रेल मंत्रालय
भारतीय रेलवे ने विद्युतीकरण से 2024-25 में डीजल की खपत को 178 करोड़ लीटर कम किया, 2016-17 से 62 प्रतिशत की कमी के लक्ष्य को हासिल किया
25 राज्यों ने शत-प्रतिशत रेल लाइनों के विद्युतीकरण के लक्ष्य को हासिल किया; 2023-24 से अब तक 10,932 रूट किलोमीटर का विद्युतीकरण किया गया
बायो-टॉयलेट, अलग-अलग कूड़ेदान, सीवेज शोधन, बोतल क्रशिंग मशीन और स्वच्छ भारत अभियानों सहित उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाता है
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2026 5:48PM by PIB Delhi
भारतीय रेलवे (आईआर) ने रेल लाइनों के विद्युतीकरण को मिशन मोड में शुरू किया है। अब तक, लगभग 99.4 प्रतिशत बड़ी लाइन (बीजी) नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। शेष रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। 2014-25 के दौरान और 2014 से पहले किए गए विद्युतीकरण कार्य निम्नानुसार है:
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अवधि
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रूट (किलोमीटर)
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2014 से पहले (लगभग 60 वर्ष)
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21,801
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2014-25
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46,900
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जोन-वार विद्युतीकरण का ब्यौरा इस प्रकार है:
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क्र.सं.
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रेलवे जोन
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विद्युतीकरण का %
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1
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मध्य रेलवे
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100%
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2
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पूर्वी तट रेलवे
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100%
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3
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पूर्व मध्य रेलवे
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100%
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|
4
|
पूर्वी रेलवे
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100%
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5
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कोंकण रेलवे
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100%
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6
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कोलकाता मेट्रो
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100%
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7
|
उत्तर मध्य रेलवे
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100%
|
|
8
|
पूर्वोत्तर रेलवे
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100%
|
|
9
|
उत्तर रेलवे
|
100%
|
|
10
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दक्षिण मध्य रेलवे
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100%
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|
11
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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे
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100%
|
|
12
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दक्षिण पूर्व रेलवे
|
100%
|
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13
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पश्चिम मध्य रेलवे
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100%
|
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14
|
पश्चिम रेलवे
|
100%
|
|
15
|
उत्तर पश्चिम रेलवे
|
99%
|
|
16
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पूर्वोत्तर सीमा रेलवे
|
99%
|
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17
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दक्षिण रेलवे
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98%
|
|
18
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दक्षिण पश्चिम रेलवे
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96%
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राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश-वार विद्युतीकरण की स्थिति निम्नानुसार है:
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क्र.सं.
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राज्य
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विद्युतीकरण का %
|
|
क्र.सं.
|
राज्य
|
विद्युतीकरण का %
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|
1
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आंध्र प्रदेश
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100%
|
|
16
|
मिजोरम
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100%
|
|
2
|
अरुणाचल प्रदेश
|
100%
|
|
17
|
नागालैंड
|
100%
|
|
3
|
बिहार
|
100%
|
|
18
|
ओडिशा
|
100%
|
|
4
|
चंडीगढ़
|
100%
|
|
19
|
पुडुचेरी
|
100%
|
|
5
|
छत्तीसगढ़
|
100%
|
|
20
|
पंजाब
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100%
|
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6
|
दिल्ली
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100%
|
|
21
|
तेलंगाना
|
100%
|
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7
|
गुजरात
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100%
|
|
22
|
त्रिपुरा
|
100%
|
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8
|
हरियाणा
|
100%
|
|
23
|
उत्तर प्रदेश
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100%
|
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9
|
हिमाचल प्रदेश
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100%
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24
|
उत्तराखंड
|
100%
|
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10
|
जम्मू-कश्मीर
|
100%
|
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25
|
पश्चिम बंगाल
|
100%
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|
11
|
झारखंड
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100%
|
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26
|
राजस्थान
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99%
|
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12
|
केरल
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100%
|
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27
|
असम
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98%
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13
|
मध्य प्रदेश
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100%
|
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28
|
तमिलनाडु
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97%
|
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14
|
महाराष्ट्र
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100%
|
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29
|
कर्नाटक
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97%
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15
|
मेघालय
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100%
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30
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गोवा
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91%
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सभी नई लाइन/मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंज़ूरी दी जा रही है और विद्युतीकरण के साथ निर्मित किया जा रहा है।
पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान, तमिलनाडु सहित रेल विद्युतीकरण परियोजनाओं पर 29,826 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है।
2023-24 से जनवरी 2026 तक 10,932 रेल मार्ग किलोमीटर का विद्युतीकरण किया गया है।
विद्युतीकरण परियोजनाओं का पूरा होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, जैसे वन विभाग के अधिकारियों द्वारा वन मंजूरी, अतिलंघी साधनों का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक और स्थलाकृतिक स्थिति, परियोजना स्थल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति, जलवायु परिस्थितियों के कारण विशेष परियोजना के लिए एक वर्ष में कार्य महीनों की संख्या आदि। ये सभी कारक परियोजनाओं के पूरा होने के समय पर असर डालती हैं।
विद्युतीकरण के साथ, भारतीय रेलवे ने डीजल की खपत को कम किया है। भारतीय रेलवे 2016-17 की तुलना में वर्ष 2024-25 में डीजल की खपत में 178 करोड़ लीटर की बचत कर पाई है, जो 62 प्रतिशत की बचत है, इस प्रकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है।
भारतीय रेलवे द्वारा 2024-25 के दौरान ट्रैक्शन के लिए कुल ऊर्जा खपत पर 32,378 करोड़ रुपये व्यय किए गए है।
भारतीय रेलवे द्वारा इलेक्ट्रिक और डीज़ल इंजनों के रख-रखाव पर व्यय की गई राशि की जानकारी भारतीय रेलवे के एनुअल स्टैटिस्टिकल स्टेटमेंट में उपलब्ध है, जो भारतीय रेलवे की वेबसाइट (https://indianrailways.gov.in) पर उपलब्ध है।
रेलवे पर्यावरण और लागत को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ रहा है। हालांकि बायो-डीजल पर परीक्षण किए गए हैं, लेकिन बायो-डीजल की तुलना में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन कहीं अधिक लाभदायक है।
अपशिष्ट प्रबंधन
ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों, खानपान इकाइयों और कोच में निकलने वाले कचरे के निपटान सहित प्रभावी प्रबंधन को भारतीय रेलवे बहुत प्राथमिकता देता है, ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके। इस संबंध में की गई विभिन्न पहलें इस प्रकार हैं:-
•ट्रेनों के अंदर एकत्र किए गए कचरे का निपटान निर्दिष्ट स्टेशनों पर किया जाता है, जिन्हें कचरे के निपटान के लिए चिन्हित किया गया है।
• ट्रेन में हाउसकीपिंग स्टाफ को पटरियों पर कचरा नहीं फेंकने के लिए सख्त आदेश दिया है और इसका उल्लंघन पर सख्त जुर्माना लगाया जाता है।
• स्वच्छता बनाए रखने के लिए रेल पटरियों के किनारे से कूड़ा उठाया जाता है।
• आवश्यकता के अनुसार स्टेशनों पर प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीनें (पीबीसीएम) लगाई गई हैं।
• बायो-डिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरे को सोर्स पर ही अलग करने के लिए अलग-अलग स्टेशनों पर दो प्रकार के कूड़ेदान लगाए गए हैं।
• स्थानीय परिस्थितियों, व्यवहार्यता और आवश्यकता के आधार पर, स्थानीय रेलवे अधिकारियों और नगर निकायों के बीच अपशिष्ट निपटान के लिए समझौता किया गया है।
• भारतीय रेलवे में कई स्थानों पर आवश्यकतानुसार के सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी), एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी), मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) जैसे अवसंरचना स्थापित की गई हैं और शुरू की गई हैं।
• भारतीय रेलवे द्वारा यात्री जागरूकता अभियान नियमित रूप से चलाए जाते हैं ताकि उन्हें ट्रेनों में उपलब्ध कराए गए कूड़ेदानों में कचरा डालने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
• मंडलीय, क्षेत्रीय और मुख्यालय स्तर पर पर्यवेक्षक/वरिष्ठ अधिकारी नियमित जांच/औचक निरीक्षण करते हैं।
• भारतीय रेलवे द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के तहत विशेषत स्वच्छता अभियान और स्वच्छता मुहिम नियमित रूप से चलाई जाती हैं, जिसका उद्देश्य स्वच्छता मानकों में महत्वपूर्ण और निरंतर सुधार लाना है।
• पैसेंजर कोच में बायो-टॉयलेट लगाकर ट्रेनों से सीधे निकलने वाले ह्यूमन वेस्ट को खत्म करना। लगाए गए बायो-टॉयलेट का विवरण नीचे दिया गया हैं:
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अवधि
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लगाए गए बायो-टॉयलेट की संख्या
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2004-14
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9,587
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2014 से अब तक
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3,61,572
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यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/ एसके
(रिलीज़ आईडी: 2226687)
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