कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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एमएसडीई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में युवाओं के लिए प्रशिक्षुता के अवसर बढ़ाने के लिए पीएम-एनएपीएस के तहत विशेष कार्यक्रम का विस्तार किया

प्रविष्टि तिथि: 17 JUL 2026 3:21PM by PIB Delhi

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता के अवसरों का विस्तार करने और युवाओं की रोजगार क्षमता को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (पीएम-एनएपीएस) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) में प्रशिक्षुता को बढ़ावा देने हेतु विशेष कार्यक्रम के विस्तार का शुभारम्भ किया है। इसका कार्यान्वयन भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी करेगा। मई 2025 में शुरू की गई प्रायोगिक पहल की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, इस विस्तारित कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों में प्रशिक्षुता के अवसर की सुलभता को बढ़ाना, उद्योग एवं सरकारी संस्थानों की भागीदारी को बढ़ाना और स्कील इंडिया मिशन के तहत क्षेत्र के युवाओं के लिए स्थायी आजीविका के मार्ग प्रशस्त करना है।

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस पहल का दायरा बढ़ाकर 30,000 प्रशिक्षुओं का उच्च लक्ष्य निर्धारित किया है, जो प्रायोगिक चरण की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है। इनमें से 15,000 प्रशिक्षुओं को पूर्वोत्तर के बाहर, सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) सहित अन्य क्षेत्रों में अवसर प्राप्त करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि अन्य 15,000 प्रशिक्षुओं को उनके मूल राज्यों सहित इसी क्षेत्र में रोजगार दिया जाएगा।

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इस पहल के लिए 57.58 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया है। यह आवंटन पीएम-एनएपीएस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र घटक के माध्यम से पूरा किया जाएगा।

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने कहा, "पूर्वोत्तर क्षेत्र देश की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है, जहां युवा, प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी आबादी राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए तत्पर है। इस प्रायोगिक पहल की उल्लेखनीय सफलता यह दर्शाती है कि सही अवसरों और समर्थन से हमारे युवा अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकते हैं। पीएम-एनएपीएस के तहत इस पहल का विस्तार करके, हम गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षुता के अवसरों तक पहुंच बढ़ा रहे हैं, स्थानीय परितंत्र को मजबूत कर रहे हैं, उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहे हैं और इस क्षेत्र के युवाओं को पूर्वोत्तर के भीतर और पूरे देश में मूल्यवान कार्यस्थल अनुभव प्राप्त करने में सक्षम बना रहे हैं।"

इस विस्तारित योजना के तहत पीएम-एनएपीएस के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के अतिरिक्त 1,500 रुपये प्रति माह के अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन का दायरा भी बढ़ाया गया है। प्रायोगिक परियोजना के तहत मुख्य रूप से अपने मूल राज्य से बाहर जाने वाले प्रशिक्षुओं को सहायता प्रदान की गई थी, लेकिन संशोधित योजना में अब पूर्वोत्तर में अपने गृह राज्यों में कार्यरत प्रशिक्षुओं को भी शामिल किया जाएगा।

वित्तीय सहायता के अलावा, यह पहल कार्यशालाओं, जागरूकता अभियानों, नियोक्ता सहभागिता कार्यक्रमों और पूरे क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों तथा उद्योग हितधारकों के साथ सहयोग के माध्यम से प्रशिक्षुता प्रणाली को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगी।

इस प्रायोगिक पहल ने अपने पहले वर्ष में ही उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। 26,000 प्रशिक्षुओं के लक्ष्य के मुकाबले, कार्यक्रम ने 23,470 प्रशिक्षुओं को रोजगार प्रदान किया, जो अपने लक्ष्य का 90 प्रतिशत से अधिक है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षुता में 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 15,562 से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 23,470 हो गई। इस पहल ने गतिशीलता को भी सफलतापूर्वक बढ़ावा दिया, जिसमें 13,673 प्रशिक्षुओं को अपने मूल राज्य से बाहर अवसर प्राप्त हुए, जबकि 9,797 प्रशिक्षुओं को उत्तर-पूर्व में रोजगार मिला।

इस प्रायोगिक पहल के परिणामस्वरूप पूर्वोत्तर क्षेत्र में प्रशिक्षुता में भागीदारी में उत्साहजनक वृद्धि देखी गई, जिसमें मेघालय में सबसे अधिक 95 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। महिलाएं प्रमुख लाभार्थी बनकर उभरीं, महिला प्रशिक्षुता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। नियोक्ताओं की भागीदारी में भी महत्वपूर्ण विस्तार हुआ, सरकारी संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षुता में भागीदारी दोगुनी हो गई और निजी क्षेत्र की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

उद्योग से संबंधित प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बढ़ाकर, यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाने और स्किल इंडिया मिशन के माध्यम से समावेशी विकास को गति देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।

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पीके/केसी/एके/एनजे


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