कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

मां को जागरूक बनाने से बच्चों में दिव्यांगता की शुरुआत में ही पहचान संभव: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम के लिए महिलाओं के बीच अधिक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि माताएं अक्सर बच्चे की विकासात्मक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पहचानने वाली सबसे पहली व्यक्ति होती हैं, गर्भावस्था के दौरान समय पर जागरूकता और स्क्रीनिंग से शुरुआती कदम उठाए जा सकते हैं और रोकथाम संभव हो सकती है

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रबुद्ध मातृ शक्ति सम्मेलन को संबोधित करते हुए रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण पर विशेष जोर दिया

प्रविष्टि तिथि: 29 AUG 2026 6:38PM by PIB Delhi

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि मां को सशक्त बनाने से बच्चे में दिव्यांगता की शुरुआती पहचान संभव हो सकती है।

सक्षम (SAKSHAM) द्वारा दिव्यांगता की रोकथाम और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के प्रति महिलाओं को शिक्षित व जागरूक करने के लिए आयोजित प्रबुद्ध "मातृ शक्ति सम्मेलन" की सराहना करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि माताएं अक्सर बच्चे की विकासात्मक या स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को समझने वाली सबसे पहली व्यक्ति होती हैं। इस कारण महिलाओं की जागरूकता दिव्यांग सेवा और सशक्तीकरण के व्यापक मिशन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है। डॉ. सिंह ने आगे कहा कि गर्भावस्था के दौरान उचित जागरूकता, नियमित प्रसव पूर्व जांच और अनुशंसित स्क्रीनिंग से कुछ विकारों का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है, जिससे समय पर चिकित्सीय सलाह और उपचार संभव होता है और रोकी जा सकने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

प्रबुद्ध "मातृ शक्ति सम्मेलन" का आयोजन शिक्षित, जागरूक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार महिलाओं को दिव्यांग सेवा, सशक्तीकरण और रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम के मिशन में सक्रिय भागीदार बनाने के उद्देश्य से किया गया था। यह पहल माताओं, शिक्षकों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और समुदाय की भूमिका पर विशेष जोर देती है, जो बच्चों और परिवारों के स्वास्थ्य, विकास तथा कल्याण से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि रोकी जा सकने वाली दिव्यांगता की रोकथाम का प्रयास जितना संभव हो उतना जल्दी शुरू होना चाहिए—यहाँ तक कि बच्चे के जन्म से पहले भी। मातृ स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्रसव पूर्व देखभाल, संक्रमण से बचाव, दवाओं के सुरक्षित उपयोग, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सा विशेषज्ञों से समय पर परामर्श के प्रति जागरूकता, परिवारों को गर्भावस्था और शुरुआती बचपन के महत्वपूर्ण चरणों में सटीक निर्णय लेने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि जहाँ गर्भावस्था के दौरान ही किसी स्थिति या समस्या की पहचान हो जाती है, वहाँ समय पर चिकित्सीय सहायता और उचित देखरेख से बेहतर परिणाम प्राप्त करने में बड़ा बदलाव आ सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों का अनुभव यह भी दर्शाता है कि जागरूकता और सपोर्ट सिस्टम को परिवार और सामुदायिक स्तर तक ले जाना कितना महत्वपूर्ण है, जिसमें महिलाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मां अक्सर अपने बच्चे के विकास या स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को सबसे पहले भांपती है; इसलिए, उसे सही ज्ञान और जानकारी से सशक्त बनाने से समस्याओं की जल्द पहचान, उचित जगह रेफरल और उपलब्ध सहायता तक समय पर पहुंच संभव हो सकती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जागरूकता केवल रोकथाम तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह दिव्यांगजनों के पूर्ण सशक्तीकरण तक विस्तारित होनी चाहिए। महिलाएं दिव्यांगजनों की पहचान, शिक्षा, पुनर्वास, सहायक उपकरणों, कौशल विकास, रोजगार के अवसरों और आत्मनिर्भरता के रास्तों तक उनकी समय पर पहुंच सुनिश्चित करके दिव्यांग सशक्तीकरण की सबसे मजबूत संवाहक बन सकती हैं।

इस व्यापक प्रयास के तहत, सरकार ने पिछले एक दशक में दिव्यांगजनों के लिए सहायता प्रणालियों को मजबूत करने और समाज में उनकी भागीदारी के अधिक अवसर पैदा करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ये प्रयास 'मातृ शक्ति सम्मेलन' जैसे सामुदायिक स्तर के आयोजनों के पूरक के रूप में कार्य करते हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य परिवार और समाज के स्तर पर जागरूकता का निर्माण करना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिव्यांगजनों के लिए खेल और विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का भी उल्लेख किया। उत्कृष्ट कोचिंग और व्यवस्थित प्रशिक्षण सहायता प्रदान करने के लिए मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए भारत का पहला हाई-टेक खेल प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस तरह के समर्पित इंफ्रास्ट्रक्चर ने खेल में उत्कृष्टता के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने में मदद की है और पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में 29 पदकों के भारत के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन में योगदान दिया है।

सरकार दिव्यांग बच्चों के लिए शुरुआती मदद के तरीकों को भी मजबूत कर रही है। शिशुओं में शुरुआती दौर से ही दिव्यांगता की पहचान और सहायता सुगम बनाने के लिए देशभर में क्रॉस-डिसएबिलिटी अर्ली ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। शुरुआती पहचान के बाद उचित उपचार, पुनर्वास और सहायता से बच्चों को अपनी विकासात्मक क्षमताओं को हासिल करने तथा शिक्षा व समाज में अधिक पूर्णता के साथ भागीदार बनने में मदद मिलती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिव्यांग बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध उन उपायों का भी ज़िक्र किया, जिनका उद्देश्य अपने बच्चों की खास ज़रूरतों को संभालने वाले परिवारों को ज़्यादा मदद देना है। इनमें रोटेशनल ट्रांसफर से छूट, 22 साल की उम्र तक बच्चों के लिए एजुकेशन अलाउंस, मेडिकल सुविधाओं के पास पोस्टिंग पर विचार और संबंधित सरकारी नियमों के तहत दो साल की पेड चाइल्ड केयर लीव शामिल हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसे उपाय एक ऐसे सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता को दर्शाते हैं जो गर्भावस्था और शुरुआती बचपन से लेकर शिक्षा, पुनर्वास, कौशल विकास और अंततः आत्मनिर्भरता तक की पूरी यात्रा को कवर करती है। हालांकि सरकारी कार्यक्रम संस्थागत सहायता प्रदान करते हैं, लेकिन माताओं और परिवारों के बीच निरंतर जागरूकता यह सुनिश्चित कर सकती है कि ये प्रयास बच्चों तक उस समय पहुँचें जब वे उनके जीवन में सबसे बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रबुद्ध मातृ शक्ति सम्मेलन का उद्देश्य केवल वर्तमान में दिव्यांगजनों की सहायता करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आज अधिक जागरूकता पैदा करना है ताकि कल की पीढ़ी अधिक स्वस्थ, समावेशी और सशक्त बन सके। सशक्त माताएं और जागरूक परिवार शुरुआती रोकथाम, शुरुआती पहचान और वृहद समावेशन की मजबूत नींव बन सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट और सरल है: हर मां जागरूक हो, हर परिवार सशक्त बने, हर बच्चे को जीवन की सबसे बेहतरीन शुरुआत मिले, और कोई भी पीछे न छूटे।

विधायक राजीव जसरोटिया ने मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह के निरंतर प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के भीतर पूरे कठुआ जिले का कायाकल्प और अकल्पनीय विकास हुआ है।

'सक्षम' (SAKSHAM) संस्था की ओर से राष्ट्रीय सचिव अभय परगल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सम्मेलन का एजेंडा प्रस्तुत किया और देशभर में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए सक्षम द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही, उन्होंने जम्मू-कश्मीर और कठुआ क्षेत्र में पूर्व में आयोजित किए गए कार्यक्रमों का ब्योरा भी साझा किया।

इस अवसर पर उपस्थित अन्य प्रमुख हस्तियों में राजकीय डिग्री कॉलेज के प्राचार्य स्वामी विश्वानंद, सक्षम की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा खन्ना, श्री अत्री, मनजीत सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।

*************

पीके/केसी/डीवी/डीए


(रिलीज़ आईडी: 2304573) आगंतुक पटल : 157
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Marathi , Tamil , Telugu