सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
ऊर्जा सांख्यिकी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट जारी संबंधी प्रेस विज्ञप्ति
प्रविष्टि तिथि:
06 JUL 2026 2:34PM by PIB Delhi
- ऊर्जा मंत्रालयों के परामर्श से ऊर्जा सांख्यिकी डेटाबेस के सामंजस्य में एमओएसपीआई अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
- ऊर्जा सांख्यिकी पर विशेषज्ञ समिति की प्रमुख सिफारिशें जैव ईंधन के योगदान, मांग और आपूर्ति पक्ष के आंकड़ों में मौजूद कमियों को भरने, विशेष रूप से कैप्टिव बिजली और इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा बिजली की खपत से संबंधित कार्यप्रणालियों से जुड़ी हैं।
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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से ऊर्जा सांख्यिकी पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट जारी कर रहा है ।
आर्थिक विकास को गति देने और सामाजिक विकास को बढ़ावा देने में ऊर्जा की अहम भूमिका होती है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) का वार्षिक प्रकाशन "एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया" अंतरराष्ट्रीय मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभिन्न तालिकाओं, ग्राफ़ों और सतत ऊर्जा संकेतकों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा प्रवाह को दर्शाता है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और नेट ज़ीरो आकांक्षाओं की ओर अग्रसर है, ऐसे में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समर्थन देने और ऊर्जा परिवर्तन की प्रभावी निगरानी सुगम बनाने के लिए एक सुदृढ़, व्यापक और सामंजस्यपूर्ण ऊर्जा सांख्यिकी ढांचे की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
इसी आवश्यकता के अनुरूप, एमओएसपीआई ने आईआईटी-दिल्ली के निदेशक डॉ. रंगन बनर्जी की अध्यक्षता में ऊर्जा सांख्यिकी पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समिति में विभिन्न ऊर्जा मंत्रालयों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (टीईआरआई), ऊर्जा कुशल अर्थव्यवस्था गठबंधन (एईईई) आदि जैसे अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। समिति ने "एनर्जी स्टैटिस्टिक्स इंडिया" प्रकाशन और भारत के ऊर्जा सांख्यिकी डेटाबेस की व्यापक समीक्षा की, जिसमें इसके दायरे, परिभाषाएं, वर्गीकरण प्रणाली, डेटा स्रोत और अनुमान पद्धतियां शामिल थीं। समिति ने ऊर्जा सांख्यिकी पर अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने, प्रमुख डेटा कमियों को दूर करने और विभिन्न ऊर्जा मंत्रालयों के भारत के ऊर्जा सांख्यिकी डेटाबेस में विसंगतियां दूर करने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया।
सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले समिति ने संबंधित मंत्रालयों, एजेंसियों और विषय विशेषज्ञों के साथ कई दौर के तकनीकी परामर्श और विचार-विमर्श किए। समिति की प्रमुख सिफारिशों का सार प्रस्तुत है;
- समिति ने ऊर्जा सांख्यिकी के संग्रह और प्रसार में अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाने की सिफारिश की, जो अंतर्राष्ट्रीय मानक औद्योगिक वर्गीकरण (आईएसआईसी) संशोधन 5, राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (एनआईसी)-2025, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा उत्पाद वर्गीकरण (एसआईईसी) आदि के अनुरूप सारणीबद्ध श्रेणियों में हों। समिति ने सभी ऊर्जा मंत्रालयों से समान रूपांतरण कारकों को अपनाने का भी आग्रह किया ताकि उनके द्वारा उत्पादित ऊर्जा सांख्यिकी में अंतर-मंत्रालयी समरूपता सुनिश्चित हो।
- समिति ने आयातित कोयले (जो भारत में कुल कोयले की खपत का लगभग 20 प्रतिशत है) और नीलामी के माध्यम से बेचे जाने वाले घरेलू कोयले, जिन्हें विविध श्रेणी में रखा गया है, के क्षेत्रीय अंतिम उपयोग उपभोग को परिष्कृत करने की एक कार्यप्रणाली की सिफारिश की। यह कार्यप्रणाली वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई) डेटाबेस का उपयोग करती है, जिसमें कोयले की उद्योग-वार खपत का सीमित डेटा उपलब्ध है। समिति ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) को परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (पीएटी) योजना के तहत एक व्यापक डेटाबेस विकसित करने और उसे बनाए रखने की भी संस्तुति की।
- समिति ने वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई) डेटाबेस का उपयोग कर भारत में उद्योग-वार बिजली की अंतिम खपत को संकलित करने और प्रसारित करने की समान पद्धति की सिफारिश की।
- राष्ट्रीय स्तर पर समेकित आंकड़ों के अभाव में, संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग (यूएनएसडी) ने अपने वार्षिक प्रकाशन 'विश्व ऊर्जा संतुलन' में भारत की कुल वार्षिक ऊर्जा खपत का लगभग 31-34 प्रतिशत जैव ईंधन की खपत का अनुमान लगाया है; यह अनुमान उसके स्वयं के आकलन पर आधारित है। समिति ने भारत के ऊर्जा संतुलन तालिका में जैव ईंधन के घटक को शामिल करने हेतु इस महत्वपूर्ण आंकड़े की कमी दूर करने के लिए एक व्यापक कार्यप्रणाली की संस्तुति की।
भारत में कैप्टिव/ऑफ-ग्रिड मोड माध्यम से बिजली की खपत और इलेक्ट्रिक वाहनों द्वारा बिजली की खपत ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण डेटा कमियों में से हैं, जिन्हें इस रिपोर्ट में संबोधित किया गया है। समिति ने इनके लिए प्रारंभिक कार्यप्रणालीगत ढांचा सुझाया है, जिसे भारत के ऊर्जा-संतुलन डेटाबेस में उपयुक्त रूप से शामिल करने के लिए उपयोगकर्ताओं और शोधकर्ताओं द्वारा और परिष्कृत करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में इन विचार-विमर्शों का विस्तृत विवरण दिया गया है, साथ ही भारत की ऊर्जा सांख्यिकी प्रणाली की प्रणालीगत सुदृढ़ता, विश्लेषणात्मक उपयोगिता और अंतर-एजेंसी एकरूपता मजबूत करने के उद्देश्य से व्यावहारिक सिफारिशें भी प्रस्तुत की गई हैं। इन सिफारिशों से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समर्थन मिलने, आंकड़ों की गुणवत्ता और तुलनीयता में सुधार होने और भारत के बदलते ऊर्जा परिदृश्य की बेहतर निगरानी में सहायता मिलने की उम्मीद है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा है कि विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अधिक एकीकृत, विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय ऊर्जा सांख्यिकी ढांचा बनाने में सभी संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग और समन्वय की आवश्यकता होगी।
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पीके/केसी/एवाई/एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2281672)
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