खान मंत्रालय
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खान मंत्रालय ने खनिज रियायत नियमों में संशोधनों को अधिसूचित किया, जिससे खनन पट्टे में सन्निहित क्षेत्र और संबंधित खनिजों को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ

प्रविष्टि तिथि: 06 APR 2026 7:29PM by PIB Delhi

खान मंत्रालय ने 30 मार्च, 2026 को 'खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत (दूसरा संशोधन) नियम, 2026' अधिसूचित किया है। इसमें गहराई में स्थित खनिजों के खनन पट्टे और कम्पोजिट लाइसेंस में सन्निहित क्षेत्र को शामिल करने तथा प्रमुख और गौण दोनों प्रकार के खनिजों के खनन पट्टों में संबंधित खनिजों को शामिल करने के लिए एक विस्तृत तंत्र प्रदान किया गया है।

नियमों में यह संशोधन, 1 सितंबर 2025 से प्रभावी एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2025 के माध्यम से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) में संशोधन के अनुसार किया गया है, जिसका उद्देश्य देश के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण और उत्पादन को बढ़ाना है। इस संशोधन द्वारा किए गए सुधार खनन क्षेत्र को उद्योगों के लिए खनिजों की आपूर्ति बढ़ाने हेतु प्रोत्साहन देते हैं, जिससे 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूती मिलती है। 

संशोधित नियमों में, गहराई में स्थित खनिजों के लिए खनन पट्टा या कम्पोजिट लाइसेंस धारक द्वारा किए गए आवेदन को प्रोसेस करने के लिए सरल और समयबद्ध प्रावधान दिए गए हैं। यह आवेदन, पट्टा या लाइसेंस वाले क्षेत्र में एक सन्निहित क्षेत्र को शामिल करने के लिए, क्षेत्र के एक बार के विस्तार हेतु किया जाता है। खनन पट्टे के मामले में, यह सन्निहित क्षेत्र पट्टे या लाइसेंस के तहत मौजूदा क्षेत्र के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए; और कम्पोजिट लाइसेंस के मामले में, यह सन्निहित क्षेत्र मौजूदा क्षेत्र के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि किसी नीलामी द्वारा प्राप्त खनन पट्टे या कंपोजिट लाइसेंस में सन्निहित क्षेत्र जोड़ा जाता है, तो धारक को उस अतिरिक्त क्षेत्र से प्रेषित खनिजों पर नीलामी प्रीमियम का 10 प्रतिशत भुगतान करना होगा। यदि पट्टा नीलामी के बिना दिया गया था, तो धारक को उस अतिरिक्त क्षेत्र से प्रेषित खनिजों पर रॉयल्टी के बराबर अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।

सन्निहित क्षेत्रों को शामिल करने की अनुमति देने से गहराई में स्थित खनिजों का बेहतर तरीके से खनन हो पाएगा; ये खनिज सन्निहित क्षेत्रों में ही दबे होते हैं और अगर इन्हें किसी अलग पट्टे या लाइसेंस के तहत निकाला जाए, तो यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं हो सकते हैं।

नियमों में खनन पट्टे में गौण खनिज सहित किसी भी अन्य खनिज को शामिल करने के बारे में भी बताया गया है और राज्य सरकार को आवेदन के 30 दिनों के भीतर इस तरह के समावेशन की अनुमति देने का आदेश दिया गया है। एमएमडीआर अधिनियम की सातवीं अनुसूची में बताए गए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों, या गहराई में पाए जाने वाले खनिजों को शामिल करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं है ताकि इन खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके, क्योंकि ये खनिज बहुत कम मात्रा में मिलते हैं और इन्हें निकालना तथा प्रोसेस करना काफी मुश्किल होता है।

यह संशोधन उन पट्टों में प्रमुख खनिजों को शामिल करने की प्रक्रिया भी निर्धारित करता है, जो एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2025 से पहले, गौण खनिजों के लिए प्रदान किए गए थे। भविष्य में गौण खनिजों के पट्टे देने के लिए, राज्य सरकारों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि गौण खनिजों (रेत को छोड़कर) के लिए खनन पट्टे तभी दिए जायेंगे, जब उस क्षेत्र का जी3 स्तर तक अन्वेषण कर लिया गया हो। यदि अन्वेषण के दौरान उस क्षेत्र में कोई प्रमुख खनिज पाया जाता है, तो राज्य सरकार उस क्षेत्र की नीलामी एक प्रमुख खनिज ब्लॉक के रूप में करेगी। यह इष्टतम खनन की दिशा में एक और कदम है।         

अधिनियम में संशोधन के अनुसरण में, कैप्टिव खदानों से खनिजों की बिक्री पर लगी सीमा को हटाने के लिए नियमों में भी संशोधन किया गया। खनिक, खदान से जुड़े एंड-यूज़ प्लांट की ज़रूरतें पूरी करने के बाद खनिज बेच सकते हैं, बशर्ते वह एंड-यूज़ प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा हो। अगर एंड-यूज़ प्लांट अपनी पूरी क्षमता से कम क्षमता पर काम करता है, तो पट्टेदार सिर्फ उतनी ही मात्रा में खनिज बेच सकता है, जितनी मात्रा में खनिज उस वित्तीय वर्ष में एंड-यूज़ प्लांट में इस्तेमाल हुआ हो। इससे एमएसएमई सहित बाजार में खनिजों की उपलब्धता बढ़ेगी।

संशोधन नियमों में प्रदान की गई सरल व्यवस्था न केवल इस क्षेत्र में व्यवसाय में सुगमता को बढ़ावा देगी, बल्कि महत्वपूर्ण, रणनीतिक और गहराई में स्थित खनिजों के उत्पादन में वृद्धि को भी संभव बनाएगी। साथ ही, राज्य सरकारों को भी अतिरिक्त भुगतानों और उत्पादन में वृद्धि से लाभ होगा। ये नियम राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, उद्योग संघों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद बनाए गए हैं।

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पीके/केसी/एसके / डीए


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