Economy
भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज
कार्यबल सुरक्षा को मजबूती
Posted On:
31 OCT 2026 9:39AM
व्यापक ईपीएफओ कवरेज, डिजिटल सुधारों और कल्याणकारी पहलों के माध्यम से भारत के सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार हुआ है। ईपीएफओ पात्र सदस्यों को भविष्य निधि बचत, पेंशन और बीमा लाभ प्रदान करता है। अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों के इसके दायरे में आने की उम्मीद है। डिजिटल पहल का उद्देश्य पंजीकरण, निकासी और दावों के निपटान को सरल बनाना है। ईपीएफओ के अलावा, ई-श्रम जैसी पहल और पीएम-एसवाईएम और प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना जैसी योजनाएं असंगठित श्रमिकों और कमजोर समूहों को सहायता प्रदान करती हैं। ये उपाय रोजगार श्रेणियों और जीवन के चरणों में सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच को मजबूत करते हैं।
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श्रमिक सुरक्षा के एक स्तंभ के रूप में सामाजिक सुरक्षा
जैसे-जैसे अर्थव्यवस्थाएं विकसित होती हैं, रोजगार पैटर्न और आजीविका के स्रोत बदलते रहते हैं। अनौपचारिक, गिग और प्लेटफ़ॉर्म-आधारित कार्य का विस्तार, आय और रोजगार निरंतरता में भिन्नता के साथ, श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा को तेजी से महत्वपूर्ण बनाता है। सामाजिक सुरक्षा जीवन के विभिन्न चरणों में आय की हानि और अन्य आकस्मिकताओं से सुरक्षा प्रदान करती है। यह सेवानिवृत्ति और आय संबंधी असुरक्षा की अवधि के दौरान वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत करता है।
भारत ने हाल के वर्षों में सामाजिक सुरक्षा की पहुंच का काफी विस्तार किया है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हो गया। इस विस्तार ने एक बिलियन से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे के भीतर ला दिया है।
भारतीय श्रमिकों के लिए, सामाजिक सुरक्षा उनके कामकाजी वर्षों से परे वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) पात्र श्रमिकों के लिए भविष्य निधि, पेंशन और बीमा योजनाओं को कार्यान्वित करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है और दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संस्थानों में से एक है। इसकी योजनाएं श्रमिकों को सेवानिवृत्ति बचत बनाने, पेंशन लाभ प्राप्त करने और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद करती हैं।
ईपीएफओ-आधारित सामाजिक सुरक्षा के तीन स्तंभ
ईपीएफओ सामाजिक सुरक्षा संरचना में भविष्य निधि बचत, पेंशन लाभ और बीमा सुरक्षा शामिल है।
- कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 (ईपीएफ)
सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020 (कोड) के तहत शुरू किए गए नए ईपीएफ 2026 ने पूर्ववर्ती कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 को बदल दिया। EPF 2026 सदस्यों को योगदान और अर्जित ब्याज के माध्यम से सेवानिवृत्ति बचत बनाने में सक्षम बनाता है। यह निर्धारित शर्तों के अधीन आवास, उच्च शिक्षा, विवाह और चिकित्सा उपचार सहित निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए आंशिक निकासी की भी अनुमति देता है।
- कर्मचारी पेंशन योजना, 2026 (ईपीएस) कोड
के तहत नए ईपीएस 2026 ने पूर्ववर्ती कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 को बदल दिया। ईपीएस 2026 सेवानिवृत्ति, सेवानिवृत्ति या विकलांगता पर पात्र सदस्यों को मासिक पेंशन लाभ प्रदान करता है। यह मृत सदस्यों के पात्र आश्रितों को पेंशन लाभ भी प्रदान करता है, जिसमें पति-पत्नी, बच्चे और परिवार के अन्य पात्र सदस्य शामिल हैं।
- कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना, 2026 (ईडीएलआई)
कोड के तहत नई ईडीएलआई 2026 ने पूर्ववर्ती कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना, 1976 को बदल दिया है और सेवा के दौरान मृत्यु की स्थिति में पात्र ईपीएफ सदस्यों को बीमा सुरक्षा प्रदान करती है। यह योजना सदस्यों को अलग से बीमा प्रीमियम का भुगतान करने की आवश्यकता के बिना 7 लाख रूपये तक का बीमा लाभ प्रदान करती है।
कार्यबल में ईपीएफओ कवरेज का विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में, ईपीएफओ ने भारत के बढ़ते औपचारिक कार्यबल के साथ-साथ अपनी पहुंच का विस्तार किया है। इसकी प्रगति व्यापक सदस्यता, संस्थागत कवरेज और पेंशन सहायता में परिलक्षित होती है।
इस अवधि के दौरान ईपीएफओ की योगदान सदस्यता में काफी वृद्धि हुई है। योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या 2014-15 में 3.49 करोड़ से बढ़कर लगभग 7.98 करोड़ (16 सितंबर, 2026 तक) हो गई। यह इस अवधि में लगभग 4.49 करोड़ योगदान देने वाले सदस्यों की वृद्धि दर्शाता है।
सितंबर 2026 तक, 7.68 लाख प्रतिष्ठान ईपीएफओ में योगदान दे रहे हैं। यह पात्र श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने के लिए एक व्यापक संस्थागत आधार प्रदान करता है।

सदस्यता के साथ-साथ पेंशन सहायता का भी विस्तार हुआ है। ईपीएफओ ने 2014-15 के दौरान 51.04 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन का भुगतान किया। सितंबर 2026 तक लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन लाभ मिल रहा है। यह 31 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की वृद्धि दर्शाता है।
सामाजिक सुरक्षा लाभों का पैमाना भी काफी बढ़ गया है। 2014-15 के दौरान 1.30 करोड़ दावों का निपटान किया गया। पिछले एक वर्ष की अवधि (अक्टूबर, 2026 तक) में, ईपीएफओ ने 6.42 करोड़ दावों का निपटान किया। यह ईपीएफओ सदस्यों और लाभार्थियों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है।
डिजिटल और सेवा सुधारों के माध्यम से ईपीएफओ को मजबूती
ईपीएफओ व्यापक कवरेज, सरलीकृत दावा निपटान और डिजिटलीकरण के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा वितरण को मजबूत कर रहा है। सुधार अनुपालन में सुधार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को कम करने और भविष्य निधि और पेंशन सेवाओं तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं।

वेतन सीमा संशोधन
कवरेज का विस्तार: अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए वेतन सीमा को अंतिम बार सितंबर 2014 में 6,500 से 15,000 रूपए प्रति माह तक संशोधित किया गया था। सितंबर 2026 में, प्रति माह 25,000 रूपए तक की वृद्धि को मंजूरी दी गई थी। संशोधन से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज प्रदान करने की उम्मीद है। यह वेतन स्तर में परिवर्तन और बीच की अवधि में औपचारिक रोजगार के विस्तार को दर्शाता है। संशोधित सीमा अनिवार्य कवरेज के लिए पात्र कर्मचारियों के पूल को व्यापक बनाती है, जो लागू वैधानिक प्रावधानों के अधीन है।
पीएफ निकासी को सुव्यवस्थित करना और दावों के निपटारे में तेजी
सरलीकृत आंशिक निकासी नियम: ईपीएफओ ने आंशिक निकासी को नियंत्रित करने वाले 13 प्रावधानों को तीन श्रेणियों में समेकित किया है: अनिवार्य आवश्यकताएं, आवास की आवश्यकताएं और विशेष परिस्थितियां। अनिवार्य आवश्यकताएं बीमारी, शिक्षा और विवाह से संबंधित खर्चों को कवर करती हैं। यह वर्गीकरण निकासी ढांचे को सरल बनाता है, जिससे पात्र सदस्यों के लिए भविष्य निधि बचत तक आसान पहुंच की सुविधा मिलती है।
उदारीकृत निकासी सीमाएं: कर्मचारी अपने कार्य वर्षों के दौरान विशिष्ट वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी पीएफ बचत से आंशिक निकासी कर सकते हैं। यह उन्हें संपूर्ण संचित शेष राशि को निकाले बिना बचत तक पहुंचने की अनुमति देता है।
ईपीएफओ ने शिक्षा के लिए 10 और शादी के लिए 5 निकासी की अनुमति देकर इन प्रावधानों को सरल बनाया है। इससे पहले, दोनों उद्देश्यों ने 3 आंशिक निकासी की संयुक्त सीमा साझा की थी। अक्टूबर 2025 में पेश किया गया संशोधित ढांचा पात्र सदस्यों को अपने पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकालने की अनुमति देता है। इसमें लागू शर्तों के अधीन कर्मचारी और नियोक्ता का योगदान शामिल है। न्यूनतम सेवा आवश्यकता को 12 महीनों में मानकीकृत किया गया है।
स्वत: दावा निपटान: ईपीएफओ ने पात्र अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रूपये कर दिया। यह मैन्युअल हस्तक्षेप के बिना पात्र निकासी की तेजी से प्रक्रिया को सक्षम बनाता है।
सरलीकृत बैंक सत्यापन: ईपीएफओ ने पात्र ऑनलाइन दावों के लिए चेक-लीफ इमेज या अटेस्टेड बैंक पासबुक अपलोड करने की आवश्यकता को हटा दिया। यह कागजी कार्रवाई को कम करता है और क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाता है।
अनुपालन को मजबूती और कारोबारी सुगमता
विश्वास, 2026: यह योजना ईपीएफ और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 और सामाजिक सुरक्षा कोड, 2020 के तहत नुकसान या दंड से जुड़े पात्र विवादों के एकमुश्त निपटान की सुविधा प्रदान करती है। यह मुकदमेबाजी को कम करता है और डिजिटल, समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करता है। इस योजना में चुनौतीपूर्ण क्षति या दंड आदेश, लंबित या आंशिक वसूली, अंतिम आदेशों की प्रतीक्षा में जारी नोटिस और ऐसे मामले शामिल हैं जहां नोटिस अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।
- 14 जून, 2024 से पहले के योग्य डिफॉल्ट पर देरी अवधि के आधार पर 0.25 प्रतिशत, 0.50 प्रतिशत या 1 प्रतिशत की मासिक क्षति दर कम हो जाती है।
- नियोक्ताओं को लागू वैधानिक ब्याज का भुगतान करना चाहिए और निपटाए गए विवादों पर आगे की अपील नहीं करने का वचन देना चाहिए।
- इस योजना में विभिन्न चरणों में मामलों को शामिल किया गया है, जो धोखाधड़ी, दुरुपयोग, जानबूझकर मिथ्याकरण और पूरी तरह से वसूल किए गए नुकसान के लिए बहिष्करण के अधीन हैं। आवेदन ईपीएफओ नियोक्ता पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जाते हैं।
एमनेस्टी, 2026: यह प्रतिष्ठानों को अपने भविष्य निधि पीएफ ट्रस्टों को नियमित करने में मदद करने के लिए ईपीएफओ द्वारा शुरू की गई एक बार की योजना है। इसमें आयकर अधिनियम, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त ट्रस्ट शामिल हैं, लेकिन ईपीएफ और एमपी अधिनियम, 1952 या सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत औपचारिक छूट का अभाव है। यह योजना 28 दिसंबर, 2026 तक खुली है।
- पात्र प्रतिष्ठान ट्रस्ट की स्थापना से लेकर निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक पूर्वव्यापी रूप से छूट प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना निर्दिष्ट न्यूनतम कर्मचारी संख्या और निधि आवश्यकताओं को भी माफ करती है।
- पात्र ट्रस्टों ने वैधानिक योगदान जमा किया होगा और सदस्यों के खातों में लागू ईपीएफ दर के बराबर या उससे अधिक दरों पर ब्याज जमा किया होगा। इन शर्तों के अधीन, केवल इसलिए शुरू की गई कार्यवाही वापस ले ली जाएगी क्योंकि औपचारिक छूट गायब थी, और इस आधार पर कोई नई कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी।

डिजिटल एक्सेस के साथ पंजीकरण का सरलीकरण
स्वचालित पंजीकरण: फरवरी 2020 से, पात्र सार्वजनिक और निजी लिमिटेड कंपनियां और एक व्यक्ति कंपनियां कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय पोर्टल के माध्यम से स्वचालित ईपीएफओ पंजीकरण की सुविधा का लाभ उठा सकती हैं। यह सुविधा स्पाइस+ और एजिल-प्रो फॉर्म के माध्यम से संचालित होती है। यह फॉर्म विभिन्न सेवाओं जैसे पैन/टैन/निदेशक पहचान संख्या/जीएसटीएन, आदि को जोड़ती है।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) का स्व-निर्माण: नवंबर 2019 से, कर्मचारी स्वतंत्र रूप से अपना यूएएन जनरेट करने में सक्षम हैं। यह सुविधा ईपीएफओ की सामाजिक-सुरक्षा योजनाओं में नामांकन का समर्थन करती है। अप्रैल 2025 में, ईपीएफओ ने आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से यूएएन जनरेशन और एक्टिवेशन की शुरुआत की। उमंग मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपलब्ध, यह सुविधा संपर्क रहित और सुरक्षित डिजिटल एक्सेस को सक्षम बनाती है। अक्टूबर 2026 तक, 1.74 करोड़ स्व-जनित यूएएन की सूचना दी गई है। इसके अलावा, जनवरी 2017 से 21 अक्टूबर तक उमंग एप्लिकेशन पर ईपीएफओ लेनदेन 709 करोड़ से अधिक हैं, जो ईपीएफओ सेवाओं तक डिजिटल पहुंच के पैमाने को दर्शाते हैं।
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यूएएन एक अद्वितीय, स्थायी नंबर है जो ईपीएफओ सदस्य को सौंपा गया है, जो विभिन्न प्रतिष्ठानों में उनके भविष्य निधि खातों को जोड़ता है। यह भविष्य निधि संचय की पोर्टेबिलिटी की सुविधा प्रदान करता है जब सदस्य रोजगार बदलते हैं, जो नियोक्ता द्वारा यूएएन डेटाबेस में उनके विवरण के सत्यापन के अधीन है।
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सरलीकृत आधार सीडिंग: अगस्त 2025 से, ईपीएफओ सदस्य यूएएन सदस्य पोर्टल के माध्यम से आधार विवरण को सीड या सही करने में सक्षम हैं। आधार और यूएएन प्रोफाइल विवरण मेल खाने पर नियोक्ता सीधे अनुरोधों को स्वीकार कर सकते हैं। बेमेल विवरण को सुधार के लिए ईपीएफओ कार्यालय में ऑनलाइन भेजा जा सकता है। यदि नियोक्ता अनुपलब्ध है, तो सदस्य संबंधित ईपीएफओ कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारी के माध्यम से सहायता ले सकते हैं।
ईपीएफओ सेवाओं का डिजिटल परिवर्तन
केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस): सीपीपीएस पूरे भारत में किसी भी बैंक शाखा के माध्यम से पेंशन वितरण को सक्षम बनाता है। पेंशनभोगी स्थानों या बैंक शाखाओं को बदलते समय कार्यालयों के बीच पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) स्थानांतरित किए बिना अपनी पेंशन प्राप्त कर सकते हैं। इससे विशेष रूप से उन पेंशनभोगियों को लाभ होता है जो सेवानिवृत्ति के बाद अपने गृहनगर चले जाते हैं। इसके अलावा, यह प्रणाली पेंशन शुरू होने के समय किसी भी सत्यापन के लिए शाखा में जाने की आवश्यकता को कम करके पेंशनभोगियों का भी समर्थन करती है।
डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सर्विसेज: ईपीएफओ ने ईपीएस पेंशनभोगियों को डोरस्टेप डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सेवाएं प्रदान करने के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के साथ साझेदारी की है। ईपीएफओ प्रति प्रमाणपत्र 50 रूपए की लागत वहन करता है, जिससे पेंशनभोगियों के लिए सेवा मुफ्त हो जाती है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बुजुर्ग पेंशनभोगियों को लाभ पहुंचाती है। यह समय पर पेंशन निरंतरता, पारिवारिक पेंशन की तेजी से शुरुआत और सीपीपीएस के तहत बेहतर सटीकता का समर्थन करता है।
पुन: डिज़ाइन की गई ईपीएफओ वेबसाइट: 1 नवंबर, 2025 को, ईपीएफओ ने epfo.gov.in में अपनी पुन: डिज़ाइन की गई वेबसाइट लॉन्च की। मोबाइल-उत्तरदायी पोर्टल कर्मचारियों, नियोक्ताओं और पेंशनभोगियों के लिए एक एकीकृत इंटरफ़ेस प्रदान करता है। यह पासबुक, दावा फॉर्म, पेंशन सेवाओं, प्रोफ़ाइल अपडेट और योजना की जानकारी तक आसान पहुंच प्रदान करता है। अलग-अलग लॉगिन विकल्प और "ईपीएफओ और आप" अनुभाग उपयोगकर्ताओं को सेवाओं का शीघ्रता से पता लगाने में मदद करते हैं। यूट्यूब वीडियो पीएफ बैलेंस चेक करने, अग्रिम के लिए आवेदन करने, पेंशन आवेदन जमा करने, इलेक्ट्रॉनिक चालान-सह-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल करने, प्रतिष्ठानों को पंजीकृत करने और यूएएन को सक्रिय करने जैसी सेवाओं की व्याख्या करते हैं। छोटा डोमेन और बेहतर नेविगेशन सभी डिवाइसों तक पहुंच को आसान बनाता है।
ईपीएफओ 3.0 - कोर बैंकिंग-आधारित परिवर्तन: ईपीएफओ 3.0 उद्योग-मानक कोर बैंकिंग क्षमताओं के माध्यम से सेवाओं का आधुनिकीकरण करता है।
- यह खाता प्रबंधन, उद्यम संसाधन योजना, अनुपालन और ग्राहक सेवाओं के लिए क्लाउड-नेटिव, एपीआई-फर्स्ट और माइक्रोसर्विसेज-आधारित मॉड्यूल के साथ एक कोर बैंकिंग समाधान को एकीकृत करता है। इसका चरणबद्ध कार्यान्वयन सुरक्षित और निर्बाध सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह पहल कागजी कार्रवाई को कम करती है, दावों को तेज करती है और सदस्य सेवाओं के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करती है।
- जोखिम-मान्य दावों को मैन्युअल हस्तक्षेप के बिना स्वचालित प्रसंस्करण के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो संभावित रूप से निपटान समय को 20 दिनों से घटाकर 3 दिनों से कम कर देता है।
- नियोजित क्षमताओं में तत्काल निकासी, बहुभाषी स्वयं-सेवा और निर्बाध पेरोल-लिंक्ड योगदान शामिल हैं। इस ढांचे का उद्देश्य 30 करोड़ से अधिक सदस्यों के लिए ईपीएफओ की सेवाओं का समर्थन करना है।
ईपीएफओ से परे: भारत का व्यापक सामाजिक-सुरक्षा ढांचा
भारत का सामाजिक सुरक्षा ढांचा कई योजनाओं और संस्थागत तंत्रों के माध्यम से ईपीएफओ से आगे तक फैला हुआ है, जो रोजगार श्रेणियों में कमजोर समूहों और श्रमिकों का समर्थन करता है। ये पहल सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए सामाजिक सहायता, पेंशन सहायता, वैधानिक सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म को जोड़ती हैं।
प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना
यह योजना पात्र बुजुर्ग व्यक्तियों, विधवाओं, विकलांग व्यक्तियों और शोक संतप्त परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करती है। इसे अक्टूबर, 2026 में मौजूदा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) से संशोधित किया गया है। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी। एनएसएपी के तहत उप-योजनाओं द्वारा दिए जाने वाले लाभ निम्नलिखित हैं:
- विकलांगता पेंशन योजना 80 वर्ष से कम आयु के लाभार्थियों को 375 रूपए और 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रूपए की मासिक सहायता प्रदान करती है। बेंचमार्क विकलांगता सीमा को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है और न्यूनतम आयु मानदंड को हटा दिया गया है, जिससे जन्म से पात्रता बढ़ गई है।
- वृद्धावस्था पेंशन योजना 60-79 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को 200 रुपये और 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों को 500 रुपये की मासिक पेंशन प्रदान करती है।
- विधवा पेंशन योजना 40-79 वर्ष की विधवाओं को 300 रूपए और 80 वर्ष और उससे अधिक आयु की विधवाओं को 500 रूपए की मासिक पेंशन प्रदान करती है।
- पारिवारिक लाभ योजना 18-59 वर्ष की आयु के प्राथमिक कमाने वाले की मृत्यु पर पात्र परिवारों को 20,000 रूपए की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
यह सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नौ मौजूदा केंद्रीय श्रम कानूनों को एक एकीकृत विधायी ढांचे में समेकित करता है। संहिता भविष्य निधि, पेंशन, बीमा, मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी और श्रमिक सुरक्षा के अन्य रूपों को कवर करने वाले सामाजिक सुरक्षा लाभों का प्रावधान करती है। इसके प्रावधान गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित संगठित और असंगठित श्रमिकों तक फैले हुए हैं।
संहिता लागू शर्तों के अधीन एक वर्ष की सेवा के बाद आनुपातिक आधार पर पात्र निश्चित अवधि के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी प्रदान करती है। यह सामाजिक सुरक्षा ढांचे के भीतर गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी मान्यता देता है और सामाजिक सुरक्षा कोष द्वारा समर्थित उनके कल्याण के लिए योजनाओं का प्रावधान करता है।
महिला-केंद्रित प्रावधानों में पात्र महिलाओं के लिए 26 सप्ताह तक के मातृत्व लाभ, घर से काम करने का विकल्प शामिल है, जहां निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले प्रतिष्ठानों में वर्क परमिट और क्रेच सुविधाएं शामिल हैं। संहिता कार्यान्वयन और सामाजिक सुरक्षा लाभों तक पहुंच की सुविधा के लिए डिजिटल और सरलीकृत अनुपालन तंत्र भी प्रदान करती है।
ई-श्रम: असंगठित श्रमिकों के लिए एक एकीकृत मंच
अगस्त 2021 में लॉन्च किया गया, ई-श्रम ने असंगठित श्रमिकों का भारत का पहला आधार-सीडेड राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया। प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक को एक यूएएन प्राप्त होता है। पोर्टल ने अगस्त 2026 तक 31.89 करोड़ पंजीकरण दर्ज किए। अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया ई-श्रम वन-स्टॉप सॉल्यूशन, 15 सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को एकीकृत करता है। यह श्रमिकों को रोजगार के लिए राष्ट्रीय करियर सेवा, कौशल और प्रशिक्षुता के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब और पात्र सरकारी योजनाओं की पहचान करने के लिए माईस्कीम से भी जोड़ता है।
पीएम-एसवाईएम 18-40 वर्ष की आयु के पात्र असंगठित श्रमिकों के लिए एक स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना है, जिनकी मासिक आय 15,000 रूपए तक है। यह निर्धारित शर्तों के अधीन 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद प्रतिमाह 3,000 रूपए की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन प्रदान करता है। नामांकन की आयु के आधार पर मासिक योगदान 55 से 200 रूपए तक होता है, जिसमें केंद्र सरकार का समान योगदान होता है। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था आय सुरक्षा का समर्थन करती है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान देती है।
व्यापक सामाजिक सुरक्षा की ओर
व्यापक ईपीएफओ कवरेज, डिजिटल सेवा वितरण और श्रम कल्याण में सुधारों के माध्यम से भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे का विस्तार जारी है। भविष्य निधि, पेंशन, बीमा और सामाजिक सहायता की पहल औपचारिक और अनौपचारिक रोजगार में श्रमिकों की सहायता करती है। सरलीकृत अनुपालन और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्लेटफॉर्म लाभों तक पहुंच को और मजबूत कर रहे हैं। साथ में, ये उपाय एक अधिक समावेशी और सुलभ सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान करते हैं।
संदर्भ
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भारत का सामाजिक सुरक्षा कवरेज
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पीआईबी शोध
पीके/केसी/आरटी/एसकेएस/एसके
(Explainer ID: 160662)
आगंतुक पटल : 127
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