Economy
पीएम-सेतु: भारत के आईटीआई में बदलाव का एक वर्ष
Posted On:
03 OCT 2026 3:22PM
| पीएम-सेतु का उद्देश्य हब-एंड-स्पोक मॉडल और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण के माध्यम से 1,000 सरकारी आईटीआई का अत्याधुनिकरण करना है। इस योजना के तहत राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों के माध्यम से पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) की क्षमता बढ़ाने का भी प्रावधान है। रणनीतिक निवेश योजनाओं, विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) और एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स के माध्यम से उद्योग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस योजना में उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यवसायों से संबंधित नए दौर के पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। चयनित एनएसटीआई में उन्नत कौशल प्रशिक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भी सहयोग प्रदान कर रही हैं। राज्य स्तरीय संचालन समितियों और उद्योग की भागीदारी के माध्यम से राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में इसके कार्यान्वयन का भी विस्तार किया गया है। एक वर्ष की प्रगति के तहत 850 आईटीआई की पहचान और 14 आईटीआई क्लस्टरों को मंजूरी शामिल है। प्रस्तावित कौशल प्रयोगशालाएं छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव के अवसरों को और बढ़ाएंगी। |
कुशल कार्यबल के लिए आईटीआई में बदलाव
भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) देश के व्यावसायिक प्रशिक्षण तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये युवाओं को रोजगार और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक कौशल प्रदान करते हैं। जैसे-जैसे कार्यबल की आवश्यकताएं बदल रही हैं, वैसे-वैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और उद्योगोन्मुखी स्वरूप को मजबूत करना अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
इसी पृष्ठभूमि में, पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) को 4 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया। यह योजना सरकारी आईटीआई को आधुनिक और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण संस्थानों में परिवर्तित करके व्यावसायिक प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाती है। इस पहल का उद्देश्य उद्योग-नेतृत्व वाले शासन को मजबूत करना, प्रशिक्षण अवसंरचना का उन्नयन करना और कार्यबल की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप मांग-आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना है। योजना का कुल परिव्यय ₹60,000 करोड़ है, जिसमें केन्द्र सरकार की ओर से 30,000 करोड़ रुपये, राज्यों की ओर से 20,000 करोड़ रुपये और उद्योग की ओर से 10,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। यह योजना 4 अक्टूबर 2026 को एक वर्ष पूरा कर रही है।
आईटीआई: कुशल कार्यबल की नींव तैयार करना
आईटीआई युवाओं को रोजगार और उद्योग के लिए व्यावहारिक कौशल से लैस करने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के तहत सरकारी और निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से इंजीनियरिंग और गैर-इंजीनियरिंग ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेड के आधार पर पाठ्यक्रम की अवधि छह महीने से दो वर्ष तक होती है। प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) राष्ट्रीय स्तर पर व्यावसायिक प्रशिक्षण के विकास और समन्वय के लिए जिम्मेदार शीर्ष संगठन है। इसके कार्यों में नीतियों, मानदंडों और मानकों का निर्धारण, पाठ्यक्रम विकास, संबद्धता, अनुदेशक प्रशिक्षण और ट्रेड परीक्षण शामिल हैं। आईटीआई राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण के अधीन हैं।
देश में सरकारी और निजी आईटीआई सहित आईटीआई की कुल संख्या 2014 में 9,776 से बढ़कर 2026 में 13,888 हो गई है, जो 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। इसके अलावा, देशभर के आईटीआई में नामांकन शैक्षणिक सत्र 2014–15 में 9.51 लाख से बढ़कर शैक्षणिक सत्र 2025–26 में 14.70 लाख हो गया है, जो 54 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
विस्तारित होता यह नेटवर्क व्यावसायिक प्रशिक्षण को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में कौशल की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप इसे ढालने के लिए एक व्यापक संस्थागत आधार प्रदान करता है।
पीएम-सेतु किस प्रकार आईटीआई में बदलाव ला रहा है
पीएम-सेतु बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, उद्योग की भागीदारी और नए दौर के प्रशिक्षण को एक साथ लाकर व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करता है। यह परिवर्तन दो अलग-अलग घटकों पर आधारित है, जिसमें पहला घटक सरकारी आईटीआई पर और दूसरा राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) पर केन्द्रित है।

- घटक-I में 1,000 सरकारी आईटीआई शामिल हैं, जिनमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई हैं। इन संस्थानों का आधुनिक बुनियादी ढांचे और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण के साथ हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। प्रत्येक हब औसतन चार स्पोक से जुड़ा है, जिससे उन्नत बुनियादी ढांचे, आधुनिक ट्रेडों, डिजिटल शिक्षण प्रणालियों और इनक्यूबेशन सुविधाओं तक साझा पहुंच संभव हो रही है।
हब में नवाचार केन्द्र, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए बुनियादी ढांचा, उत्पादन इकाइयां और प्लेसमेंट सेवाओं जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। स्पोक प्रशिक्षण तक पहुंच का विस्तार करते हैं और शिक्षार्थियों को अपने-अपने क्लस्टरों में उपलब्ध संसाधनों से जोड़ते हैं।
यह मॉडल स्मार्ट कक्षाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल सामग्री और उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से आईटीआई के उन्नयन में सहायता कर रहा है।
- घटक-II भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित 5 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) की क्षमता बढ़ाने पर केन्द्रित है। इसमें क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों की स्थापना और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से प्रशिक्षकों का उन्नत प्रशिक्षण शामिल है।
पीएम-सेतु का कार्यान्वयन: राज्य, उद्योग और केन्द्र के बीच समन्वय
- संबंधित राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश उद्योग के परामर्श से पीएम-सेतु के तहत आईटीआई के चयन का नेतृत्व करते हैं। वे उद्योग साझेदारों के सहयोग से आईटीआई के उन्नयन के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं। इस प्रक्रिया में उभरती कौशल आवश्यकताओं और संबंधित क्षेत्रों की औद्योगिक क्षमता को ध्यान में रखा जाता है।
- राष्ट्रीय स्तर पर, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने सचिव, एमएसडीई की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) का गठन किया है, जो योजना के लिए समग्र दिशा-निर्देश प्रदान करती है। एनएससी व्यापक नीतिगत दिशा तय करने, परिचालन संबंधी दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देने, कार्यान्वयन की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने में सहयोग करती है।
- चयन प्रक्रिया में उद्योग की भागीदारी को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत संभावित साझेदारों को रणनीतिक निवेश योजना (एसआईपी) प्रस्तुत करना आवश्यक है।
एसपीवी के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाला शासन
पीएम-सेतु उन्नत आईटीआई क्लस्टरों के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाले शासन का प्रावधान करता है। प्रस्तावित संरचना के तहत एंकर इंडस्ट्री पार्टनर को 51 प्रतिशत स्वामित्व दिया गया है, जबकि केन्द्र और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत है।
एसपीवी क्लस्टर के विकास और संचालन का नेतृत्व करते हैं तथा स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयुक्त हस्तक्षेपों का प्रस्ताव रखते हैं। इन हस्तक्षेपों में पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा और उद्योग से परिचय जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।
एक वर्ष में पीएम-सेतु: योजना से कार्यान्वयन तक
पीएम-सेतु के पहले वर्ष के दौरान कार्यान्वयन ने संस्थागत तैयारियों और आईटीआई की पहचान से आगे बढ़कर आईटीआई क्लस्टरों और एसआईपी को मंजूरी देने तक प्रगति की है। कुल 850 आईटीआई की पहचान की गई है, जिनमें 172 हब आईटीआई और 678 स्पोक आईटीआई शामिल हैं। 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने क्लस्टरों की पहचान कर ली है और इसके लिए समर्पित राज्य बजट बनाए हैं। वहीं, 35 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने कार्यान्वयन के मार्गदर्शन और निगरानी के लिए अपनी राज्य संचालन समितियों का गठन किया है। 26 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने उद्योग की भागीदारी आमंत्रित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
एनएससी ने पीएम-सेतु को इसके पायलट चरण से आगे बढ़ाकर पहचाने गए सभी 200 आईटीआई क्लस्टरों में राष्ट्रव्यापी स्तर पर लागू करने को भी मंजूरी दे दी है। इस विस्तार के तहत राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश उद्योग की तैयारी और कार्यान्वयन क्षमता के आधार पर योजना को लागू कर सकेंगे।
पीएम-सेतु के तहत 14 आईटीआई क्लस्टरों के लिए 3,446 करोड़ रुपये के निवेश वाली रणनीतिक निवेश योजनाओं (एसआईपी) को मंजूरी दी गई है।
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राष्ट्रीय संचालन समिति द्वारा 8 राज्यों और 1 केन्द्र शासित प्रदेश की 14 एसआईपी को मंजूरी
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संख्या
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राज्य
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क्लस्टर
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एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (एआईपी)
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क्षेत्र
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मूल्य (करोड़ रुपये में)
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1
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आंध्र प्रदेश
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कंचरापालेम
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आर्सलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया
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इस्पात और धातु
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200
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2
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ओडीशा
|
क्योंझर-बारबिल
|
जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड (जेएनएएल)
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विविधीकृत विनिर्माण
|
240
|
|
3
|
गुजरात
|
सूरत
|
आर्सलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया
|
इस्पात और धातु
|
240
|
|
4
|
तेलंगाना
|
पुराना शहर
|
अपोलो मेडस्किल्स लिमिटेड
|
स्वास्थ्य सेवा और जीव विज्ञान
|
241
|
|
5
|
तेलंगाना
|
सांगारेड्डी
|
न्यूलैंड फाउंडेशन
|
औषधि एवं रसायन
|
241
|
|
6
|
तेलंगाना
|
पाटनचेरु
|
श्री सिद्धार्थ इन्फ्राटेक एंड सर्विसेज
|
विविधीकृत विनिर्माण
|
275
|
|
7
|
राजस्थान
|
भिवाड़ी
|
एच.जी. इन्फ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड
|
बुनियादी ढांचा एवं निर्माण
|
241
|
|
8
|
उत्तर प्रदेश
|
मेरठ
|
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी)
|
कौशल विकास
|
240
|
|
9
|
तेलंगाना
|
मेडचल
|
जेन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड
|
रक्षा एवं इलेक्ट्रॉनिक्स
|
254
|
|
10
|
हरियाणा
|
कुरुक्षेत्र
|
जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड (जेएनएएल)
|
विविधीकृत विनिर्माण
|
320
|
|
11
|
महाराष्ट्र
|
छत्रपति संभाजीनगर
|
बेलराइज इंडस्ट्रीज
|
ऑटोमोटिव उद्योग
|
238
|
|
12
|
महाराष्ट्र
|
पुणे
|
बीवीजी ग्रुप
|
एकीकृत सुविधा प्रबंधन
|
241
|
|
13
|
जम्मू और कश्मीर
|
श्रीनगर
|
इंदरदीप इन्फ्रा इंडिया लिमिटेड
|
बुनियादी ढांचा एवं निर्माण
|
235
|
|
14
|
जम्मू और कश्मीर
|
जम्मू
|
ईगल इन्फ्रा इंडिया लिमिटेड
|
बुनियादी ढांचा एवं निर्माण
|
240
|
|
कुल 3,446 करोड़ रुपये
|

कौशल विकास के दायरे का विस्तार
कार्यबल की उभरती आवश्यकताओं के लिए नए दौर के पाठ्यक्रम
बुनियादी ढांचे और संस्थागत सुधारों के पूरक के रूप में, पीएम-सेतु का ध्यान व्यावसायिक प्रशिक्षण को उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यवसायों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने पर भी है। प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के तहत 32 नए दौर के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, हरित हाइड्रोजन, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), सौर ऊर्जा, 5जी और सॉफ्टवेयर परीक्षण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। राज्य इन पाठ्यक्रमों को अपने आईटीआई में अपना सकते हैं, जो उनके प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण के अधीन हैं।
उन्नत कौशल विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां
पीएम-सेतु के तहत कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्रों की क्षमता को मजबूत करने और प्रशिक्षण को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी प्रावधान किया गया है। एनएसटीआई चेन्नई के लिए सिंगापुर, एनएसटीआई कानपुर के लिए फ्रांस और एनएसटीआई भुवनेश्वर के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। वहीं, एनएसटीआई हैदराबाद के लिए जर्मनी के साथ संयुक्त आशय घोषणा (ज्वाइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट) का आदान-प्रदान किया गया है।
कौशल से रोजगार तक के मार्ग को मजबूत करना
पीएम-सेतु आधुनिक बुनियादी ढांचे, उद्योग की भागीदारी और मांग-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से भारत के व्यावसायिक प्रशिक्षण तंत्र को मजबूत कर रहा है। इसके कार्यान्वयन से सरकारी आईटीआई और एनएसटीआई को कार्यबल की बदलती आवश्यकताओं के और करीब लाया जा रहा है। यह पहल नए दौर के कौशल, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और प्रारंभिक व्यावसायिक अनुभव तक पहुंच का भी विस्तार कर रही है। इन सभी उपायों से मिलकर भारत के युवाओं के लिए अधिक सुदृढ़, परस्पर जुड़ा हुआ और उद्योग की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी कौशल विकास मार्ग तैयार करने में सहायता मिल रही है।
संदर्भ
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय
https://dgt.gov.in/sites/default/files/2025-01/NCVT_Affiliation_norms_ITIs.pdf
https://pmsetu.nimi.co.in/about-us
https://pm-setu.skillindiadigital.gov.in/
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2246879&lang=1®=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2286584®=48&lang=2
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https://sansad.in/getFile/lsapps/loksabhaquestions/annex/188/AS206_AQ2o13.pdf?source=lsapps
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2281937®=6&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2307775&lang=1®=3
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2312980®=6&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2174932®=48&lang=2
प्रधानमंत्री कार्यालय
https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/pm-to-unveil-various-youth-focused-initiatives-worth-more-than-rs-62000-crore-on-4th-october
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