कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेंशनभोगियों की जीवन सुगमता की प्रतिबद्धता दोहराई; डिजिटल पेंशन सेवाओं को अपनाने का आह्वान किया


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 17वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत में 897 लंबित मामलों के समाधान की सुनवाई हुई, जिनमें 756 का निपटारा: डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2017 में पंचायत अदालत की अवधारणा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया

पेंशन सुधारों को जीवन सुगमता और प्रत्‍येक पेंशन भोगियों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित होना चाहिए: डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रौद्योगिकी-आधारित पेंशन सेवाओं, डिजिटल जीवन प्रमाण पत्रों और पारिवारिक पेंशन सुधारों का उल्‍लेख किया
सरकार पेंशन सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रौद्योगिकी-संचालित और जन-केंद्रित बनाने पर काम कर रही है: डॉ. जितेंद्र सिंह

17वीं पेंशन अदालत में शिकायतों के त्वरित निवारण और पेंशनभोगियों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित रहा; 84.2 प्रतिशत दर के साथ 897 में से 756 शिकायतों का निवारण

प्रविष्टि तिथि: 05 OCT 2026 5:05PM by PIB Delhi

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जीवन सुगमता और पेंशनभोगियों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि कि प्रौद्योगिकी और डिजिटल उपायों का अपेक्षित परिणाम पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए सरल और अधिक सुलभ सेवा प्रदान करना होना चाहिए।

पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग-डीओपीपीडब्ल्यू द्वारा नई दिल्ली स्थित आईआईपीए के टी.एन. चतुर्वेदी मेमोरियल हॉल में आयोजित 17वीं पेंशन अदालत को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशन प्रशासन को पेंशनभोगियों के अनुभवों और कठिनाइयों से लगातार अनुभव प्राप्‍त करना चाहिए और मौजूदा व्यवस्थागत कमियों को दूर करने पर काम करना चाहिए। 17वीं पेंशन अदालत में आज 84.2 प्रतिशत निवारण दर के साथ 897 शिकायतों में से 756 का निवारण किया गया। डॉ. सिंह ने वर्ष 2017 में पंचायत अदालत की अवधारणा शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेंशन व्यवस्था की मौजूद कमियों को पहचानने और निरंतर सुधार द्वारा उन्हें दूर करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पेंशन सुधारों का उद्देश्य केवल तकनीकी उन्नति नहीं बल्कि सुनिश्चित करना है कि सुधारों का लाभ अंतिम पेंशनभोगियों तक पहुंचे और उनके जीवन में वास्तविक बदलाव लाए।

17वीं पेंशन अदालत में पारिवारिक पेंशनभोगियों और अत्‍यंत पुराने पेंशनभोगियों से संबंधित 897 शिकायतों पर त्वरित निवारण हेतु सुनवाई हुई। जिसमें आज 5 अक्टूबर, 2026 तक 84.2 प्रतिशत निवारण दर के साथ 756 मामलों का निवारण हो गया। शेष मामलों के निवारण के लिए आगामी  दिनों में कार्रवाई की जा रही है। यह समय पर शिकायत निवारण और पेंशनभोगियों के कल्याण के प्रति सरकार के निरंतर ध्यान को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेंशन संबंधी सेवाओं में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग का उल्‍लेख करते हुए कहा कि डिजिटल पहचान और चेहरे की पहचान पर आधारित तंत्रों द्वारा प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है। उन्होंने ऐसी सुविधाओं के बारे में पेंशनभोगियों को लगातार सूचित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि वे डिजिटल सेवाओं का पूर्ण लाभ उठा सकें।

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र पहल की चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने पेंशनभोगियों को डिजिटल प्रमाण पत्र प्राप्त करने में आसानी और जागरूकता कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इन पहल की व्यापक सफलता का उल्लेख किया। उन्‍होंने कहा कि अधिक जागरूकता और व्यापक पहुंच से यह और मजबूत होगा।

डॉ. सिंह ने देश भर के पेंशनभोगियों तक पेंशन सुधारों की जानकारी पहुंचाने में मीडिया और जनसंचार की भूमिका का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने पहले चलाए गए जागरूकता अभियानों के सकारात्मक परिणामों  की चर्चा करते हुए आधुनिक संचार साधनों के निरंतर उपयोग का आह्वान किया ताकि पेंशनभोगी और उनके परिवार को उपलब्ध सेवाओं और सुधारों के बारे में जानकारी मिले।

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल नियमित सेवा के लिए ही नहीं बल्कि समस्याओं को  पहचानने और समग्र पेंशन प्रशासन प्रणाली में सुधार के लिए भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी कमियां या टाली जा सकने वाली कठिनाइयां दिखाई दें, उनको पहचान कर तुरंत उनका समाधान किया जाना चाहिए ताकि प्रणाली में निरंतर सुधार हो।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेंशनभोगियों का कल्याण सरकार के दृष्टिकोण के केंद्र में है और तकनीकी उपायों के साथ ही पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों की आवश्‍यकताओं के प्रति संवेदनशीलता भी बरती जानी चाहिए।

केन्‍द्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्री ने पेंशन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पेंशनभोगियों के परिवारों को बेहतर सहायता प्रदान करने हेतु जारी प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधारों के केंद्र में लाभार्थियों द्वारा सामना की जाने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां होनी चाहिए और इससे जीवन सुगमता बढ़नी चाहिए।

17वीं पेंशन अदालत में पेंशनभोगियों और संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के संबंधित कर्मचारी पेंशन संबंधी शिकायतें प्रस्तुत करने और उन पर विचार और निपटारे के लिए साथ आए। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव (पेंशन) ने डॉ. जितेंद्र सिंह के समक्ष मामलों की प्रस्तुति भी दी। कार्यवाही से शिकायतों की प्रत्यक्ष जांच संभव हुई और उनके शीघ्र निवारण के लिए समन्वित प्रयास हुए।

17वीं पेंशन अदालत के दौरान, 16वीं पेंशन अदालत की सफलता पर आधारित पर्चे और पारिवारिक पेंशनभोगियों की जीवन सुगमता नामक ई-पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इन प्रकाशनों में पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के प्रभावी शिकायत निवारण और उनके बेहतर अनुभव के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्‍लेख किया गया है।

17वीं पेंशन अदालत पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा पेंशनभोगियों की शिकायतों के सार्थक, सुलभ और त्वरित निवारण के लिए विकसित संस्थागत व्‍यवस्‍था का हिस्सा है।

इसमें श्रीमती चंदर कांता जल्ली का मामला एक अनुकरणीय उदाहरण रहा, जिनके पति ने 1973 में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हें उदारीकृत पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी। हालांकि, कुछ कारणों से, उन्हें मिलने वाली पारिवारिक पेंशन उनकी हकदार राशि से कम थी। जब उन्हें इस बात का पता चला तब उन्होंने विभिन्न मंचों से संपर्क किया। पेंशन अदालत के दौरान, उनके पुत्र श्री जसविंदर जल्ली ने चंडीगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा भाग लिया और माननीय लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री के समक्ष अपनी माता की ओर से शिकायत प्रस्तुत की। मामले पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद, पारिवारिक पेंशन के रूप में 2.02 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी की गई।

एक अन्य मामले में, पेंशन अदालत की मदद से सुश्री दमयंती सिन्हा को 72 लाख रुपये से अधिक की पेंशन राशि जारी की गई।

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पीके/केसी/आरटी/एकेवी/एमपी


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