सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के संयुक्त सचिव गिरीश सी. होसुर ने मुंबई में स्थित अली यावर जंग नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग डिसएबिलिटीज [एवाईजेएनआईएसएचडी(डी)] का दौरा किया; उन्होंने यहां की मुख्य सुविधाओं और सेवाओं का जायजा लिया और टेली-रिहैबिलिटेशन (टेलीफोन या वीडियो कॉल के जरिए रिहैबिलिटेशन) और ऑडियो रिकॉर्डिंग सुविधाओं की शुरुआत की
प्रविष्टि तिथि:
12 JUN 2026 9:58PM by PIB Delhi
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) के संयुक्त सचिव श्री गिरीश सी. होसुर ने आज मुंबई स्थित अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग डिसएबिलिटीज (दिव्यांगजन) [एवाईजेएनआईएसएचडी(डी)] का दौरा किया।
अली यावर जंग नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एंड हियरिंग डिसएबिलिटीज [एवाईजेएनआईएसएचडी(डी)] के निदेशक डॉ. सुमन कुमार ने संस्थान के दौरे पर आए श्री गिरीश सी. होसुर का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। डायरेक्टर ने जॉइंट सेक्रेटरी का परिचय अलग-अलग विभागों के प्रमुखों से कराया, जिससे सार्थक बातचीत और विचारों का आदान-प्रदान हो सका। इसके बाद इंस्टीट्यूट परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विभाग प्रमुख और संकाय के सदस्यों ने संयुक्त सचिव को संस्थान के मौजूदा कार्यक्रमों, सेवाओं और आने वाली योजनाओं के बारे में जानकारी दी। बातचीत में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि बोलने, भाषा और सुनने की अक्षमता वाले लोगों को सशक्त बनाने में हर विभाग की क्या भूमिका है और समाज के बड़े हिस्से तक ये सेवाएं कैसे पहुंचाई जा सकती हैं।
इस दौरान श्री होसुर ने कई अहम विभागों का दौरा किया, जिनमें क्रॉस डिसेबिलिटी अर्ली आइडेंटिफिकेशन एंड इंटरवेंशन सेंटर (सीडीईआईसी), ऑडियोलॉजी विभाग, स्पीच एंड लैंग्वेज पैथोलॉजी विभाग, सूचना और दस्तावेजीकरण केंद्र, संस्थान की लाइब्रेरी और मनोविज्ञान विभाग शामिल रहे। साथ ही उन्होंने इन विभागों की गतिविधियों और सेवाओं का जायजा लिया। उन्होंने नए बन रहे हॉस्टल भवन का भी दौरा किया।

संयुक्त सचिव ने टेली-रिहैबिलिटेशन और वॉयस रिकॉर्डिंग रूम का उद्घाटन किया और सेवा वितरण व पहुंच को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई सुविधाओं का जायजा लिया।

क्रॉस डिसएबिलिटी अर्ली आइडेंटिफिकेशन एंड इंटरवेंशन सेंटर (सीडीईआईसी) में डॉ. सुनी मैथ्यू ने 0 से 6 साल की उम्र के अलग-अलग तरह की दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए उपलब्ध इलाज के तरीकों और सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चों और उनके परिवारों के लिए सबसे अच्छे नतीजे सुनिश्चित करने में शुरुआती पहचान, समय पर मदद और सर्वांगीण पुनर्वास के महत्व पर जोर दिया।

गिरीश सी. होसुर ने दिव्यांग लोगों के लिए व्यापक मेडिकल, शैक्षणिक और समुदाय-आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने में अली यावर जंग नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एंड हियरिंग डिसएबिलिटीज [एवाईजेएनआईएसएचडी(डी)] के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह एक समावेशी समाज बनाने की दिशा में योगदान देने के लिए जन-जागरूकता और आउटरीच पहल, शोध गतिविधियों और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों को और मजबूत करे।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2272386)
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