Social Welfare

अटल वयो अभ्युदय योजना

भारत की रजत अर्थव्यवस्था का सशक्तीकरण

Posted On: 27 OCT 2026 11:07AM

भारत में वृद्धजनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसे देखते हुए उनका स्वस्थ, सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना सार्वजनिक नीति की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गया है। ‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ इसके लिए एकीकृत ढांचा प्रदान करती है। यह वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए संस्थागत देखभाल, स्वास्थ्य सेवा, सहायक उपकरण, कौशल विकास, सक्रिय वृद्धावस्था और तकनीकी हस्तक्षेपों को एक साथ जोड़ती है।

बढ़ती उम्र की अनिवार्यता

भारत एक शांत जनसांख्यिकीय बदलाव से गुजर रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष और उससे अधिक आयु) की कुल जनसंख्या 10.38 करोड़ है। इनमें 5.11 करोड़ पुरुष और 5.27 करोड़ महिलाएं हैं। लांगिट्यूडिनल एजिंग स्टडी इन इंडिया (एलएएसआई) इस बात पर प्रकाश डालती है कि वृद्धजनों का एक बड़ा हिस्सा अपने रोजमर्रा के कामकाज में दिक्कतों का सामना करता है। यह तथ्य एक व्यवस्थित और विश्वसनीय देखभाल प्रणाली की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता है। इसके साथ ही बढ़ते शहरीकरण, प्रवासन और एकल परिवारों के कारण वरिष्ठ नागरिकों के लिए पारंपरिक पारिवारिक सहायता ढांचा भी कमजोर हो रहा है।

वर्ष 2021 में शुरू की गई अटल वयो अभ्युदय योजना (अव्यय) ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनी पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीएसआरसी) का विलय कर उसका विस्तार किया है। इस तरह, वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़ी कई योजनाओं को एक ही व्यापक योजना के अंतर्गत लाया गया। इस योजना का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को व्यावहारिक सहायता प्रदान करना और उनके सक्रिय जीवन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य सेवा और मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह योजना सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों,  स्थानीय निकायों और समुदायों के क्षमता निर्माण के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के सक्रिय और उत्पादक जीवन को प्रोत्साहित करती है। यह योजना गरिमापूर्ण और अपने निवास स्थल पर ही वृद्धावस्था के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। गरिमापूर्ण वृद्धावस्था यह सुनिश्चित करती है कि वरिष्ठ नागरिकों के जीवन भर के योगदान का आदर करने के साथ ही उन्हें सम्मानजनक और सशक्त बनाने वाली देखभाल मिले। दूसरी ओर, अपने निवास स्थल पर वृद्धावस्था इस लक्ष्य में मददगार है। इसके जरिए बुजुर्गों को किसी सहायक देखभाल केंद्र में स्थानांतरित होने के बजाय अपने ही घरों और समुदायों में सुरक्षित रूप से रहने की सुविधा मिलती है। यह व्यवस्था अनुकूल गृह संशोधनों और विशेष सामुदायिक सहायता प्रणालियों के माध्यम से संभव बनाई जाती है।

क्या है अव्यय का उद्देश्य

वर्ष 2036 तक भारत में वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या 23 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धजनों के लिए एक विस्तृत सहायता प्रणाली की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित करता है। अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से सरकार संस्थागत तंत्र को मजबूत करके और समुदाय आधारित सहायता को बढ़ावा देकर इस जनसांख्यिकीय बदलाव से निपटने का प्रयास कर रही है, ताकि बुजुर्ग एक गरिमापूर्ण, संतोषजनक और सार्थक जीवन जी सकें। सरकार ने अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए ‘अव्यय’ के एक घटक- ‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए समेकित कार्यक्रम’ के अंतर्गत 755 परियोजनाओं को सहायता अनुदान के रूप में 77.98 करोड़ रुपए जारी किए हैं।

अव्यय की संस्थागत संरचना

अव्यय की संस्थागत संरचना इस प्रकार हैः

1. नोडल मंत्रालय

  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के माध्यम से ‘अव्यय’ के नीति निर्माण, वित्तपोषण, निगरानी और समग्र कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी नोडल मंत्रालय है।

2. राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र सरकारें

  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारें वरिष्ठ नागरिक कल्याण के लिए अपने राज्यों की कार्य योजनाएं तैयार कर उन्हें कार्यान्वित करती हैं।
  • इन योजनाओं के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए मंत्रालय वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

3. जिला स्तरीय समितियां: केंद्र और राज्य योजना के व्यापक ढांचे के निर्माता हैं। लेकिन स्थानीय लाभार्थियों का वास्तविक चयन और वृद्धाश्रमों की जमीनी स्तर पर निगरानी जिला कलक्टर/मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली जिला समितियां करती हैं।

निगरानी, मूल्यांकन और जवाबदेही

अटल वयो अभ्युदय योजना (अव्यय) के अंतर्गत निगरानी, मूल्यांकन और जवाबदेही ढांचा इस तरह तैयार किया गया है ताकि योजना के सभी घटकों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और परिणाम-आधारित क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

  • परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (आईपीएसआरसी) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रामाणिकता और उनके उचित कामकाज को सत्यापित करने के लिए आवधिक क्षेत्रीय निरीक्षण आयोजित करती है।
  • कार्यान्वयन करने वाले एनजीओ के लिए निम्नलिखित दस्तावेज जमा करना अनिवार्य हैः
  • आवधिक प्रगति रिपोर्ट
  • उपयोग प्रमाण पत्र
  • लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण
  • परियोजनाओं की निगरानी ई-अनुदान पोर्टल के माध्यम से की जाती है। कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए निवासियों से संबद्ध क्लाउड-आधारित कांटेक्टलेस बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का उपयोग करना अनिवार्य है।
  • इसके अलावा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संस्थानों को अपनी वेबसाइटों या पोर्टल पर लाइव सीसीटीवी फीड उपलब्ध कराना आवश्यक है।

‘अव्यय’ के घटक

‘अटल वयो अभ्युदय योजना’ एकीकृत घटकों के एक समूह के जरिए काम करती है जिन्हें वरिष्ठ नागरिकों की विभिन्न प्रकार की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम

‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम’ (आईपीएसआरसी) मुख्य कार्यान्वयन संस्था के रूप में कार्य करता है। वह वृद्धाश्रमों, सतत देखभाल केंद्रों, सचल चिकित्सा इकाइयों, फिजियोथेरेपी क्लीनिकों और क्षेत्रीय संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्रों के संचालन तथा रखरखाव के लिए गैर सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों को सीधे सहायता अनुदान प्रदान करता है। वर्तमान में आईपीएसआरसी के तहत 764 वरिष्ठ नागरिक गृहों, 13 सतत देखभाल केंद्रों, 17 सचल चिकित्सा इकाइयों और 3 फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से सचल चिकित्सा इकाइयां और फिजियोथेरेपी क्लीनिक जारी परियोजनाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस योजना के वर्तमान विस्तार में मुख्य ध्यान जरूरतमंद वृद्धजनों के लिए आश्रय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्राथमिक रूप से वरिष्ठ नागरिक गृहों की स्थापना और रखरखाव पर है। इन सुविधाओं की स्थापना और रखरखाव के लिए गैर सरकारी संगठनों, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों सहित पात्र संगठनों को सहायता अनुदान मॉडल के माध्यम से धनराशि जारी की जाती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राज्य कार्य योजना (एसएपीएसआरसी)

यह राज्य-स्तरीय रणनीति और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। इसके तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को अनुदान दिया जाता है, ताकि वे वृद्धजनों की देखभाल करने वाले प्रशिक्षित लोगों का एक समूह तैयार कर सकें, मोतियाबिंद सर्जरी के लिए विशेष अभियान चला सकें और राज्य-विशेष कल्याणकारी पहलों को लागू कर सकें। स्थानीय स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, राज्य अपने आवंटित फंड का 20% तक इन राज्य-विशेष कार्यक्रमों पर खर्च कर सकते हैं। हालांकि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी खुद की रणनीतियां और कार्यक्रम शामिल कर सकते हैं, लेकिन फंडिंग केवल उन्हीं कार्यों के लिए मिलेगी जिन्हें 'अव्यय' के तहत मंजूरी दी गई है। साथ ही, यह भी अपेक्षा की जाती है कि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध संसाधनों को बढ़ाने के लिए अपना धन भी लगाएं।

क्षेत्रीय संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र (आरआरटीसी)

क्षेत्रीय संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र (आरआरटीसी), 'अव्यय' (विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम - आईपीएसआरसी) के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण संस्थागत सहायता संरचना के रूप में कार्य करते हैं। सरकार द्वारा नामित, ये केंद्र क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण, जागरूक करने और उम्र बढ़ने और वृद्धजनों के कल्याण से संबंधित मुद्दों का समर्थन के लिए क्षेत्रीय नोडल एजेंसियों के रूप में कार्य करते हैं। वे डेटाबेस तैयार करने, निगरानी और मूल्यांकन, परियोजनाओं के निरीक्षण, तथा राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और कार्यान्वयन करने वाले संगठनों के साथ समन्वय के माध्यम से साक्ष्य-आधारित नीति और कार्यक्रम लागू करने में सहायता करते हैं। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक आरआरटीसी को 19.58 लाख रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहुँच बढ़ाने, क्षमता निर्माण और सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए आरआरटीसी के रूप में सेवारत नामित गैर सरकारी संगठनों और संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना(आरवीवाई)

राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई), जिसे मूल रूप से 2017 में एक स्वतंत्र केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में शुरू किया गया था, अब 'अव्यय' के एक प्रमुख घटक के रूप में इसमें शामिल कर ली गई है। इसके तहत, उम्र से जुड़ी शारीरिक अक्षमता या कमजोरी से जूझ रहे पात्र वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे अपने  शारीरिक कार्य काफी हद तक सामान्य ढंग से कर सकें। अब तक, यह योजना बहुत बड़े स्तर तक पहुँच चुकी है। इसके माध्यम से 10.45 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुँचाया गया है। उन्हें 'प्रधानमंत्री दिव्याशा वयोश्री केंद्रों' (पीएमडी-वीके) में कैंप मोड और वॉक-इन सेंटरों

के जरिए कुल 55,87,653 सहायक उपकरण दिए गए हैं। ये केंद्र भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) द्वारा संचालित हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन

सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए 'एल्डरलाइन' (हेल्पलाइन नंबर: 14567) नाम से एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन शुरू की है, जिसे अक्टूबर 2021 में शुरू किया गया था। यह वरिष्ठ नागरिकों को समय पर सहायता से जोड़ती है और उन्हें मुफ्त जानकारी, मार्गदर्शन तथा भावनात्मक सहारा प्रदान करती है। एक सुलभ प्लेटफॉर्म के रूप में, यह हर तरह की शिकायतों का समाधान करती है। समस्याओं को सुलझाने के लिए, यह सेवा सीधे जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करती है। जहाँ भी वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक आवश्यकता होती है, वहाँ मौके पर जाकर भी मदद (फील्ड इंटरवेंशन) दी जाती है। अपनी व्यापक पहुँच का प्रमाण देते हुए, 'एल्डरलाइन' को 8.66 लाख से अधिक ऐसी कॉल प्राप्त हुई हैं जिन पर कार्रवाई की गई। इनमें जानकारी, मार्गदर्शन, भावनात्मक सहारा, मौके पर जाकर मदद और अन्य सेवाओं जैसी विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं।

'जीवन' ऐप और 'शतायु' डैशबोर्ड

मई 2026 में, सरकार ने संयुक्त वृद्धजन सशक्तिकरण और आभासी सहायता नेटवर्क (जॉइंट एलल्डरली एम्पावरमेंट एंड वर्चुअल असिस्टेंस नेटवर्क-'जीवन') मोबाइल एप्लिकेशन और वृद्धजन समग्र देखभाल सहायता और उपयोगिता के लिए 'सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर योर यूटिलिटी-'शतायु') देखभाल प्रशिक्षण डैशबोर्ड शुरू किया।

यह ऐप वरिष्ठ नागरिकों की ज़रूरतों के अनुरूप कई सुविधाएँ प्रदान करता है, इनमें सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी, आपातकालीन सहायता और सहायता सेवाओं तक पहुँच तथा वरिष्ठ नागरिक आवासों का विवरण शामिल है। वृद्धजन उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए इस प्लेटफ़ॉर्म में इस्तेमाल में अनुकूल इंटरफ़ेस, सरल नेविगेशन और बेहतर पहुंच विकल्प मौजूद हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें "वन-टैब कॉल" की सुविधा है, जिससे उपयोगकर्ता एक ही टैप में महत्वपूर्ण नंबरों पर सीधे कॉल कर सकते हैं। इससे चिकित्सीय ज़रूरतों या आपात स्थिति के दौरान तत्काल मार्गदर्शन और सहायता मिलती है।

'शतायु' डैशबोर्ड वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिवारों को प्रशिक्षित देखभाल करने वालों (केयरगिवर्स) को खोजने में मदद करता है। यह जिला और राज्य के स्तर पर केयरगिवरों की उपलब्धता दिखाता है और भारत की संगठित 'केयर इकॉनमी' (देखभाल अर्थव्यवस्था) को मजबूत करता है। यह प्रशिक्षित देखभाल करने वालों को उन वरिष्ठ नागरिकों से भी जोड़ता है जिन्हें देखभाल की जरूरत है। डेटाबेस को मजबूत करने के लिए, 2023-24 और उससे पहले प्रशिक्षित हुए देखभाल करने वालों को खुद को पंजीकृत करने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिससे अधिक वरिष्ठ नागरिकों को प्रशिक्षित देखभाल सेवाएं मिल सकें। डैशबोर्ड के अनुसार, देखभाल करने वालों की कुल संख्या 30,151 है, उनमें से 6,817 पुरुष, 23,334 महिलाएं हैं।

अनुभव बोलता है

'अनुभव बोलता है' एक जागरूकता और ज्ञान-साझाकरण पहल है, जो 'अटल वयो अभ्युदय योजना' के अंतर्गत आती है। 'सीनियर सिटीजन्स पोर्टल' के माध्यम से, यह वरिष्ठ नागरिकों को अपने अनुभव, सफलता की कहानियाँ और जीवन के सबक साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। यहाँ से मिलने वाली प्रेरणा सभी के लिए सीखने और जुड़ने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। अपनी पहुँच को बढ़ाते हुए, 'अनुभव बोलता है' को हाल ही में शुरू किए गए 'जीवन' मोबाइल एप्लिकेशन में भी एक समर्पित ज्ञान-साझाकरण अनुभाग के रूप में शामिल किया गया है। इस ऐप पर ऐसे लेख उपलब्ध हैं जो वरिष्ठ नागरिकों को बढ़ती उम्र, स्वस्थ जीवन शैली, कानूनी अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी देते हैं। इस तरह, यह एक सेवा-उन्मुख मंच होने के साथ-साथ सक्रिय जागरूकता का एक स्रोत भी है।

सीनियरकेयर एजिंग ग्रोथ इंजन (एसएजीई)

इस पहल का उद्देश्य युवा उद्यमियों को बुजुर्गों के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और अभिनव समाधानों के जरिए उनका समाधान निकालने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसका लक्ष्य आर्थिक सहायता प्रदान करके इन विचारों को स्टार्टअप्स के रूप में विकसित करने में मदद करना भी है। एक मजबूत “रजत अर्थव्यवस्था” (बुजुर्गों से जुड़ी अर्थव्यवस्था) बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, एसएजीई नए विचारों को स्टार्टअप्स में बदलने और वृद्धजनों की देखभाल के क्षेत्र में पहले से काम कर रहे स्टार्टअप्स के विस्तार, दोनों का समर्थन करता है। ये उद्यम वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद, सेवाएं और तकनीकी समाधान विकसित करते हैं। एसएजीई के तहत, चुने गए स्टार्टअप्स को पूंजी भागीदारी के माध्यम से 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अलावा, उन्हें मार्गदर्शन और बाज़ार संपर्क भी उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे ऐसे समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू कर सकें जो बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएं।

पूंजी सहायता और एसएजीई पोर्टल के माध्यम से, सरकार “रजत अर्थव्यवस्था” को बढ़ावा देते हुए विश्वसनीय बुजुर्ग देखभाल समाधानों तक पहुंच को सुगम बनाती है।

एसएजीई पोर्टल

यह एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो वृद्धजनों की देखभाल से जुड़े समाधानों की पहचान करने, उन्हें सत्यापित करने और एक जगह इकट्ठा करने के लिए 'सिंगल-विंडो इंटरफ़ेस' के रूप में काम करता है। यह पोर्टल वरिष्ठ नागरिकों, उनकी देखभाल करने वालों और अन्य संबंधित पक्षों को उत्पादों और सेवाओं की एक चुनिंदा श्रृंखला तक पहुँच प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, यह नवोन्वेषी स्टार्ट-अप और अंतिम उपयोगकर्ताओं के बीच एक पुल के रूप में भी कार्य करता है, जिससे भारत में वृद्धजनों की देखभाल के समग्र तंत्र को मजबूती मिलती है।

एसएजीइ पोर्टल पर पंजीकरण: बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमी और स्टार्टअप, एसएजीई पोर्टल पर अपनी कंपनी का विवरण, वेबसाइट/ऐप की जानकारी, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर आदि देकर पंजीकरण कर सकते हैं और लॉगिन क्रेडेंशियल (पहुंच विवरण) बना सकते हैं। आवेदन जमा होने के बाद, अंतिम मंजूरी मिलने से पहले आईएफसीआई वेंचर द्वारा इसका प्रारंभिक मूल्यांकन और विस्तृत जांच  की जाती है। साथ ही, यह पोर्टल वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक मददगार माध्यम का काम करता है, जो उन्हें एक ऐसा सुलभ प्लेटफॉर्म देता है, जहां से वे वृद्धजनों की देखभाल करने वाले इन सत्यापित सेवा प्रदाताओं को आसानी से ढूंढ सकते हैं और उनसे जुड़ सकते हैं।

सीनियर सिटीजन अपॉर्चुनिटीज़ फॉर प्रोडक्टिव एंगेजमेंट (स्कोप)

'सीनियर सिटीजन अपॉर्चुनिटीज़ फॉर प्रोडक्टिव एंगेजमेंट' (स्कोप) वृद्धजनों को समुदाय में सक्रिय भागीदारी और आजीविका के अवसरों के माध्यम से सशक्त बनाता है। कई वरिष्ठ नागरिकों के पास ऐसा अनुभव, समय और ऊर्जा होती है, जो उन व्यावसायिक उद्यमों के लिए बहुत मूल्यवान हो सकती है, जिन्हें स्थिर और अनुभवी कर्मचारियों की तलाश है। यह देखते हुए कि कई निजी कंपनियों के मानव संसाधन विभाग कुछ खास पदों के लिए ऐसे अनुभवी लोगों की तलाश में रहते हैं, यह पोर्टल प्राथमिकताओं के आधार पर लोगों को आपस में जोड़ने का एक जरिया या पुल का काम करता है। इन अनुभवी वरिष्ठ नागरिकों को सार्थक भूमिकाओं से जोड़कर, यह पहल 'प्रोडक्टिव एजिंग' (सक्रिय वृद्धवस्था) को प्रोत्साहित करती है और उन्हें भारत के बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में एक सक्रिय और स्वतंत्र योगदानकर्ता के रूप में सामने लाती है।

पीएम-स्पेशल (घर पर वृद्धजनों की देखभाल और सहायक जीवन प्रणाली) - वृद्धजनों की देखभाल करने वालों के लिए प्रशिक्षण

यह पहल भारत में वृद्धजनों की देखभाल के इकोसिस्टम को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य वृद्धजनों की देखभाल करने वालों की बढ़ती मांग और उनकी उपलब्धता के बीच के अंतर को कम करना है। इसका लक्ष्य वरिष्ठ नागरिकों को अधिक पेशेवर सेवाएं उपलब्ध कराना और वृद्धजनों  की देखभाल के क्षेत्र में पेशेवर देखभाल करने वालों (केयरगिवर्स) का एक समूह तैयार करना है। इसके अलावा, यह वृद्धजनों की देखभाल के काम से जुड़े लोगों को निःशुल्क कौशल-आधारित प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। यह प्रशिक्षण सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार, सूचीबद्ध संस्थानों के माध्यम से दिया जाता है।

गरिमापूर्ण वृद्धावस्था की ओर

अपने विभिन्न घटकों के अलावा, 'अव्यय' में ऐसी पहलें भी शामिल हैं जो वरिष्ठ नागरिकों को युवा पीढ़ियों से जोड़ती हैं। 1 सितंबर 2026 को, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 'पीढ़ियों के बीच जुड़ाव'  को बढ़ावा देने के लिए रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह राष्ट्रव्यापी पहल स्कूली व्यवस्था के माध्यम से, खेल-आधारित और साक्ष्य-आधारित गतिविधियों के ज़रिए बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास करती है। इस सहयोग के तहत, एक ऐसा मॉडल तैयार किया जाएगा जिसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके। इसे 200 प्रायोगिक स्कूलों में शुरू किया जाएगा, जिसमें 'को-लर्निंग गेम्स' (साथ मिलकर सीखने वाले खेल), दो भाषाओं वाला एक संसाधन केंद्र और शिक्षकों के लिए प्रमाणन शामिल होंगे। उम्मीद है कि यह पहल मंत्रालय की वरिष्ठ नागरिक कल्याण योजनाओं—जैसे कि 'अव्यय' और 'एल्डर लाइन' हेल्पलाइन—को और मज़बूत करेगी। इससे वरिष्ठ नागरिकों को अपना ज्ञान और मूल्य अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर मिलेगा और साथ ही बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े रह सकेंगे। रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन इसे लागू करने में भागीदार होंगे, जबकि शोध, डिज़ाइन और मूल्यांकन के लिए उन्हें एक ज्ञान संवर्धन साझेदार का सहयोग मिलेगा।

'अटल वयो अभ्युदय योजना'  भारत की बुजुर्ग आबादी की विविध जरूरतों को पूरा करने के लिए एक व्यापक और विकसित होती हुई रूपरेखा है। यह योजना वृद्धजनों के लिए दीर्घकालिक देखभाल की अवसंरचना, सहायता-युक्त आवास सुविधाओं और सहायता प्रणालियों को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह भारत के वरिष्ठ नागरिकों के प्रति एक अधिक समन्वित और जीवन-चक्र पर आधारित दृष्टिकोण की ओर बदलाव को दर्शाती है। केंद्र और राज्य सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और विशेष संस्थानों को शामिल करने वाले अपने सहयोगात्मक मॉडल के माध्यम से, यह योजना भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थापित है।

संदर्भ:

पत्र सूचना कार्यालय

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय

'जीवन' ऐप — आधिकारिक अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, भारत सरकार)

अटल वयो अभ्युदय योजना

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