कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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कौशल मंत्रियों का क्षेत्रीय सम्मेलन – कौशल मंथन चंडीगढ़ में आयोजित

केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने कौशल और उद्यमिता पर संयुक्त प्रयास का संकल्प लिया

कौशल मंथन केवल एक सम्मेलन नहीं है, यह विकसित भारत@2047 के लिए कौशल को आकांक्षापूर्ण और प्रभावशाली बनाने के लिए एकजुट कार्रवाई का आह्वान है: श्री जयंत चौधरी

Posted On: 28 AUG 2025 4:53PM by PIB Delhi

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज चंडीगढ़ में कौशल मंत्रियों का क्षेत्रीय सम्मेलन - कौशल मंथन आयोजित किया। यह एक ऐतिहासिक संवाद है। इसका उद्देश्य कौशल और उद्यमिता के भविष्य पर केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री के कौशल विकास, पुनर्कौशलीकरण और अपस्किलिंग के मंत्र के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में कौशल मंत्री, उत्तर भारत के राज्यों के सांसद, वरिष्ठ अधिकारी और नीति निर्माता एक साथ आए।

सम्मेलन में बिहार, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों ने भाग लिया।

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण हाल ही में स्वीकृत 60,000 करोड़ रुपए की आईटीआई उन्नयन और कौशल विकास हेतु उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना थी। इसका उद्देश्य हब-एंड-स्पोक मॉडल और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से 1,000 सरकारी आईटीआई को विश्वस्तरीय उत्कृष्टता संस्थानों में बदलना है। उद्योग-नेतृत्व वाली विशेष प्रयोजन कंपनियां इस परिवर्तन का नेतृत्व करेंगी।

इस योजना पर पीएमकेवीवाई 4.0, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना और जन शिक्षण संस्थान जैसी अन्य प्रमुख पहलों के साथ चर्चा की गई। इसमें प्रतिभागियों ने राज्य-स्तरीय कार्यक्रमों और क्षेत्रीय उद्योग की मांगों के साथ मज़बूत तालमेल की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। एजेंडे में स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड, पुनर्गठित मॉडल स्किल लोन स्कीम जैसे नवीन वित्तपोषण तंत्र, और क्रेडिट फ्रेमवर्क और शिक्षुता-आधारित डिग्री कार्यक्रमों के माध्यम से एनईपी 2020 के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षण को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ एकीकृत करने पर भी चर्चा की गई।

श्री जयंत चौधरी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए समन्वय और अभिसरण के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "विश्व की कौशल राजधानी बनने की भारत की आकांक्षा, सच्चे अभिसरण के साथ काम करने की हमारी क्षमता पर निर्भर करती है। प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्ट शक्तियां हैं, लेकिन संसाधनों को एकत्रित करके, रणनीतियों को संरेखित करके और उद्योग जगत को समान भागीदार बनाकर ही हम अपने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में बदलाव ला सकते हैं, अपने युवाओं को सशक्त बना सकते हैं और एक ऐसा इको-सिस्टम बना सकते हैं जहां कौशल रोज़गार, उद्यमिता और श्रम की गरिमा का मार्ग प्रशस्त करें। कौशल मंथन केवल एक सम्मेलन नहीं है—यह विकसित भारत@2047 के लिए कौशल विकास को आकांक्षापूर्ण और प्रभावशाली बनाने हेतु एकजुट कार्रवाई का आह्वान है।"

उन्होंने कहा कि आज हमारी सभी कौशल योजनाएं लचीली, पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। एनएपीएस, विशेष रूप से नए संशोधित अप्रेंटिसशिप पोर्टल के साथ, अप्रेंटिसशिप के लिए पूर्ण लचीलापन प्रदान करता है। जबकि क्लस्टर-आधारित मैपिंग और 5-वर्षीय योजना वाली नई आईटीआई उन्नयन योजना दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित करेगी। लेकिन मैं इस बात पर ज़ोर देना चाहता हूं कि कौशल विकास केवल सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है; यह छात्रों की भी ज़िम्मेदारी है कि वे आगे आएं और सर्वोत्तम अवसरों का लाभ उठाएं।

श्री चौधरी ने कहा, हमें भाषा को एक कौशल के रूप में, और यहां तक कि खेलों को भी एक कौशल के रूप में मान्यता देनी शुरू करनी होगी, क्योंकि कल विनिर्माण से लेकर खेल उद्योग तक की अर्थव्यवस्था इसकी मांग करेगी। भविष्य अभिसरण में निहित है, और इसके माध्यम से हम एक ऐसा कार्यबल तैयार कर रहे हैं जो आकांक्षी, भविष्य के लिए तैयार और विश्व स्तर पर प्रासंगिक है।"

कौशल मंथन की कार्यवाही में विभिन्न चुनिंदा राज्यों के मंत्रियों ने भाग लिया। इनमें पंजाब सरकार में रोजगार सृजन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण मंत्री श्री अमन अरोड़ा; पंजाब सरकार में तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा एवं भाषा एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री हरजोत सिंह बैंस; दिल्ली सरकार में उद्योग, खाद्य एवं आपूर्ति तथा पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा; हिमाचल प्रदेश सरकार में तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री श्री राजेश धर्माणी; हरियाणा सरकार में युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता, खेल (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं विधायी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौरव गौतम; उत्तर प्रदेश सरकार में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री कपिल देव अग्रवाल; और राजस्थान सरकार में उद्योग एवं वाणिज्य तथा खेल एवं युवा मामले, कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण कुमार विश्नोई शामिल थे।

सम्मेलन में श्री विक्रमजीत सिंह साहनी, सांसद (राज्यसभा) एवं राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप एवं खेल, कौशल नियोजन एवं उद्यमिता नीति निर्माण के उपाध्यक्ष भी उपस्थित थे। एमएसडीई की आर्थिक सलाहकार सुश्री अर्चना मायाराम ने उद्घाटन भाषण में मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु सहयोगात्मक और अभिसरण दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया।

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने जीवंत कौशल और उद्यमिता इको-सिस्टम के निर्माण के लिए अपने अग्रणी प्रयासों का प्रदर्शन किया। पंजाब ने उत्कृष्टता केंद्रों और नए युग के व्यवसायों सहित आईटीआई में अपने सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की। हरियाणा ने ड्रोन दीदी योजना, दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली और भारत के पहले कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना जैसी पहलों पर प्रकाश डाला। बिहार ने अपने उद्योग 4.0 सहयोग, उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों और नव स्थापित जन नायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी दी।

जम्मू-कश्मीर ने महत्वाकांक्षी मिशन युवा पहल को साझा किया। ये जमीनी स्तर पर उद्यमिता के माध्यम से चार लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करेगा। जबकि उत्तराखंड ने उद्योग 4.0 के लिए तैयार कार्यबल बनाने के लिए टाटा टेक्नोलॉजीज और हीरो जैसे उद्योग के नेताओं के साथ अपने उत्कृष्टता केंद्रों और साझेदारियों का विवरण दिया। उनके हस्तक्षेप ने संवाद को समृद्ध किया। आयोजन में सभी चर्चाएं विविध भौगोलिक और आर्थिक संदर्भों की वास्तविकताओं पर आधारित थीं। इस विमर्श ने कौशल एजेंडे को आगे बढ़ाने में सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत किया।

सम्मेलन का समापन सभी सहभागी राज्यों और केंद्र की व्यापक राज्य कार्य योजनाएं तैयार करने, उद्योग जगत के साथ साझेदारी को मज़बूत करने और पारदर्शिता, व्यापकता और मापनीय परिणामों के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का लाभ उठाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। कौशल मंथन ने इस नई सहमति के साथ एक समन्वित कौशल संरचना की नींव रखी है, जो भारत के युवाओं को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करेगी।

 

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पीके/केसी/केके/एसके



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