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एनसीएससी के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना ने अनुसूचित जाति के छात्र की मृत्यु के संबंध में आईआईटी बॉम्बे में मौके पर जांच की


आयोग ने श्री साहिल वाकोडे की मृत्यु से संबंधित परिस्थितियों की समीक्षा की। सभी प्रासंगिक साक्ष्यों के संरक्षण और जांच के निर्देश दिए

प्रविष्टि तिथि: 24 SEP 2026 8:12PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के  अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना ने आज भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (आईआईटी बॉम्बे) में ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में बी.टेक के द्वितीय वर्ष के अनुसूचित जाति के छात्र श्री साहिल वाकोडे की मृत्यु के संबंध में घटनास्थल पर विस्तृत जांच की।

मृतक के परिवार द्वारा जाति आधारित भेदभाव, उत्पीड़न और उसकी मृत्यु से पहले की परिस्थितियों के संबंध में लगाए गए आरोपों के मद्देनजर यह दौरा किया गया। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है। आयोग अनुसूचित जाति के सदस्यों को उपलब्ध संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों के दायरे में इस मामले की जांच कर रहा है।

इस  दौरान माननीय अध्यक्ष ने आईआईटी बॉम्बे के वरिष्ठ अधिकारियों, निदेशक, उप निदेशक, रजिस्ट्रार, संबंधित संकाय सदस्य और संस्थान के अन्य अधिकारियों के साथ विस्तृत बातचीत की। आयोग ने छात्र की मृत्यु से पहले की घटनाओं का विस्तृत विवरण मांगा। इसमें 18 सितंबर 2026 को मध्यावधि परीक्षा के दौरान हुई घटना भी शामिल है जब छात्र कथित तौर पर शैक्षणिक कदाचार में लिप्त पाया गया था।

 

आयोग ने उन परिस्थितियों की जांच की जिनमें परीक्षा के दौरान छात्र से पूछताछ की गई थी। उसके बाद कथित तौर पर अपनाई गई प्रक्रिया, संबंधित संकाय और संस्थान के अधिकारियों की भूमिका और छात्रों की शिकायतों के निवारण तथा अनुसूचित जाति के छात्रों के कल्याण और अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध संस्थागत तंत्रों की जांच की।

माननीय अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, आधिकारिक संचार, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी सामग्री सहित मामले से संबंधित सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड और सामग्री को संरक्षित किया जाना चाहिए और कानून के अनुसार जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए जिससे छात्र की मृत्यु के आसपास की परिस्थितियों को साक्ष्य के आधार पर स्थापित किया जा सके।

इस जांच के तहत श्री किशोर मकवाना ने स्वयं ऊर्जा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग का दौरा किया जहां श्री साहिल वाकोडे पढ़ रहे थे। अध्यक्ष ने उस कक्षा/परीक्षा कक्ष का भी निरीक्षण किया जहां कथित परीक्षा घटना घटी थी और परीक्षा के दौरान और उसके तुरंत बाद की घटनाओं के क्रम के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इसके बाद आयोग ने छात्रावास परिसर और मृतक छात्र के कमरे का दौरा किया। माननीय अध्यक्ष ने श्री साहिल वाकोडे के सहपाठियों और साथी छात्रों से भी बातचीत की ताकि उनके शैक्षणिक और परिसर के अनुभवों को समझा जा सके और उनकी मृत्यु से पहले की परिस्थितियों और घटनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सके। आयोग इन जानकारियों के साथ-साथ आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों पर भी विचार करना चाहता है।

आईआईटी बॉम्बे में मौके पर हुई जांच के बाद माननीय अध्यक्ष ने पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त और जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें अपराध शाखा के अधिकारी भी शामिल थे, के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

बैठक के दौरान आयोग ने जांच की स्थिति और प्रगति की समीक्षा की और एफआईआर, साक्ष्यों के संग्रह और संरक्षण, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों की जांच और मामले के अन्य प्रासंगिक पहलुओं के संबंध में विवरण मांगा।

माननीय अध्यक्ष ने जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष, तटस्थ, व्यापक और त्वरित हो, और प्रत्येक प्रासंगिक आरोप और परिस्थिति की जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर और कानून के अनुसार सख्ती से की जाए।

पुलिस अधिकारियों को सभी प्रासंगिक दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक, फोरेंसिक और मौखिक साक्ष्यों के उचित संग्रह, संरक्षण और जांच को सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया। आयोग ने कानून के अनुसार जहां भी आवश्यक हो, छात्रों, संकाय सदस्यों, संस्थान के अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों, जिनके पास प्रासंगिक जानकारी हो सकती है, के बयान दर्ज करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

माननीय अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को जल्द से जल्द विस्तृत कार्रवाई/जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें जिससे आयोग द्वारा इसकी आगे जांच की जा सके।

इसके बाद माननीय अध्यक्ष ने श्री साहिल वाकोडे के माता-पिता और परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उनकी शिकायतों और चिंताओं को विस्तार से सुना। परिवार ने छात्र की मृत्यु से पहले की परिस्थितियों के संबंध में अपने आरोप आयोग के समक्ष रखे और आयोग से उचित हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की।

श्री मकवाना ने परिवार को आश्वासन दिया कि आयोग संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों के अनुसार मामले की जांच करेगा। आयोग जांच की प्रगति पर बारीकी से नजर रखेगा और सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपने अधिकार क्षेत्र में उचित कार्रवाई करेगा।

आयोग ने दोहराया कि अनुसूचित जाति के सदस्यों को उपलब्ध संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से संरक्षित किया जाना चाहिए और संस्थानों को गरिमा, समानता, गैर-भेदभाव, छात्र कल्याण और प्रभावी शिकायत निवारण सुनिश्चित करने के लिए उचित तंत्र बनाए रखना चाहिए।

आयोग ने सामाजिक सद्भाव और एकजुटता बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी बल दिया कि सभी आरोपों की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और उचित प्रक्रिया के अनुसार की जाए।

माननीय अध्यक्ष के साथ डॉ. सुनील कुमार बाबू, निदेशक, एनसीएससी राज्य कार्यालय, महाराष्ट्र; डॉ. आर. स्टालिन, उप निदेशक, अत्याचार और नागरिक अधिकार संरक्षण (एपीसीआर) विंग, एनसीएससी मुख्यालय, नई दिल्ली; और एनसीएससी राज्य कार्यालय के अधिकारी उपस्थित थे।

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पीके/केसी/एनकेएस


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