पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने असम के मूगा रेशम के लिए "सेनेहजोरी" मिशन का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर विजन को मिशन सेनेहजोरी में साकार होते देखा जा सकता है - इसका उद्देश्य असम के सुनहरे रेशम को वैश्विक लक्जरी ब्रांड में बदलना है

केंद्रीय मंत्री ने प्रीमियम मूगा रेशम और लक्जरी वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की असम की क्षमता के बारे में बताया

प्रविष्टि तिथि: 02 JUN 2026 7:05PM by PIB Delhi

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (एमडीओएनईआर) श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज असम के माननीय मुख्यमंत्री के साथ मिलकर मिशन "सेनेहजोरी" - असम मूगा सिल्क यूएसपी का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक क्लस्टर-आधारित पहल है। इसका उद्देश्य असम के अद्वितीय मूगा रेशम क्षेत्र को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी, उच्च मूल्य वाले लक्जरी वस्त्र इकोसिस्टम में परिवर्तित करना है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों/संगठनों के समन्वय से संचालित यह मिशन, मेजबान पौधे की खेती और रेशमकीट के बीज उत्पादन से लेकर रीलिंग, बुनाई, ब्रांडिंग, निर्यात संवर्धन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और पर्यटन तक संपूर्ण मूगा रेशम मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास करता है।

मुगा रेशम को दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक रूप से सुनहरा रेशम और भारत का पहला जीआई-टैग प्राप्त रेशम माना जाता है। यह असम में लगभग 2.6 लाख रेशम पालकों और बुनकरों के परिवारों को आजीविका प्रदान करता है। अपनी दुर्लभता और वैश्विक मान्यता के बावजूद, यह क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है। मिशन सेनेहजोरी एक प्रीमियम, पता लगाने योग्य और निर्यात-उन्मुख मुगा रेशम अर्थव्यवस्था का निर्माण करके इस मूल्य अंतर को पाटने का प्रयास करता है।

इस मिशन में जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची सहित प्रमुख मूगा रेशम उत्पादक जिलों को शामिल है और ये क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है। इस पहल का उद्देश्य मेजबान पौधे की पारिस्थितिकी को मजबूत करना, आधुनिक रीलिंग अवसंरचना स्थापित करना, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देना, साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) बनाना, जीआई प्रमाणीकरण को लागू करना और "सेनेहजोरी" की एकीकृत ब्रांड पहचान के तहत वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाना है ।

केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र की अनूठी खूबियों और उत्पादों को वैश्विक मान्यता दिलाने और स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका उत्पन्न करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि असम का मूगा रेशम केवल एक वस्त्र उत्पाद नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मिशन सेनेहजोरी की परिकल्पना न केवल "संपूर्ण सरकारी" सिद्धांत पर आधारित है, बल्कि इसमें केंद्रीय मंत्रालयों, असम सरकार, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्र के भागीदारों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए "संपूर्ण सरकारी" दृष्टिकोण को अपनाया गया है। तीन वर्षों की अवधि में (एमडीओएनईआर के 136–151 करोड़ रुपये सहित) लगभग 396–411 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ मिशन का उद्देश्य विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त लक्जरी मूगा रेशम इकोसिस्टम का निर्माण करना, उत्पादकों के लिए मूल्य प्राप्ति को बढ़ाना और असम को रेशम आधारित सांस्कृतिक और अनुभवात्मक पर्यटन के लिए एक अग्रणी गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

श्री सिंधिया ने यह भी कहा कि मिशन की सफलता तब स्पष्ट होगी जब प्रामाणिक असम मूगा रेशम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लक्जरी बाजारों में प्रमुख स्थान प्राप्त करेगा और साथ ही राज्य भर में रेशम पालकों और बुनकर परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करेगा। उन्होंने अवसंरचना विकास, ब्रांडिंग, गुणवत्ता आश्वासन और निर्यात सुविधा के माध्यम से संपूर्ण मूगा रेशम मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

सभा को संबोधित करते हुए श्री सिंधिया ने आज के दिन को असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने इस मिशन को प्रेरित करने वाले उस गहरे भावनात्मक बंधन को याद किया। उन्होंने बताया कि अष्टलक्ष्मी महोत्सव में असम के मूगा रेशम (केवल कपड़ा ही नहीं, बल्कि तैयार वस्त्र भी) के प्रदर्शन वाले एक स्टॉल पर ही मिशन सेनेहजोरी का विचार सही मायने में आकार ले पाया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि असम विश्व के मूगा रेशम उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा है। इस क्षेत्र की अनूठी विशेषताएं - इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग, असाधारण टिकाऊपन और जीआई-प्रमाणित ट्रेसबिलिटी - इसे वैश्विक स्तर पर विलासितापूर्ण वस्त्रों में एक अलग ही स्थान देती हैं। उन्होंने कहा कि किसानों और उद्यमियों के अथक प्रयासों के बावजूद, उत्पादक आज मूगा रेशम से केवल 18,000-21,000 रुपये प्रति वर्ष कमाते हैं, और मिशन सेनेहजोरी इस वास्तविकता को निर्णायक रूप से बदलने के लिए बनाया गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस मिशन के पीछे मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में प्रधानमंत्री के समग्र सरकारी, समग्र भारतीय दृष्टिकोण पर बल दिया। इसका अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मूगा रेशम का पूरा प्रीमियम मूल्य खेत से लेकर विदेशी तटों तक पहुंचे। उन्होंने बल दिया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह असम के बुनकरों और पालकों तक पहुंचे।

श्री सिंधिया ने कहा, "मैं आपको यह आश्वासन देना चाहता हूं कि हम योगदान देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि मूल्य श्रृंखला से जुड़े सभी लोग एक साथ आए - ताकि मुगा रेशम को असम के कोकून से निकालकर विश्व स्तर पर पहुंचाया जा सके।"

असम के मुख्यमंत्री ने मिशन सेनेहजोरी की परिकल्पना और समर्थन के लिए एमडीओएनईआर की सराहना की और इसे असम के पारंपरिक रेशम क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि मूगा रेशम असम की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है और यह मिशन राज्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए किसानों, पालकों, बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री माननीय डॉ. सुकांता मजूमदार ने कहा कि भारत सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी है। उन्होंने मिशन सेनेहजोरी को एक परिवर्तनकारी पहल बताया जो असम को उच्च गुणवत्ता वाले रेशम उत्पादन के वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी, साथ ही रोजगार सृजन, उद्यमिता प्रोत्साहन और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देगी।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास सचिव श्री संजय जाजू ने प्रामाणिक मूगा रेशम के एकमात्र उत्पादक के रूप में असम को मिलने वाले अनूठे लाभ के साथ-साथ मिशन के कार्यान्वयन ढांचे के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मिशन का मुख्य उद्देश्य मेजबान पौधे के पुनर्जनन को मजबूत करना, बीज सुरक्षा में सुधार करना, रीलिंग अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना, जीआई प्रमाणीकरण को बढ़ावा देना, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सिस्टम स्थापित करना और ब्रांडिंग और निर्यात के माध्यम से बाजार पहुंच को बढ़ाना होगा।

इस मिशन का उद्देश्य 2028 तक कई प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इनमें पांच आधुनिक मुगा रीलिंग इकाइयों और एक मुगा स्पन मिल की स्थापना, 30 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और 1,180 से अधिक किसान हित समूहों का निर्माण, 5,000 हेक्टेयर में सोम और सोआलू प्रजाति के पौधों का पुनर्जनन, जीआई-लिंक्ड सिस्टम के माध्यम से व्यापार किए गए 80 प्रतिशत से अधिक मुगा रेशम का प्रमाणीकरण, 8,000 से अधिक परिवारों के लिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी तंत्र का निर्माण और मुगा रेशम के निर्यात को प्रति वर्ष 2,000 किलोग्राम से अधिक तक विस्तारित करना शामिल है।

मिशन सेनेहजोरी का उद्देश्य मुगा सिल्क ट्रेल के विकास, सिल्क टूरिज्म पार्क की स्थापना और वार्षिक मुगा उत्सवों के आयोजन के माध्यम से सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना भी है। इससे असम को रेशम विरासत पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके।

इस शुभारंभ कार्यक्रम में वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा के साथ-साथ केंद्र सरकार, असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र और रेशम उत्पादन संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि, बुनकर, उद्यमी और मूगा रेशम मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य हितधारक भी उपस्थित थे।

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पीके/केसी/वीके/एसएस

 


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