Infrastructure
पीएम गतिशक्ति के पाँच वर्ष:भारत की बुनियादी ढांचा योजना में परिवर्तनकारी बदलाव
Posted On:
12 OCT 2026 1:43PM
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पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) एक राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा मानचित्रण प्लेटफॉर्म से धीरे-धीरे विकसित होकर एक व्यापक नियोजन ढाँचे के रूप में उभरा है। यह जीआईएस आधारित मंच के माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और बुनियादी ढांचा नेटवर्कों को एक साथ जोड़ता है, ताकि एकीकृत योजनाएं बनाने और परियोजनाओं के समन्वय में सहायता मिल सके। वर्तमान में इसके दायरे में 58 केन्द्रीय मंत्रालय और विभाग तथा सभी 36 राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
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विकसित भारत के इंजन के रूप में बुनियादी ढांचा
भारत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है, जिसके लिए विभिन्न क्षेत्रों और परिवहन के साधनों के बीच समन्वय आवश्यक है। सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डे, जलमार्ग और उपयोगिता सेवाओं के नेटवर्क अक्सर एक क्षेत्र में एक-दूसरे से जुड़ते हैं। इन नेटवर्कों की एक साथ योजना बनाने से लागत और समय की बचत करने, परियोजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने तथा मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिक कुशलतापूर्वक उपयोग करने में मदद मिल सकती है। इसी आवश्यकता के चलते विभिन्न बुनियादी ढांचा नेटवर्कों को एक साझा नियोजन ढाँचे में एकीकृत करने की पहल की गई।
इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए 13 अक्टूबर 2021 को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की गई। इसके तहत विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के आँकड़ों को एक साझा भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया। पीएम गतिशक्ति योजनाकारों को बुनियादी ढांचा, भौगोलिक विशेषताओं, आर्थिक क्षेत्रों और अन्य संबंधित महत्वपूर्ण आँकड़ों को एक साथ देखने में मदद करता है, जिससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए आँकड़ों पर आधारित योजना बनाने और निर्णय लेने में सहायता मिलती है। पाँच वर्षों में यह दृष्टिकोण एक राष्ट्रव्यापी नियोजन ढाँचे के रूप में विकसित हो चुका है।
पीएम गतिशक्ति: एक दृष्टि में
पीएम गतिशक्ति के मार्गदर्शन के लिए छह सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बुनियादी ढांचा नियोजन को अधिक एकीकृत, कुशल और समन्वित बनाना है। इनमें एकीकृत विकास, मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचा, अंतिम छोर तक संपर्क की सुविधा, भूमि अधिग्रहण में तेजी, मंजूरियों की संख्या में कमी तथा पारिस्थितिक प्रभाव को कम करना शामिल है।
पीएम गतिशक्ति की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:
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क्या आप जानते हैं?
पीएम गतिशक्ति में विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को शामिल किया गया है, जैसे भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, ड्राई/लैंड पोर्ट और उड़ान।
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- सात बुनियादी ढांचा इंजन: सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, जलमार्ग, हवाई अड्डे, सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा इस योजना के प्रमुख क्षेत्र हैं।
- समग्र सरकारी नियोजन: राष्ट्रीय मास्टर प्लान में 58 केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों तथा सभी 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में अवसंरचना संबंधी प्रस्तावों की योजना बनाने और उनका आकलन करने में मदद मिलती है।
- एकीकृत डिजिटल नियोजन: राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बुनियादी ढांचा और भू-स्थानिक जानकारी को एक साझा जीआईएस आधारित मंच पर एकत्रित किया गया है, जिससे स्थानिक नियोजन और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सहायता मिलती है।
- डेटा तक व्यापक पहुँच: पीएम गतिशक्ति पब्लिक प्लेटफॉर्म 230 अनुमोदित डेटासेट तक पहुँच प्रदान करता है, जिससे स्थल की उपयुक्तता का विश्लेषण, संपर्क सुविधा का मानचित्रण, मार्ग निर्धारण की योजना और अनुपालन संबंधी जाँच करने में मदद मिलती है।
- डेटा लेयर्स: 12 अक्टूबर 2026 तक 23,493 से अधिक डेटा लेयर्स के माध्यम से बुनियादी ढांचा और अन्य प्रासंगिक जानकारी को साझा जीआईएस आधारित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है।
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आईटीएलए: एकीकृत परिवहन नियोजन को मजबूत बनाना
पीएम गतिशक्ति के पूरक के रूप में, केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (आईटीएलए) की स्थापना को मंजूरी दी है। यह प्राधिकरण दीर्घकालिक परिवहन नियोजन और समन्वय पर ध्यान केन्द्रित करेगा।
आईटीएलए दस वर्ष या उससे अधिक की नियोजन अवधि को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगा। यह क्षेत्रीय और वार्षिक परिवहन योजनाओं का आकलन करेगा तथा 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा। प्राधिकरण इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी भी करेगा। इसके अतिरिक्त, यह फास्टैग, वाहन और जीएसटीएन ई-वे बिल जैसे स्रोतों से प्राप्त जानकारी को एकीकृत करके राष्ट्रीय परिवहन डेटा रिपॉजिटरी (एनटीडीआर) विकसित करेगा।
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गतिशक्ति कैसे काम करती है : समन्वय से परियोजना नियोजन तक
पीएम गतिशक्ति में निम्नलिखित तीन-स्तरीय संस्थागत ढाँचा शामिल है:
- अधिकार प्राप्त सचिवों का समूह (ईजीओएस): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में यह समूह पीएम गतिशक्ति के कार्यान्वयन की निगरानी करता है तथा मास्टर प्लान में बदलावों की समीक्षा, उन पर विचार और उन्हें मंजूरी प्रदान करता है।
- नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी): यह समूह बुनियादी ढांचा मंत्रालयों और विभागों के नेटवर्क नियोजन प्रभागों के प्रमुखों को एक साथ लाता है। यह बुनियादी ढांचा संबंधी प्रस्तावों की जाँच करता है तथा एकीकृत नियोजन, समन्वय और अनुकूलन सुनिश्चित करता है। साथ ही, परियोजना नियोजन के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों की निगरानी भी करता है।
- तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू): इस इकाई में विभिन्न क्षेत्रों और विषयों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं, जो मूल्यांकन प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करते हैं। यह लॉजिस्टिक्स प्रभाग को पीएम गतिशक्ति सचिवालय के रूप में अपनी भूमिका निभाने में सहायता करती है।
11 अगस्त 2026 तक, नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी) ने लगभग 18.66 लाख करोड़ रुपये की कुल अनुमानित लागत वाली 396 अवसंरचना परियोजनाओं का मूल्यांकन किया था। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी थी, जिनमें से 198 परियोजनाएँ कार्यान्वयन के चरण में थीं। इस संस्थागत ढाँचे को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहयोग प्राप्त है, जो योजनाकारों को भू-स्थानिक डेटा, उपग्रह चित्र और विश्लेषणात्मक उपकरण उपलब्ध कराता है।
गतिशक्ति विश्वविद्यालय: एकीकृत अवसंरचना नियोजन के लिए विशेषज्ञता का विकास
गतिशक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों पर विशेष रूप से केन्द्रित अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय है। वर्ष 2022 में स्थापित यह विश्वविद्यालय परिवहन से संबंधित विभिन्न विषयों में शिक्षा, कार्यकारी प्रशिक्षण और अनुसंधान को एक साथ जोड़ता है।
गतिशक्ति विश्वविद्यालय विशेष शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान के माध्यम से पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान तथा राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) को सहयोग प्रदान करता है। यह दोनों पहलों के लिए पाठ्यक्रम विकसित करने और उन्हें संचालित करने वाली नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। इस सहयोग के अंतर्गत सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान केन्द्र स्थापित करने की भी परिकल्पना की गई है। जुलाई 2026 तक, विश्वविद्यालय ने पीएम गतिशक्ति के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रमों के माध्यम से 2.4 लाख से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया था। विश्वविद्यालय एकीकृत परिवहन नियोजन के लिए अनुप्रयुक्त अनुसंधान पर अपना ध्यान बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, समुद्री परिवहन, पुल एवं सुरंग इंजीनियरिंग तथा रक्षा लॉजिस्टिक्स जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रहा है।
डेटा से निर्णय तक: डिजिटल नियोजन किस प्रकार योजनाकारों की मदद कर रहा है
राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) एक साझा मंच पर अवसंरचना, भौगोलिक विशेषताओं और जनसांख्यिकी से संबंधित जीआईएस आधारित डेटा को एकत्रित करता है। एकीकृत बुनियादी ढांचा नियोजन में सहायता के लिए बहु-माध्यमीय संपर्क अवसंरचना के साथ-साथ आर्थिक क्षेत्रों का भी मानचित्रण किया जाता है। इससे योजनाकारों को परियोजनाओं की योजना बनाते समय विभिन्न अवसंरचना नेटवर्कों और प्रासंगिक भौगोलिक जानकारी को एक साथ देखने में मदद मिलती है।
यह प्लेटफॉर्म डेटा को अद्यतन करने और एकीकृत करने की व्यवस्थाओं के साथ स्थानिक नियोजन एवं विश्लेषणात्मक उपकरणों को जोड़ता है। इसके माध्यम से परियोजना संबंधी जानकारी जोड़ने, निकटता का आकलन करने, विकास के लिए उपयुक्त एवं अनुपयुक्त क्षेत्रों (जहाँ विकास प्रतिबंधित हो सकता है) की पहचान करने तथा आवश्यक मंजूरियाँ प्राप्त करने जैसी गतिविधियों में सहायता मिल सकती है।
बुनियादी ढांचा और बुनियादी ढांचा नोड्स का मानचित्रण
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) में मल्टीमॉडल संपर्क बुनियादी ढांचे के साथ आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केन्द्रों का मानचित्रण किया जाता है। इससे बुनियादी ढांचा सम्पर्क और आस-पास के विकास का संदर्भ योजना की प्रक्रिया में शामिल हो जाता है। यह प्लेटफॉर्म आर्थिक क्षेत्रों और विकास परियोजनाओं को सहयोग देने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा संपर्कों के साथ-साथ संपर्क सुविधा में मौजूद कमियों की पहचान करने में मदद करता है, जो लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही को प्रभावित कर सकती हैं।
एकीकृत बुनियादी ढांचा नियोजन में सहायता के लिए वस्त्र एवं फार्मास्यूटिकल क्लस्टर, रक्षा गलियारे, इलेक्ट्रॉनिक पार्क, औद्योगिक गलियारे, मत्स्य क्लस्टर और कृषि क्षेत्र जैसे आर्थिक क्षेत्रों का मानचित्रण किया जाता है।
उदाहरण: बिहार में खगडि़या-पूर्णिया गलियारा। इस गलियारे के उन्नयन की योजना के तहत पीएम गतिशक्ति के पाँच आर्थिक केन्द्रों को जोड़ने का प्रस्ताव है। इनमें एक वस्त्र क्लस्टर, मेगा फूड पार्क और मत्स्य/समुद्री खाद्य पार्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 11 लॉजिस्टिक्स केन्द्रों को भी जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित संपर्क सुविधा का उद्देश्य पूरे क्षेत्र में वस्तुओं और यात्रियों की आवाजाही में तेजी लाना है।

लॉजिस्टिक्स प्रणालियों को जोड़ना
एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) सरकारी लॉजिस्टिक्स प्रणालियों के एपीआई-आधारित एकीकरण को सक्षम बनाता है, जबकि लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी) आयात-निर्यात (एक्जिम) कंटेनरों की आवाजाही की वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा प्रदान करता है। ये दोनों मिलकर लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में डिजिटल सूचना के आदान-प्रदान और पारदर्शिता को मजबूती प्रदान करते हैं। जुलाई 2026 तक, यूएलआईपी ने 142 एपीआई के माध्यम से 12 केन्द्रीय मंत्रालयों की 46 सरकारी प्रणालियों को एकीकृत किया।
भू-स्थानिक डेटा को अधिक व्यापक उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ बनाना
डिजिटल इकोसिस्टम का विस्तार सरकारी उपयोगकर्ताओं के अलावा भी हुआ है। अक्टूबर 2025 में, भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी-एन) द्वारा विकसित क्वेरी-आधारित विश्लेषण तंत्र के माध्यम से पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान प्लेटफॉर्म को निजी क्षेत्र के लिए भी खोल दिया गया। यह प्लेटफॉर्म बुनियादी ढांचा नियोजन और निवेश संबंधी निर्णयों के लिए चयनित गैर-संवेदनशील डेटासेट तक नियंत्रित पहुँच प्रदान करता है।
वर्तमान में, यह प्लेटफॉर्म भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों से संबंधित 230 अनुमोदित डेटासेट तक पहुँच उपलब्ध कराता है। उपयोगकर्ता स्थल की उपयुक्तता का विश्लेषण, संपर्क सुविधा का मानचित्रण, मार्ग निर्धारण की योजना और अनुपालन संबंधी जाँच कर सकते हैं तथा विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं।
डेटा से निगरानी तक
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म परियोजनाओं की प्रगति पर नज़र रखने और बुनियादी ढांचा संबंधी डेटा में सुधार करने में भी सहायता करता है। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान डैशबोर्ड विभिन्न क्षेत्रों की प्रगति पर नज़र रखने और उपयोगी निष्कर्ष प्राप्त करने के लिए बहु-क्षेत्रीय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करता है। डेटा अपलोडिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (डीयूएमएस) विकेन्द्रीकृत स्तर पर डेटा के स्वामित्व और उसे वास्तविक समय में अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध कराती है।
समग्र रूप से, इस दृष्टिकोण में भू-स्थानिक डेटा, उपग्रह चित्रों और एपीआई एकीकरण का उपयोग किया जाता है, जिससे अवसंरचना विकास के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने, नियोजन और संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग में सहायता मिलती है।
पीएम गतिशक्ति : काम जारी
- पुणे–बेंगलुरु एक्सप्रेसवे: 699 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र और कर्नाटक के औद्योगिक एवं आर्थिक क्लस्टरों को जोड़ेगा जिसके 2027–28 तक पूरा होने की उम्मीद है। इनमें मोटर वाहन और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के कारखाने, फार्मास्यूटिकल क्लस्टर, विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा रक्षा गलियारे शामिल हैं। यह परियोजना 15 राष्ट्रीय राजमार्गों, 25 राज्य राजमार्गों और 6 रेलवे स्टेशनों को जोड़ती है, जिससे मल्टीमॉडल संपर्क सुविधा को बढ़ावा मिलेगा। पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए, वन भूमि के ओवरलैप को 19 प्रतिशत तक कम करने के लिए मार्गरेखा में संशोधन किया गया। इस परियोजना से यात्रा के समय में 7–8 घंटे की कमी आने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, इससे प्रतिवर्ष लगभग 16 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 39 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी।
- जोगीघोपा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, असम: असम में जोगीघोपा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित है। इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र में सड़क, रेल और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल की निर्बाध आवाजाही को सक्षम बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसके एकीकृत नियोजन और मांग के विश्लेषण के लिए पीएम गतिशक्ति का उपयोग किया गया। ब्रह्मपुत्र नदी पर धुबरी और फूलबाड़ी के बीच एक चार-लेन पुल का निर्माण कार्य जारी है। इस पुल के बनने से यात्रा की दूरी 205 किलोमीटर से घटकर 20 किलोमीटर रह जाने और यात्रा का समय लगभग सात घंटे से घटकर 30 मिनट होने की योजना है।
- हरित ऊर्जा गलियारा: लद्दाख–हरियाणा: पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत नेटवर्क नियोजन समूह (एनपीजी) द्वारा अनुशंसित यह परियोजना 5 गीगावाट की पारेषण प्रणाली के माध्यम से 13 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी और ग्रिड एकीकरण को सक्षम बनाएगी। इसमें लद्दाख के पांग और हरियाणा के कैथल के बीच उच्च वोल्टेज वाली 480 किलोमीटर लंबी एचवीडीसी पारेषण लाइन शामिल है। इसके दोनों सिरों पर 5 गीगावाट क्षमता वाले एचवीडीसी टर्मिनल स्थापित किए जाएंगे। यह पारेषण प्रणाली हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर गुजरेगी तथा कैथल में राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ेगी। इस परियोजना को वित्त वर्ष 2029–30 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
संपर्क युक्त बुनियादी ढांचे के भविष्य का निर्माण
अपनी शुरुआत के बाद पाँच वर्षों में, पीएम गतिशक्ति एक राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा नियोजन पहल से विकसित होकर एक व्यापक डिजिटल नियोजन इकोसिस्टम बन गया है। मंत्रालयों, राज्यों, जिलों और बुनियादी ढांचा के नए क्षेत्रों में इसके विस्तार से भारत की अगली पीढ़ी का बुनियादी ढांचे के नियोजन के लिए एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण विकसित हो रहा है।
संदर्भ
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय
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रेल मंत्रालय
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गति शक्ति विश्वविद्यालय
https://gsv.ac.in/
https://gsv.ac.in/vice-chancellor/
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2301687&lang=1®=3
पीआईबी अभिलेखागार
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=153274&lang=1®=3
https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?id=151083&NoteId=151083&ModuleId=16®=48&lang=2
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