योरेंस पॉलिसी बड़े पैमाने पर जहाज निर्माण में वित्तीय दबाव को कम करने के मकसद से बनाई गई हैं। ईसीजीसी लिमिटेड द्वारा तैयार की गई शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस पॉलिसी (एसबीपीसीपी) एक्सपोर्ट प्रोजेक्ट्स को कवर करेगी, जबकि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएसीएल) द्वारा तैयार की गई बिजनेस क्रेडिट शील्ड पॉलिसी-शिपबिल्डर्स (बीसीएसपीएस) घरेलू प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देगी। भारत सरकार इंश्योरेंस प्रीमियम पर सब्सिडी देगी और शिपयार्ड द्वारा क्लेम फाइल करने की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनियों को सीधी सहायता देगी। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री सोनोवाल ने कहा, "जहाज बनाना एक बहुत बड़ा और कई सालों तक चलने वाला काम है; पेमेंट का एक भी माइलस्टोन छूटने से पूरे शिपयार्ड का कामकाज रुक सकता है। इन नई इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ, हम उन्हें एक असली सुरक्षा कवच दे रहे हैं। हम चाहते हैं कि हमारे शिपयार्ड उस काम पर ध्यान दें जिसमें वे सबसे अच्छे हैं - यानी वर्ल्ड-क्लास जहाज बनाना - और उन्हें पेमेंट में देरी या वैश्विक बाज़ार में अचानक बदलाव की वजह से पीछे नहीं हटना पड़े।"

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बैठक के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, "एमएसडीसी अब एक नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है, जिससे मैरीटाइम गवर्नेंस में सहकारी संघवाद (कोऑपरेटिव फेडरलिज़्म) मज़बूत होगा। एमआईवी 2030 और एमएकेवी 2047 लक्ष्यों को अपनाने से भारत के पोर्ट और शिपिंग सेक्टर भविष्य के लिए तैयार, प्रतिस्पर्धी और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप होंगे। परिषद के आज के फैसले एकीकृत समुद्री विकास और पोर्ट-आधारित औद्योगीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम हैं।" 21वीं एमएसडीसी ने बड़े और छोटे बंदरगाहों के मिले-जुले विकास के लिए एक साझा कार्ययोजना तय की है। इससे 'समुद्री भारत परिकल्पना 2030' और 'समुद्री अमृत काल परिकल्पना 2047' के तहत भारत के समुद्री परिकल्पना को और मज़बूती मिली है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बैठक को "टीम इंडिया की बैठक" बताया और परिषद के काम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मंत्र से जोड़ा।

 

 

 

 

 

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पीके/केसी/आरटी/एमकेएस/डीके


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