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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में उद्योग जगत के लीडर्स ने सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस (SaaS) और एंटरप्राइज सेवाओं पर एआई एजेंट्स के प्रभाव पर चर्चा की


बिजनेस मॉडल के विकास, उद्यमों की तैयारी और कस्टमर-सेंट्रिक एआई अपनाने पर पैनल की मुख्य चर्चाएँ

एआई एजेंट्स बिजनेस और ऑपरेटिंग मॉडल्स को नया आकार देंगे, एआई युग में सफलता के लिए तेजी और कस्टमर-सेंट्रिक इनोवेशन अनिवार्य

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 8:51PM by PIB Delhi

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में एक उच्च स्तरीय पैनल ने इस बात की समीक्षा की कि क्या एआई एजेंट मौलिक रूप से पारंपरिक सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस (SaaS) मॉडल को बदल रहे हैं। इस चर्चा में इंफोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलिल पारेख, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार और सेल्सफोर्स इंडिया की चेयरपर्सन एवं सीईओ अरुंधति भट्टाचार्य शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण चर्चा का संचालन अमिताभ कांत द्वारा किया गया।

मार्केट के तेज रिएक्शन और सास (SaaS) के भविष्य को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर अपनी राय रखते हुए, अरुंधति भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि इस विषय को इतनी सरलता से देखना भूल होगी। उन्होंने कहा, "मार्केट बहुत सी बातें कहेगा, लेकिन वह सब सच नहीं होता।" उन्होंने जोर देते हुए कहा, "जब आप सास (SaaS) मॉडल की बात करते हैं, तो यह केवल वाइब कोडिंग या सिर्फ एक एप्लिकेशन बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह वर्कफ़्लो को समझने, कस्टमर की समस्याओं को पहचानने और यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि आप उनका समाधान कर रहे हैं। यह ऑब्जर्वेबिलिटी (निरीक्षण क्षमता), गवर्नेंस (शासन), ऑडिटेबिलिटी (लेखा-परीक्षण) और इसे अपनाने से जुड़ा विषय है।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भले ही काम करने के तरीके बदल जाएंगे, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कस्टमर्स को वास्तविक मूल्य कितना प्रदान कर पा रहे हैं।

के. कृतिवासन ने सेवाओं के दृष्टिकोण से इंजीनियरों की भूमिका में आने वाले एक मौलिक बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ सॉफ्टवेयर इंजीनियर की भूमिका हाई-लेवल आर्किटेक्चर और कड़े वैलिडेशन की ओर बढ़ रही है।“ यद्यपि एआई प्रोडक्टिविटी में भारी बढ़ोतरी की संभावना जगाता है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उद्यमों द्वारा इसे अपनाने के लिए डेटा को सही बनाने से लेकर एप्लिकेशन को मॉडर्न बनाने तक महत्वपूर्ण जमीनी कार्य की आवश्यकता है। क्षेत्र में गिरावट के बजाय, वे इसके विस्तार का अनुमान लगाते हैं: "हम इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गिरावट की आशंका नहीं देखते हैं, बल्कि जो कुछ भी बनाया जा सकता है उसकी मात्रा और जिन जटिल समस्याओं को हम हल कर सकते हैं, उनमें एक व्यापक बढ़ोत्तरी देखते हैं।

श्री सी. विजयकुमार ने इस विचार का समर्थन किया कि उद्यमों में एआई को अपनाना केवल सामान्य मॉडल्स तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) और फाउंडेशनल मॉडल्स को अभी तक उद्यमों की विशिष्ट जरूरतों के लिए पूरी तरह से प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने फाउंडेशनल मॉडल्स की क्षमताओं और उद्यम-स्तर के प्रदर्शन के बीच मौजूद एक स्थायी अंतर की ओर इशारा किया। उन्होंने आगे कहा कि एचसीएल टेक्नोलॉजीज इस अंतर को पाटने और इसके उपयोग को बड़े पैमाने पर ले जाने के लिए बौद्धिक संपदा (आईपी) और विशेषज्ञ सेवाओं का निर्माण कर रही है, जिसमें फिजिकल एआई और एजेंटिक एआई शामिल हैं। इसके लिए कंपनी अपनी मौजूदा बिजनेस लाइनों को सक्रिय रूप से विकसित करने के लिए भी तैयार है।

श्री सलिल पारेख ने भविष्य के अवसरों के व्यापक पैमाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "एआई 'असंभव' को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाकर 300 बिलियन डॉलर के सेवा अवसर पैदा कर रहा है।" उन्होंने इसके एक प्रमुख उदाहरण के रूप में लेगेसी मॉडर्नाइजेशन (पुरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण) को एक खास उदाहरण बताया। उन्होंने आगे बताया कि इन्फोसिस के ऑर्केस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से, उद्यम औसत दर्जे के फाउंडेशन मॉडल्स को विशेष एजेंट्स के साथ एकीकृत कर सकते हैं, जिससे औसत के बजाय मापने योग्य व्यावसायिक मूल्य प्राप्त किया जा सके।

अंत में, पूरे पैनल ने सामूहिक रूप से एक स्पष्ट संदेश दिया: एआई एजेंट्स बिजनेस और ऑपरेटिंग मॉडल्स को पूरी तरह से नया आकार तो देंगे, लेकिन वे उन्हें रातों-रात अप्रासंगिक नहीं बनाएंगे। एआई के इस युग में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कोई संगठन कितनी सजगता, संस्थागत तैयारी और ऑर्केस्ट्रेशन (विभिन्न प्रणालियों का तालमेल) दिखा पाता है। और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह सफलता लगातार जटिल होते डिजिटल परिवेश में कस्टमर्स की वास्तविक समस्याओं को निरंतर हल करने की क्षमता पर टिकी होगी।

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पीके/केसी/डीवी/एसएस


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