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भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह 2026
जल सुरक्षा, जमीनी स्तर से
प्रविष्टि तिथि:
25 SEP 2026 1:48PM by PIB Delhi
पानी किसी एक रास्ते से ही होकर नहीं बहता। बारिश की एक बूंद मिट्टी में रिस सकती है, तालाब को भर सकती है, कुएं का पुनर्भरण कर सकती है या नदी में बहकर मिल सकती है। उस पानी के संग्रहण, संरक्षण और प्रबंधन का हमारा तौर-तरीका आम लोगों के जीवन एवं आजीविका पर काफी असर डाल सकता है। देश भर में, विभिन्न समुदायों ने पारंपरिक रूप से वर्षा के पानी को जमा करने, भूजल का पुनर्भरण करने और नदियों व पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने हेतु अलग- अलग प्रकार के ढांचे बनाए हैं। आज, जब हमारे चारों ओर पानी की मांग बढ़ रही है, तो वैज्ञानिक योजना, मजबूत संस्थानों एवं निरंतर प्रयासों के साथ-साथ जल सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सामुदायिक भागीदारी को फिर से सक्रिय करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार की यह सोच है कि पानी से जुड़ी अलग-अलग चुनौतियों से निपटने हेतु इन सभी प्रयासों को एक साथ लाया जाए। इन प्राथमिकताओं की झलक ‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू)’ में भी मिलती है। इस कार्यक्रम की शुरुआत 2012 में हुई थी। आज, आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू हर दो वर्ष में आयोजित होने वाला एक ऐसा मंच बन गया है जहां नीति-निर्माता, शोधकर्ता, उद्योग जगत के प्रमुख और आम लोग एक साथ आते हैं। ये लोग इस मंच पर विचारों का आदान-प्रदान करते हैं और टिकाऊ व जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन के उपायों की तलाश करते हैं।
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भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह-2026
‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) 2026’ का 9वां संस्करण 22 सितंबर से 26 सितंबर, 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इसका विषय “जलवायु के अनुकूल जल प्रबंधन” है। जलशक्ति मंत्रालय ‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह’ का आयोजन करता है।
इस वर्ष की चर्चाएं सात उप-विषयों पर केन्द्रित हैं:
• समावेशी और न्यायपूर्ण जल प्रशासन
• जल संसाधनों के बेहतर सदुपयोग हेतु सहयोग
• जल सुरक्षा के लिए तकनीक और समुदाय
• जलवायु से जुड़े जोखिमों के संदर्भ में जल
• जल संबंधी बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण हेतु वित्तपोषण का नवीन मॉडल
• सतत जल संसाधन प्रबंधन
• लोगों और धरती के लिए जल

इस कार्यक्रम में छह केन्द्रीय मंत्रालयों और 16 राज्यों व केन्द्र-शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि एक साथ आयेंगे। इसमें हिस्सा लेने हेतु लगभग 150 देशों को आमंत्रित किया गया है और 11 देशों के साझेदार देश के तौर पर शामिल होने की उम्मीद है। इस कार्यक्रम में मंत्रियों के पूर्ण सत्र, युवा मंच और खास तौर पर स्टार्ट-अप के लिए मंच सहित जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर 49 विशेष सत्र होंगे।
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पिछले दशक में, सरकार ने जल संरक्षण को मजबूत करने और जल सुरक्षा को बेहतर बनाने हेतु कई कदम उठाए हैं। जलशक्ति अभियान, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलों ने इन प्रयासों में मदद की है। हाल ही में, ‘जल संचय जन भागीदारी’ ने समुदाय के नेतृत्व वाले संरक्षण को मजबूत किया है। जबकि, नक्विम 2.0 इलाके के आधार पर भूजल प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारियां प्रदान कर रहा है। इन प्रयासों का असर देश के भूजल संकेतकों में भी दिखाई देता है। कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 2017 में 432 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) से बढ़कर 2025 में 448.52 बीसीएम हो गया है।
सरकार के इन प्रयासों के अलावा, देश भर से मिलने वाली कहानियां सामुदायिक भागीदारी, भूजल पुनर्भरण, टिकाऊ जल प्रबंधन और समावेशी शासन जैसे विषयों को वास्तविक स्वरूप प्रदान करती हैं। ये कहानियां इस बात को दर्शाती हैं कि कैसे समुदाय, स्थानीय संस्थाएं और तकनीक मिलकर पानी से जुड़ी चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान निकाल रही हैं। भूजल पुनर्भरण एवं पानी की गुणवत्ता की निगरानी से लेकर नदियों को पुनर्जीवित करने और बारिश के पानी को जमा करने तक, ये सभी प्रयास आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू 2026 में चर्चा किए जा रहे विचारों एवं तरीकों की जमीनी असलियत को दर्शाते है।
बड़े पैमाने पर सामुदायिक पुनर्भरण
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में जल संरक्षण एक सामुदायिक प्रयास बन गया है। विभिन्न गांवों में ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों ने मिलकर ऐसे ढांचे बनाए हैं जो वर्षा के पानी को जमा करते हैं और भूजल के पुनर्भरण में मदद करते हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में चेक डैम
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‘जल संचय जन भागीदारी 2.0’ के तहत, जिले में जून 2025 और मई 2026 के बीच 2.84 लाख पुनर्भरण से जुड़े ढांचे बनाए गए। इन ढांचों में बारिश का पानी बचाने हेतु विभिन्न गांवों में बनाए गए चेक डैम, रिचार्ज पिट और कंटूर ट्रेंच शामिल हैं।
एक उल्लेखनीय कदम 14.3 किलोमीटर लंबे मौसमी जल-मार्ग, ‘तवेरा नाला’ का पुनरुद्धार रहा है। इस नाले के किनारे 6,250 से अधिक जल-संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं। इन उपायों से 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा-जल के संरक्षण और भूजल स्तर में अनुमानित 5-10 फीट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
बनाई गई संरचनाओं की संख्या से परे, यह अनुभव जल संरक्षण के एक सामूहिक जिम्मेदारी बनने और समुदायों द्वारा स्थानीय जल सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों में योगदान देने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
जब महिलाएं जल प्रबंधक बनीं
त्रिपुरा के खोवाई में, समुदाय की भागीदारी और स्थानीय संस्थाओं के जरिए ग्रामीण जलापूर्ति को मजबूत किया जा रहा है। इस जिले में टिकाऊ जल प्रबंधन में सहयोग करने हेतु पंचायतों, स्वयं-सहायता समूहों, स्कूलों तथा अन्य स्थानीय हितधारकों को एक साथ जोड़ा गया है।

त्रिपुरा के खोवाई में 'जल अर्पण दिवस' कार्यक्रम में शामिल होती महिलाएं
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कुल 6,000 से अधिक स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएं समुदाय को एकजुट करने के काम में लगी हुई हैं। स्कूल वाटर क्लब के जरिए, स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएं विद्यार्थियों को फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता की बुनियादी जांच करना भी सिखाती हैं। इससे पानी की गुणवत्ता की बुनियादी निगरानी का काम स्थानीय समुदायों के और करीब के दायरे में आ गया है।
जिले में ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी को भी मजबूत किया गया है। जियो-टैग से लैस निगरानी व्यवस्था, तीसरे पक्ष द्वारा गुणवत्ता की जांच और जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) तथा जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की नियमित बैठकें, योजनाओं के कार्यान्वयन और जवाबदेही तय करने में मदद करती हैं। पूरी हो चुकी योजनाओं को ‘जल अर्पण’ के जरिए औपचारिक रूप से ग्राम पंचायतों को सौंप दिया जाता है।
पानी के स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता बनाए रखने हेतु, जिले की कार्ययोजना में ‘स्रोत की स्थिरता’ एक अहम हिस्सा है। इसमें जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) की सुरक्षा, वृक्षारोपण, भूजल का पुनर्भरण और उपयोग हो चुके पानी (ग्रे-वॉटर) का प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं। जिले के सभी 860 आंगनवाड़ी केन्द्रों में वर्षा जल संचयन संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) की व्यवस्था मौजूद है।

नदियों से भरोसेमंद पानी तक

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जलापूर्ति योजना
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नल के पानी का कनेक्शन घर तक पानी तो पहुंचाता है, लेकिन पानी की दीर्घकालिक सुरक्षा उन स्रोतों को बचाने पर भी निर्भर करती है जिनसे यह पानी मिलता है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में, इसी सोच के आधार पर जल जीवन मिशन को नदियों के पुनरुद्धार, जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी से जोड़ने के प्रयास किए गए हैं।
“धारा से धरोहर तक” अभियान के तहत, बान नदी को लगभग 42 किलोमीटर और सोट नदी को करीब 17 किलोमीटर तक पुनर्जीवित किया गया। परिणामस्वरूप, अमरोहा में भूजल स्तर में सुधार हुआ। इस पहल को पड़ोसी जिले की नदियों तक भी बढ़ाया गया है, जिनमें बिजनौर की मालन और कुशीनगर की हिरण्यावती नदियां शामिल हैं।
समुदायिक भागीदारी इन प्रयासों के केन्द्र में रही है। ग्राम सभा के जरिए निगरानी, 'पानी की पाठशाला' के सत्र और महिलाओं की अगुवाई में पानी की गुणवत्ता की जांच ने लोगों को अपने जल संसाधनों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया है। ‘जल सेवा आकलन’ ने सामुदायिक भागीदारी एवं जवाबदेही को और मजबूत किया है।
जहां विद्यार्थी पानी की हर बूंद बचाना सीखते हैं
एक विद्यार्थी के लिए, बारिश का मतलब बस कक्षा में की जाने वाली पढ़ाई से ब्रेक हो सकता है। लेकिन ओडिशा में, बरसात इस बात का सबक बन रही है कि पानी कहां से आता है और कहां जाता है। ‘कैच द रेन 2026’ अभियान के जरिए, शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को भूजल विज्ञान, जल-संबंधी प्रक्रियाओं और वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
इस सीखने की प्रक्रिया को एक बड़े जन-अभियान का समर्थन हासिल है। ओडिशा ने वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने हेतु नुक्कड़ नाटकों, लोक प्रदर्शनों और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए 968 सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां आयोजित की हैं।

स्वास्थ्य केन्द्रों में वर्षा जल संचयन के महत्व पर चर्चा
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लेकिन यह अभियान महज जागरूकता तक ही सीमित नहीं है। पूरे राज्य में वर्ष जल के संचयन और भूजल के पुनर्भरण हेतु 905 संरचनाएं बनाई गई हैं। इनमें बारिश का पानी जमा करने वाली 849 प्रणालियां और भूजल के पुनर्भरण में मदद करने वाले 56 रिचार्ज शाफ्ट शामिल हैं। ओडिशा के जाजपुर में 45 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं। राज्य के सभी 30 जिलों में 98 टैंकों की मरम्मत और उनमें से गाद निकालने (डीसिल्टिंग) का काम भी शुरू किया है।

सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम
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स्थानीय स्तर पर कार्रवाई से लेकर अंतरराष्ट्रीय समन्वय तक
ये सभी अनुभव इस बात की पुष्टि करते हैं कि स्थायी प्रगति समुदायिक भागीदारी, वैज्ञानिक योजना, संस्थागत समन्वय और निरंतर देखरेख पर निर्भर करती है। ‘भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह 2026’ इसी व्यापक चर्चा को मुखर करता है। यह कार्यक्रम दुनिया के देशों और संबंधित पक्षों को ज्ञान साझा करने, अनुभव का आदान-प्रदान करने और पानी के स्थायी प्रबंधन के तरीकों पर विचार-विमर्श करने का एक मंच प्रदान कर रहा है।
संदर्भ
जलशक्ति मंत्रालय
https://www.indiawaterweek.in/
https://www.instagram.com/p/DADC0CUS7Cf/
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2254585®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2283262®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2266694®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2261459®=48&lang=2
https://jaljeevanmission.gov.in/sites/default/files/2026-07/Jal-Jeevan-Samvad-May-2026.pdf
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2292906®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2297630®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2295541&lang=2®=48
https://jsjb.mowr.gov.in/DashboardJsjb.aspx
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2295509®=48&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2286237®=48&lang=1
https://amritsarovar.gov.in/login#
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2202306®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2297163®=1&lang=1
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पीआईबी बैकग्राउंडर
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2214258®=3&lang=1
विश्व बैंक
https://www.worldbank.org/en/brief/2026/03/19/how-india-is-addressing-its-water-needs
अन्य
https://x.com/dmkhowai/status/2014292764423528904?s=20
https://www.facebook.com/dmkhowai/videos/-history-made-proud-moment-for-khowai-khowai-becomes-the-first-district-in-india/917803378050184/
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