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भारतीय मानक ब्यूरो हॉलमार्किंग

उपभोक्ताओं के विश्वास की पहचान

Posted On: 05 NOV 2026 2:00PM

हॉलमार्किंग उपभोक्ताओं को सोने और चांदी के आभूषणों की शुद्धता का आश्वासन प्रदान करके सोच-समझकर खरीदारी करने में मदद करती है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) निर्धारित मानकों, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और नियामक जांच के माध्यम से इस व्यवस्था की निगरानी करता है।

वर्ष 2021 में सोने के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू किए जाने के बाद, 15 अक्टूबर, 2026 तक 65 करोड़ से अधिक सोने के आभूषणों को हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या (एचयूआईडी) प्रदान की जा चुकी है। इसी अवधि के दौरान बीआईएस में पंजीकृत जौहरियों की संख्या भी 43,153 से बढ़कर 2,36,624 हो गई है।

चांदी के मामले में हॉलमार्किंग स्वैच्छिक बनी हुई है, लेकिन 1 सितंबर, 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के सभी आभूषणों पर एचयूआईडी को अनिवार्य कर दिया गया है। अब तक 90 लाख से अधिक चांदी की वस्तुओं पर एचयूआईडी के साथ हॉलमार्किंग की जा चुकी है।

बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से डिजिटल सत्यापन और निरंतर निगरानी से उपभोक्ताओं को आभूषणों की शुद्धता जांचने में मदद मिलती है जिससे बाजार में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

सोना और उपभोक्ता विश्वास की आवश्यकता

भारतीय परिवारों में पीढ़ियों से सोने का विशेष स्थान रहा है। यह न केवल बहुमूल्य धरोहर के रूप में संजोकर रखा जाता है, बल्कि मूल्यवान संपत्ति के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवार अक्सर महंगाई के प्रभाव से अपनी बचत को सुरक्षित रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर आभूषणों को गिरवी रखकर ऋण प्राप्त करने के उद्देश्य से सोना खरीदते हैं। हालांकि, सोने के आभूषणों की शुद्धता का सही-सही पता लगाना हमेशा आसान नहीं होता।

सोना अपेक्षाकृत एक नरम धातु है और आभूषण बनाने और सामान्य उपयोग के दौरान होने वाली टूट-फूट से बचाने के लिए इसमें अन्य धातुओं का मिश्रण किया जाता है हालांकि, यह प्रक्रिया आवश्यक है, लेकिन इससे मिलावट और शुद्धता के बारे में गलत जानकारी देने की आशंका भी पैदा हो सकती है। इसके अलावा, कई जोड़ वाले जटिल डिजाइन के आभूषणों अथवा सोने की परत चढ़ी वस्तुओं में वास्तविक सोने की मात्रा का निर्धारण करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

सरकार ने उपभोक्ताओं को इस प्रकार की अनियमितताओं से बचाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सोने के उत्पादों के मानकीकरण और देश में हॉलमार्किंग व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए।

हॉलमार्किंग क्या है?

हॉलमार्किंग एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता संरक्षण उपाय है जो निर्धारित मानकों के अनुरूप कीमती धातुओं से बनी वस्तुओं की शुद्धता को प्रमाणित करता है। यह उपभोक्ताओं को सोच-समझकर खरीदारी का निर्णय लेने में मदद करता है और उन्हें प्राप्त होने वाली वास्तविक शुद्धता से अधिक शुद्धता के लिए भुगतान करने के जोखिम को कम करता है।

हॉलमार्किंग योजना: स्वैच्छिक से व्यापक पहुंच

भारतीय स्वर्ण बाजार में नियामकीय व्यवस्था की कमी को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2000 में स्वैच्छिक हॉलमार्किंग योजना शुरू की गई। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को भारत में हॉलमार्किंग योजना के कार्यान्वयन के लिए एकमात्र एजेंसी के रूप में नामित किया गया। उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाने के लिए इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी बीआईएस को सौंपी गई। इसके साथ ही, बीआईएस को निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारत को सोने के आभूषणों के एक अग्रणी वैश्विक बाजार के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य करने का दायित्व भी सौंपा गया।

चांदी की वस्तुओं के लिए हॉलमार्किंग योजना वर्ष 2005 में शुरू की गई। वर्तमान में भारत में हॉलमार्किंग योजना के अंतर्गत सोना और चांदी, दोनों शामिल हैं।

सोने के आभूषणों के लिए 23 जून, 2021 से 256 जिलों में हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई। परख एवं हॉलमार्किंग केंद्रों के विस्तार के साथ अब इसका दायरा 392 जिलों तक बढ़ गया है। हॉलमार्किंग की इस व्यवस्था के अंतर्गत आईएस 1417 मानक के तहत सोने की 7 कैरेट श्रेणियां—9 कैरेट (375), 14 कैरेट (585), 18 कैरेट (750), 20 कैरेट (833), 22 कैरेट (916), 23 कैरेट (958) और 24 कैरेट (995)(प्रति हजार भाग में शुद्धता) शामिल हैं।

चांदी की हॉलमार्किंग अभी भी स्वैच्छिक है, लेकिन बीआईएस की योजना के अंतर्गत हॉलमार्क की गई चांदी की प्रत्येक वस्तु पर 1 सितंबर, 2025 से हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या (एचयूआईडी) अंकित करना अनिवार्य है। एचयूआईडी छह अंकों का एक विशिष्ट अल्फ़ान्यूमेरिक कोड है, जिसे हॉलमार्क वाले प्रत्येक आभूषण पर अंकित किया जाता है। इससे आभूषण की पहचान और उसकी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित होती है।

संशोधित आईएस 2112:2025 मानक के अंतर्गत चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों की हॉलमार्किंग शुद्धता की आठ श्रेणियों—800 (800.0), 835 (835.0), 900 (900.0), 925 (925.0), 958 (958.0), 970 (970.0), 990 (990.0) और 999 (999.0) (प्रति हजार भाग में शुद्धता) में की जा सकती है।

हॉलमार्क वाले आभूषणों की पहचान कैसे करें

हॉलमार्क वाले आभूषण या कलाकृतियां खरीदते समय तीन महत्वपूर्ण चिह्नों की पहचान करना आवश्यक है।

सोने के आभूषणों/कलाकृतियों के लिए:

  • बीआईएस मानक चिह्न : इस चिह्न पर बीआईएस का लोगो अंकित होता है।
  • शुद्धता/फाइननेस चिह्न : यह आभूषण में सोने की शुद्धता दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 22के916
  • एचयूआईडी (हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या): यह आभूषण को आवंटित छह अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या होती है।

चांदी के आभूषणों/कलाकृतियों के लिए:

  • बीआईएस मानक चिह्न: इस पर बीआईएस के लोगो के साथ ‘सिल्‍वर’ शब्द अंकित होता है।
  • शुद्धता/फाइननेस चिह्न : यह चांदी की शुद्धता दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 925
  • एचयूआईडी (हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या): यह वस्तु को आवंटित छह अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या होती है।

ये तीनों चिह्न मिलकर खरीदे गए आभूषण की शुद्धता के प्रति उपभोक्ताओं को अधिक भरोसा और आश्वासन प्रदान करते हैं। आभूषण की वास्तविक सुंदरता शुद्धता के विश्वास के साथ ही निखरती है।

व्यवहार में हॉलमार्किंग: अनुरोध से सत्यापन तक

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने हॉलमार्किंग के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया स्थापित की है, जिसमें जौहरियों का पंजीकरण, शुद्धता का आकलन, डिजिटल पहचान और नियामकीय निगरानी शामिल हैं।


 

1. पंजीकरण और परीक्षण केंद्र

हॉलमार्किंग की प्रक्रिया हॉलमार्क वाले आभूषण बेचने के इच्‍छुक जौहरियों के बीआईएस में पंजीकरण से शुरू होती है। जौहरी, राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली पोर्टल https://www.nsws.gov.in/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस पोर्टल पर सीधे अथवा बीआईएस पोर्टल https://www.manakonline.in के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है। पंजीकरण तत्काल और निःशुल्क प्रदान किया जाता है तथा इसकी वैधता आजीवन रहती है।

इसके बाद जौहरियों को अपने आभूषण बीआईएस से मान्यता प्राप्त परख एवं हॉलमार्किंग केंद्र (एएचसी) में जमा कराने होते हैं। एएचसी वे परीक्षण केंद्र हैं, जहां आभूषणों की जांच की जाती है। बीआईएस इन केंद्रों को उनके बुनियादी ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और योग्य कर्मचारियों के सत्यापन के बाद मान्यता प्रदान करता है।

2. डिजिटल पोर्टल के माध्यम से हॉलमार्किंग अनुरोध शुरू करना

जौहरियों को हॉलमार्किंग के लिए आभूषण जमा कराने हेतु पोर्टल के माध्यम से अनुरोध शुरू करने और आभूषणों को एएचसी तक भेजने की सुविधा का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पंजीकृत जौहरी www.manakonline.in पर लॉग-इन करके हॉलमार्किंग विकल्प चुन सकते हैं और अनुरोध शुरू कर सकते हैं। इसके तहत उन्हें आभूषणों की श्रेणी, संख्या, वजन, घोषित शुद्धता और चयनित एएचसी जैसे विवरण दर्ज करके अनुरोध जमा करना होता है।

वैकल्पिक रूप से, यदि जौहरी पोर्टल का उपयोग किए बिना आभूषण जमा कराते हैं, तो एएचसी के कर्मचारी उनकी ओर से अनुरोध शुरू कर सकते हैं। इस डिजिटल प्रक्रिया से जमा कराए गए आभूषणों का रिकॉर्ड तैयार होता है जिससे हॉलमार्किंग की पूरी प्रक्रिया के दौरान उसकी ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

3. परीक्षण और एचयूआईडी

आभूषणों के परख एवं हॉलमार्किंग केंद्र (एएचसी) पहुंचने के बाद निर्धारित उपकरणों और प्रक्रियाओं का उपयोग करके उनके वजन और शुद्धता का आकलन किया जाता है।

हॉलमार्किंग प्रक्रिया में उपयोग की जाने वाली मशीनों और उपकरणों, जिनमें वजन मापने वाले तराजू, एक्स-रे फ्लोरेसेंस मशीनें और लेजर मार्किंग मशीनें शामिल हैं, में केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर को सीधे डेटा हस्तांतरित करने की सुविधा होना अनिवार्य है। इससे प्रक्रिया के दौरान प्राप्त संबंधित आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किए जा सकते हैं और मैन्युअल डेटा प्रविष्टि की आवश्यकता कम होती है।

मैन्युअल डेटा प्रविष्टि की संभावना को समाप्‍त करने के लिए एक्सआरएफ मशीनों का एपीआई आधारित एकीकरण 1 सितंबर, 2024 से लागू किया गया। इसके साथ ही एकीकृत वजन मापन प्रणालियां भी उपलब्ध कराई गई हैं, जो तराजू से प्राप्त रीडिंग को सीधे रिकॉर्ड करती हैं।

परीक्षण के बाद, बीआईएस सर्वर प्रत्येक आभूषण के लिए छह अंकों का विशिष्ट अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी कोड तैयार करता है। इसके बाद बीआईएस मानक चिह्न और संबंधित शुद्धता चिह्न के साथ एचयूआईडी कोड भी आभूषण पर अंकित किया जाता है।

एएचसी के लिए आभूषण और उस पर अंकित हॉलमार्क, जिसमें एचयूआईडी भी शामिल है, की तस्वीरें लेना भी अनिवार्य है। 8 जून, 2026 को लागू किए गए प्रावधानों के तहत ये तस्वीरें और आभूषणों का वजन सीधे मानक ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं।

4. डिजिटल निगरानी और ट्रेसबिलिटी

बीआईएस ने पोर्टल पर एएचसी में की जाने वाली गतिविधियों की तारीख और समय दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। ये टाइमस्टैम्प (समय संबंधी विवरण) संचालन की वास्तविक समय में निगरानी करने और हॉलमार्क वाले आभूषणों की प्राप्ति से लेकर उन्‍हें सौंपने तक लगने वाले समय का आकलन करने में मदद करते हैं। इससे यह जांचने में भी सहायता मिलती है कि लेजर मार्किंग से पहले आभूषणों का परीक्षण किया गया था या नहीं।

इसके अतिरिक्त, स्वचालित वजन रिकॉर्डिंग और एचयूआईडी हस्तांतरण सुविधा जैसी डिजिटल पहलें हॉलमार्किंग की आपूर्ति श्रृंखला में शुरू से अंत तक ट्रेसबिलिटी को और मजबूत करती हैं। एचयूआईडी हस्तांतरण सुविधा के माध्यम से जब सोने के आभूषण एक जौहरी से दूसरे जौहरी या एक बिक्री केंद्र से दूसरे बिक्री केंद्र तक पहुंचते हैं, तो जौहरी बीआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशिष्ट एचयूआईडी को डिजिटल रूप से हस्तांतरित कर सकते हैं।

1 जून, 2026 को लागू किए गए इस सुविधा के पहले चरण में कॉरपोरेट ज्वैलर्स के बीच अथवा किसी भी जौहरी से कॉरपोरेट इकाई को सोना हस्तांतरित किए जाने पर एचयूआईडी हस्तांतरण का प्रावधान किया गया है। इससे दोहरी हॉलमार्किंग या धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलती है।

5. नियामकीय निगरानी: बिक्री केंद्रों से आगे भी जांच

डिजिटल निगरानी के साथ-साथ बीआईएस भौतिक निरीक्षण और नियामकीय जांच भी करता है। बीआईएस समय-समय पर आभूषण बिक्री केंद्रों का दौरा करता है और हॉलमार्क वाले आभूषणों के नमूने लेकर संबंधित भारतीय मानकों के अनुरूप उनकी जांच करता है। बीआईएस यह सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निगरानी ऑडिट भी करता है कि एएचसी निर्धारित आवश्यकताओं का निरंतर पालन कर रहे हैं या नहीं।

बीआईएस हॉलमार्क के दुरुपयोग से संबंधित प्राप्त शिकायतों और सूचनाओं के आधार पर छापेमारी सहित विभिन्न प्रवर्तन संबंधी कार्रवाइयां भी करता है। ये कदम उपभोक्ताओं की सुरक्षा और हॉलमार्किंग व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करने में मदद करते हैं। वर्ष 2025-26 में ऐसे उल्लंघनों के लिए जौहरियों के विरुद्ध 30 से अधिक प्रवर्तन संबंधी कार्रवाइयां की गईं।

6. खरीदारी से पहले सत्यापन: बीआईएस केयर ऐप

भारतीय मानक ब्यूरो उपभोक्ताओं को बीआईएस केयर ऐप के माध्यम से हॉलमार्क वाले सोने और चांदी के आभूषणों का डिजिटल सत्यापन करने की सुविधा प्रदान करता है। उपभोक्ता हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या (एचयूआईडी) दर्ज करके किसी भी हॉलमार्क वाली वस्तु की प्रामाणिकता की जांच कर सकते हैं।

यह ऐप आभूषण की शुद्धता, उत्पाद के प्रकार, जौहरी तथा परख एवं हॉलमार्किंग केंद्र से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त, 8 जून, 2026 को लागू किए गए डिजिटल उन्नयन के बाद ऐप के माध्यम से आभूषण की तस्वीर, उस पर अंकित हॉलमार्क और स्वचालित रूप से दर्ज किए गए वजन की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है। इससे ग्राहक खरीदारी से पहले वास्तविक आभूषण का आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध विवरणों से मिलान कर सकते हैं।

बीआईएस केयर ऐप एंड्रॉयड और आईओएस पर 12 भाषाओं में निःशुल्क उपलब्ध है।

इस प्रकार, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, उपकरणों का एकीकरण और भौतिक निगरानी मिलकर हॉलमार्किंग व्यवस्था में जवाबदेही को और मजबूत बनाते हैं।

हॉलमार्किंग: पहुंच और जागरूकता का विस्तार

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने पंजीकृत जौहरियों और परख एवं हॉलमार्किंग केंद्रों के बढ़ते नेटवर्क के साथ-साथ उपभोक्ता जागरूकता संबंधी पहलों के माध्यम से हॉलमार्किंग के दायरे का विस्तार किया है।

वर्ष 2021 में सोने के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू किए जाने के बाद, 15 अक्टूबर, 2026 तक 65 करोड़ से अधिक सोने के आभूषणों पर एचयूआईडी के साथ हॉलमार्किंग की जा चुकी है। इस अवधि के दौरान बीआईएस में पंजीकृत सक्रिय जौहरियों की संख्या 43,153 से बढ़कर 2,36,624 हो गई, जबकि मान्यता प्राप्त परख एवं हॉलमार्किंग केंद्रों (एएचसी) की संख्या 948 से बढ़कर 1,565 हो गई।

स्वैच्छिक हॉलमार्किंग योजना के अंतर्गत चांदी के लिए 1 सितंबर, 2025 से एचयूआईडी की व्यवस्था शुरू की गई। इसके परिणामस्वरूप, 90 लाख से अधिक चांदी की वस्तुओं पर एचयूआईडी के साथ हॉलमार्किंग की जा चुकी है।

उपभोक्ता जागरूकता इस प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बीआईएस के क्षेत्रीय और शाखा कार्यालयों ने देशभर में 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर, 2026 के दौरान 1,582 उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में अनिवार्य प्रमाणन के अंतर्गत आने वाले मानकों, हॉलमार्किंग तथा ग्राम पंचायतों को जागरूक करने से संबंधित कार्यक्रम आदि शामिल थे।

अधिक विश्वास और पारदर्शिता की ओर

हॉलमार्किंग आभूषणों की खरीदारी के दौरान बहुमूल्य धातुओं की शुद्धता के प्रति उपभोक्ताओं के विश्‍वास को बढ़ाती है। पिछले कुछ वर्षों में व्यापक पहुंच, प्रौद्योगिकी के उपयोग और अधिक सुदृढ़ ट्रेसबिलिटी के माध्यम से इस व्यवस्था का विस्तार हुआ है।

विशिष्ट पहचान कोड आभूषणों से संबंधित विवरणों के सत्यापन में मदद करते हैं, जबकि भौतिक निगरानी और नियामकीय जांच जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक हैं। उपभोक्ता जागरूकता संबंधी पहलें भी खरीदारों को हॉलमार्क वाले आभूषणों की पहचान करने और सोच-समझकर खरीदारी करने में मदद करती हैं।

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ प्रत्येक हॉलमार्क  को विश्‍वास की पहचान बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।  

संदर्भ

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय

https://www.bis.gov.in/wp-content/uploads/2020/12/brief-on-Hallmarking.pdf

https://www.bis.gov.in/hallmarking-overview/?lang=en

https://www.bis.gov.in/case-studies/bis-hallmark-green-tests-for-yellow-metal/?utm_

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https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1904262&reg=48&lang=2

https://www.bis.gov.in/wp-content/uploads/2026/07/GuidelinesForAHCs.pdf

https://www.bis.gov.in/wp-content/uploads/2026/06/Guidelines-for-recognition-operation-of-AHCs.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2088051&lang=2&reg=48

https://sansad.in/getFile/annex/271/AU2602_qHfqdj.pdf?source=pqars

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2211859&reg=48&lang=2

 

पीआईबी बैकग्राउंडर्स

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1912343&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284432&lang=2&reg=48

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2207673&reg=3&lang=1

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