जल शक्ति मंत्रालय
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महाराष्ट्र ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए


केंद्र और राज्य सरकार ने हर घर तक पेयजल सेवा सुदृढ़ करने तथा ग्रामीण पाइपलाइन नेटवर्क में सुधार के लिए हाथ मिलाया

प्रविष्टि तिथि: 19 MAR 2026 6:13PM by PIB Delhi

ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आज महाराष्ट्र और केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही महाराष्ट्र औपचारिक रूप से जल जीवन मिशन 2.0 के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में शामिल हो गया है, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

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इस समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र के जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री श्री गुलाबराव पाटिल और महाराष्ट्र की राज्य मंत्री श्रीमती मेघना बोर्डीकर साकोरे की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, जो ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त सचिव (जल) श्रीमती स्वाति मीना नायक और महाराष्ट्र सदन की रेजिडेंट कमिश्नर एवं सचिव श्रीमती आर. विमला के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन ने देश भर के ग्रामीण जलापूर्ति में क्रांतिकारी बदलावा लाया है। मिशन ने अब तक 80% ग्रामीण परिवारों को नल से जल के कनेक्शन उपलब्ध करा दिए हैं। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 का ध्यान सुनिश्चित सेवा वितरण, जवाबदेही और संरचनात्मक सुधार के साथ दीर्घकालिक स्थिरता पर है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति सरकार की 'जीरो-टोलरेंस' नीति को भी दोहराया।

केंद्रीय मंत्री ने एसबीआई रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि जल जीवन मिशन ने लगभग 9 करोड़ महिलाओं को पानी लाने की दैनिक मशक्कत से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अध्ययन का उल्लेख करते हुए बताया कि नल से सुरक्षित पेयजल की पहुंच से महिलाओं के प्रतिदिन लगभग 5.5 करोड़ घंटे बच सकते हैं और डायरिया जैसी बीमारियों से होने वाली करीब 4 लाख वार्षिक मौतों को रोका जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जल जीवन मिशन केवल एक योजना नहीं, बल्कि जीवन में बदलाव लाने वाला अभियान है, जो स्वास्थ्य, गरिमा और जीवन स्तर में सुधार ला रहा है, विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए। इसलिए हर गांव में नियमित और निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है और जन शिकायतों का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के आह्वान का उल्लेख करते हुए उन्होंने राज्य से जल स्रोतों की स्थिरता और जल संरक्षण पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने जल जीवन मिशन के बदलावकारी प्रभाव की सराहना की और हर ग्रामीण घर को टिकाऊ, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति के साथ, राज्य कार्यों की गुणवत्ता पर अधिक जोर देगा।

अपने संबोधन में, उन्होंने आगे कहा कि संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति के साथ, राज्य कार्यों की गुणवत्ता पर अधिक जोर देगा और जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों को साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मिशन के सार्वभौमिक घरेलू नल जल कवरेज प्राप्त करने के मुख्य एजेंडे से सीखे गए अनुभवों के आधार पर, राज्य ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करने और मिशन के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर काम करेगा।

सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन के हिस्से के तहत, ग्रामीण पेयजल सेवाओं की गुणवत्ता, नियमितता और विश्वसनीयता पर सामुदायिक फीडबैक लेने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 'जल सेवा आकलन' किया जाएगा। जल सेवा आकलन के तहत दर्ज की गई प्रतिक्रियाएं वास्तविक सेवा वितरण परिणामों को प्रतिबिंबित करेंगी और 'मेरी पंचायत' एप्लीकेशन के माध्यम से नागरिकों को दिखाई देंगी, जिससे जल शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक भागीदारी मजबूत होगी।

जन भागीदारी को और अधिक संस्थागत बनाने के लिए, समझौता ज्ञापन में 'जल उत्सव' मनाने का प्रावधान है, जो स्थानीय संस्कृति के भीतर जल जागरूकता और प्रबंधन को शामिल करने के उद्देश्य से एक संरचित त्रि-स्तरीय वार्षिक अभियान है। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर जल महोत्सव, राज्य स्तर पर राज्य जल उत्सव / नदी उत्सव और ग्राम पंचायत स्तर पर लोक जल उत्सव शामिल हैं, जिसमें पानी के स्थानीय सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व को एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस संदर्भ में, राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 की शुरुआत 8 मार्च 2026 को देशव्यापी 'जल अर्पण' के साथ की गई थी और इसका समापन 22 मार्च 2026 को विश्व जल दिवस के अवसर पर होगा। 11 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शामिल हुईं, जो इस पहल के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है।

समझौता ज्ञापन के तहत एक प्रमुख सुधार शर्त के रूप में, सभी पूर्ण हो चुकी पाइप जलापूर्ति योजनाओं को "जल अर्पण" प्रक्रिया के माध्यम से औपचारिक रूप से ग्राम पंचायतों, वीडब्ल्यूएससी और समुदाय को सौंपा जाएगा। इस संरचित हस्तांतरण का उद्देश्य ग्रामीण पेयजल सेवाओं का स्थानीय स्वामित्व, परिचालन जिम्मेदारी और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।

सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन आगे ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाले, सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल शासन मॉडल को अनिवार्य बनाता है, जो जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है। यह जिला और ग्राम पंचायत स्तरों पर एक डिजिटल योजना मंच के रूप में पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) द्वारा विकसित निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) के संचालन का भी प्रावधान करता है। डीएसएस स्रोत स्थिरता योजना का समर्थन करेगा और इसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म और राष्ट्रीय जल डेटासेट के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे डेटा-आधारित, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।

दिसंबर 2028 तक मिशन के विस्तार और बढ़े हुए वित्तीय प्रावधान के साथ, इसका उद्देश्य पेयजल सेवाओं को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और समुदाय-केंद्रित बनाना है, जिससे जल जीवन मिशन 2.0 को ग्रामीण पेयजल सेवाओं के लिए एक मजबूत और टिकाऊ राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सके।

सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मजबूत सामुदायिक भागीदारी (जन भागीदारी) के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित आधार पर पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्ता की पेयजल आपूर्ति प्राप्त हो। इसके अलावा, ग्रामीण जलापूर्ति प्रणालियों के टिकाऊ संचालन और रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार लाए जा सकें, जिससे 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान देते हुए ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

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पीके/ केसी/ केजे / डीए

 


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