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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कोल्लम के अमृतापुरी में माता अमृतानंदमयी देवी के 73वें जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित विश्व सेवा दिनम समारोह में भाग लिया


उपराष्ट्रपति ने माता अमृतानंदमयी मठ की विभिन्न मानवीय पहलों का शुभारंभ किया

अम्मा एक चमत्कार हैं, उनका जीवन प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का संदेश है: उपराष्ट्रपति

तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवता को संवेदनशीलता और करुणा की भी आवश्यकता है: उपराष्ट्रपति

सेवा की वास्तविक महानता मानव जीवन के परिवर्तन में निहित है: उपराष्ट्रपति

विकसित भारत एक समावेशी भारत होगा, जहां कोई भी पीछे नहीं छूटेगा: उपराष्ट्रपति

‘विकास भी, विरासत भी’ का सिद्धांत विकसित भारत की यात्रा का मार्गदर्शन करे: उपराष्ट्रपति

प्रविष्टि तिथि: 27 SEP 2026 2:52PM by PIB Delhi

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज केरलम के कोल्लम स्थित अमृतापुरी में माता अमृतानंदमयी देवी के 73वें जन्मोत्सव के अवसर पर माता अमृतानंदमयी मठ द्वारा आयोजित विश्व सेवा दिनम समारोह में भाग लिया।

 

 

 

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने मठ की कई मानवीय पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने भारत में नेपाल के राजदूत श्री सुरेंदर थापा को नेपाल बाढ़ राहत के लिए ₹2 करोड़ की सहायता राशि सौंपी। इसके साथ ही उन्होंने कोच्चि और फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पतालों में वंचित लाभार्थियों के लिए मुफ्त सर्जरी के प्रमाण पत्र और मछुआरों के परिवारों को वित्तीय सहायता वितरित की।

 

 

उपराष्ट्रपति ने भारत और श्रीलंका में 50,000 मकानों के निर्माण के उपलक्ष्य में 'अमृताकुटीरम 30वीं वर्षगांठ स्मारिका' का विमोचन किया। इसके साथ ही उन्होंने आश्रम के तीन नए प्रकाशनों—'द हनुमान चालीसा', 'द ओशन ऑफ ग्रेस' और 'सत्यम शिवम सुंदरम' का भी विमोचन किया।

 


सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने अम्मा के 73वें जन्मोत्सव के अवसर पर अमृतापुरी में उपस्थिति को अपना परम सौभाग्य और अत्यधिक प्रसन्नता का विषय बताया। उन्होंने माता अमृतानंदमयी देवी को सादर प्रणाम किया और राष्ट्र सेवा में समर्पित उनके दीर्घायु जीवन की कामना की।

एक अवसर को याद करते हुए, जब उन्होंने कोयंबटूर में एक कार्यक्रम के लिए अम्मा को आमंत्रित किया था, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें आज भी हजारों लोगों की वह लंबी कतार याद है जो उनका स्वागत करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए एकत्र हुई थी।

अम्मा की जीवनपर्यंत सेवा के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका जीवन प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का संदेश है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन राष्ट्र को भारत के एक शाश्वत सत्य की याद दिलाता है, कि सेवा जीवन जीने की एक शैली है और मानवता के साथ एकात्मता की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने याद दिलाया कि बचपन से ही अम्मा ने अपने आसपास के लोगों के दुख-दर्द को महसूस किया और भोजन, वस्त्र, स्नेह एवं करुणा से उसका उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि इस सेवा के मूल में यह आध्यात्मिक समझ है कि सभी जीवों में एक ही आवश्यक दिव्य एकात्मता का वास है।

स्वास्थ्य सेवा को माता अमृतानंदमयी मठ के परोपकारी कार्यों का सबसे प्रेरक आयाम बताते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि 1998 से भारत में ₹890 करोड़ से अधिक की धर्मार्थ चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है, जिससे मुफ्त इलाज और सर्जरी के माध्यम से 64 लाख से अधिक मरीज लाभांवित हुए हैं।

अगस्त 2022 में फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल के उद्घाटन को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अम्मा को "प्रेम, करुणा, सेवा और त्याग" का साक्षात रूप तथा भारत की आध्यात्मिक परंपरा की वाहक बताने के कथन का उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेवा का उद्देश्य भविष्य के लिए अवसर पैदा करना भी है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि मठ द्वारा दुनिया भर में 55,000 से अधिक छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं और उन्होंने वंचित समुदायों के लिए नए मार्ग खोलने के उद्देश्य से टैबलेट-आधारित शिक्षा, स्कूल के बाद की ट्यूशन, वयस्क साक्षरता और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी पहलों को रेखांकित किया।

उन्होंने विशेष रूप से 'अमृताश्री' (AmritaSREE) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 15,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों के साथ, गरीब और वंचित समुदायों की लगभग 2.5 लाख महिलाओं को शुरुआती पूंजी, व्यावसायिक प्रशिक्षण और माइक्रोफानेंस के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है।

"जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका प्रभाव किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहकर कहीं आगे तक जाता है," उन्होंने यह ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह परिवारों और समुदायों को मजबूत बनाता है।

उन्होंने कहा कि नारी शक्ति का अर्थ केवल भागीदारी नहीं है, बल्कि यह सशक्तिकरण, गरिमा, अवसर और नेतृत्व का प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक गांव में एक छोटी बच्ची की करुणा से जो शुरुआत हुई थी, वह आज भारत और दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को छूने वाले एक विशाल मानवीय आंदोलन का रूप ले चुकी है।

उन्होंने बेघर लोगों के लिए 50,000 से अधिक घरों के निर्माण, हजारों बच्चों के लिए छात्रवृत्तियों, एक लाख से अधिक जरूरतमंद लोगों के लिए पेंशन और आजीविका की पहलों को रेखांकित किया।

कार्य के प्रभावशाली पैमाने को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक महानता आंकड़ों के पीछे छिपे मानवीय जीवनों में निहित है। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए सेवा को केवल आंकड़ों के माध्यम से नहीं, बल्कि मानव जीवन में इसके द्वारा लाए जाने वाले परिवर्तन के माध्यम से समझा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेवा की वास्तविक परीक्षा अक्सर संकट के समय होती है और उन्होंने आपदाओं तथा आपातकालीन स्थितियों में मठ की मानवीय सहायता एवं राहत कार्यों को रेखांकित किया।

उन्होंने हिंद महासागर की सुनामी, गुजरात भूकंप, उत्तराखंड बाढ़, केरलम बाढ़, कोविड-19 महामारी और वायनाड भूस्खलन के दौरान संगठन द्वारा प्रदान की गई सहायता का उल्लेख किया।

उन्होंने भारत सरकार के 'नमामि गंगे' कार्यक्रम में मठ द्वारा दिए गए ₹100 करोड़ के योगदान के साथ-साथ वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियानों और सतत ग्रामीण जीवनशैली के लिए शुरू की गई पहलों को भी प्रमुखता से रेखांकित किया।

'अमल भारतम' पहल का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत देश भर में बड़ी संख्या में स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र के 'बिलियन ट्री कैंपेन' के हिस्से के रूप में दुनिया भर में 10 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अम्मा के कार्यों को प्रेरित करने वाली भावना भारत के सभ्यतागत मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सेवा की जाति, पंथ, भाषा, क्षेत्र या राष्ट्रीयता की कोई सीमा नहीं होती और यह केवल एक ही पहचान को स्वीकार करती है—मानवता। उन्होंने इसे 'विश्व सेवा दिनम' का मूल दर्शन बताया।

संघर्षों, मानवीय संकटों, प्राकृतिक आपदाओं, विस्थापन, गरीबी, अकेलेपन और पर्यावरणीय चुनौतियों सहित दुनिया के सामने मौजूद विविध संकटों का उल्लेख करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि मानवता को केवल तकनीकी प्रगति ही नहीं, बल्कि करुणापूर्ण प्रगति की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण की ओर अग्रसर है, और विकास के लिए  इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, निवेश, नवाचार तथा आर्थिक वृद्धि की आवश्यकता होती है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकास का एक मानवीय पहलू भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधुनिकता और हमारे सभ्यतागत मूल्य एक साथ आगे बढ़ें।" उन्होंने आगे कहा कि "विकास भी, विरासत भी" हमारा मार्गदर्शक मंत्र होना चाहिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि विकसित भारत एक ऐसा समावेशी भारत हो जहां कोई भी पीछे न छूटे।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने माता अमृतानंदमयी देवी को आदरपूर्वक प्रणाम किया और कहा कि अम्मा किसी चमत्कार से कम नहीं हैं, जो समाज और राष्ट्र की सेवा में हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह महान आंदोलन लाखों लोगों के जीवन को स्पर्श करता रहेगा और सेवा एक अधिक शांतिपूर्ण, सतत व करुणापूर्ण विश्व का आधार बनेगी।

इस कार्यक्रम में केरलम एवं तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, केरलम के मुख्यमंत्री श्री वी. डी. सतीसन, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी, केरलम विधानसभा के अध्यक्ष श्री तिरुवंचूर राधाकृष्णन, केरलम सरकार के मंत्रीगण, केरलम उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोपीनाथ, सांसद श्री एन. के. प्रेमचंद्रन एवं श्री शशि थरूर, भारत में नेपाल के राजदूत श्री सुरेंद्र थापा, विधायकगण, स्वामीगण, भक्तगण और स्वयंसेवक उपस्थित थे।

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