Technology

भारत में क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र

देश में सुरक्षित और व्यापक कंप्यूटिंग के लिए एक डिजिटल आधार का निर्माण

Posted On: 29 OCT 2026 2:13PM

भारत में हो रहा तीव्र डिजिटलीकरण देश में एक सुरक्षित, विस्तृत और विश्वसनीय क्लाउड बुनियादी ढांचे की मांग को बढ़ा रहा है। देखा जाए तो क्लाउड कंप्यूटिंग डिजिटल शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है। भारत 'मेघराज' (MeghRaj) जैसे कदमों और स्वदेशी डेटा सेंटर क्षमता के विस्तार के माध्यम से अपनी घरेलू क्लाउड क्षमता का निर्माण बढ़ा रहा है। नीतिगत उपाय, संस्थागत तंत्र और सार्वजनिक-निजी सहयोग से भारत के विभिन्न क्षेत्रों में क्लाउड अपनाने को और गति मिल रही है।

डेटा संप्रभुता के लिए क्लाउड का बीजारोपण

भारत में हो रहा डिजिटल परिवर्तन देश के शासन, वाणिज्य, संचार और सार्वजनिक सेवाओं में अभूतपूर्व मात्रा में डेटा उत्पन्न कर रहा है। मार्च 2026 तक  देश का इंटरनेट उपभोक्ता आधार 1,092.79 मिलियन तक पहुंच गया। बढ़ते डिजिटल उपयोग से इंटरनेट डेटा की खपत भी बढ़ रही है, जिसमें औसत वायरलेस डेटा उपयोग प्रति उपभोक्ता प्रति माह 25.51 GB तक पहुंच गया है। कुल वायरलेस डेटा उपयोग वित्त वर्ष 2025–26 में बढ़कर 285,376 पेटाबाइट हो गया। डिजिटल भुगतान से लेनदेन के रिकॉर्ड बनते हैं, ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाओं से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होते हैं, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अनुप्रयोग से विशाल मात्रा में विभिन्न जानकारियों की उत्पत्ति और आकड़ों का संसाधन दोनों तैयार होता है। इस बढ़ते डेटा के सम्पूर्ण प्रबंधन के क्रम में प्राप्त जानकारी को कुशलतापूर्वक संग्रहीत करना, उन्हें संसाधित करना और फिर उन्हें नियोजित करने के लिए सुरक्षित, विस्तृत और विश्वसनीय बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पड़ती है।

इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए केवल स्टोरेज स्पेस से कहीं और ज्यादा  की आवश्यकता होती है। संगठनों को जानकारी संसाधित करने, एप्लिकेशन चलाने और विश्वसनीय रूप से डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए कंप्यूटिंग शक्ति की भी आवश्यकता होती है। स्वतंत्र रूप से किसी भौतिक सर्वर और संबंधित अन्य उपकरणों का रखरखाव करना महंगा  और इसका विस्तार करना कठिन हो सकता है। ऐसे में क्लाउड कंप्यूटिंग आवश्यकता पड़ने पर इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराकर इस चुनौती का समाधान करती है।

हालांकि, जैसे-जैसे हमारी क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता बढ़ती है, संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा करना और उसके भंडारण तथा प्रसंस्करण पर नियंत्रण बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। घरेलू क्लाउड का विकास महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधनों पर राष्ट्रीय नियंत्रण को मजबूत करके डेटा संप्रभुता का समर्थन करता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग विभिन्न उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट के माध्यम से डेटा स्टोरेज, सर्वर, सॉफ्टवेयर और प्रसंस्करण क्षमताओं सहित विभिन्न कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच को सक्षम बनाती है। अपने स्वयं के सर्वर खरीदने और उनका रखरखाव करने के बजाय, संस्थाएं आवश्यकतानुसार इन संसाधनों का उपयोग कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, गूगल ड्राइव (Google Drive) उपयोगकर्ताओं को दस्तावेज़ों को ऑनलाइन संग्रहीत करने और कई उपकरणों पर उन तक पहुंचने की अनुमति देता है। इसी प्रकार, एक सरकारी विभाग सभी आवश्यक उपकरणों का स्वयं रखरखाव करने के बजाय क्लाउड प्लेटफॉर्म पर अपने एप्लिकेशन और डेटाबेस को होस्ट कर सकता है । उचित सुरक्षा उपायों और गवर्नेंस फ्रेमवर्क का समर्थन मिलने पर, घरेलू क्लाउड बुनियादी ढांचा संवेदनशील जानकारी पर अपने नियंत्रण को मजबूत कर सकता है। यह विश्वसनीय सार्वजनिक सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी समर्थन कर सकता है।

भारत का क्लाउड सेवा प्रदाता पारिस्थितिकी तंत्र

सितंबर 2026 तक, भारत ने 30 क्लाउड सेवा प्रदाताओं (CSPs) को सूचीबद्ध (empanel) किया है, जिनका बुनियादी ढांचा मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और जामनगर सहित कई स्थानों पर फैला हुआ है। इन सूचीबद्ध प्रदाताओं में जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड, भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), आईटीआई (ITI) लिमिटेड, रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, अडानीकॉनेक्स (AdaniConneX) प्राइवेट लिमिटेड और योटा डेटा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी भारतीय कंपनियां शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रदाताओं में गूगल क्लाउड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ओरेकल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और अमेज़न वेब सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इत्यादि शामिल हैं।

 

क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रमुख लाभ

क्लाउड कंप्यूटिंग डिजिटल बुनियादी ढांचे को अधिक सुलभ, लचीला और कुशल बनाकर कई लाभ प्रदान करता है। यह भौतिक सर्वर खरीदने और उनके रखरखाव की आवश्यकता को सीमित करके इसकी लागत को कम करता है।

सर्वर रूम एक समर्पित स्थान होता है जहां ऐसे कंप्यूटर रखे जाते हैं जो डेटा संग्रहीत करते हैं और डिजिटल सेवाएं चलाते हैं। उदाहरण के लिए, एक स्कूल अपने स्वयं के कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे में निवेश करने के बजाय क्लाउड प्लेटफॉर्म पर छात्रों के रिकॉर्ड संग्रहीत कर सकता है।

यह संस्थाओं को लंबे बुनियादी ढांचे के सेटअप बिना सेवा शुरू करने की सुविधा देकर उनकी अपनी डिजिटल सेवाओं और अनुप्रयोगों की तेज़ तैनाती (deployment) को सक्षम बनाता है। उदाहरण के लिए, एक अस्पताल अपने स्वयं के सर्वर स्थापित किए बिना अपनी ऑनलाइन अपॉइंटमेंट प्रणाली शुरू कर सकता है।

क्लाउड प्लेटफॉर्म आसान स्केलेबिलिटी (क्षमता विस्तार) भी प्रदान करते हैं, जिससे संगठनों को उनकी अपनी मांग के अनुसार कंप्यूटिंग संसाधनों को समायोजित करने की अनुमति मिलती है। उदाहरण के लिए, एक ऑनलाइन परीक्षा पोर्टल पंजीकरण की अवधि के दौरान अपने संसाधनों को बढ़ा सकता है और बाद में उन्हें कम कर सकता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग विभिन्न स्थानों पर मौजूद उपयोगकर्ताओं को जानकारी तक पहुंचने और उसे साझा करने की अनुमति देकर बेहतर सहयोग (collaboration) को बढ़ावा देती है। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय के छात्र अपनी अनुसंधान परियोजनाओं पर सहयोग ले सकते हैं, अध्ययन सामग्री साझा कर सकते हैं और दस्तावेज़ों को ऑनलाइन संपादित कर सकते हैं।

क्लाउड प्लेटफॉर्म डेटा बैकअप और रिकवरी को सुदृढ़ करते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं को आकस्मिक रूप से डेटा हट जाने, उपकरण खराब होने या अन्य व्यवधानों के बाद जानकारी पुनः प्राप्त करने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, एक अस्पताल अपनी सिस्टम विफलता की स्थिति में बैकअप किए गए रोगी रिकॉर्ड को बहाल (restore) कर सकता है।

इस तरह की क्षमताएं अप्रत्याशित रुकावटों के बावजूद संस्थाओं को अपनी सेवा का संचालन फिर से शुरू करने में मदद करके सेवा की निरंतरता (service continuity) को चलायमान रखती हैं। उदाहरण के लिए, जब किसी ऑनलाइन बैंकिंग सेवा के प्राथमिक बुनियादी ढांचे में तकनीकी समस्याएं आती हैं, तो वह बैकअप सिस्टम पर स्विच कर सकता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग डिजिटल रिकॉर्ड के भंडारण, संगठन और पुनर्प्राप्ति को सरल बनाकर कुशल डेटा प्रबंधन का भी समर्थन करती है। उदाहरण के लिए, एक ई-कॉमर्स व्यवसाय एक ही क्लाउड-आधारित प्रणाली के माध्यम से उत्पाद जानकारी, ग्राहक ऑर्डर और इन्वेंट्री रिकॉर्ड का प्रबंधन कर सकता है।

डिजिटल इंडिया भाषिनी (BHASHINI) प्लेटफॉर्म का क्लाउड पर माइग्रेशन

डिजिटल इंडिया भाषिनी (BHASHINI) प्लेटफॉर्म यह प्रदर्शित करता है कि कैसे स्वदेशी क्लाउड बुनियादी ढांचा डिजिटल सेवाओं में सुधार करते हुए डेटा संप्रभुता का समर्थन कर सकता है। फरवरी 2026 में, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने योटा डेटा सर्विसेज द्वारा संचालित भाषिनी के भारतीय क्लाउड पर माइग्रेशन की जानकारी दी। यह परिवर्तन इसके भाषा डेटासेट, AI मॉडल और नागरिक संवादों को भारत के अधिकार क्षेत्र के भीतर रखता है। इस तैनाती से कथित तौर पर प्रदर्शन में 40% तक सुधार, 20–30% लागत बचत और 99.99% अपटाइम हासिल हुआ।

महाकुंभ 2025 के दौरान, भाषिनी ने 11 से अधिक भारतीय भाषाओं में रीयल-टाइम अनुवाद और आवाज-आधारित सहायता का समर्थन किया। इसकी बहुभाषी सेवाओं ने भाषा की बाधाओं के बावजूद तीर्थयात्रियों को जानकारी प्राप्त करने में मदद की।

 

रचनात्मक मस्तिष्क, विज्ञान को उत्प्रेरित करना, प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाना

ESTIC-2026, भारत के उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव का दूसरा संस्करण, 27–29 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। यह कॉन्क्लेव “रचनात्मक मस्तिष्क, विज्ञान को उत्प्रेरित करना, प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाना” (Creative Minds, Catalyzing Science, Empowering Technologies) थीम पर आधारित है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) द्वारा आयोजित, ESTIC-2026 क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों सहित उभरते वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों को आगे बढ़ाता है। यह रणनीतिक सहयोग को उत्प्रेरित करता है और विकसित भारत 2047 के भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। 12 विषयगत क्षेत्रों में विस्तृत इस कॉन्क्लेव में पूर्ण सत्र, तकनीकी चर्चाएं और प्रदर्शनियां शामिल हैं। एजेंडा के बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें: ESTIC 2026

क्लाउड कंप्यूटिंग के मूल सिद्धांतों को समझना

क्लाउड मॉडल के प्रकार

[1] https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2225350&lang=2&reg=48&utm_source=chatgpt.com

[1]https://estic2026.in/index.html

[1] https://azure.microsoft.com/en-in/resources/cloud-computing-dictionary/what-is-cloud-computing

 

क्लाउड मॉडल यह निर्धारित करते हैं कि क्लाउड बुनियादी ढांचा कहां संचालित होता है, इसका उपयोग कौन कर सकता है, और कोई संगठन इस पर कितना नियंत्रण रखता है। आमतौर पर चर्चा किए जाने वाले तीन मॉडल पब्लिक, प्राइवेट और हाइब्रिड क्लाउड हैं।

एक पब्लिक क्लाउड (Public cloud) तृतीय-पक्ष प्रदाता द्वारा प्रदत्त और कई ग्राहकों के बीच साझा किए जाने वाले बुनियादी ढांचे का उपयोग करता है। उदाहरण के लिए, एक व्यवसाय/वीडियो-स्ट्रीमिंग कंपनी साझा सर्वरों से लाखों दर्शकों को सेवा प्रदान करती है।

एक प्राइवेट क्लाउड (Private cloud) किसी एकल संगठन के लिए बुनियादी ढांचा समर्पित करता है। उदाहरण के लिए, एक राज्य कोषागार कार्यालय सुरक्षा पर अधिक नियंत्रण के साथ संवेदनशील प्रशासनिक रिकॉर्ड्स को प्रबंधित व सुरक्षित करने के लिए भुगतान और लेखा डेटा को प्राइवेट क्लाउड पर रखता है।

एक हाइब्रिड क्लाउड (Hybrid cloud) पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड वातावरण को जोड़ता है। उदाहरण के लिए, एक नगर निगम अपने संपत्ति-कर भुगतान पोर्टल को पब्लिक क्लाउड पर और नागरिकों के रिकॉर्ड को प्राइवेट क्लाउड पर रखता है। इसका चुनाव संगठन की सुरक्षा, लागत और परिचालन आवश्यकताओं पर निर्भर करता है।

विभिन्न क्लाउड सेवाएं

क्लाउड सेवाएं डिजिटल बुनियादी ढांचे को किराए पर लेने से लेकर रेडी-मेड एप्लिकेशन का उपयोग करने तक, विभिन्न स्तरों की कंप्यूटिंग सहायता प्रदान करती हैं। इनकी चार सामान्य श्रेणियां हैं: इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐज अ सर्विस (IaaS), प्लेटफॉर्म ऐज अ सर्विस (PaaS), सॉफ्टवेयर ऐज अ सर्विस (SaaS) और सर्वरलेस कंप्यूटिंग (serverless computing)। इन्हें कभी-कभी क्लाउड कंप्यूटिंग “स्टैक” भी कहा जाता है क्योंकि ये एक-दूसरे के ऊपर निर्मित होते हैं।

 

इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐज अ सर्विस (IaaS) उपयोगकर्ताओं को भौतिक उपकरण खरीदने के बजाय वर्चुअल सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्क जैसे कंप्यूटिंग संसाधनों को किराए पर लेने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए, एक ऑनलाइन रिटेलर अपनी वेबसाइट को होस्ट करने के लिए क्लाउड सर्वर लीज पर ले सकता है और त्योहारी बिक्री के दौरान ट्रैफिक में होने वाली वृद्धि को संभालने के लिए कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ा सकता है।

 

प्लेटफॉर्म ऐज अ सर्विस (PaaS) डेवलपर्स को अंतर्निहित बुनियादी ढांचे का प्रबंधन किए बिना एप्लिकेशन बनाने, परीक्षण करने और लॉन्च करने के लिए टूल्स के साथ सक्षम बनाता है। उदाहरण के लिए, मोबाइल बैंकिंग एप्लिकेशन विकसित करने वाली एक टीम अपने सॉफ्टवेयर के निर्माण और परीक्षण के लिए क्लाउड प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकती है।

 

सॉफ्टवेयर ऐज अ सर्विस (SaaS) इंटरनेट पर उपयोग के लिए तैयार (रेडी-टू-यूज़) सॉफ्टवेयर प्रदान करता है, जिसमें प्रदाता अपडेट और रखरखाव का प्रबंधन करता है। इसके उदाहरणों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए Zoom, ग्राहक संबंध प्रबंधन के लिए Salesforce और ऑनलाइन फ़ाइल स्टोरेज तथा शेयरिंग के लिए Dropbox शामिल हैं।

 

सर्वरलेस कंप्यूटिंग (Serverless computing) डेवलपर्स को सीधे सर्वर का प्रबंधन किए बिना विशिष्ट कार्यों को चलाने की अनुमति देता है। क्लाउड प्रदाता बुनियादी ढांचे का प्रबंधन करता है और आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए संसाधन आवंटित करता है। उदाहरण के लिए, जब कोई ग्राहक खरीदारी पूरी करता है, तो एक ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म स्वचालित रूप से ऑर्डर प्रोसेस कर सकता है। अपने नाम के बावजूद, सर्वरलेस कंप्यूटिंग में अभी भी सर्वर का उपयोग होता है; प्रदाता डेवलपर की ओर से उनका प्रबंधन करता है।

स्वदेशी क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र की तैनाती में भारत की प्रगति

भारत डिजिटल शासन, डेटा प्रबंधन और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहायता के लिए अपने घरेलू क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ कर रहा है। सरकार साझा बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है, विश्वसनीय क्लाउड सेवाओं को लागू कर रही है और स्वदेशी कंप्यूटिंग क्षमताओं को आगे बढ़ा रही है।

मेघराज (MeghRaj) और मेघराज 2.0: भारत सरकार का क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र

मेघराज (MeghRaj), जो भारत सरकार का क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र है, को ई-गवर्नेंस में तेजी लाने और सार्वजनिक ICT व्यय को अनुकूलित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा 2014 में लॉन्च किया गया था। मेघराज 2.0 (MeghRaj 2.0) इस राष्ट्रीय क्लाउड कंप्यूटिंग पहल की दूसरी पीढ़ी के संस्करण का प्रतिनिधित्व करता है, जो देश के डिजिटल इंडिया मिशन के लिए सुरक्षित डिजिटल रीढ़ के रूप में कार्य करता है। वितरित क्लाउड आर्किटेक्चर के माध्यम से लचीले IaaS, PaaS और SaaS मॉडल प्रदान करके, यह सरकारी विभागों को मांग पर डिजिटल अनुप्रयोगों को तेजी से तैनात करने की अनुमति देता है।

[1] https://ngc.gov.in/assets/media/Service-Catalogue-Meghraj-2.0_V4.pdf

पिछले एक दशक में इस पारिस्थितिकी तंत्र का अत्यधिक विस्तार हुआ है। सितंबर 2026 तक, इसे अपनाने वाले सरकारी विभागों की संख्या बढ़कर 2,330 हो गई। आज, मेघराज 2.0 डाक विभाग की उन्नत डाक प्रौद्योगिकी (APT) के साथ-साथ डिजीलॉकर (DigiLocker), माईगव (MyGov) और राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल सहित भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्मों को संचालित करने के लिए आवश्यक अत्यधिक सुरक्षित, AI-सक्षम होस्टिंग प्रदान करता है। इसके बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें: भारत का डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चरइसके बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें: भारत का डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर

भारत की क्लाउड प्रणाली के एक स्तंभ के रूप में डेटा सेंटर

डेटा सेंटर उन सर्वरों और स्टोरेज प्रणालियों को रखते हैं जो क्लाउड कंप्यूटिंग को संचालित करते हैं। डिजिटल सेवाओं और AI कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग से प्रेरित होकर, भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र गति पकड़ रहा है। अगस्त 2026 तक, भारत की डेटा सेंटर क्षमता 1.57 GW तक पहुंच गई है और 2030 तक इसके बढ़कर लगभग 8 GW होने का अनुमान है। यह क्षेत्र मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और जामनगर में केंद्रित है। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी उभरते डेटा सेंटर हब गति पकड़ रहे हैं। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता है, और यह क्षेत्र घोषित परियोजनाओं में अतिरिक्त 90 बिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ वर्तमान में चल रहे निवेशों में लगभग 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर आकर्षित कर रहा है। इन निवेशों से कंप्यूटिंग क्षमता में वृद्धि होने और भारत की घरेलू क्लाउड क्षमताओं के व्यापक होने की उम्मीद है। इसके बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें: भारत में डेटा सेंटरइसके बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें: भारत में डेटा सेंटर

 

डेटा सेंटर नेटवर्क को सुदृढ़ करना

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) भारत के डेटा सेंटर बुनियादी ढांचे का एक अभिन्न अंग है जो देश भर में 4 राष्ट्रीय डेटा सेंटर और 24 मिनी डेटा सेंटर संचालित कर रहा है। ये सुविधाएं सरकारी विभागों को शेयर्ड होस्टिंग, को-लोकेशन और क्लाउड सेवाएं प्रदान करती हैं। NIC राज्य केंद्रों पर स्थित मिनी डेटा सेंटर विकेंद्रीकृत लेकिन मानकीकृत बुनियादी ढांचे के माध्यम से राज्य-स्तरीय ई-गवर्नेंस आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन — AI कंप्यूटिंग तक पहुंच का लोकतांत्रिकरण

क्लाउड बुनियादी ढांचा शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप्स को अपने AI अनुप्रयोगों को तैनात करने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों से लैस करता है। ₹10,371.92 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन, कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच को व्यापक बना रहा है। इसके अंतर्गत एक साझा AI कंप्यूटिंग सुविधा के लिए 45,000 से अधिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) को शामिल (ऑनबोर्ड) किया गया है। ये संसाधन भारतीय स्टार्ट-अप्स और शैक्षणिक संस्थानों को AI विकास के लिए किफायती कंप्यूटिंग शक्ति प्रदान करते हैं, जिससे उनको समर्पित उपकरणों में निवेश की आवश्यकता कम हो जाती है। इसके बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें: AI के साथ भारत का परिवर्तन

क्लाउड कंप्यूटिंग में कौशल विकास (अपस्किलिंग) और क्षमता निर्माण की पहल

भारत के बढ़ते डिजिटल बुनियादी ढांचे के संचालन के लिए एक कुशल कार्यबल का निर्माण आवश्यक है। MeitY–NASSCOM द्वारा 2021 में शुरू किया गया फ्यूचरस्किल्स प्राइम (FutureSkills PRIME) कार्यक्रम देश में उभरती-प्रौद्योगिकी के कौशलों को बढ़ावा देता है। अगस्त 2026 तक, इसमें 34 लाख पंजीकृत उम्मीदवार थे, जिनमें से 23 लाख से अधिक नामांकित या प्रशिक्षित थे। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स में उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण के लिए इसे यूरोपीय आयोग की पैक्ट फॉर स्किल्स रिपोर्ट 2024 में विश्व स्तर पर तीसरा (3rd) स्थान मिला। इस पहल के पूरक के रूप में, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) 56 केंद्रों, 750 संबद्ध संस्थानों और 9,000 से अधिक सुविधा केंद्रों का संचालन कर रहा है, जो क्लाउड कंप्यूटिंग, AI, साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन और IoT में पेशेवरों को प्रशिक्षित करते हैं।

इस प्रतिभा आधार को और अधिक प्रतिबिंबित करते हुए, क्लाउड नेटिव कंप्यूटिंग फाउंडेशन (CNCF) की 2026 की एक रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत में 2.25 मिलियन क्लाउड-नेटिव डेवलपर्स हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि इसमें 44% भारतीय डेवलपर्स पब्लिक और प्राइवेट क्लाउड वातावरण को मिलाकर हाइब्रिड क्लाउड का उपयोग करते हैं। यह कुशल कार्यबल भारत के विकसित होते क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन को सुगम बना सकता है।

 

[1] https://meity.dashboard.nic.in/Public/View/Dashboard.aspx

[1] https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221894&reg=3&lang=2

[1] https://cloud.gov.in/user/

[1] https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2298788&reg=3&lang=1

[1] https://sansad.in/getFile/annex/270/AU3892_NqLb9B.pdf?source=pqars

 

भारत में क्लाउड अपनाने को गति देने वाले नीतिगत प्रयास

भारत की क्लाउड रणनीति समन्वित नीतिगत पहलों और लक्षित निवेशों के माध्यम से विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित है। उभरती प्रौद्योगिकियों और डेटा-संचालित सेवाओं के लिए क्लाउड और डेटा सेंटरों को महत्वपूर्ण मानते हुए, केंद्रीय बजट 2026–27 ने भारत की डिजिटल क्षमताओं को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। इनका उद्देश्य भारत की दीर्घकालिक डिजिटल क्षमता को बढ़ाते हुए क्लाउड कंप्यूटिंग, AI और हाइपरस्केल डेटा सेंटरों में निवेश आकर्षित करना है।         

    

क्या आप जानते हैं?

मार्च 2026 में, MeitY ने एक क्लाउड चयन रूपरेखा (Cloud Selection Framework) जारी की जो डेटा की संवेदनशीलता और गंभीरता के आधार पर क्लाउड बुनियादी ढांचे के चयन के लिए मंत्रालयों और विभागों को संरचित मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा विचारों के अनुरूप डेटा वर्गीकरण का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, यह NIC और राज्य डेटा सेंटर जैसे सरकार-समर्थित क्लाउड के उपयोग को प्राथमिकता देता है, और सूचीबद्ध क्लाउड सेवा प्रदाताओं के साथ हाइब्रिड प्रसार (deployment) मॉडल  को सक्षम बनाता है।

इसके अतिरिक्त, डिजिटल वैयक्तिक डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत डेटा प्रसंस्करण के लिए सुरक्षा उपाय स्थापित करता है और सीमा-पार डेटा हस्तांतरण के लिए शर्तें निर्धारित करता है। यह स्थानीय डेटा सेंटरों और क्लाउड सेवाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करता है, जैसा कि यह डेटा रेजिडेंसी (डेटा के देश के भीतर भंडारण) और सीमा-पार डेटा हस्तांतरण पर प्रतिबंधों से संबंधित प्रावधानों में परिलक्षित भी होता है। यह स्पष्ट उपयोगकर्ता सहमति, डेटा फिडुशियरी (न्यासियों) की जवाबदेही और सख्त डेटा प्रसंस्करण दायित्वों संबंधी प्रावधानों के माध्यम से डेटा पर बेहतर नियंत्रण और विनियमों का अनुपालन भी सुनिश्चित करता है।

सुरक्षित और मानकीकृत डिजिटल शासन का मार्गदर्शन

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) केंद्र और राज्य स्तरों पर ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के लिए तकनीकी और सलाहकार सहायता प्रदान करता है। इसकी जिम्मेदारियों में परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन शामिल है, जिसमें उनकी प्रौद्योगिकी वास्तुकला (आर्किटेक्चर), सुरक्षा, मानक और साझा बुनियादी ढांचे का उपयोग शामिल है। यह सहयोगात्मक ढांचा डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस प्राथमिकताओं को गति देते हुए भारत के संपूर्ण सरकारी पारिस्थितिकी तंत्र में क्लाउड सेवाओं को आगे बढ़ा रहा है।

भारत के क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आगे की राह

भारत का क्लाउड पारिस्थितिकी तंत्र बड़ी तेजी से  अपना विस्तार देख रहा है। आगामी 2030 तक देश की क्लाउड डेटा क्षमता के लगभग 4–5 गुना बढ़ने का अनुमान है। डिजिटल शासन, सार्वजनिक सेवा वितरण और प्रौद्योगिकी-संचालित प्लेटफॉर्मों में क्लाउड बुनियादी ढांचे पर बढ़ती निर्भरता देश में कंप्यूटिंग संसाधनों की मांग को  तेजी से बढ़ा रही है। डेटा सेंटरों में बढ़ रहे निवेश हमारी घरेलू क्षमता को मजबूत कर रहे हैं, जबकि लक्षित कौशल-विकास से क्लाउड-आधारित प्रौद्योगिकियों के लिए कार्यबल  तैयार किया जा रहा  है। ये सभी उपाय मिलकर नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं और क्लाउड कंप्यूटिंग को भारत के दीर्घकालिक डिजिटल परिवर्तन की आधारशिला के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

संदर्भ

राज्य सभा

 

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

 

संचार मंत्रालय

 

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय

 

नीति आयोग

 

पीआईबी मुख्यालय (PIB Headquarters)

 

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स रिपोर्ट 2025

 

नैसकॉम (NASSCOM)

हिंदी PDF फ़ाइल के लिए यहाँ क्लिक करें

पीआईबी रिसर्च (PIB Research)

*****

 पीके/केसी/आरटी/एमएम

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