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कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना

कंटेनर विनिर्माण के लिए भारत की 10,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना

Posted On: 28 OCT 2026 5:21PM

कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना

समुद्री परिवहन वैश्विक व्यापार का प्रमुख आधार है, जिसमें शिपिंग कंटेनर सीमाओं के पार वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फरवरी 2026 तक, भारत के समुद्री क्षेत्र के माध्यम से देश का 95% व्यापार मात्रा के आधार पर और 70% व्यापार मूल्य के आधार पर संचालित होता था। व्यापार में भूमिका के अलावा, यह क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 4–5% का योगदान देता है।

जैसे-जैसे भारत वैश्विक विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, कंटेनरों में माल की ढुलाई की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे देश में ही कंटेनर विनिर्माण की क्षमताओं को विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित होती है। इस दिशा में प्रयासों को गति देने के लिए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (सीएमपीएस) को मंजूरी दी है, जिसके लिए वित्त वर्ष 2039-40 तक 10,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।

कंटेनर क्या होते हैं?

शिपिंग कंटेनर मानकीकृत इस्पात से बने मालवाहक कंटेनर होते हैं, जिनका उपयोग जहाजों, रेलवे और सड़क वाहनों के माध्यम से माल परिवहन के लिए किया जाता है। इनके उपयोग से यात्रा के दौरान सामान को उतारे और दोबारा पैक किए बिना एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुँचाया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) के विनिर्देशों के अनुसार निर्मित ये कंटेनर विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच निर्बाध परिवहन और वैश्विक व्यापार को सुगम बनाते हैं। सबसे सामान्य आकार 20 फुट और 40 फुट के कंटेनर हैं। इनकी क्षमता को ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (टीईयू) में मापा जाता है, जो कंटेनर क्षमता मापने की मानक इकाई है।

 

भारत के कंटेनर विनिर्माण इकोसिस्‍टम का निर्माण

सीएमपीएस भारत की दीर्घकालिक समुद्री और व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में योगदान  देते हुए मेक इन इंडिया, मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 और मल्‍टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के विकास से जुड़ी सरकारी पहलों को समर्थन देती है।

 

क्या आप जानते हैं?

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) के अनुसार,  मात्रा के आधार पर  लगभग 80% वैश्विक वस्तु व्यापार का   परिवहन समुद्र के रास्ते किया जाता है।

 

  • इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में निवेश को प्रोत्साहित करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण इकोसिस्‍टम  स्थापित करना है।
  •  यह पहल आयात पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति शृंखला की सुदृढ़ता बढ़ाने का प्रयास करती है।
  • यह नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में सहायता देने के साथ-साथ मौजूदा कंटेनर विनिर्माण इकाइयों का विस्‍तार भी करती है।  

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सीएमपीएस के अंतर्गत घटक

यह योजना तीन प्रमुख घटकों: निवेश सहायता, परिचालन व्यय तथा परीक्षण एवं प्रमाणन के माध्यम से सहायता प्रदान करती है।

ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड सुविधाएँ

ग्रीनफील्ड परियोजना में पूरी तरह से नई परिसंपत्ति का निर्माण किया जाता है, जबकि ब्राउनफील्ड परियोजना में मौजूदा परिसंपत्ति का उन्नयन, नवीनीकरण या पुनः उपयोग किया जाता है।

ब्याज अनुदान सहायता (आईएसए)

859 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ, ब्याज अनुदान सहायता (आईएसए) के तहत कंटेनर निर्माताओं द्वारा ग्रीनफील्ड सुविधाएँ स्थापित करने और मौजूदा विनिर्माण क्षमता के ब्राउनफील्ड विस्तार हेतु लिए गए पात्र सावधि ऋणों (पूंजीगत ऋणों) पर प्रति वर्ष 3% ब्याज अनुदान प्रदान किया जाता है। इस सहायता के लिए पात्र होने हेतु परियोजनाओं को निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना होगा:

(क) ग्रीनफील्ड विनिर्माण सुविधाओं की वार्षिक क्षमता कम से कम 1,00,000 टीईयू होनी चाहिए;

(ख) ब्राउनफील्ड विस्तार के तहत वार्षिक क्षमता में कम से कम 25,000 टीईयू की वृद्धि होनी चाहिए। इस अतिरिक्त क्षमता को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के तीन वर्षों के भीतर चालू किया जाना चाहिए तथा वैश्विक कंटेनर मानकों का अनुपालन करना चाहिए।

परिचालन व्यय सहायता (ओईए) 

इस घटक के तहत वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे गए कंटेनरों को समर्थन देने के लिए 8,891 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है। इस सहायता का उद्देश्य लागत के अंतर को कम करना और देश में निर्मित कंटेनरों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

 

कंटेनर के प्रकार के अनुसार परिचालन व्यय सहायता (ओईए) 

कंटेनर के प्रकार

सहायता मूल्य (प्रति कंटेनर)

20 फुट का कंटेनर

₹49,500

40 फुट का कंटेनर

₹86,625

20 फुट का विशेष कंटेनर

₹37,125-₹74,250

 

सहायता प्राप्त करने के लिए, निर्माताओं को वित्त वर्ष 2031-32 तक न्यूनतम 70% स्थानीय सामग्री की आवश्यकता को पूरा करना होगा। घरेलू आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करने के लिए, वित्त वर्ष 2032-33 से इन मानदंडों को बढ़ाकर 90% कर दिया जाएगा।

परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता

डायनेमिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट जैसी साझा सुविधाओं की स्थापना को समर्थन देने के लिए 150 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय आवंटित किया गया है।

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अपेक्षित परिणाम और व्यापक आर्थिक प्रभाव   

इस योजना का उद्देश्य भारत की निर्यात क्षमता, आपूर्ति श्रृंखलाओं और संबंधित उद्योगों को सुदृढ़ करते हुए घरेलू कंटेनर उत्पादन का विस्तार करना है।

(क) विनिर्माण क्षमता में वृद्धि: घरेलू कंटेनर विनिर्माण की वार्षिक क्षमता में लगभग दस गुना वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह बढ़कर 7.5 लाख टीईयू तक पहुँच जाएगी।

(ख) निर्यात की संभावनाएँ: यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण आधार विकसित करने में सहायता देगी और भारत को गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में अपनी क्षमता को मजबूत करने में सहायता देगी।

(ग) आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता: भारत की समुद्री और लॉजिस्टिक्स आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुदृढ़ता बढ़ने की उम्मीद है।

(घ) रोजगार सृजन: इस योजना का उद्देश्य अनुमानित 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है।
(ङ) सहायक उद्योगों को समर्थन: इस योजना से कॉर्नर कास्टिंग, विशेष प्रकार के इस्पात, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे उद्योगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

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भारत के समुद्री इकोसिस्‍टम को सुदृढ़ बनाना

एकीकृत और घरेलू आधार पर विकसित लॉजिस्टिक्स इकोसिस्‍टम  के निर्माण के लिए सीएमपीएस के अतिरिक्त कई अन्य उपाय भी किए गए हैं।

भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (बीसीएसएल) की स्थापना 

भारत में एकीकृत कंटेनर इकोसिस्‍टम  के निर्माण और उसे समर्थन देने के उद्देश्य से, फरवरी 2026 में भारत कंटेनर शिपिंग लाइन (बीसीएसएल) की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 

इस समझौते के तहत, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तत्वावधान में भारतीय नौवहन निगम (एससीआई), कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीओएनसीओआर), जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (जेएनपीए), वी. ओ. चिदंबरनार पत्तन प्राधिकरण (वीओसीपीए), चेन्नई पत्तन प्राधिकरण और सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसएमएफसीएल) एक साथ आए हैं।

यह समझौता ज्ञापन जेएनपीए, वीओसीपीए और चेन्नई पत्तनों को देश के अंतर्देशीय बाजारों से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर कंटेनर शिपिंग इकोसिस्‍टम  की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसका उद्देश्य संपूर्ण लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को बेहतर बनाना, माल ढुलाई की लागत को स्थिर रखना और भारत की व्यापारिक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना है।

समुद्री क्षेत्र के लिए व्यापक समर्थन  

सरकार की कई पूरक पहलें भी भारत के समुद्री क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में योगदान दे रही हैं।

 समर्थन का क्षेत्र

प्रमुख उपाय और पहल

विधायी समर्थन

व्यापारी पोत परिवहन अधिनियम, 2025; तटीय पोत परिवहन अधिनियम, 2025; और भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025

व्यापार सुगमता के लिए डिजिटल समर्थन

वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस (ओएनओपी), मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र।

एकीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क

एम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) और सागरमाला कार्यक्रम।

 

निष्‍कर्ष

सीएमपीएस का उद्देश्य भारत की समुद्री विनिर्माण क्षमताओं को सुदृढ़ करना, आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करते हुए रोजगार के अवसर सृजित करना है। व्यापक समुद्री सुधारों के अनुरूप, यह योजना भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में आगे बढ़ाती है।

 

संदर्भ

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय

https://sansad.in/getFile/annex/270/AU2875_nAmH3t.pdf?source=pqars&utm

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221817&reg=48&lang=2

https://dgma.gov.in/download/1775649151_69d6417f46b3f_dgs-nmdc-address-01042026.pdf?utm

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2222805&lang=1&reg=3&utm

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https://dgma.gov.in/download/1774258056_69c10788105ab_24-02-2026-international-conference-on-shipbuilding.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2222805&lang=2&reg=3

https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Monthly%20Summary%20-%20Feburary%2C%202026.pdf

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी)

https://unctad.org/topic/transport-and-trade-logistics/review-of-maritime-transport

https://unctad.org/publication/review-maritime-transport-2025

https://unctad.org/news/shipping-data-unctad-releases-new-seaborne-trade-statistics

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी)

https://survey.oecd.org/index.php?lang=en&r=survey%2Findex&sid=744293

पीआईबी आर्काइव

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2297455&reg=48&lang=1

 

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पीआईबी शोध

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