जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

अनुसूचित जनजातियों की सांस्कृतिक पहचान, भाषा और पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण हेतु उपाय

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 12:42PM by PIB Delhi

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा को सूचित किया कि जनजातीय कला रूपों, भाषाओं, मौखिक परंपराओं एवं देशज (स्थानीय) ज्ञान प्रणालियों सहित जनजातीय विरासत के संरक्षण, दस्तावेज़ीकरण एवं संवर्धन हेतु, जनजातीय कार्य मंत्रालय, केंद्र प्रायोजित योजना "जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता" के अंतर्गत जनजातीय अनुसंधान संस्थान, झारखंड सहित 29 जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। टीआरआई, संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करते हैं तथा मंत्रालय से प्राप्त वित्तीय सहायता से अनुमोदित वार्षिक कार्य योजनाओं का कार्यान्वयन करते हैं। टीआरआई, झारखंड, जनजातीय भाषाओं, लोककथाओं, रीति-रिवाजों एवं पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेज़ीकरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन, जनजातीय संग्रहालयों के सुदृढ़ीकरण एवं अनुसंधान के प्रकाशन जैसी गतिविधियां संचालित करता है। मंत्रालय ने जनजातीय विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु ट्राइबएक्स (ट्राइबेक्स) (पूर्ववर्ती आदि संस्कृति) डिजिटल मंच (प्लेटफॉर्म) के माध्यम से झारखंड के जनजातीय सांस्कृतिक संसाधनों के दस्तावेज़ीकरण एवं प्रदर्शन हेतु डिजिटल पहलें भी विकसित की हैं। मंत्रालय की ट्राइबएक्स (ट्राइबेक्स) पहल के अंतर्गत, झारखंड के सोहराई पेंटिंग, डोकरा शिल्प (क्राफ्ट) एवं जादुपेटिया चित्रकार जैसे जनजातीय कला रूपों को अल्पकालिक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों (सर्टिफिकेट कोर्सेज़) के रूप में सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने एक एआई-आधारित अनुवाद उपकरण (टूल) "आदि वाणी" भी विकसित किया है, जो जनजातीय भाषाओं एवं हिंदी/अंग्रेज़ी के मध्य एआई-सक्षम (एआई-एनेबल्ड) पाठ एवं वाक् अनुवाद (टेक्स्ट एंड स्पीच ट्रांसलेशन) के माध्यम से संथाली एवं मुंडारी सहित झारखंड की जनजातीय भाषाओं के संरक्षण एवं व्यापक सुगम्यता को सहायता प्रदान करता है।

संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) एवं अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों सहित अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित संवैधानिक सुरक्षा उपायों एवं सांविधिक प्रावधानों का कार्यान्वयन, मुख्यतः राज्य सरकार का दायित्व है। जनजातीय कार्य मंत्रालय नीतिगत मार्गदर्शन, परामर्श एवं क्षमता-निर्माण सहायता प्रदान करता है, जबकि जनजातीय अनुसंधान संस्थान साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण एवं प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता देने हेतु अनुसंधान, अध्ययन एवं दस्तावेज़ीकरण का कार्य करते हैं।

जनजातीय संस्कृति के अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण एवं संवर्धन, जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षण, प्रकाशन एवं जनजातीय ज्ञान के प्रसार से संबंधित स्वीकृत गतिविधियों हेतु "जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता" योजना के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। अनुमोदित वार्षिक कार्य योजनाओं, निधियों की उपलब्धता एवं निर्धारित शर्तों की पूर्ति के आधार पर राज्य सरकार/जनजातीय अनुसंधान संस्थान को निधियां जारी की जाती हैं। जनजातीय सांस्कृतिक संरक्षण हेतु विशेष रूप से पृथक घटक के रूप में सहायता जारी नहीं की जाती। जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को स्वीकृत परियोजनाओं/गतिविधियों का विवरण मंत्रालय के पोर्टल https://tribal.nic.in/Display_Apex_Minutes.aspx पर उपलब्ध है:

आज की तिथि तक, जनजातीय कार्य मंत्रालय के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

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